मुनेश त्यागी
पूंजीवादी समाज में “मैं” नहीं,
“हम” में ही शक्ति बस्ती है,
पूंजीवाद में “मैं मैं” करने वाला,
मारा तो जा सकता है,
मगर “मैं मैं” अकेला सब कुछ नहीं कर सकता,
“हम सब” मिलकर ही हालात को बदल सकते हैं,
“मैं मैं” करने वाला कुछ शुरुआत तो कर सकता है
मगर “मैं मैं” इस रक्त पिपासु समाज को बदल नहीं सकता,
“मैं मैं” इन हालातों को भी नहीं बदल सकता,
“मैं मैं” अपनी किस्मत को भी नहीं बदल सकता,
इसलिए “मैं मैं” नहीं,
अपनी किस्मत को बदलने के लिए,
इस जनविरोधी निजाम को बदलने के लिए,
“हम सब” जरूरी हैं।





