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*रिटायर होने से पहले आईएएस अधिकारी शशि भूषण सिंह ने किया किसानों के साथ फिर बड़ा छल*

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मध्यप्रदेश में कुछ आईएएस अधिकारी जब रिटायर होने के नजदीक आ जाते हैं तब वे जाते-जाते कुछ न कुछ बड़ा कमाल कर जाते हैं। और यह कमाल रिटायरमेंट के बाद भ्रष्टाचार से कमाई हुई पूंजी उनके लिए आनंद का विषय बन जाती है। सूत्रों के अनुसार इसी अवधारणा के चलते आईएएस अधिकारी शशि भूषण सिंह जब उद्यानिकी संचालनालय के संचालक पद से रिटायर हुए तो उन्होंने यही कमाल किया।

बताते हैं कि मध्यप्रदेश के किसानों के साथ फिर एक बड़ा छल उनके कारनामे के रूप सामने आया है। और तो और इन्हीं शशिभूषण सिंह के भ्रष्टाचार के इरादों ने भारत सरकार के उपक्रम के नाम से ख्याति प्राप्त कंपनी HIL इंडिया लिमिटेड पर भी गंभीर आरोप लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। समझा जाता है कि उक्त आईएएस अधिकारी ने बिना वैध बीज अनुज्ञप्ति (सीड लाइसेंस) और बिना सरकार से अनुमोदन प्राप्त किए 12 करोड़ का धनिया किसानों के लिए बीज के रूप में सप्लाई के आदेश दे दिए हैं। इस गड़बड़ी में निजी सप्लायर मेसर्स राज सीड्स ट्रेडर्स की भी भूमिका सामने आई है, जिसका न तो कोई वैध रजिस्ट्रेशन है, न ही HIL इंडिया के साथ MOU या कोई करार पंजीकृत किया गया था। सूत्रों के मुताबिक, जब इस गंभीर धांधली की शिकायतें दिनांक 8 अक्टूबर और 14 अक्टूबर 2024 को संबंधित विभाग को प्रेषित की गईं, हालांकि इस प्रकरण की जांच विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन की निगरानी में है लेकिन आज तक विभाग ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है जिसकी वजह से इस भ्रष्टाचार से अभी तक पर्दा नहीं उठा और न ही किसी को दोषी साबित किया गया है। सूत्र कहते हैं कि किसानों के साथ ठगी का यह पहला मामला नहीं है।

जहां तक सवाल है वर्तमान संचालक युवा आईएएस प्रीति मैथिल का तो जानकारों का स्पष्ट मानना है कि, प्रीति मैथिल के आने के बाद उद्यानिकी संचालनालय में हड़कंप मच गया है और भ्रष्टाचार से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों पर कभी भी बड़ी कार्रवाई प्रीति मैथिल कर सकती है। यह भी चौंकाने वाला वाक्या है कि प्रीति मैथिल के आने के पहले विभागीय अधिकारियों ने एक समिति बनाकर ‘लीपा-पोती’ का प्रयास किया और बिना वैध आधार के HIL इंडिया लिमिटेड को मसाला फसलों के क्षेत्र विस्तार घटक योजनाओं के अंतर्गत धनिया बीज सप्लाई करवा दी। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में एक बार फिर यह साबित हो गया है कि किसानों के नाम पर चलाई जा रही योजनाओं के पीछे किस तरह सुनियोजित भ्रष्टाचार पल रहा है।

HIL इंडिया लिमिटेड जैसे सरकारी उपक्रम द्वारा बिना वैध लाइसेंस और बिना राज्य सरकार की अनुमति के धनिया बीज बेचना न केवल सीड एक्ट और सीड कंट्रोल ऑर्डर का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह किसानों की आजीविका से सीधा खिलवाड़ है। राष्ट्रीय हिन्दी मेल की टीम ने यह भी पता लगाया है कि, जब दस्तावेजी शिकायतें महीनों पहले दर्ज हो चुकी थीं और पूरा मामला संबंधित विभाग के संज्ञान में था, तब भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे स्पष्ट है कि कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से इस गंभीर अपराध पर पर्दा डालने का प्रयास किया गया। ‘राज सीड्स ट्रेडर्स’ जैसा निजी आपूर्तिकर्ता बिना किसी वैध रजिस्ट्रेशन और MOU करार के कैसे प्रदेश भर में बीज सप्लाई कर रहा है, यह प्रश्न विभागीय पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार जिस धनिया किस्म को न तो राज्य बीज उपयुक्तता समिति ने स्वीकृत किया, न ही भारत सरकार के उपायुक्त ने अनुमोदित किया लेकिन फिर भी उसकी सप्लाई किसानों तक कर दी गई। यह सीधा-सीधा किसानों की मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

उद्यानिकी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल तकनीकी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि केन्द्र सरकार की नीति के विपरीत भ्रष्टाचार का ज्वलंत उदाहरण है। अगर समय रहते दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो इसका परिणाम प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था और किसानों की आत्मनिर्भरता पर दीर्घकालिक प्रभाव डालेगा। इस विशेष रिपोर्ट का लब्बोलुआब यह है कि, मप्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लागू भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस के फामूले के खिलाफ यह पहला ऐसा उदाहरण है जिससे प्रधानमंत्री मोदी के विजन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मिशन को करारा झटका लगा है

Ramswaroop Mantri

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