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*आईएएस संतोष वर्मा उदित राज की राह जाएंगे, चंद्रशेखर रावण भी कर रहे तारीफ*

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संतोष वर्मा पहले मध्य प्रदेश में ही जाने जाते थे. अब अपने बयानों के बाद तकरीबन देश भर में उन्हें पहचाना जाने लगा है. इसी कारण उनके पहले ये नहीं लिखा कि मध्य प्रदेश के आईएएस संतोष वर्मा की बात हो रही है. उनका ताजा तेवर बता रहा है कि वो अब अपनी कुर्सी बदलने की कोशिश में लग गए हैं. भीम आर्मी के संस्थापक सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण का हवाला दे कर उन्होंने चंद्रशेखर की बात दुहराई थी कि कितने संतोष वर्मा को मारोगो. अब उन्होंने एक कार्यक्रम में बोलते हुए सीधे हाई कोर्ट के जजों को निशाने पर ले लिया. इस दफा उनका कहना है कि ये हाई कोर्ट के जज एससी एसटी समुदाय के युवकों को जज नहीं बनने देते.

कल भी बयान दिया था, आज हाई कोर्ट पर निशाना
इस बार उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें वे कह रहे हैं कि कॉलेज के इंतहानों में 50 परसेंट लाने वाले ही सिविल जज की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. अब एससी एसटी समुदाय के बच्चों का 49.9 फीसदी से ज्यादा नंबर नहीं आएगा. ऐसे में वे कैसे सिविल जज की परीक्षा में शामिल हो सकेंगे. यानि जज बन ही नहीं पाएंगे. संतोष वर्मा यहीं तक नहीं रुके. उन्होंने पूरी व्यवस्था पर प्रहार किया. उन्होंने कहा वैस भी इंटरव्यू में इस समुदाय के लोगों को कभी 20 में 20 नंबर नहीं दिए जाते.

पिछले बयान पर सरकार की ओर से उन्हें नोटिस मिली हुई है. दुबारा उन्होंने सिविल सेवा में रहते हुए किसी राजनेता की सार्वजनिक तारीफ की है. उसके लिए भी उन पर कार्रवाई की तलवार लटक ही रही है. इन सबसे आगे बढ़ कर जब उन्होंने हाई कोर्ट पर बयानबाजी की है तो उसके नतीजों के बारे में भी उन्होंने समझ लिया होगा. कोर्ट इसपर इस मामले पर संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकती है या फिर सरकार को निर्देश भी दे सकती है. फिर भी उन्होंने ये बयान दिया.

कर्मचारियों अधिकारियों के नेता लेकिन ‘चिंता’ पूरे समाज की
संतोष वर्मा मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी अधिकारी संघ अजाक्स के अध्यक्ष हैं. जाहिर है इस मंच से उनकी जिम्मेदारी समुदाय के कर्मचारियों अधिकारियों के हितों की रक्षा करनी हैं. न कि किसी राजनेता की तरह बयानबाजी करना. फिर भी वे कर रहे हैं. ऐसा लग रहा है कि वे समझ चुके हैं कि नौकरशाही में सफल न होने पर राजनीति में कूद कर बड़ा ओहदा हासिल किया जा सकता है. उनके सामने उदित राज जैसे अफसर की मिसाल भी है. उदित राज ने आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में अपना हाथ आजमाया. ये अलग बात है कि अब वे बीजेपी में हैं.

उदित राज और संतोष वर्मा
उदित राज ने नौकरी छोड़ी थी. यहां संतोष वर्मा चाह रहे हैं कि उनके खिलाफ सरकार या व्यवस्था की ओर से एक्शन लिया जाय. इससे उनकी छवि समुदाय की बात उठा कर शहीद होने वाली बन जाएगी. इसका उन्हें ज्यादा फायदा मिलने की उन्हें उम्मीद हो सकती है. ब्राह्मण की बेटी की अपनी बेटी से शादी वाले बयान को लेकर ब्राह्मण और सवर्ण समुदाय के लोग उनका जोरदार विरोध कर ही रहे हैं. इससे उनकी ये छवि और उभरने की भी उन्हें उम्मीद हो सकती है. साथ ही बीजेपी के साथ जाने से उदित राज की पहले जैसी जोरदार दलित नेता की छवि कमजोर हुई है. हो सकता है वर्मा इस जगह को भरने की भी सोच रहे हों.

हालांकि उनका करियर दागदार रहा है. उन पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्रमोशन के लिए उनका इस्तेमाल करने के आरोप लगे. उन्हें जेल भी जाना पड़ा. उनका परमोशन भी बाधित हुआ. बहरहाल,अब चंद्रशेखर जैसे नेता ने उनकी तारीफ कर ही दी है तो इसे भी एक संकेत माना जा सकता है. हो सकता है आगे भी चंद्रशेखर उनका साथ दें.

Ramswaroop Mantri

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