शशिकांत गुप्ते
आज जब मै सीतारामजी से मिलने गया तो देखा सीतारामजी सन 1969 में प्रदर्शित फिल्म
आंसू बन गया फूल का गीत सुन रहे थे।
यह फिल्म मराठी भाषा में लिखा आश्रुंची झाली फुले नाटक का हिंदी रूपांतर है।
इस फिल्म का उक्त गीत, गीतकार ताज भोपाली ने लिखा है।
गीत की कुछ चुनिंदा पंक्तियां वर्तमान सियासी संदर्भ पर एकदम प्रासंगिक हैं।
इलेक्शन में मालिक के लड़के खड़े है
अरे इन्हें कम न समझो
ये खुद भी बड़े है
इनके सिवाय वोट का हक़दार कौन है?
इस शहर भर में जितने हैं अख़बार इनके हैं
काले सफ़ेद सैकड़ों व्यापार इनके है।
सब अस्पताल इनके हैं बीमार इनके हैं
प्रणाम लाख बार करों इनको वोट दो
ऐसे सपूत अब है कहा अपने देश में
भगवान आ गए है इंसा के भेष में
हर चीज़ इनकी दास है हर शय गुलाम है
जिन्दा इन्ही के नाम से शराफत का काम है
लोगो का दिल ख़रीदना बस इनका काम है
सीतारामजी ने कहा यह स्पष्टी देना अतंत्य जरूरी है।
*गीत की उक्त पंक्तियां गीतकार *ताज भोपाली* *ने फिल्म *आंसू बन गए फूल* के लिए लिखे गीत की है,इस गीत को गाया है,गायक किशोर कुमार।लेखक ने गीत की एक कुछ पंक्तियों को सिर्फ उद्धृत किया है।*
मैने सीतारामजी से पूछा यह स्पष्टी करण देना अनिवार्य क्यों है?
सीतारामजी ने कहा यह प्रश्न सिर्फ स्पष्टीकरण तक सीमित नहीं है,बल्कि संविधान द्वारा प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी उपस्थित होता है?
सीतारामजी ने कहा साहित्य को समाज का दर्पण कहा जाता है। क्योंकि समाज की गतिविधियों से साहित्य प्रभावित होता हैl एक साहित्यकार जो कुछ अपने साहित्य में लिखता है, वह समाज का ही एक प्रतिबिंब होता है। साहित्य और समाज का एक अटूट संबंध है। साहित्य के मदद से एक साहित्यकार अपनी भावनाओं को समाज के सामने लाता है।
इसीलिए साहित्यकार को पहले दर्पण में स्वयं को भी देखना चाहिए,और साहित्य का दर्पण समाज को दिखाना चाहिए।
दर्पण दिखाने से तात्पर्य है, समाज को यथार्थ से अवगत करना।
साहित्य का वैचारिक अंकुश समाज के हरक्षेत्र पर होना ही चाहिए।
विचार के माध्यम से ही समाज में परिवर्तन संभव है।
अपना हौसला बुलंद होना चाहिए।
शायर निदा फ़ाज़ली रचित निम्न शेर मौंजू है।
धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
साहित्य के माध्यम से ही वैचारिक क्रांति संभव है।
आज वैचारिक क्रांति अनिवार्य है।
वैचारिक क्रांति से सामाजिक,
सांस्कृतिक,राजनैतिक,आर्थिक हर क्षेत्र में व्याप्त भ्रांति मिटाई जा सकती है।





