अग्नि आलोक
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*शिक्षा अमीरों की रखैल बनी रही तो…..!

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डॉ. नीलम ज्योति ——–

  _चीन ने अपने यहां प्रॉफिट स्कूलिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि वहां अब कोचिंग और ट्यूशन उद्योग नहीं चल सकेगा।_
     ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि वहां का मध्यम वर्ग इन महंगे कोचिंग के बोझ से दबा जा रहा था और छात्र भयावह मानसिक और सामाजिक दबाव में जी रहे थे।
  इसकी तुलना में भारत के प्राइवेट स्कूल मुनाफे के सबसे बड़े उद्योग के रूप में विकसित हुए हैं

कोटा, पुणे, बेंगलुरु, दिल्ली, पटना, इलाहाबाद, लखनऊ, अपने कोचिंग सेंटर्स के बदौलत ही शिक्षा केंद्र के रूप में उभर चुके हैं।
कोचिंग उद्योग का सालाना मुनाफा अरबों रुपए में है। भारत में इंटरनेट के कोचिंग प्लेटफार्म भी लाखों रूपए वसूल रहे हैं।
चीन की प्रगति का बड़ा रहस्य सामाजिक विषमता को कम करना और सभी नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं सहज रूप से उपलब्ध कराने में छुपी है।
भारत का सत्ता प्रतिष्ठान सरकारी सेवा को ध्वस्त करने और सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने को अपनी सफलता के रूप में प्रचारित कर रहा है।
भारत की इस भयानक गलती का खामियाजा वर्तमान पीढ़ी भुगत रही है तथा पिछले 70 सालों में अर्जित सफलता के लाभांश को हम अगले कुछ दशकों में गरीबी और अमीरों के महाखड्ड में खो देंगे।
[चेतना विकास मिशन]

Ramswaroop Mantri

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