भोजन पेट भरने का साधन माना जाता है, लेकिन भारतीय संस्कृति में भोजन को ग्रहों की उर्जा संतुलित करने का माध्यम भी माना गया है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, काले चने का संबंध सीधे तौर पर न्यायधीश और कर्मफल दाता कहे जाने वाले शनि देव से है. मान्यता है कि अगर इसका उपयोग सही तरह से किया जाता है, तो ये सेहत को सुधारने के साथ-साथ साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों को भी दूर करता है.
ज्योतिषविद शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के लिए विशेष उपाय बताते हैं, लेकिन उन सब में काले चने का उपाय या कहें कि टोटके बहुत प्रभावी होते हैं. शास्त्रों के जानकारों के अनुसार, अगर काले चने का उपयोग सही ढंग से किया जाए तो कुंडली से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम हो सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं काले चने के इन उपायों के बारे में.
स्कंद पुराण के अनुसार…
स्कंद पुराण के अनुसार, शनि देव को काला रंग और लोहे की चीजें अत्यंत प्रिय हैं. माना जाता है कि काले चने के रंग और प्रकृति में शनि की उर्जा समाहित है. तांत्रिक विधियों की तरह ही सात्विक पूजा में काले चने का महत्व है. ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, काले चने को कर्म सुधारक माना गया है. इसके सेवन और दान से शनि की कठोर दृष्टि का प्रभाव कम होता है.
काले चने से करें ये उपाय
अगर आप पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या चल रही है, तो रोजाना काले चले का सेवन करें. अगर रोजाना संभव न हो तो हर शनिवार को काले चने का सेवन अवश्य करें. काले चने को नमक के साथ उबालकर सबसे पहले शनि देव को चढ़ाएं और उनका आशीर्वाद लें. चने का सेवन करते समय “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का मानसिक जप करें. इससे आप शनि दोष से मुक्त होंगे. स्वयं खाने के साथ-साथ इसे जरूरतमंदों में भी बांटे.






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