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यह राजनीति तो नहीं…क्या संदेश देना चाहती हैं उमा भारती?

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उमा भारती की गिनती कभी बीजेपी के फायर ब्रांड नेताओं में थी। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनकी लोकप्रियता घटी है। पार्टी में उनका रसूख बहुत कम हो गया है। कह सकते हैं कि वह साइडलाइन) हो गई हैं। यह अलग बात है कि उमा भारती बीच-बीच में कुछ ऐसा कर देती हैं कि सुर्खियों में आ जाती हैं। रविवार को उन्‍होंने शराब की दुकान में घुसकर तोड़फोड़ की। इसके पहले उन्‍होंने ब्‍यूरोक्रेसी पर विवादित बयान दिया था। ऐसे में अब सवाल उठने लगा है कि क्‍या ऐसा करके उमा भारती राजनी‍ति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं? क्‍या उन्‍हें गुम हो जाने का डर है? या फिर फायर ब्रांड नेता एमपी में अपनी खोई राजनीतिक जमीन को वापस पाने की नाकाम कोशिश कर रही हैं?

उमा भारती बीजेपी का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रही हैं। बतौर सीएम वह मध्‍यप्रदेश की कमान संभाल चुकी हैं। उन्हें आक्रामक तेवरों के लिए जाना जाता है। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद तस्‍वीर काफी बदली है। पार्टी हाईकमान में उनकी लोकप्रियता घटी है। वह पॉलिटिकल सीन से भी गायब होती जा रही हैं।

साल 2003 में मध्‍य प्रदेश में बीजेपी सरकार बनी थी। उस वक्‍त पार्टी का नेतृत्व उमा भारती के ही हाथों में था। विधानसभा चुनावों में उमा पार्टी की मुख्य प्रचारक थीं। लगातार 10 साल तक सीएम रहे दिग्विजय के सामने बीजेपी ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में पेश किया था। कांग्रेस को सत्ता से बेदखल करने में उनका रोल अहम था। उन्हें इसका ईनाम भी मिला। 8 दिसंबर, 2003 को उन्होंने सीएम पद की शपथ ली थी। लेकिन, 9 महीने बाद ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा था। हुबली दंगों में कोर्ट से अरेस्‍ट वॉरेंट जारी होने के बाद उन्‍हें ऐसा करना पड़ा। इसके बाद पहले बाबूलाल गौर और फिर शिवराज सिंह चौहान सीएम बने। उमा का नंबर दोबारा नहीं आया।

बीजेपी से हो गई थीं आउट
अगस्त, 2004 में उमा भारती को सीएम पद ही नहीं गंवाना पड़ा था। एक वक्‍त आया जब उन्हें बीजेपी से भी बाहर होना पड़ा। फिर उन्होंने भारतीय जनशक्ति पार्टी बनाई। चुनाव भी लड़ा। चुनाव में करारी हार के बाद उन्‍होंने बीजेपी में वापसी के लिए जोर लगाया। काफी मशक्कत के बाद पार्टी में उनकी दोबारा वापसी हुई। लेकिन, प्रदेश की राजनीति में वह जगह नहीं बना पाईं। वह उत्तर प्रदेश में विधायक बनीं। सांसद बनीं। केंद्र में मंत्री भी रहीं। लेकिन, 2019 में लोकसभा का टिकट नहीं मिला। तब से वह नई जिम्मेदारी के इंतजार में हैं। माना जाता है कि इस छटपटाहट में ही वह कुछ ऐसा करती हैं जिससे लाइमलाइट में रहें।

शराब की दुकान में घुसकर क‍िया हंगामा
वरिष्ठ भाजपा नेता मध्य प्रदेश में पूरी तरह शराबबंदी की मांग उठाती रही हैं। रविवार को वह भोपाल के आजाद नगर स्थित एक शराब की दुकान में घुसीं और पूरी ताकत के साथ पत्थर फेंककर वहां रैक में रखी शराब की कुछ बोतलों को फोड़ दिया। अपने इस ऐक्‍ट को उमा ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर भी किया। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने स्थानीय प्रशासन को एक सप्ताह के भीतर शराब की दुकान बंद करने की चेतावनी दी है।

इसके बाद लोगों ने सवाल उठाया। उन्‍होंने उमा भारती से पूछा कि उन्‍होंने तोड़फोड़ करने बजाय स्‍थानीय प्रशासन से शिकायत करने का रास्‍ता क्‍यों नहीं चुना। अपने हाथ में कानून-व्‍यवस्‍था को लेना कितना सही है। वह अपनी जगह ठीक ही क्‍यों न हों, लेकिन विरोध का यह तरीका कितना सही है।

दरअसल, एमपी में बीजेपी सरकार ने हाल ही में एक नई आबकारी नीति बनाई है। इसके तहत उसने होम बार स्थापित करने की अनुमति दी है। शराब की खुदरा कीमतों में 20 फीसदी की कमी की है।

वीडियो में दिख रहा है कि उमा भारती कुछ लोगों के साथ एक पत्थर लेकर इस दुकान में जाती हैं। इसके बाद वह वहां रैक में पड़ी शराब की बोतलों पर इस पत्थर को पूरी ताकत के साथ फेंकती हैं। इससे वहां रखी कुछ शराब की बोतलें टूट जाती हैं। इसके बाद वह वहां से बाहर आ जाती हैं और चली जाती हैं।

अफसरों को द‍िखाई थी औकात
इसके पहले उमा भारती नौकरशाही पर दिए अपने बयान को लेकर विवाद में घिर गई थीं। उनका एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें वह कहती दिख रही थीं, ‘आपको गलतफहमी है ब्यूरोक्रेसी कुछ नहीं होती है, चप्पल उठाने वाली होती है। चप्पल उठाती है हमारी… हम लोग ही राजी हो जाते हैं उसके लिए क्योंकि हमें समझाया जाता है कि आपका बहुत बड़ा चक्कर पड़ जाएगा।’ इस बयान की तीखी आलोचना के बाद उमा भारती ने सफाई दी थी।

उमा भारती ने इसी वीडियो में कहा था, ‘कर्नाटक में जो प्रयोग हुआ लिंगायत समाज का… शरद यादव मेरी बात का समर्थन करते हैं। जिसमें सब लोग शिवलिंग की उपासना करने लगे, रोटी-बेटी करने लगे। उसका परिणाम यह निकला कि सब ओबीसी कहलाए और कुछ नहीं…अब उनके बिना कोई मुख्यमंत्री नहीं बन पाता।’

मध्‍य प्रदेश में वह कई मुद्दों पर अपनी ही पार्टी को निशाने पर लेती रही हैं। इनमें महिला सुरक्षा, ओबीसी कोटा और अन्‍य मुद्दे शामिल हैं। हलांकि, हाल में उन्‍हें सीएम शिवराज सिंह चौहान की तारीफ करते हुए देखा गया है।

Ramswaroop Mantri

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