अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

बीजेपी को वोट नहीं दिया तो घरों में लगाई आग,त्रिपुरा हिंसा के बाद पुरुषों का पलायन

Share

पूनम मसीह

त्रिपुरा में दो मार्च को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। जिसके बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा भड़क गई। खबरों केअनुसार इस प्रायोजित हिंसा में आठ लोग घायल हुए थे। जिनका सिविल अस्पताल में इलाज भी चला।

अगरतला। त्रिपुरा विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद राज्य में जो हिंसा हुई उसका असर अब भी देखने को मिल रहा है। लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही है। जनचौक ने हिंसा प्रभावित इलाकों की कुछ महिलाओं से इस बारे में बात की है। राज्य की महिलाएं चुनाव, हिंसा और परिवार के बीच कैसे पिस रही हैं।

पिछले दिनों राज्य में हुई हिंसा के बाद सीपीएम और कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल पीड़ितों से मिलने पहुंचा। जिसमें महिलाओं ने अपनी परेशानियों के बारे में बात की। इनमें कुछ महिलाएं ऐसी भी थीं जो अब अपने घर में अकेली रह रहीं हैं। जनचौक की टीम भी इसी प्रतिनिधिमंडल के साथ इन पीड़ितों से मिलकर उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश की।

रात में जंगल में रहने को मजबूर

जमुना दास पश्चिम त्रिपुरा के कालिकापुर में टिन के घर में रहती हैं। हिंसा के बाद से ही वह अंदर से डरी हुई हैं। स्थिति यह थी कि हमसे बात करते वक्त भी उनकी आवाज में एक भारीपन था। जमुना के टिन से बने घर को कुल्हाड़ी से तोड़ दिया है।

उस दिन की घटना को याद करते हुए वह बताती हैं कि चुनाव नतीजे आने के बाद से ही माहौल थोड़ा बदल गया था। हमें हमले की पहले से ही आशंका थी और हुआ भी ऐसा ही। नतीजा आने के बाद जैसे बाकी जगहों पर हमले हुए वैसे ही हमारे यहां भी हुए।

जमुना कहती हैं कि उनके परिवार में पांच लोग हैं। चुनाव के नतीजेआने के बाद से ही वह घर और जंगल के बीच जी रहे थे। वह बताती हैं कि हमलोग दिन में घर पर और रात में जंगल में रहने को मजबूर थे। इसी बीच हमारे घर को कुल्हाड़ी से तोड़ दिया गया। टिन के घर को तेज धारदार हथियार से काट दिया गया।

Tripura 2
हमले के बाद घर का दृश्य

हमने जब जमुना से मुलाकात की तो घर पर वह और उसका बेटा था। पति के बारे में पूछने पर वह बताती हैं कि फिलहाल कुछ दिन जंगल में रहने के बाद अब वह यहां से बाहर चले गए हैं।

जमुना अब उन महिलाओं में से हैं जो हमारी खबर करने तक अपने बच्चे के साथ अकेले रह रही हैं। जमुना हिंदी बोलने में सक्षम नहीं थी, उन्होंने बांग्ला में हमें बताया कि अब भी डर लगता है। पति घर पर नहीं हैं मैं अपने बेटे के साथ रह रही हूं। डर लगता है फिर कोई हमला न कर दें। आम जीवन में भी थोड़ी परेशानी हो रही है।

पुलिस ने नहीं की हमारी मदद

इसके बाद हम गांधी ग्राम गए। जहां एक क्षेत्र में सात से आठ परिवारों के घरों पर हमले हुए हैं। यहां भी वही स्थिति थी जो जमुना दास की थी। रिजल्ट के बाद लोगों के घरों पर बम फेंके गए थे। स्थिति यह थी कि यहां भी ज्यादातर घरों के पुरुष बाहर रह रहे हैं। हमने यहां के लोगों से बातचीत करने की कोशिश की।

एक महिला ने हमसे बात की। उनके पति भी पिछले कुछ दिनों से घर पर नहीं हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव नतीजे आने के बाद लगातार तीन से चार दिन तक रोज रात को सात से नौ बजे के बीच में बम फेंके जाते थे। यहां तक कि यह सारी चीजें पुलिस के संज्ञान में भी थी तब भी पुलिस हमारी मदद नहीं कर रही थी।

Tripura 3
हमले के बाद घर का दृश्य

वह कहती हैं कि मेरे पति एक बिजनेसमैन हैं। साथ ही लेफ्ट समर्थक भी हैं। जिसके कारण हमारे घर को टारगेट किया गया। घर की खिड़कियों को तोड़ दिया गया। बम फेंके गए। अब स्थिति ऐसी है कि घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है। भाजपा के कार्यकर्ता नारा लगाते हुए आते थे और घर पर पत्थरों और बमों से हमला करते थे।

हमें यहां तक धमकी दी जा रही है कि मेरे परिवार को यहां रहने नहीं दिया जाएगा। डर का माहौल है इसलिए पति अभी कहीं बाहर रह रहे हैं। मैं और मेरा बेटा यहां डर के माहौल में जीने को मजबूर हैं क्योंकि घर छोड़कर कहां जाएं?

बच्चा मानसिक तनाव में…

मीना विश्वास की भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। उसके बेटे ने हिंसा का भयावह रुप देखा है और मानसिक तनाव में चला गया है। उसके हावभाव से साफ पता चलता है कि हिंसा का डर अब भी उसके जेहन में है।

दरअसल जिस वक्त उनके घर पर हमला हुआ घर पर मीना और उसका बेटा अकेले थे। मीना बताती हैं कि चुनाव नतीजों के बाद हमने कभी नहीं सोचा था ऐसी स्थिति बन जाएगी। मेरे अलावा गांव के और घरों पर भी हमले हुए। लेकिन सभी लोग डरे हुए हैं इसलिए कुछ नहीं कहना चाहते।

Tripura
जनचौक संवाददाता पूनम पीड़िता से बात करती हुईं

वह बताती हैं कि चुनाव परिणाम आने के बाद दो मार्च की रात 10.30 बजे मैं और परिवार के बाकी लोग घर में खाना खाते हुए टीवी देख रहे थे। इसी दौरान जोर-जोर से चिल्लाने की आवाज आई। कुछ लोग मेरे पति को बाहर निकलने के लिए कह रह थे।

मीना अपने घर के मेन गेट को दिखाते हुए कहती हैं कि लोग यहां से अंदर आए। शायद उनके हाथ में डंडे थे क्योंकि हमलोग अंदर थे इसलिए हमने देखा नहीं। घर की बाउंड्री में आने के बाद उन्होंने ऑटो को तोड़ दिया। उसके बाद घर के बाहर लगी बड़ी लाइट को भी तोड़ दिया।

मीना उसी टूटी हुई लाइट को दिखाते हुए कहती हैं कि पहले उन लोगों ने लाइट को तोड़ा और उसके बाद अंदर आने की कोशिश करने लगे। चूंकि अंदर से ताला लगा था। इसलिए वह अंदर नहीं आ सके। वह एक भयानक समय था। हमें समझ नहीं आ रहा था। हमारे साथ क्या हो रहा है और क्या होनेवाला है। मेरे बेटे ने भी यह सारी चीजें देखी हैं जिसके कारण वह मानसिक रुप से बीमार हो रहा है।

इन सारी चीजों के बीच मेरे बेटे के पढ़ाई खराब हो रही है। बेटे की परीक्षा चल रही है। वह क्लास छह में पढ़ता है। भय के कारण वह अपनी परीक्षा भी नहीं दे रहा है। इस तरह के भय के बीच मेरे बेटे का भविष्य खराब हो रहा है।

वह कहती हैं कि हमारा कसूर बस इतना है कि हमने लेफ्ट पार्टी का सपोर्ट किया। इसलिए भाजपा के लोगों ने लेफ्ट समर्थकों को टारगेट करके नुकसान पहुंचाया है।

त्रिपुरा में दो मार्च को विधानसभा चुनाव के नतीजे आए थे। जिसके बाद राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा भड़क गई। खबरों के अनुसार इस प्रायोजित हिंसा में आठ लोग घायल हुए थे। जिनका सिविल अस्पताल में इलाज भी चला। इसके साथ ही हिंसा के मामले में पुलिस ने लगभग 20 लोगों को गिरफ्तार किया था।

त्रिपुरा में चुनाव के बाद हुई हिंसा के बारे में सीपीआई (एम) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी का कहना है कि भाजपा का राज आते ही राज्य में हिंसा फैल गई है। जिसमें लगभग दो हजार लोगों को नुकसान हुआ है। लोग घरों को छोड़कर जंगलों में रहने को मजबूर हैं और भाजपा कह रही है कि सिर्फ कुछ घटनाएं हुई हैं। वह कहते हैं कि आज भी लोगों के बीच डर का माहौल है। लोग पार्टी ऑफिस में रहने को मजबूर हैं। घर जाने पर उन्हें जान का खतरा लग रहा है।

अगरतलाफरवरी की कड़कड़ाती ठंड में पूर्वोत्तर के तीन राज्यों- त्रिपुरा, मेघालय और नागालैंड में चुनावी पारा गर्मी का अहसास करा रहा था। केंद्र में सत्तारूढ़ संघ-भाजपा के मंत्रियों ने पूर्वोत्तर में डेरा डाल दिया था। उनके सियासी बयानों ने पूर्वोत्तर के अपेक्षाकृत ठंड माहौल में गर्मी ला दी थी। चुनाव के बाद तीनों राज्यों में बीजेपी गठबंधन की सरकार बन गई। सरकार बनते ही त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में सत्तारूढ़ दल के कार्यकर्ता पुलिस-प्रशासन की शह पर विपक्षियों के घरों को आग के हवाले कर दिया। सत्तापक्ष दूसरे दलों को वोट देने वालों को प्रताड़ित कर रहा है। अगरतला के कई गांवों में लोगों के घरों पर हमला किया गया।

दो मार्च को चुनाव नतीजे आने के साथ ही त्रिपुरा में हिंसा का तांडव शुरू हो गया और देखते ही देखते यह अपना विकराल रूप ले लिया। लोगों के घरों को जलाने से लेकर रबर के बागों को पूरी तरह से नष्ट करने का सिलसिला शुरू हो गया। जिसको लेकर लोगों के बीच अभी भी भय पसरा है। क्योंकि पुलिस-प्रशासन औऱ सरकार में कहीं उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। घरों के आग में राख होने के बाद कई परिवार जंगलों में खुले आसमान में रहने को विवश हैं।

राजधानी अगरतला में भाजपा की जीत के बाद पूरा शहर भाजपा के झंडों से पट गया है। हर गली और चौक-चौराहों से लेकर लोगों के घरों और दुकानों में सिर्फ कमल का फूल दिखाई दे रहा है। लेकिन इन कमल के फूलों के बीच कुछ मुरझाए चेहरे हैं, जिनकी जुबान से आवाज नहीं निकल रही है, क्योंकि उनका सबकुछ हिंसा और आग की भेंट चढ़ चुका है।

20230310 154508
जले घर के पड़े आलू

पूरा घर जलकर राख

ऐसी ही एक पीड़ित से जनचौक संवाददाता ने अगरतला में बात की। यह शख्स राजधानी अगरतला के पास दुर्गाबाड़ी के जतीन डोरा हैं, जिनका पूरा घर जला दिया गया है। स्थिति यह है कि उनके घर में एक सामान नहीं बचा है। घर के चारों ओर एक जली काली चादर सी बिछी है। जलने की महक से पूरा वातावरण भरा हुआ है। जगह-जगह जले हुए सामानों के कुछ टुकड़े पड़े हुए हैं। हम सबसे पहले जतीन डोरा के घर पहुंचे।

जतीन के घर के आसपास के दूसरे घर एकदम ठीक हैं। गली के बीच में जमीन के बड़े हिस्से में बना जतीन डोरा का घर जलकर पूरी तरह से राख हो गया है। घर में पड़ी साइकिल पूरी तरह से जल चुकी है। एक कोने में आलू-टमाटर गिरे पड़े हैं। घर में पड़ा बेड पूरी तरह से जल चुका है। लकड़ी के दरवाजे भी जले हुए हैं। घर के नाम पर अब बस मलवा ही पड़ा है।

रात 12.30 बजे लगाई आग

इस पूरी घटना पर जतीन डोरा का कहना है कि 2 मार्च को रिजल्ट आने के बाद शाम से ही धीरे-धीरे माहौल खराब होने लगा। वह बताते हैं कि दो मार्च की शाम से ही लोगों के बीच में डर का माहौल था। इसी डर के बीच रात 12.30 बजे मेरे घर को जला दिया गया।

जतीन उस दिन को याद करते हुए बताते हैं कि मंगलवार का दिन था, मैं और मेरा बेटा घर में सोए हुए थे। अचानक पेट्रोल की गंध आने लगी। इस गंध के आने के साथ ही मैं और मेरा बेटा घर से बाहर निकले। लेकिन इतनी ही देर में भाजपा के लोगों ने हमें आग में झोंक दिया। बड़ी मुश्किल से हम लोग घर से बाहर निकल पाए।

Screenshot 20230316 180210 Gallery
जतीन डोरा

हम सिर्फ गायों को ही बचा पाए, एक गाय जल गई

मेरे बेटे ने बाहर निकलते हुए जल्दी-जल्दी तीन गायों को खोला। इतनी जल्दी करने के बाद भी गाय जल गईं। एक गाय की तो आंख के पास का हिस्सा भी जल गया है। अब संपत्ति के नाम पर मेरे पास सिर्फ तीन गाय बची हैं। बाकी सबकुछ जल कर राख हो गया है।

वह बताते हैं कि पूरी जिदंगी की जमा-पूंजी मेरी आंखों के सामने जलकर राख हो गई। जब तक आसपास के लोग बचाने के लिए आए तब तक 10 से 12 लाख का नुकसान हो गया।

उस दिन की घटना को याद करते हुए वह कहते हैं कि जिस दिन चुनाव के नतीजे आए हमारे पास में एक शख्स की मौत हुई थी। उनके यहां रामायण हो रहा था। आस-पास के सभी लोग वहीं गए हुए थे। जब आधी रात हो गई तो भाजपा के लोगों ने मौका पाकर घर को जला दिया।

हमने उनसे पूछा कि क्या आपका घर वोट देने के कारण जला दिया गया है? जतीन ने हमें बताया कि हां मैं सीपीएम का समर्थक हूं और वह भाजपा के लोग थे। क्या आपने किसी को देखा? हां इनमें से दो लोग तो हमारे ही गांव के थे। डर लगाता है कहीं किसी को खो न दें।

इस घटना के बाद जतीन डोरा की बेटी भी घर आई है। हमने उनसे बात की, वह कहती हैं कि घर तो पूरा जल गया है। अब तो हमलोग आर्थिक और शारीरिक दोनों तरीके से कमजोर हो गए हैं। इस घटना को सुनने के बाद मैं सुसराल से यहां आकर रह रही हूं। डर लगता है, घर जल गया है, कहीं घर के किसी सदस्य को न खो दें।

वह बड़े दुखी मन से कहती हैं- कोई किसी का क्या इस तरह से नुकसान करता है कि उसका पूरी तरह से सर्वनाश ही कर दे। हमारे साथ तो यही हुआ है। मेरे पिता पानी सप्लाई का काम करते हैं। भाई की एक छोटी दुकान है।

लोग इतने हैवान थे कि उन्होंने गाय पर भी तरस नहीं खायी। हमारी तीन गायों को नुकसान पहुंचा है। पैर जल गए हैं। हमने समय रहते उन्हें बचा लिया। अभी इलाज कराने के बाद वह थोड़ा ठीक हैं। खेतों में चर रही हैं।

जतीन के घर को जलाए जाने को लेकर आसपास के लोग भी दबी जुबान से बात कर रहे हैं। लेकिन कोई भी खुलकर इस पर बात करने को तैयार नहीं है।

20230310 154531
चूल्हा

प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ितों से मुलाकात की

घटना के एक सप्ताह बाद कांग्रेस और लेफ्ट के एक प्रतिनिधिमंडल ने जतीन डोरा से मुलाकात की। उनकी हर संभव मदद करने का आश्वसन देते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। पार्टी उनके साथ खड़ी है।

त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने जतीन डोरा से मुलाकात करने के साथ-साथ आसपास के लोगों को हौसला देते हुए कहा कि वह इन सारे मुद्दों को संसद में उठाएंगे ताकि देश के बाकी हिस्सों में भी लोगों को यहां की स्थिति के बारे में पता चल सके।

त्रिपुरा में चुनाव के बाद हुई हिंसा के बारे हमने बीजेपी के मंत्री टीटू राय से पूछा तो उन्होंने पहले पार्टी का गुणगान करते हुए कहा कि यहां बहुत ज्यादा घटनाएं नहीं हुई हैं। बाकी जो हुई हैं वह सभी प्रयोजित हैं। पुलिस के सामने ही लोगों पर हो रहे हमले पर उनका कहना था कि यह सब लेफ्ट और कांग्रेस करवा रही है।

सरकार द्वारा पीड़ित लोगों को मुआवजा की बात करने पर वह कहते हैं कि फिलहाल हमारी सरकार बनी है। इससे पहले आचार संहिता लागू थी। अब सरकार बनी है। आगे का काम अभी सरकार देखेगी।

20230310 154537
जतीन डोरा के पड़ोसी

दो हजार लोगों को हुआ नुकसान

चुनाव के बाद हुई हिंसा के बारे में सीपीआई (एम) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी का कहना है कि भाजपा का राज आते ही राज्य में हिंसा फैल गई है। जिसमें लगभग दो हजार लोगों को नुकसान हुआ है। लोग घरों को छोड़कर जंगलों में रहने को मजबूर हैं और भाजपा कह रही है कि सिर्फ कुछ घटनाएं हुई हैं।

वह कहते हैं कि आज भी लोगों के बीच डर का माहौल है। लोग पार्टी ऑफिस में रहने को मजबूर हैं। घर जाने पर उन्हें जान का खतरा लग रहा है।

हमने इस हिंसा को लेकर स्थानीय पत्रकारों से बातचीत करने की कोशिश की। पत्रकारों ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि चुनाव के पहले यहां लेफ्ट, भाजपा और टिपरा मोथा के बीच लड़ाई थी। जैसे ही चुनाव के नतीजे आए जिस पार्टी ने जीत हासिल की वह हारी हुई पार्टी के समर्थकों पर भारी पड़ने लगी। इनमें से कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने आपसी रंजिश का बदला लेने के लिए राजनीति का सहारा लिया।

हिंसा के बारे में हमने अगरतला के एसपी से बात करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें