सार्वजनिक प्रयोजन की जमीनें नहीं मिलेगी पट्टे पर
शासन के राजस्व विभाग ने 24 सितम्बर 2020 को परिपत्र इस संबंध में जारी किया उसमें सार्वजनिक प्रयोजन की जमीनों पर काबिज लोगों को ये स्थायी पट्टे नहीं मिलेंगे। ग्रीन बेल्ट, बगीचे, खेल के मैदान, सडक़, गली, नदी-नाले या जल संग्रहण क्षेत्र के रूप में चिन्हित जमीनों के अलावा धार्मिक स्थल की जमीन, राजस्व, वन भूमि या संहिता की धारा 233 क के अधीन आरक्षित जमीनों पर ये पट्टे नहीं दिए जा सकेंगे। अगर किसी जमीन का विवाद न्यायालय या अन्य सक्षम प्राधिकारी के समक्ष चल रहा है तो भी उसका निराकरण अभी नहीं किया जाएगा और इस नीति का लाभ एक परिवार एक ही बार में उठा सकेगा। विवाद के मामले में कलेक्टर का निर्णय ही अंतिम माना जाएगा।
शासन के निर्देश पर सरकारी यानी नजूल जमीनों पर जो कब्जे या निर्माण हैं उन्हें 30 साल का स्थायी पट्टा दिया जाएगा। शर्त यह है कि 31 दिसम्बर 2014 से सरकारी जमीन पर निरंतर कब्जा होना चाहिए। यानी 25 साल से अगर कब्जा है तो स्थायी पट्टे की पात्रता रहेगी। जिला प्रशासन को अभी तक 464 आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिस पर दावे-आपत्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सबसे अधिक 168 आवेदन सांवेर क्षेत्र से प्राप्त हुए हैं, क्योंकि सडक़ चौड़ीकरण के चलते कई लोगों को अधिकार-पत्र दिए गए थे। उन्होंने अब स्थायी पट्टे के लिए आवेदन किए हैं। शासन नियमों के मुताबिक स्थायी पट्टा देते वक्त आवासीय और व्यवसायिक प्रीमियम दरों की तय की गई राशि जमा करवाई जाएगी और उसी के मान से सालाना भू-फाटक भी 2018 के नियमों के तहत निर्धारित किया जाएगा।
निजी से सरकारी हुई जमीनों का निर्णय शासन करेगा
कई जमीनें ऐसी है जो पहले निजी थी और बाद में फिर सरकारी घोषित कर दी गई। लिहाजा ऐसे प्रकरणों में भी अभी इस धारणा अधिकार नीति के तहत जो आवेदन प्राप्त होंगे उसका निर्णय स्थानीय स्तर पर प्रशासन नहीं करेगा, बल्कि ऐसे प्रकरणों को शासन के पास यानी भोपाल भेजा जाएगा। शासन जांच-पड़ताल के बाद अधिसूचित करते हुए पट्टे देने की पात्रता या अपात्रता निर्धारित करेगा। उसके आधार पर प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा। यानी पहले निजी और फिर सरकारी हो चुकी जमीनों के संबंध में स्थानीय स्तर पर फिलहाल निर्णय नहीं लिया जाएगा। आबादी के अधिभोगियों के प्रकरणों में स्वत्व अधिभोग की जांच अत्यंत बारीकी से करने के निर्देश इसीलिए शासन ने दिए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत मालिकाना हक
शहरी क्षेत्र में जहां धारणा अधिकार के तहत स्थायी पट्टे देकर मालिकाना हक दिया जा रहा है, तो इसी तरह का अभियान ग्रामीण आबादी का सर्वे कर स्वामित्व योजना के तहत अधिकार दिए जाएंगे। अभी 6 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभर में इस अभियान की शुरुआत की और मध्यप्रदेश के भी कुछ जिलों में ये स्वामित्व योजना के मालिकाना हक ग्रामीणों को दिए गए पिछले दिनों प्रमुख राजस्व आयुक्त डॉ. संजय गोयल और आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त बी. ज्ञानेश्वर पाटिल ने सभी जिलों के अपर कलेक्टरों से इंदौर में ही चर्चा की थी और उन्हें निर्देश दिए कि सभी जिलों में स्वामित्व योजना का निराकरण करें। इंदौर में भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत जल्द पट्टे दिए जाएंगे।





