इंदौर जिले में अवैध कॉलोनियों के विरुद्ध चल रही मुहिम के तहत कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देशन में लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में धार रोड स्थित ग्राम धन्नड़, पीथमपुर रोड पर अपर कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देशन में एसडीएम गोपाल वर्मा द्वारा एक अवैध कॉलोनी को सील किया गया था।
हालांकि, सवाल यह उठता है कि क्या इस क्षेत्र में केवल यही एक अवैध कॉलोनी है? आसपास कई अन्य अवैध कॉलोनियां कुकुरमुत्तों की तरह फैलती जा रही हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्या प्रशासन की यह ‘चुनिंदा कार्रवाई’ सवालों के घेरे में नहीं है?
ग्राम धन्नड़ से कुछ ही दूरी पर स्थित ग्राम चिराखान, जो पीथमपुर के समीप है, वहां लक्ष्मी नगर, न्यू लक्ष्मी नगर, बालाजी पार्क और न्यू बालाजी पार्क जैसी 4 से 6 अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं। इन कॉलोनियों में कॉलोनाइजरों द्वारा कुछ हिस्सों में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर पहाड़ियों को काटकर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।
जब इस मामले में जांच की गई, तो पाया गया कि कॉलोनाइजर ‘साम, दाम, दंड, भेद’ की नीति अपनाकर प्रशासनिक कार्रवाई से बचने की कोशिश में लगे हैं।
विकास के रास्ते में खड़ा हो गया बड़ा खतरा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्टने कहा है कि देश भर में कुकुरमूत्ते की तरह अवैध कॉलोनियों के फैलने से शहरी विकास के रास्तें में बड़ा खतरा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकारों के पास इस तरह के अवैध कॉलोनियों से निपटने और उसे बनने देने से रोकने के लिए एक समग्र प्लान की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल नागेश्वर राव की अगुवाई वाली बेंच ने मामले में गोपाल शंकरनारायण को कोर्ट सलाहकार नियुक्त किया है और सुझाव मांगा है कि सरकार इन अवैध कॉलोनियों को रोकेन के लिए क्या कर सकती है ये बताएं।
सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध कॉलोनियों की मशरुमिंग (कुकुरमुत्ते) की तरह फैलने से देश भर के शहरों में नतीजे भयानक हो रहे हैं। हमने हैदराबाद और केरल की बाढ़ देखी है। यह सब सिर्फ अवैध कॉलोनियों की वजह से हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसे रोकने के लिए राज्य सरकार के पास समग्र योजना होनी चाहिए। हमें देखना होगा कि राज्य सरकार कैसे इस पर काम करेगी। यह सब शहरी विकास के रास्ते में खतरा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले से संबंधित सारे रेकॉर्ड कोर्ट सलाहकार को सौपे जाएं ताकि। शीर्ष अदालत ने कोर्ट सलाहकार से कहा है कि वह दो हफ्ते में सुझाव पेश करें।
सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने कोर्ट सलाहकार को इस बात की इजाजत दे दी है कि वह राजयों और केंद्र शासित प्रदेशों को सवाल तैयार कर भेजें। मामले की सुनवाई तीन हफ्ते के लिए टाल दी गई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट श्रवण कुमार ने कहा कि बड़ी संख्या में अवैध निर्माण होने से शहरों में अनरेग्युलेटेड विकास हो रहा है। अवैध निर्माण के कारण बाढ़ आ रही है। देश भर में रेग्युलर और सही तरीके से विकास करने की जरूरत है। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकारें अवैध एक्ट को रेग्युलर कर रही है। और यह अवैध निर्माण रीयल ईस्टेट माफिया कर रहे हैं इसमें सरकार के अधिकारियों की मिलीभगत है। इस कारण राज्यों में बाढ़ आ रही और और ट्रैफिक जाम हो रहा है। ड्रेनेज सिस्टम की कमी हो गई है। लोगों को भारी नुकसान हो रहा है। प्रॉपर्टी के साथ जीवन का नुकसान है।





