सुसंस्कृति परिहार
राजनीति के किरदार यूं तो आजकल होते ही हैं मज़ेदार। बात जब चुनाव की हो और भीतरघात के पूरे आसार बन रहे हों तो चित्र और कविता के ज़रिए ही बहुत कुछ कहना होता है। पिछले रविवार से एक चित्र सोशल मीडिया से लेकर प्रत्येक चैनल पर धूम मचाए है वह है मोदीजी के साथ योगी जी का। आजकल यह केर बेर के संग के रूप में चर्चित हैं। बहुतेरे लोग यह जानते ही हैं कि योगी जी पर संघ का वरदहस्त है और संघ की दृढ़ इच्छा है देश का अगला प्रधानमंत्री योगी हो। स्वाभाविक है मोदी इसे कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं? वे भी संघ की मेहरबानी से ही इस मंजिलेमक्सूद तक पहुंचे।मगर सत्ता का नशा आसानी से नहीं उतरता।आगे रहने उछल-कूद तो करनी ही होती है।सो वे खेल बिगाड़ने में लगे हुए हैं।
बहरहाल मोदीजी से एक बड़ी चूक हो गई जब उन्होंने योगी जी को अपनी गाड़ी के पीछे दौड़ाया वह किसी को भी अच्छा नहीं लगा था।चंद दिनों बाद ही ये जो चित्र सामने आया है वह चित्र सब कुछ कहता प्रतीत होता है जैसे मोदी जी कंधे पर हाथ रख कर कह रहे हों क्षमा योगी।हम साथ साथ चलेंगे।वे चलकर भी दिखा रहे हैं। कुछ समझा भी मोदी जी रहे हैं पर योगी अपनी प्रतिक्रिया देते हैं कविता के ज़रिए जो चित्र के साथ ही सलीके से सजाई गई है। देखें कविता—
हम निकल पड़े हैं प्रण करके
अपना तन-मन अर्पण करके
जिद है एक सूर्य उगाना है
अम्बर से ऊँचा जाना है
एक भारत नया बनाना ।
इसकी क्या ज़रूरत थी योगी जी।नये भारत के निर्माण में नरेन्द्र मोदी जी आठ साल से लगे हुए हैं क्या वह आपको पसंद नहीं? यह मानते हैं संघ ने आपको मुख्यमंत्री बनाया है किंतु जब तक आपका प्रधानमंत्री है ग़म खा लेते।यह प्रण भाजपा को दो फाड़ कर देगा।आपकी लुटिया डूब जायेगी। उत्तर प्रदेश की जनता पर ज़्यादा भरोसा ठीक नहीं।
उधर समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तंज भरे लहजे में कहा कि ‘बेमन से कंधे पर रख हाथ, कुछ कदम संग चलना पड़ता है…’
दुनिया की ख़ातिर, सियासत में कभी यूं भी करना पड़ता है।इस संग साथ को सभी भली-भांति जान चुके हैं।
दूसरी तरफ इस तस्वीर को लेकर बलिया सांसद और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा वीरेंद्र सिंह मस्त ने लिखा है, ‘
चाहे जितना जोर लगा लो जीतेगी बीजेपी
आयेंगे फिर योगी जी, आएंगे फिर योगी जी
इस कदमताल पर यकीन मुमकिन नहीं लगता क्योंकि अब अब तलक उत्तरप्रदेश में यही जोड़ी काम करती रही है
मोदी और संघ के इस बैर की वजह मोदीजी का अहंकार और संघ की उपेक्षा बताया गया है । लेकिन सबसे बड़ी वजह जो है मोदीजी ने किसी भी क्षेत्र में अपनी योग्यता प्रदर्शित नहीं की है जनता में उनकी छवि खराब है।वे अपने यारों अंबानी अडानी के विकास में ही लगे रहे।संघ की मोदी पर कुदृष्टि का ही शायद ये परिणाम है मोदीजी के भागने से पहले अंबानी लंदन का रुख कर लिए हैं।
दूसरी तरफ योगी जी हैं जो भगवाधारी, गोरखनाथ पीठ के मठाधीश हैं जिनके शिष्य सुदूर कोलकाता तक फैले हैं।संघ को उनका ठकुरासी लहज़ा पसंद है किंतु जनता-जनार्दन भगवाधारियों और मठाधीशों से सख़्त नाराज़ हैं उनके कारनामे लगातार देख और झेल रही है।नायक बदलने से जनविश्वास नहीं मिल सकता।उसे तो अमन -चैन, मंहगाई और बेरोजगारी से निजात चाहिए। सुरक्षा,स्वास्थ,शिक्षा की उचित व्यवस्था चाहिए़ जो ना तो संघीय एजेंडे में शामिल हैं और ना भाजपाई नीत सरकार के पास। इसलिए भाषण, चित्र और कविता इसका समाधान नहीं हो सकते। मोदी योगी दोनों को जाना ही होगा।





