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पूजा में में अत्यंत ही जरूरी माने गये अक्षत का महत्व

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हिंदू धर्म में पूजा के लिए प्रयोग किए जाने वाले अक्षत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. अक्षत शब्द का अर्थ होता है जिसका क्षय न हुआ हो यानि अखंडित. सरल शब्दों में कहें तो साबुत और अखंडित चावल को अक्षत कहा जाता है. सनातन परंपरा में इसे अत्यंत ही पवित्र मानते हुए किसी भी पूजा में पूर्णता लाने वाला माना  गया है. जिस किसी भी देवी-देवता की पूजा में कोई वस्तु घट जाती है, उसकी जगह अक्षत को अर्पित करके पूर्ण किया जाता है. आइए सनातन परंपरा में अक्षत के धार्मिक महत्व और इससे जुड़े अचूक उपाय के बारे में जानते हैं. 

क्यों पवित्र माना जाता है अक्षत?
हिंदू मान्यता के अनुसार प्रकृति में सबसे धान की खेती की गई थी, जिसके ऊपर लगा छिलका उसकी शुद्धता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए कवच की तरह काम करता है. छिलके से ढंके रहने के कारण उसे जीव-जंतु झूठा नहीं कर पाते हैं. खास बात ये भी कि यह अखंडित होता है. 

अक्षत का धार्मिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसर अन्न जिसे जीवन का आधार माना जाता है वह देवताओं की पूजा के दौरान अर्पित किए जाने पर सुख-समृद्धि और सौभाग्य का कारक बनता है. अक्षत न सिर्फ देवी-देवता की पूजा में बल्कि पितरों की पूजा में प्रयोग किया जाता है. जिसके माध्यम से पितर तृप्त होकर अपनी कृपा बरसाते हैं.

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अक्षत के उपाय

  • हिंदू मान्यता के अनुसार यदि धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा में चावल को हल्दी से पीला करके अर्पित किया जाए और उसके बाद पीले अक्षत के 21 दाने को प्रसाद मानकर अपने धन स्थान या फिर पर्स आदि में रखा जाए तो माता लक्ष्मी की कृपा और धन की आवक बनी रहती है. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार प्रतिदिन सूर्य देवता को तांबे के लोटे में जल और रोली के साथ अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने से भगवान भास्कर शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और सुख-सौभाग्य और आरोग्य का वरदान प्रदान करते हैं. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार प्रतिदिन प्रात:काल स्नान-ध्यान करने के बाद हल्दी से रंगे पीले चावल को मुख्य द्वार से प्रारंभ करके घर के प्रमुख हिस्सों में छिड़कने से सुख-सौभाग्य बना रहता है. 
  • हिंदू मान्यता के अनुसार अक्षत की ढेरी पर मां अन्नपूर्णा की मूर्ति स्थापित करके प्रतिदिन पूजा करने से कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होती है.

Ramswaroop Mantri

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