सुसंस्कृति परिहार
अहा !क्या बात है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने प्रदेश की महिलाओं को पिछले दिनों जो महत्वपूर्ण उपहार दिया है उसने ये सिद्ध कर दिया है कि मामा नशे के मामले में असमानता को दूर करने बेसब्री से आतुर है। उन्होंने घोषणा की है कि अब मध्यप्रदेश में महिलाओं के लिए शराब की दूकानें खोली जायेंगी जिससे उन्हें इसकी आपूर्ति सुनिश्चित हो सके ।वे किसी के आधीन ना रहें।मामा की अपनी बहिनों और भांजियों के लिए यह चिंता काबिले तारीफ है।अभी फिलहाल भोपाल, इंदौर,ग्वालियर, जबलपुर में दूकानें खोली जा रही हैं। जहां विदेशी शराब ही मिलेगी।स्तरीय शराब। सरकार महिलाओं का एक वाइन उत्सव भी आयोजित करेगी। जो देखने लायक होगा । महिलाएं नशे में डूबी रहें इससे बेहतर काम और क्या हो सकता है वे बहुत आगे बढ़ गई हैं और ये मनुवादी संस्कृति के ख़िलाफ़ भी है। पहले वे कहां शराबबंदी के खिलाफ जूझ रहीं थीं ।अब तो मामा की मेहरबानी से बल्ले बल्ले।अब साथ साथ नशे का लुत्फ़ वे भली भांति ले पायेंगी।किटी पार्टियों में मशरूफ महिलाएं अब जगह जगह शराब की पार्टियां मनाती नज़र आयेंगी।शादी और ग़म के माहौल में भी यह ख़ूब चलेगी।
इससे पुरुष वर्ग को एक फायदा ये भी होगा कि अब औरत को होने वाली यौन हिंसा और अश्लील हरकतों को नशे में थी, कहकर आसानी से मोक्ष मिल सकेगा।उसकी बात पर कि फलां फलां नेता या अधिकारी था अब भला कौन भरोसा करेगा ? दूसरी बात ये कि राजस्व में अब दुगुनी वृद्धि की ओर बढ़ने की पूरी कोशिश की जाएगी।शराब पीने पिलाने की तहज़ीब का प्रचार भी जोर शोर से होगा।हो सकता है इसके लिए महिलाओं के क्लब भी सरकार बना दे।
लेकिन सबसे बड़ी फायदेमंद बात यह है कि इससे महिलाओं में शराब लेने की जो प्रवृत्ति बढ़ेगी उससे आगामी चुनावों में उन्हें भी पुरुषों की तरह शराब पहुंचा कर वोट पक्का किया जा सकेगा। मध्यप्रदेश में आदिवासियों , दलितों, पिछड़ों की आबादी सर्वाधिक है जिसमें आदिवासी महिलाओं में ये तो चलन में है ही। दलित कामगार महिलाओं में इसका चलन कभी कभार ख़ुशी या थकान मिटाने हेतु किया जाता है।अब उन्हें घर पर इसे बनाने की आजादी भी मिल गई है। ।मध्यम वर्ग तो जो परेशानियों से निरंतर जूझ रहा है उस वर्ग को परेशानियों को भूलने यदि इसकी लत लगा दी जाए तो क्या कहने ?हां,जियो की तरह शिवराज सरकार को पहले इसे मुफ्त बांटने की पहल करने की ज़रूरत है आहिस्ता आहिस्ता लत के पड़ जाने पर जितने चाहे रेट कर दें।यह इतना लाभकारी होगा जो कल्पना से परे होगा।
मुझे लगता है ,अभी जिन चार क्षेत्रों में उपचुनाव होने जा रहे वे आदिवासी ,दलित बहुल हैं। वहां इस घोषणा से निश्चित तौर आदिवासी,दलित हलकों की महिलाओं में एक जोश उत्पन्न होगा और वे उत्साहित होकर मामा की पार्टी को जितायेंगे।
सचमुच भाजपाईयों की सोच का स्वागत करना चाहिए वे पूरे देश को नशे में डुबाने कितनी कितनी कोशिशें कर रहे हैं ताकि देश की समस्यायों के होते हुए भी सब नशे में मस्त रहें ।वरना अब तक 20-21अक्टूवर के दरमियान पकड़ी गई असम से 4करोड़,गोवा से 7.4 लाख, मुम्बई में राजस्थान से आई 21करोड़ तथा पाकिस्तानी डोन से अमृतसर में पहुची एक किलो हेरोइन वालों पर कार्रवाई ज़रूर होती। यहां तक अडानी के मुंद्रा एयरपोर्ट पर अब तक सबसे अधिक 21हज़ार करोड़ मूल्य की हैरोइन के अपराधी जेल में होते।आर्यन खान के मित्र कुछ ग्राम हेरोइन रखते हैं उसे साथियों सहित इस बात पर जेल में रखा जाता है कि उनका उसे लेने का प्लान था।यानि इसे मंगाने वाले बेचने वाले अपराधी नहीं यदि कोई प्लान बनाया है तो जघन्य अपराध की श्रेणी में आयेगा।जिसकी जमानत नहीं। यहां यह भी विचारणीय है कि इतना माल आ रहा है तो उपभोक्ता होंगे हीं।कश्मीर, नागालैंड, मणिपुर,गोवा और हमारे महानगरों में युवा पीढ़ी किस कदर नशे में डूब चुकी है इसकी ख़बरें बराबर मिलती रहती हैं।
कुल मिलाकर यह साफ है कि नशा कोई भी हो उसका व्यापार उचित है।नशे का भरपूर कारोबार चले यकीन है शराब पीने पिलाने वालों की महफिलों पर रोक नहीं लगाई जायेगी।क्योंकि गांजा,भांग और सोमरस का सेवन हमारी संस्कृति में गलत नहीं है।यहीं वजह है कि संसद से लेकर सड़कों तक यह समभाव से दृष्टिगोचर होता है।गांजा और भांग की परम्परा से हमारे देश के दो वज़ीरेआज़मों ने जिस तरह लोगों को जोड़ा है उसका जवाब नहीं।इससे शिवराज जी को पूरे प्रदेश में दूकानें खोलकर महिलाओं को ख़ुश करना चाहिए।तभी समरसता का भाव जन्मेगा।
आइए नशे को जीवन का सम्बल बनाएं।आधी आबादी हेतु मामा जी की पहल का अनुकरण अन्य राज्य करेंगे।इससे देश की पंगु अर्थव्यवस्था मज़बूत होगी। तालिबानियों की कमाई का मूल आधार यही हैं।हमारा तालिबानियों से याराना इसी तरह देश को सुदृढ़ बनायेगा।ख़ुदा ख़ैर करे।हम गांधी के देश को पूरी तरह बदलते जा रहें हैं।
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