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*देश-दुनिया की अहम खबरें:आज मणिपुर पहुंचेंगे PM मोदी; UN में भारत फलस्तीन के साथ; नेपाल में बनी अंतरिम सरकार, 2026 में चुनाव*

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 15 सितंबर तक पांच राज्यों-मिजोरम, मणिपुर, असम, बिहार और बंगाल के दौरे पर रहेंगे। इसकी शुरुआत शनिवार को मिजोरम से होगी, जहां से वह मणिपुर जाएंगे। मणिपुर में 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद से पीएम मोदी का यह पहला दौरा है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष को 23 महीने से अधिक हो चुके हैं। फलस्तीन भी इस्राइल की आक्रामकता का प्रमुख कारण रहा है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह फलस्तीन को अलग देश के तौर पर मान्यता नहीं देंगे। हालांकि, इस उथल-पुथल के बीच भारत ने ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ का समर्थन किया है। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले हफ्ते इस्राइल का दौरा करेंगे। यह दौरा उस समय हो रहा है, जब संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीनी देश के गठन पर बहस होने वाली है, जिसे बेहद विवादास्पद माना जा रहा है। इसके अलावा, नेपाल में युवा पीढ़ी के हिंसक प्रदर्शनों के बाद उपजे राजनीतिक संकट के बीच शुक्रवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार की कमान सौंप दी गई। शुक्रवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति भवन में उन्हें शपथ दिलाई। इससे पहले नेपाल की संसद को भंग कर दिया गया था।  देश-दुनिया की अहम खबरें

पीएम मोदी का आज से पूर्वोत्तर दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 15 सितंबर तक पांच राज्यों-मिजोरम, मणिपुर, असम, बिहार और बंगाल के दौरे पर रहेंगे। इसकी शुरुआत शनिवार को मिजोरम से होगी, जहां से वह मणिपुर जाएंगे। मणिपुर में 2023 में भड़की जातीय हिंसा के बाद से पीएम मोदी का यह पहला दौरा है। मणिपुर में कई दिनों से पीएम के दौरे की तैयारियां जोर-शोर से जारी हैं। हालांकि, दौरे की पहली आधिकारिक जानकारी शुक्रवार को ही दी गई।

प्रधानमंत्री के इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। वह इस दौरान मणिपुर को 8,500 करोड़ की योजनाओं की सौगात भी देंगे। इसमें चुराचांदपुर में 7,300 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाएं और इंफाल में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं शामिल हैं। वह दोनों जगह जनसभाओं को संबोधित करेंगे। इंफाल में 237 एकड़ में फैले कांगला किले और चुराचांदपुर के पीस ग्राउंड के नजदीक राज्य व केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है।  

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सीआरपीएफ ने पहाड़ी और घाटी दोनों जिलों में अस्थायी चौकियां बनाई हैं। इससे पहले, पीएम मोदी शनिवार सुबह 10 बजे मिजोरम पहुंचेंगे और 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास-उद्घाटन करेंगे।

चुराचांदपुर और इंफाल में जानेंगे विस्थापितों का दर्द
मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने बताया कि पीएम मोदी शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे कुकी-जो बहुल चुराचांदपुर पहुंचेंगे। सबसे पहले वह हिंसा के कारण विस्थापित लोगों से बातचीत करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद, करीब ढाई बजे इंफाल पहुंचेंगे व विस्थापितों से बातचीत कर उनकी पीड़ा जानेंगे। 

  • मणिपुर में मैतेई बहुल घाटी और कुकी-जो बहुल पहाड़ी क्षेत्रों के 280 से ज्यादा राहत शिविरों में करीब 57,000 लोग रह रहे हैं, जो दो वर्षों से ज्यादा से विस्थापित जीवन जीने को विवश हैं। 

पहली बार रेलवे नेटवर्क से जुड़ेगा आइजॉल

केंद्र सरकार मणिपुर के समावेशी व समग्र विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मिजोरम के आइजॉल की यात्रा खास है क्योंकि बैराबी-सैरांग नई रेल लाइन के साथ यह अद्भुत शहर पहली बार रेलवे नेटवर्क से जुड़ने जा रहा है। यह लाइन चुनौतीपूर्ण भूभाग पर बनी है।
-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

फलस्तीन पर भारत ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ के साथ डटा
पश्चिम एशिया में इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष को 23 महीने से अधिक हो चुके हैं। फलस्तीन भी इस्राइल की आक्रामकता का प्रमुख कारण रहा है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह फलस्तीन को अलग देश के तौर पर मान्यता नहीं देंगे। हालांकि, इस उथल-पुथल के बीच भारत ने ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ का समर्थन किया है। यूएन महासभा में लाए गए एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हुए भारत ने कहा, वह दो अलग-अलग देशों को मान्यता देकर इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान करने के पक्ष में है। बता दें कि यह विवाद कई दशकों से खिंचा चला आ रहा है। लंबे समय से भारत अपने रूख पर दृढ़ है और स्पष्ट किया है कि वह टू-स्टेट सॉल्यूशन (दो राष्ट्र समाधान) का मजबूती से समर्थन करता है।

पश्चिम एशिया में इस्राइल और हमास के हिंसक संघर्ष को 23 महीने से अधिक हो चुके हैं। फलस्तीन भी इस्राइल की आक्रामकता का प्रमुख कारण रहा है। इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह फलस्तीन को अलग देश के तौर पर मान्यता नहीं देंगे। हालांकि, इस उथल-पुथल के बीच भारत ने ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ का समर्थन किया है। यूएन महासभा में लाए गए एक प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हुए भारत ने कहा, वह दो अलग-अलग देशों को मान्यता देकर इस विवाद का शांतिपूर्ण समाधान करने के पक्ष में है। बता दें कि यह विवाद कई दशकों से खिंचा चला आ रहा है। लंबे समय से भारत अपने रूख पर दृढ़ है और स्पष्ट किया है कि वह टू-स्टेट सॉल्यूशन (दो राष्ट्र समाधान) का मजबूती से समर्थन करता है।

अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध किया
दरअसल, भारत ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में उस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जो फलस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान और दो-राष्ट्र समाधान के क्रियान्वयन के लिए ‘न्यूयॉर्क घोषणा’ को मंजूरी दी गई है। फ्रांस की ओर से पेश इस प्रस्ताव को कुल 142 देशों ने समर्थन दिया, 10 ने विरोध किया और 12 ने मत नहीं दिया। विरोध करने वाले देशों में अर्जेंटीना, हंगरी, इस्त्राइल और अमेरिका शामिल हैं।

इस घोषणा में दुनिया के नेताओं ने गाजा में युद्ध को तुरंत समाप्त करने, इस्त्राइल-फलस्तीन संघर्ष का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान व क्षेत्र के सभी लोगों के लिए बेहतर भविष्य बनाने पर सहमति जताई। बता दें कि यूएन में मतदान से पहले इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इस क्षेत्र में फलस्तीन नाम के किसी भी देश को मान्यता देने से इनकार कर दिया है

गाजा और पश्चिमी तट का एकीकरण जरूरी
घोषणा में गाजा को फलस्तीनी राष्ट्र का अभिन्न हिस्सा बताया गया है और इसे पश्चिमी तट के साथ एकीकृत करने का आग्रह किया गया। इसमें कहा गया कि कब्जा.. नाकाबंदी, भू-क्षेत्र में कटौती या जबरन विस्थापन नहीं होना चाहिए। घोषणा में चेतावनी दी गई कि यदि दो-राष्ट्र समाधान की दिशा में निर्णायक कदम और मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी नहीं ली गई, तो संघर्ष और गहरा होगा और क्षेत्रीय शांति बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।

क्या है इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का रूख
इस्राइली प्रधानमंत्री ने UNGA में हुई इस अहम वोटिंग से पहले चौंकाते हुए कहा कि कोई फलस्तीनी देश नहीं होगा और ये हमारी जमीन है। इस्राइली पीएम का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब कई पश्चिमी देश फलस्तीन को मान्यता देने की का एलान कर चुके हैं। गुरुवार को वेस्ट बैंक में एक प्रमुख यहूदी बस्ती परियोजना के लिए एक हस्ताक्षर समारोह में बोलते हुए इस्राइली प्रधानमंत्री ने ये बात कही। यह समारोह यरुशलम के पूर्व में स्थित यहूदी बस्ती माले अदुमिम में आयोजित किया गया और इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया।

नेपाल की अंतरिम सरकार की प्रमुख बनीं सुशीला कार्की
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं। उन्हें राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में शपथ दिलाई। सुशीला कार्की के शपथ ग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति रामसहाय यादव, काठमांडू के मेयर बालेन शाह, मुख्य न्यायाधीश प्रकाश सिंह रावत उपस्थित रहे। माना जा रहा है कि सुशीला कार्की के शपथ ग्रहण के बाद नेपाल में अंतरिम कैबिनेट आज रात ही पहली बैठक कर सकती हैं।  राष्ट्रपति ने यह नियुक्ति संविधान की धारा 61 का हवाला देते हुए की। धारा 61 (4) के अनुसार राष्ट्रपति का मुख्य कर्तव्य संविधान का पालन और संरक्षण करना तथा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना है।

इससे पहले शुक्रवार को राष्ट्रपति के कार्यालय शीतल निवास में दोपहर दो बजे से शाम साढे सात बजे तक चली उच्च स्तरीय बैठक में संसद को भंग करने और कार्की को शपथ दिलाने पर सहमति बनी। जेन-जी के प्रतिनिधियों ने दो दिन से चल रही वार्ता में स्पष्ट किया था कि संसद भंग किए बिना वे नई सरकार का गठन स्वीकार नहीं करेंगे। शुक्रवार को दिन भर हुए विचार-विमर्श के बाद पौडेल ने शाम को सुशीला कार्की को निर्णायक वार्ता के लिए शीतल निवास बुलाया। इस बैठक में अधिवक्ता ओमप्रकाश अर्याल, रमण कर्ण और जेन-जी समूह की ओर से सुदन गुरुंग उपस्थित थे।

नए प्रधानमंत्री के लिए ऑफिस तय
अंतरिम सरकार के नए प्रधानमंत्री का कार्यालय सिंह दरबार में निर्माणाधीन गृह मंत्रालय के भवन में बनाया जाएगा। नेपाल के मुख्य सचिव एकनारायण अर्याल के नेतृत्व में सचिवों की टोली ने विभिन्न भवनों का दौरा कर इस भवन का चयन किया। एक सचिव ने बताया, कई विकल्पों पर विचार किया गया लेकिन अधिकांश भवन आंदोलन के दौरान क्षतिग्रस्त कर दिए जाने के कारण गृह मंत्रालय के निर्माणाधीन भवन को ही प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए सही पाया गया।

कौन हैं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की का जन्म सात जून 1952 को विराटनगर में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके अलावा उन्होंने कानून की पढ़ाई नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सटी से की। इसके बाद वकालत और कानूनी सुधारों के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई की, जिनमें चुनावी विवाद भी शामिल थे।

हिंसक प्रदर्शन में 51 लोगों की मौत
नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया मंचों पर प्रतिबंध के खिलाफ हाल में हुए ‘जेन जेड’ प्रदर्शन में एक भारतीय नागरिक सहित कम से कम 51 लोगों की मौत हुई है। काठमांडू पोस्ट अखबार ने नेपाल पुलिस के सह-प्रवक्ता वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रमेश थापा के हवाले से कहा कि मृतकों में एक भारतीय नागरिक, तीन पुलिसकर्मी और अन्य नेपाली नागरिक शामिल हैं।

खबर में कहा गया कि कम से कम 36 शव महाराजगंज स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में हैं, जहां शुक्रवार को पोस्टमॉर्टम शुरू हुआ। पुलिस ने बताया कि बृहस्पतिवार और शुक्रवार को देश के विभिन्न हिस्सों से 17 शव बरामद किए गए।

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सबसे बड़ी रक्षा डील की तैयारी में भारत सरकार
रक्षा मंत्रालय को भारतीय वायुसेना से 114 ‘मेक इन इंडिया’ राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का प्रस्ताव मिला है। इस सौदे की कीमत दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। खास बात यह है कि ये विमान फ्रांस की डसॉ एविएशन कंपनी बनाएगी, लेकिन इसमें भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों की भी अहम भूमिका होगी। मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू कर दी है। 

रक्षा मंत्रालय को भारतीय वायुसेना से 114 ‘मेक इन इंडिया’ राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का प्रस्ताव मिला है। इस सौदे की कीमत दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है। खास बात यह है कि ये विमान फ्रांस की डसॉ एविएशन कंपनी बनाएगी, लेकिन इसमें भारतीय एयरोस्पेस कंपनियों की भी अहम भूमिका होगी। मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू कर दी है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना द्वारा तैयार किया गया “स्टेटमेंट ऑफ केस” (एसओसी) मंत्रालय को कुछ दिन पहले मिला है। अब इस पर रक्षा मंत्रालय की विभिन्न शाखाएं, जिसमें रक्षा वित्त भी शामिल है, विचार कर रही हैं। अगले चरण में यह प्रस्ताव रक्षा खरीद बोर्ड डीपीबी) और फिर रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के पास जाएगा।

सबसे बड़ा रक्षा सौदा
इस प्रस्ताव को अगर मंजूरी मिल जाती है तो यह भारत सरकार का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा होगा। इससे भारतीय रक्षा बलों के पास कुल 176 राफेल विमान हो जाएंगे। फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल हैं और नौसेना ने 26 विमानों का ऑर्डर दिया हुआ है।

पाकिस्तान और चीन पर राफेल का दबदबा
राफेल की क्षमता हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ हुए ऑपरेशन सिंदूर में भी साबित हुई। इसमें राफेल ने चीन के आधुनिक PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइलों को अपनी स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रणाली से मात दी। इसके अलावा, नए विमानों में स्कैल्प से ज्यादा रेंज वाली एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें लगाई जाएंगी, जो पाकिस्तान के अंदर आतंकवादी ठिकानों और सैन्य ठिकानों पर हमलों के दौरान कारगर साबित होंगी।

स्वदेशीकरण और एमआरओ सुविधा
‘मेक इन इंडिया’ राफेल विमानों में 60% से अधिक स्वदेशीकरण शामिल होगा। फ्रांस की डसॉ कंपनी हैदराबाद में राफेल इंजनों (M-88) के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल (एमआरओ) सुविधा स्थापित करने की योजना बना रही है। भारतीय कंपनियां जैसे टाटा भी इस उत्पादन प्रक्रिया में भाग लेंगी।

भारतीय वायुसेना की रणनीतिक मजबूती
भारत के सामने चीन और पाकिस्तान से लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए यह सौदा अहम माना जा रहा है। वायुसेना की भविष्य की लड़ाकू विमान संरचना मुख्य रूप से सुखोई-30 एमकेआई, राफेल और स्वदेशी प्रोजेक्ट्स पर आधारित होगी। भारत पहले ही 180 एलसीए मार्क-1ए लड़ाकू विमान ऑर्डर कर चुका है और 2035 के बाद बड़ी संख्या में पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी विमानों को भी शामिल करने की योजना बना रहा है।

रक्षा उद्योग के लिए बड़ा मौका
अगर यह सौदा सिरे चढ़ता है तो यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए ऐतिहासिक अवसर साबित होगा। इससे न सिर्फ तकनीक का हस्तांतरण होगा, बल्कि भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती भी मिलेगी। साथ ही, भारत में एयरोस्पेस सेक्टर में रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

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मौसम विभाग का अनुमान- उत्तर पश्चिम भारत से मानसून की विदाई 15 सितंबर से
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून की 15 सितंबर के आसपास से उत्तर-पश्चिम भारत से वापसी शुरू हो जाएगी। आईएमडी ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से 15 सितंबर के आसपास दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होती जा रही हैं। 

दक्षिण पश्चिम मानसून आमतौर पर 1 जून को केरल में दस्तक देता है और 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जाता है। 17 सितंबर के आसापस उत्तर-पश्चिम भारत से उसकी वापसी शुरू हो जाती है और 15 अक्तूबर तक पूरे देश से वापसी हो जाती है। इस वर्ष मानसून ने सामान्य तिथि 8 जुलाई से नौ दिन पहले ही पूरे देश को कवर कर लिया। 2020 के बाद से यह सबसे जल्दी मानसून था जिसने पूरे देश को कवर किया, जब मानसून ने 26 जून तक ऐसा किया था। मानसून 24 मई को केरल पहुंचा था, 2009 के बाद से पहली बार इतनी जल्दी मानसून पहुंचा था। देश में अब तक 836.2 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य बारिश 778.6 मिमी से सात फीसदी अधिक है।

मई में आईएमडी ने पूर्वानुमान लगाया था कि भारत में जून-सितंबर मानसून सीजन के दौरान 87 सेमी की दीर्घकालिक औसत वर्षा का 106 प्रतिशत प्राप्त होने की संभावना है। इस 50-वर्षीय औसत के 96 से 104 प्रतिशत के बीच वर्षा को सामान्य माना जाता है। मानसून देश के कृषि क्षेत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो लगभग 42 फीसदी आबादी की आजीविका का आधार है। कृषि क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में 18.2 फीसदी का योगदान देता है। यह पेयजल और बिजली उत्पादन के लिए आवश्यक जलाशयों को भरने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सिक्किम में भूस्खलन में एक परिवार के 4 सदस्यों की मौत
पश्चिम से लेकर पूर्वी हिमालयी राज्यों में बारिश का कहर जारी है। सिक्किम में लगातार बारिश के कारण हुए भूस्खलन में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया। वहीं, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।  सिक्किम पुलिस ने शुक्रवार बताया कि ग्यालशिंग जिले रिम्बी क्षेत्र में भूस्खलन से एक घर ध्वस्त हो गया। उस समय सभी लोग सो रहे थे। सिक्किम पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवान और स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला, लेिकन तीन की मौके पर मौत हो गई जबकि एक महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। सात साल का एक बच्चा जीवित मिला।

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कर्नाटक के हासन में आठ लोगों की मौत, 20 से अधिक घायल
कर्नाटक के हासन जिले में शुक्रवार रात गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान एक भीषण हादसा हो गया। एक ट्रक श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया। जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शोक प्रकट किया। उन्होंने घायलों के इलाज और मृतकों के परिजनों को आर्थिक मदद देने का एलान किया। सीएम ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा कि अधिकारियों को पीड़ितों को हरसंभव मदद मुहैया कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सीएम सिद्धारमैया और हासन के स्थानीय प्रशासन का बयान
मुख्यमंत्री ने एक्स हैंडल पर लिखा, हासन में गणेश विसर्जन के लिए जा रहे जुलूस से एक लॉरी की टक्कर में कई लोगों की मौत और 20 से ज़्यादा लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। मैं प्रार्थना करता हूं कि मृतकों की आत्मा को शांति मिले और घायल जल्द से जल्द स्वस्थ हों।

मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये का मुआवज़ा
सिद्धारमैया ने आगे लिखा, राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया जाएगा। सरकार इस घटना में घायल हुए लोगों के इलाज का खर्च भी वहन करेगी। उन्होंने संवेदना प्रकट करते हुए पीड़ितों का साथ देने की अपील करते हुए लिखा, ‘यह बेहद दुखद क्षण है। आइए हम सब इस त्रासदी से प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हों।’

22 घायलों में एक की हालत नाजुक, सात घायलों का इलाज निजी अस्पताल में
सीएम के अलावा इस हादसे पर हासन प्रशासन की शीर्ष महिला पदाधिकारी (डिप्टी कमिश्नर) केएस लता कुमारी ने कहा, दुर्घटना में आठ लोगों की मौत हुई है 22 लोग घायल हुए हैं। घायलों का इलाज केआईएमएस अस्पताल में कराया जा रहा है। एक शख्स की हालत गंभीर है। सात लोगों का इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। उनकी हालत सामान्य बताई जा रही है। स्थानीय पुलिस ने अभी तक घटना का पूरा ब्यौरा और हादसे के कारणों पर रिपोर्ट नहीं दी है।

हादसे के समय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थे
डिप्टी कमिश्नर के मुताबिक प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ रहा था और उसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल थे। अचानक एक ट्रक डिवाइडर से टकरा गया। ऐसी खबरें हैं कि उस समय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थे। उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी के लिए थोड़ा और इंतजार करने की अपील की।

कब और कहां हुआ हादसा?
यह घटना हासन जिले के होसहल्ली गांव में रात करीब 8:45 बजे गणेश चतुर्थी के अंतिम दिन हुई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृतकों में ज्यादातर युवा लड़के शामिल हैं। सभी घायलों को हासन के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अरकलागुडु से आ रहे ट्रक के चालक ने नियंत्रण खोकर श्रद्धालुओं को कुचल दिया। ग्रामीणों का कहना है कि लॉरी के पहिये के नीचे दबकर चार लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई।

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: अफ्रीकी देश कांगो में दो नाव दुर्घटनाएं, 193 यात्रियों की मौत
अफ्रीकी देश कांगो के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में इस सप्ताह दो अलग-अलग नाव दुर्घटनाओं हुईं, जिनमें कम से कम 193 लोगों की मौत हो गई और कई लोग लापता हैं। अधिकारियों और सरकारी मीडिया ने शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि ये दुर्घटनाएं बुधवार और बृहस्पतिवार को इक्वेटर प्रांत में करीब 150 किलोमीटर के अंतराल पर हुईं। 

कांगों के मानवीय मामलों के मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में कहा कि बृहस्पतिवार शाम को लगभग 500 यात्रियों से भरी एक नाव में आग लग गई और वह कांगो नदी में पलट गई। यह हादसा लुकोलेला इलाके के मालंगे गांव के पास हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हेलबोट से जुड़ी इस दुर्घटना के बाद 209 लोगों को बचा लिया गया। 

बसनकुसु क्षेत्र में नाव पलटने से गई 86 लोगों की जान
बुधवार को, इसी प्रांत के बसनकुसु क्षेत्र में एक मोटर चालित नाव पलट गई थी। इसमें कम से कम 86 लोगों की मौत हो गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। सरकारी मीडिया के अनुसार, कई लोग अब भी लापता हैं, लेकिन उनकी सटीक संख्या नहीं बताई गई है। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि दुर्घटना का कारण क्या था, या शुक्रवार शाम तक बचाव कार्य जारी था या नहीं।

स्थानीय सामाजिक संगठनों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया
सरकारी मीडिया ने घटनास्थल से मिली रिपोर्टों का हवाला देते हुए बुधवार की दुर्घटना का कारण ‘अनुचित लोडिंग और रात में नाव चलाना’ बताया। सोशल मीडिया आई तस्वीरों में ग्रामीणों को शवों के पास रोते हुए देखा गया। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है और दावा किया है कि मृतकों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा है। हालांकि, इस पर अधिकारियों की कोई टिप्पणी नहीं मिली।

Ramswaroop Mantri

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