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2021 में गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर हुये हैं

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सबका साथ और सबका विकास’ का आलाप ‘गरीबों का वोट और अमीरों को नोट’ में बदला

इसी तथ्य पर पर्दा डालने को भाजपा कर रही है तमाम तिकड़में

डा. गिरीश

हां ये विकास ही है जिसकी रट मोदी शाह योगी और समूचा संघ परिवार दिन रात लगाये रहता है। विकास के इस विकास के तहत पूंजीपति वर्ग और कार्पोरेट घराने मालामाल हुये हैं और गरीब और अधिक गरीबी की ओर धकेले जा चुके हैं।

देश की गरीबी में महिलाएं कितनी बुरी तरह पिस रही हैं, इस डराने वाली रिपोर्ट  में सामने आया - India's Richest 1 percent holds wealth over four times to  that of 95


जिस कोरोना को अर्थव्यवस्था की बरवादी का कारण बताया जाता रहा है उस काल में भी पूंजीवाद ने आपदा में अवसर तलाश लिये। गत एक वर्ष में बाजार नयी ऊंचाइयों को छूते हुए 52 फीसदी तक बढ़ा।
देश में अरबपतियों की संख्या बढ़ कर 126 पहुंच गई। एक अरब डालर ( करीब 75,000 करोड़ रुपये ) की हैसियत वाले प्रवर्तकों और कारोबारियों की संख्या वर्ष 2020 में 85 थी, जो 2021में रिकार्ड तोड़ कर 126 पर पहुंच गई है। इनकी कुल संपत्ति 728 अरब डालर ( करीब 54.6 लाख करोड़ रुपये ) है, जो दिसंबर 2020 में 494 अरब डालर ( करीब 37 लाख करोड़ रुपये) थी। इन अरबपतियों की सूची में इत्र कारोबारी पीयूष जैन जैसे अरबपति शामिल नहीं हैं, जिनकी काली संपत्ति इस गणना की परिधि से बाहर है।
उधर इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आरहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इसी अवधि के दरम्यान देश में आर्थिक असमानता भी बढ़ गई है। यानी गरीब और गरीब होगये हैं। वहीं, अमीरों की संपत्ति में बढ़ोत्तरी दर्ज हुयी है।
वैश्विक असमानता रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गरीब और अमीर में असमानता का स्तर पांच गुना तक बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में शीर्ष10 फीसदी आबादी के पास कुल राष्ट्रीय आय का 57 फीसदी हिस्सा है। इन 10 फीसदी में से 1 प्रतिशत के पास 22 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं निचली 50 फीसदी (आधी) आबादी के पास केवल 13 प्रतिशत हिस्सा है।
जी हां! अमीरों के और अमीर होने और गरीबों के और भी गरीब होने के ये आंकड़े 2021 के हैं, जिसके लिए भाजपा के झुठैत न नेहरू को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं न इंदिरा गांधी को। ‘सबका साथ, सबका विकास’ का भाजपा का आलाप ‘गरीबों का वोट और अमीरों को नोट’ में बदल चुका है।
इसी पर पर्दा डालने को खैरातें बांटी जारही हैं, धर्म की आड़ ली जारही है तथा सांप्रदायिक विभाजन और जातीय समीकरण बैठाने की तमाम तिकड़में की जारही हैं।
डा. गिरीश

Ramswaroop Mantri

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