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लखीमपुर हिंसा के आरोपी आशीष की बैरक में 4 कूलर, घर से आता है खाना; 40 स्पेशल पान भी

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लखीमपुर-खीरी

लखीमपुर खीरी हिंसा (किसानों पर कार चढ़ाने का मामला) का मुख्य आरोपी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा आशीष मिश्रा 24 अप्रैल से जेल में है। खास बात यह है कि आशीष को लखीमपुर जेल में वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है। खाने-पीने से लेकर उसके रहने का भी खास इंतजाम किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि बैरक में उसके लिए चार कूलर लगवाए गए हैं और स्पेशल पान भी बाहर से मंगाया जा रहा है। पान भी एक या दो नहीं, पूरे 30 से 40।

बैरक नंबर 20 में नए गद्दे और चादर का इंतजाम
जेल प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक आशीष को सुरक्षा के मद्देनजर बैरक नंबर 20 में रखा गया है। उसे किसी प्रकार की कोई दिक्कत न हो, इसलिए बैरक में 24 अप्रैल से पहले ही नए गद्दे और चादर की व्यवस्था की गई थी। आशीष मिश्रा को अन्य बंदियों से अलग रखा गया है। जेल के अंदर ही उसे हर संभव मदद दी जा रही है।

जेल में रोजाना आशीष मिश्रा के लिए घर से ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर आता है। यही नहीं स्पेशल पान की भी व्यवस्था की गई है।

जेल में रोजाना आशीष मिश्रा के लिए घर से ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर आता है। यही नहीं स्पेशल पान की भी व्यवस्था की गई है।

गर्मी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा मंत्री पुत्र
इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। तापमान 40 डिग्री से ज्यादा है। ऐसे में जेल में मंत्री पुत्र को भी गर्मी सता रही है। आशीष को गर्मी न लगे इसलिए बैरक में 4 कूलर की व्यवस्था की गई है। ताकि उसे भीषण गर्मी से निजात मिल सके। फिर भी भीषण गर्मी मंत्री पुत्र को परेशान कर रही है। लिहाजा दिक्कतों को दूर करने के लिए जेल प्रशासन अन्य इंतजाम करने में जुटा है।

24 अप्रैल से जेल का खाना नहीं खाया
जेल प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक बीते 24 अप्रैल से आशीष मिश्रा ने जेल का खाना नहीं खाया है। जेल के अंदर ही उसे वीआईपी ट्रीटमेंट मिल रहा है। रोजाना सुबह 7 से 8 बजे के बीच उसके नाश्ते के लिए घर से चाय, मक्खन और ब्रेड आता है।

हर रोज घर से आता है लंच और डिनर
मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा इन दिनों जेल में जरूर है, लेकिन उसके खाने-पीने का खास इंतजाम रखा गया है। दोपहर करीब 10 बजे आशीष मिश्रा के घर से जेल में लंच भी पहुंचाया जाता है। आरोपी दोपहर 12 से 1 बजे के बीच लंच करता है।

बताया जा रहा है कि 24 अप्रैल से अब तक आशीष मिश्रा ने वेज खाना ही घर से मंगाया है। उसकी पसंद का ही खाना घर से पहुंचाया जाता है। वहीं, शाम को करीब छह बजे घर से डिनर भी जेल में पहुंचाया जाता है। देर शाम करीब 7:30 से 8 बजे के बीच आशीष डिनर करता है।

18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर दी थी। आशीष को सरेंडर करने के लिए कोर्ट ने एक हफ्ते का समय दिया था।

18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत रद्द कर दी थी। आशीष को सरेंडर करने के लिए कोर्ट ने एक हफ्ते का समय दिया था।

खास पान भी बाहर से मंगाया जाता है
जेल में भी मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा की सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। रोजाना उसके लिए पान की व्यवस्था भी की जाती है। जेल सूत्रों के मुताबिक रोजाना करीब 30 से 40 पान मंत्री पुत्र को पहुंचाए जाते हैं। जिन्हें दिनभर में विशेष तौर पर लंच और डिनर करने के बाद वह खाता है।

24 अप्रैल को किया था सरेंडर
आशीष मिश्रा ने सीजेएम कोर्ट में 24 अप्रैल को सरेंडर किया था। बता दें कि आशीष को इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। लखीमपुर हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा ने लखीमपुर की लोअर कोर्ट में रविवार को यानी छुट्टी के दिन सरेंडर किया था। इस पर काफी चर्चाएं हुई थीं। इसके पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आशीष मिश्रा को जमानत दी थी, जिसके विरोध में कई याचिकाएं शीर्ष कोर्ट में लगाई गई थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट से मिली जमानत पर तीखी टिप्पणी की थी। इसके साथ ही आशीष की बेल को रद्द कर दिया था। जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सात दिन के भीतर आरोपी को सरेंडर करने का आदेश दिया। बीते 18 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा उर्फ सोनू की जमानत रद्द कर दी थी।

3 अक्टूबर को लखीमपुर के तिकुनिया में हिंसा हुई थी। - फाइल फोटो

3 अक्टूबर को लखीमपुर के तिकुनिया में हिंसा हुई थी। – फाइल फोटो

हाईकोर्ट से ऐसे मिली थी जमानत
इस हाई प्रोफाइल केस में हाईकोर्ट ने जमानत का फैसला कैसे सुना दिया, यह किसी के गले नहीं उतर रहा था। वकील की दलील के बाद हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया था वह यह था, ‘अभियोजन की दलीलें मान भी लें तो स्पष्ट है कि घटनास्थल पर हजारों प्रदर्शनकारी थे। ऐसे में संभव है कि ड्राइवर ने बचने के लिए गाड़ी भगाई और यह घटना हो गई।

याची ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों में कई लोग तलवारें व लाठियां लिए हुए थे। बहस के दौरान कहा गया कि एसआईटी ऐसा कोई साक्ष्य नहीं पेश कर सकी जिससे साबित हो कि गाड़ी चढ़ाने के लिए उकसाया गया।

क्या है तिकुनिया हिंसा?
बीते साल 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया कस्बे में हुई हिंसा में चार किसानों और एक पत्रकार सहित आठ लोगों की जान गई थी। जांच टीम ने सीजेएम अदालत में मामले की जांच पूरी करते हुए 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी है। उस पर आरोप है कि जिस थार गाड़ी से किसानों की कुचलकर मौत हुई, उस पर वही सवार था।

किसान पक्ष के वकील बोले, SC की फटकार के बाद अब मजूबती से सुना जाएगा पीड़ित पक्ष; नए जज करेंगे सुनवाई

आशीष मिश्र की जमानत याचिका पर सुनवाई टलने के बाद किसान पक्ष के वकील ने पीड़ितों का पक्ष मजबूत बताया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीमकोर्ट की फटकार के बाद अब जरूरी तथ्यों को सुना जाएगा। जमानत याचिका पर अब नए जज सुनवाई करेंगे।

गाड़ी से कुचलकर किसानों की मौत के मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्र के बेटे आशीष मिश्र को मुख्य आरोपी बनाया गया है। बीते रविवार 24 अप्रैल को आशीष मिश्र ने सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर लखीमपुर खीरी की अदालत में सरेंडर किया था, यहां से जेल भेज दिया गया। इसके बाद 26 अप्रैल को आरोप तय होने के लिए सुनवाई होनी थी, जिसमें वकील ने डिस्चार्ज अप्लीकेशन के लिए और तैयारी करने का समय मांगा था। अब 10 मई को आरोप तय होंगे।

क्यों नहीं हो सकी सुनवाई
किसान पक्ष के वकील ने बताया कि रोस्टर के हिसाब से इस बार फिर सुनवाई की फाइल पुराने जज राजीव सिंह के पास ही पहुंच गई। उन्होंने फाइल मुख्य न्यायाधीश के पास बढ़ा दी है। अब आगे की कार्यवाही उनके या उनके द्वारा नियुक्त नए जज की ओर से की जाएगी।

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया मोड़ पर किसान प्रदर्शन के लिए जमा हुए थे, यहां गाड़ी के नीचे आने से 4 की मौत हो गई थी, जिसके बाद हिंसा भड़क गई थी।

लखीमपुर खीरी के तिकुनिया मोड़ पर किसान प्रदर्शन के लिए जमा हुए थे, यहां गाड़ी के नीचे आने से 4 की मौत हो गई थी, जिसके बाद हिंसा भड़क गई थी।

तिकोनिया में 3 अक्टूबर को हुई थी घटना
लखीमपुर खीरी के तिकोनिया मोड़ के पास प्रदर्शन के लिए जमा किसानों की भीड़ पर थार गाड़ी चढ़ गई थी। गाड़ी से कुलचने और हिंसा में 8 लोगों की मौत हुई। इसमें 4 किसान, भाजपा के 3 कार्यकर्ता और एक पत्रकार शामिल थे। किसानों की कुचलकर मौत के मामले में केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय कुमार मिश्र के बेटे आशीष मिश्र को मुख्य आरोपी बनाया गया है। एफआईआर तिकोनिया थाने में दर्ज कराई गई थी। पहले 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया, फिर आशीष मिश्र उर्फ मोनू की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद 8 और लोगों को गिरफ्तार किया गया।

24 अप्रैल को आशीष मिश्र ने लखीमपुर खीरी की अदालत में सरेंडर किया था, जिसके बाद उसे भेज जेल दिया गया। अब हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जमानत अर्जी लगाई है।

24 अप्रैल को आशीष मिश्र ने लखीमपुर खीरी की अदालत में सरेंडर किया था, जिसके बाद उसे भेज जेल दिया गया। अब हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जमानत अर्जी लगाई है।

आशीष मिश्र को 10 फरवरी को मिली थी जमानत
आशीष मिश्र को यूपी चुनाव के बीच में हाईकोर्ट ने 10 फरवरी को जमानत दी थी। जमानत को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अप्रैल को दिए आदेश में कहा था कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्ष का ध्यान नहीं रखा। उनकी सुनी नहीं गई।

Ramswaroop Mantri

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