भोपाल:मध्यप्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को ट्रांसफर नीति 2025 को लेकर अहम चर्चा हुई, जहां कई मंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपने स्थानांतरण संबंधी अधिकारों में विस्तार की मांग की। प्रदेश में 1 मई से 30 मई के बीच ट्रांसफर होंगे।
कैबिनेट बैठक के दौरान मंगलवार को ट्रांसफर नीति 2025 पर चर्चा के समय मंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपने तबादला अधिकारों में विस्तार की मांग की। उनका कहना था कि बीते दो वर्षों से ट्रांसफर प्रक्रिया ठप रही है, जिससे उनके क्षेत्रों में राजनीतिक और जनप्रतिनिधि स्तर पर भारी दबाव बन गया है। जैसे ही बैठक में ट्रांसफर नीति का प्रजेंटेशन शुरू हुआ, उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने सुझाव दिया कि स्थानांतरण की प्रतिशत सीमा यानी स्लैब बढ़ाई जाए, जिससे उन्हें अधिक अधिकार मिल सकें। इसके बाद अन्य मंत्रियों ने भी इस सुझाव का समर्थन किया। मंत्रियों का कहना था कि रोजाना उन्हें ट्रांसफर संबंधी 10 से ज्यादा आवेदन आते हैं और हर मामले में अनुशंसा करनी पड़ती है। सीएम समन्वय पोर्टल पर भी सैकड़ों आवेदन और उनकी अनुशंसाएं लंबित हैं। पार्टी कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि भी लगातार ट्रांसफर को लेकर दबाव बनाते हैं, जिससे असमंजस की स्थिति बनती है। मंत्रियों की यह भी मांग थी कि स्वैच्छिक तबादलों को निर्धारित प्रतिशत सीमा (स्लैब) से बाहर रखा जाए, ताकि अधिक संख्या में स्थानांतरण हो सकें।
कैबिनेट बैठक के दौरान मंगलवार को ट्रांसफर नीति 2025 पर चर्चा के समय मंत्रियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अपने तबादला अधिकारों में विस्तार की मांग की। उनका कहना था कि बीते दो वर्षों से ट्रांसफर प्रक्रिया ठप रही है, जिससे उनके क्षेत्रों में राजनीतिक और जनप्रतिनिधि स्तर पर भारी दबाव बन गया है। जैसे ही बैठक में ट्रांसफर नीति का प्रजेंटेशन शुरू हुआ, उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने सुझाव दिया कि स्थानांतरण की प्रतिशत सीमा यानी स्लैब बढ़ाई जाए, जिससे उन्हें अधिक अधिकार मिल सकें। इसके बाद अन्य मंत्रियों ने भी इस सुझाव का समर्थन किया। मंत्रियों का कहना था कि रोजाना उन्हें ट्रांसफर संबंधी 10 से ज्यादा आवेदन आते हैं और हर मामले में अनुशंसा करनी पड़ती है। सीएम समन्वय पोर्टल पर भी सैकड़ों आवेदन और उनकी अनुशंसाएं लंबित हैं। पार्टी कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि भी लगातार ट्रांसफर को लेकर दबाव बनाते हैं, जिससे असमंजस की स्थिति बनती है। मंत्रियों की यह भी मांग थी कि स्वैच्छिक तबादलों को निर्धारित प्रतिशत सीमा (स्लैब) से बाहर रखा जाए, ताकि अधिक संख्या में स्थानांतरण हो सकें।
नई नीति नहीं की गई सार्वजनिक
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंत्रियों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और इस पर विचार करने की सहमति दी। इसी कारण नीति को मंजूरी मिलने के बाद भी इसे सार्वजनिक नहीं किया गया और अंतिम रूप से जारी करने से पहले इसमें कुछ संशोधनों की संभावना बनी हुई है।





