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*चुनावी माहौल में नेताओं के सरकारी पद के अधिकार समाप्त होने का मतलब*

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बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही देश के 7 राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव आयोग द्वारा की गई घोषणा के अनुसार, बिहार में दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण के तहत 6 नवंबर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को मतदान होगा। वहीं जम्मू कश्मीर, ओडिशा, झारखंड, मिजोरम, पंजाब, तेलंगाना और राजस्थान में 11 नवंबर को उपचुनाव होंगे। बिहार व अन्य राज्यों में मतगणना 14 नवंबर होगी।

चुनाव की अधिसूचना जारी होते ही जिलों में अधिकारियों की कमान चुनाव आयोग के पास आ जाती है। चुनाव आयोग अधिकारियों का अपने विवेक से तबादला भी कर सकता है। इसके साथ ही चुनावी माहौल में लोग अक्सर बात करते हैं कि ‘नेताजी’ का बस्ता जमा हो गया। आखिर ये बस्ता जमा होने का मतलब क्या होता है और नेताजी से कौन-कौन से अधिकार वापस लिए जाते हैं? साथ ही समझते हैं कि आईएएस-आईपीएस अधिकारियों के तबादले वाला नियम क्या है…

क्या होता है बस्ता जमा होने का मतलब?
चुनावी माहौल में अक्सर बस्ता जमा होना जैसे शब्दों का खूब इस्तेमाल होता है। यह चुनाव आयोग द्वारा लागू की गई कानूनी प्रक्रिया का एक हिस्सा है। इस प्रक्रिया के तहत चुनाव के दौरान नेता या प्रत्याशी को उनके कुछ अधिकार या सरकारी सुविधाएं अस्थायी रूप से रोक दी जाती हैं। खासतौर पर यह सरकारी पद पर बैठे नेताओं के लिए लागू होता है, ताकि चुनाव में निष्पक्षता बनी रहे।

उदाहरण के तौर पर समझें तो यदि कोई मंत्री या विधायक चुनाव लड़ रहा है, तो चुनाव आयोग उनसे कुछ सरकारी सुविधाएं, सुरक्षा, वाहन आदि जमा करा सकता है। इसे कहते हैं बस्ता जमा कराना, मतलब वे चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी संसाधनों का गलत उपयोग न कर सकें।

सांसद/विधायक से कौन-कौन से अधिकार वापस लिए जाते हैं?
चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार, चुनाव अवधि में नेताओं से कई अधिकार और सुविधाएं अस्थायी रूप से वापस ली जा सकती हैं। इसमें चुनाव आयोग अक्सर नेताओं से सरकारी कार, जेटीप, गनमैन या सुरक्षा कर्मियों को अस्थायी रूप से वापस ले लेता है। यदि कोई मंत्री या अधिकारी चुनाव लड़ रहा है, तो उनके सरकारी पद के अधिकार (जैसे फैसले लेने की शक्तियां) चुनाव अवधि के लिए सीमित कर दिए जाते हैं।

क्या है IAS-IPS के ट्रांसफर का स्पेशल नियम?
चुनाव आयोग भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने के लिए स्वतंत्र है। जब किसी भी राज्य में चुनाव की घोषणा होती है, तो आयोग यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी अधिकारी चुनाव में कोई भी पक्षपात न करें। इसलिए IAS-IPS और अन्य अधिकारियों के ट्रांसफर नियम लागू होते हैं।

ट्रांसफर के लिए चुनाव आयोग की अनुमति जरूरी
चुनाव आयोग के इस नियम के तहत चुनाव तारीखों की घोषणा के साथ ही राज्य में अधिकारियों का तबादला चुनाव आयोग की बिना अनुमति से नहीं किया जा सकता है। केवल चुनाव आयोग की सलाह और अनुमति से ही अधिकारी को पद से हटाया या नया पोस्टिंग दी जा सकती है।

यदि किसी जिले में चुनाव होने वाला है, तो उस जिले का एसपी को चुनाव आयोग की अनुमति के बिना ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। इसी तरह, जिलाधिकारी और अन्य संवेदनशील पदों पर तैनात IAS अधिकारी भी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए ट्रांसफर किए जा सकते हैं।

Ramswaroop Mantri

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