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3 जुलाई की ताजा खबर:घाना में पीएम मोदी को देश का सर्वोच्च सम्मान,पूरे अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ होगा प्रदर्शन, यूएस से 10 गुना बड़ी मिलिट्री सिटी बना रहा चीन,हार्ट अटैक से युवाओं की मौत… कर्नाटक सीएम ने उठाए कोविड वैक्सीन पर सवाल

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कर्नाटक के हासन जिले में एक महीने में 20 युवाओं की हार्ट अटैक से मौत से हड़कंप मचा हुआ है, जिसके बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने वैक्सीन को लेकर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है और जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। हालांकि ICMR औरएम्स की रिपोर्ट कुछ अलग ही दावा कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़े इन दोनों संगठनों ने कर्नाटक के सीएम के दावे को गलत बताते हुए कहा है कि कोविड के बाद वयस्कों में हो रही अचानक मौतों पर आईसीएमआर और एम्स की डिटेल स्टडी से साबित हुआ है कि कोविड-19 टीकों और अचानक होने वाली मौतों के बीच कोई संबंध नहीं है। जीवनशैली और पहले से मौजूद स्थितियों को इन मौतों के पीछे का प्रमुख कारण माना गया है।

एनआई चेन्नै के डायरेक्टर ने क्या कहा?

आईसीएमआर- इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NIE) चेन्नई के डायरेक्टर डॉ. मनोज मुरहेकर ने कहा कि आईसीएमआर- एनआईई चेन्नई और एम्स की स्टडी में सामने आया है कि कोविड वैक्सीन का अचानक होने वाली मौतों से कोई संबंध नहीं है। अचानक मौतों की जेनेटिक हिस्ट्री हो सकती है, ज्यादा शराब पीना, ड्रग का प्रयोग भी कारण हो सकते है। अभी एम्स की एक स्टडी चल रही है। उनका कहना है कि PGI चंडीगढ़ ने भी एक स्टडी में पाया था कि कोविड से पहले और बाद में अचानक होने वाली मौतों में कोई इजाफा नहीं हुआ है। लेकिन युवाओं की मौत के सही कारणों तक जाना होगा। कर्नाटक में जिन युवाओं की मौत हुई है, उनके बारे में जांच करने के लिए वहां की सरकार ने एक कमिटी बनाई है, उम्मीद है वे भी कुछ डेटा के आधार पर स्टडी करेंगे।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का जवाब

देश की कई एजेंसियों के माध्यम से अचानक हुई मौतों के मामले की जांच की गई है। इन अध्ययनों से पता चला है कि कोविड-19 टीकाकरण और देश में अचानक हुई मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) द्वारा की गई स्टडी से पुष्टि हुई है कि भारत में कोविड-19 के टीके सुरक्षित और प्रभावी हैं और इनमें गंभीर दुष्प्रभावों के मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं। यह निष्कर्ष भी निकला है कि हृदय संबंधी कारणों के चलते अचानक मौत के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें आनुवंशिकी, खराब जीवनशैली, पहले से मौजूद बीमारियां और कोविड के बाद की जटिलताएं शामिल हैं।

किस एज ग्रुप के बीच हुई थी स्टडी

  • केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ये दोनों एजेंसियां मुख्य तौर पर 18 से 45 साल के बीच के लोगों में अचानक होने वाली मौतों के पीछे के कारणों को समझने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। अलग-अलग पहलुओं को लेकर रिसर्च की गई हैं और दो स्टडी की गई। पहला, पिछले डेटा पर आधारित और दूसरा, वर्तमान की जांच पर आधारित।
  • आईसीएमआर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (NIE) ने भारत में 18-45 वर्ष की आयु के वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों से जुड़े मसले पर स्टडी की, मई से अगस्त 2023 तक 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 47 क्षेत्रीय अस्पतालों में डेटा को देखा गया। इसमें ऐसे व्यक्तियों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो स्वस्थ दिख रहे थे लेकिन अक्टूबर 2021 और मार्च 2023 के बीच अचानक उनकी मौत हो गई। निष्कर्षों से साबित हुआ है कि कोविड-19 टीकाकरण से युवा वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों का जोखिम नहीं बढ़ता है।
  • दूसरी स्टडी युवाओं में अचानक होने वाली मौतों के कारणों का पता लगाने के लिए की गई। इसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली द्वारा आईसीएमआर के साथ मिलकर किया गया। अभी स्टडी के आंकड़ों के शुरुआती विश्लेषण से पता चलता है कि दिल का दौरा या मायोकार्डियल इंफार्क्शन (एमआई) इस आयु वर्ग में अचानक मौत का प्रमुख कारण बना हुआ है।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि पिछले वर्षों की तुलना में इन कारणों के पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है। ऐसे अधिकांश अस्पष्टीकृत मौतों के मामलों में, इनके संभावित कारण के रूप में आनुवंशिक उत्परिवर्तन की पहचान की गई है। स्टडी पूरी होने के बाद फाइनल डेटा जारी किया जाएगा और नतीजे भी बताए जाएंगे।
  • ये दोनों स्टडी भारत में युवा वयस्कों में अचानक होने वाली अस्पष्टीकृत मौतों के बारे में अधिक व्यापक जानकारी प्रदान करते हैं। यह भी पता चला है कि कोविड-19 टीकाकरण से जोखिम नहीं बढ़ता है जबकि अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं, आनुवंशिक प्रवृत्ति और जोखिम भरी जीवनशैली अचानक मौतों में भूमिका निभाती है।
  • क्या कहते हैं एक्सपर्ट

वैज्ञानिक विशेषज्ञों ने दोहराया है कि कोविड टीकाकरण को अचानक होने वाली मौतों से जोड़ने वाले बयान झूठे और भ्रामक हैं और वैज्ञानिक आम सहमति से समर्थित नहीं हैं। निर्णायक सबूतों के बिना अटकलें लगाने वाले दावों से उन टीकों में जनता का भरोसा कम होने का जोखिम है, जिसने महामारी के दौरान लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्पाइसजेट फ्लाइट की बीच रास्ते हवा में उखड़ी विंडो

गोवा से पुणे जा रही स्पाइसजेट की 90 सीटर फ्लाइट नंबर एसजी-1080 का बीच रास्ते में हवा में एक विंडो उखड़ गया। प्लेन के अंदर हवा में इस तरह की घटना होते ही यात्री डर गए। गनीमत रही कि हवाईजहाज की इस विंडो की अंदरूनी साइड उखड़ी। शीशे लगी बाहर वाली साइड सही-सलामत रही।

अंपायर ने इंग्लैंड की मदद कर दी, मिला करारा जवाब

इंग्लैंड और भारत के बीच टेस्ट सीरीज के दूसरे मुकाबले के पहले दिन कड़ी टक्कर देखने को मिली। बेन स्टोक्स ने टॉस ने जीतकर भारत को पहले बैटिंग के लिए बुलाया। पहले दिन स्टंप के समय भारतीय टीम ने 5 विकेट पर 310 रन बना लिए थे। कप्तान शुभमन गिल ने लगातार दूसरे मैच में सेंचुरी ठोकी। पहले दिन का खेल खत्म होने से कुछ समय पहले ही गिल ने अपने टेस्ट करियर का सातवां शतक ठोका

पेंटागन से दस गुनी बड़ी ‘मिलिट्री सिटी’ बना रहा चीन,यह तीसरे विश्व युद्ध की तैयारी तो नहीं?

चीन गुप्त रूप से पेंटागन से दस गुना बड़ा एक विशाल नया सैन्य किला बना रहा है। विशेषज्ञ इसे चीन की तीसरे विश्व युद्ध की तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं। अमेरिकी खुफिया जानकारी के अनुसार, ” बीजिंग मिलिट्री सिटी ” में बनने वाले बंकर परमाणु हमले तक को झेलने में सक्षम है। ये बंकर युद्ध के दौरान कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के रूप में भी काम कर सकते हैं। बता दें कि पेंटागन दुनिया की सबसे बड़ी ऑफिशियल बिल्डिंग है, जिसे अमेरिकी रक्षा मंत्रालय चलाता है। लेकिन, यह चीन की नई मिलिट्री सिटी के सामने कुछ भी नहीं है।

चीन गुप्त रूप से पेंटागन से दस गुना बड़ा एक विशाल नया सैन्य किला बना रहा है। विशेषज्ञ इसे चीन की तीसरे विश्व युद्ध की तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं। अमेरिकी खुफिया जानकारी के अनुसार, ” बीजिंग मिलिट्री सिटी ” में बनने वाले बंकर परमाणु हमले तक को झेलने में सक्षम है। ये बंकर युद्ध के दौरान कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के रूप में भी काम कर सकते हैं।

द सन की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की यह मिलिट्री सिटी राजधानी बीजिंग से लगभग 20 मील दक्षिण-पश्चिम में एक विशाल स्थान पर बनाई जा रही है। इस जगह के आसपास चीनी सेना की कोई मौजूदगी नहीं है, लेकिन अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का मानना है कि इसे चीन के भविष्य के सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए डिजाइन किया गया है। शी जिनपिंग तेजी से चीन के परमाणु शस्त्रागार को बढ़ा रहे हैं, जो एक दशक के समय में अमेरिका के परमाणु शस्त्रागार को टक्कर दे सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश के पास सिर्फ परमाणु हथियारों का होना ही काफी नहीं होता है, बल्कि उसे दुश्मन देशों के परमाणु हथियारों के खिलाफ ज्यादा मजबूत सुरक्षा की जरूरत भी होती है। ऐसा माना जा रहा है कि चीन इसलिए ही इस मिलिट्री सिटी के नीचे बंकरों का निर्माण कर रहा है। इस परिसर के निर्माण की सबसे पहले रिपोर्ट फाइनेंशियल टाइम्स ने दी थी, जिसमें सैटेलाइट तस्वीरों से इसके निर्माण को दिखाया गया था।

मिलिट्री सिटी का 2024 से शुरू हुआ निर्माण

फरवरी 2022 में, यह साइट चोनकिंग जलाशय के उत्तर में एक क्षेत्र में आवासीय भवनों और खुली जमीन के रूप में थी। एक साल बाद, इसे एक बड़े निर्माण प्रोजेक्ट की तैयारी के लिए काफी हद तक साफ कर दिया गया था। इसका निर्माण 2024 के मध्य से शुरू हुआ। सबसे पहले आसपास की सुरंगों और सड़कों का जाल बिछाया गया। इसके बाद बंकर बनाए गए और अब ऊपर बिल्डिंग बनाने का काम किया जा रहा है। हालांकि, चीनी सरकार के अनुसार, इस तरह की कोई भी फैसिलिटी मौजूद नहीं है। इस निर्माण परियोजना का कोई आधिकारिक उल्लेख नहीं है, और चीनी दूतावास का दावा है कि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं है।

चीन ने इस जगह को बनाया गुप्त

चीन ने इस इलाके की रक्षा के लिए वाटरप्रूफ बाउंड्रीवॉल का निर्माण किया है। यहां बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश की सख्त मनाही है। इतना ही नहीं, निर्माण साइट पर ड्रोन और कैमरों पर भी प्रतिबंध है। एक पूर्व वरिष्ठ अमेरिकी खुफिया अधिकारी ने FT को बताया कि नया कमांड सेंटर शीत युद्ध के समय से चीन के मौजूदा सैन्य मुख्यालय की जगह ले सकता है। सूत्र ने कहा: “नई फैसिलिटी का आकार, पैमाना और आंशिक रूप से दबी हुई विशेषताएं बताती हैं कि यह प्राथमिक युद्धकालीन कमांड सुविधा के रूप में वेस्टर्न हिल्स कॉम्प्लेक्स की जगह लेगी।”

डोनाल्ड ट्रंप के विरोध में 4 जुलाई को पूरे US में प्रदर्शन

अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस पर 4 जुलाई को पूरे देश में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन होंगे। विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य अरबपतियों के प्रभाव को चुनौती देना, गरीबी से लड़ना, गैरकानूनी आदेशों का विरोध करना और डर की राजनीति को नकारना है।

महिला अधिकार समूह “वीमेन मार्च” 4 जुलाई को “फ्री अमेरिका ” का आयोजन कर रहा है। यह आयोजन पूरे अमेरिका में होगा। इसका मकसद अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर ट्रंप प्रशासन की नीतियों का विरोध करना है। लोग रैलियां, मार्च, स्ट्रीट परेड, आर्ट प्रोजेक्ट, BBQ, डांस इवेंट और ब्लॉक पार्टियां आयोजित कर सकते हैं। वीमेन मार्च का कहना है कि सरकार लोगों को डराना और बांटना चाहती है। वे हमें सच्ची आजादी से रोकना चाहते हैं। लेकिन हमें ऐसा नहीं होने देना है। इसलिए 4 जुलाई को हम सड़कों पर उतरेंगे और आजादी का जश्न मनाएंगे। अमेरिकी स्वतंत्रता का सपना सभी के लिए है। हम इसे पाने के लिए लगातार प्रयास करेंगे।

विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य अरबपतियों के प्रभाव को चुनौती देना, गरीबी से लड़ना, गैरकानूनी आदेशों का विरोध करना और डर की राजनीति को नकारना है। वीमेन मार्च ने अपनी वेबसाइट पर डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया, न्यूयॉर्क, मैरीलैंड, विस्कॉन्सिन, इलिनोइस, फ्लोरिडा, मैसाचुसेट्स और कई अन्य राज्यों में लगभग 150 कार्यक्रमों की लिस्ट दी है।

कांवड़ यात्रा के दौरान गाजियाबाद में दुकानों पर नेमप्लेट अनिवार्य

सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर गाजियाबाद जिला प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान गाजियाबाद में सभी मीट और मछली की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। यात्रा मार्ग के आसपास धार्मिक भावनाएं आहत न हों, इसको ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है।

सावन महीने में होने वाली कांवड़ यात्रा को लेकर गाजियाबाद जिला प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान गाजियाबाद में सभी मीट और मछली की दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी। यात्रा मार्ग के आसपास धार्मिक भावनाएं आहत न हों, इसको ध्यान में रखते हुए फैसला लिया गया है।

गाजियाबाद में शराब की दुकानें निर्धारित समय पर ही खुलेंगी और समय पर बंद की जाएंगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि शराब की दुकानों की निगरानी की जाएगी, ताकि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी तरह की अशांति न फैले और श्रद्धालुओं की भावना का सम्मान बना रहे।

कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क किनारे लगने वाली दुकानों पर नेमप्लेट लगाना अनिवार्य किया गया है। बुधवार को मीडिया से बात करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि भक्तों को जानकारी होनी चाहिए कि वो किस दुकानदार से सामान खरीद रहे हैं। इसके अलावा दुकानदारों को उचित मूल्य दरों का भी पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की ठगी या ओवरचार्जिंग की शिकायतें सामने न आएं।

दूधेश्वर नाथ मंदिर में बैरीकेडिंग की जाएगी

जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि यात्रा मार्ग की सड़कों को दुरुस्त किया जा रहा है। अंधेरे वाले क्षेत्रों में रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है और खंभों पर प्लास्टिक की पन्नी चढ़ाई जा रही है, ताकि करंट लगने जैसी घटनाएं न हों। दूधेश्वर नाथ मंदिर के पास बैरीकेडिंग की जाएगी, ताकि जल चढ़ाने में भक्तों को कोई परेशानी न हो।

लगभग तैयारी पूरी

कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा के मुद्दे पर भी जिलाधिकारी ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगा दी गई है। कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा को लेकर कई सेक्टर और जोन बनाए गए हैं, जहां एडिशनल फोर्स की तैनाती रहेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को टास्क और चेकलिस्ट दे दी गई है। अभी बॉर्डर मीटिंग भी की जाएगी, जहां ट्रैफिक व्यवस्था के साथ-साथ अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी। कांवड़ यात्रा को लेकर लगभग पूरी तैयारी हो चुकी है।

घाना में पीएम मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान देते राष्ट्रपति महामा

घाना में पीएम मोदी को देश का सर्वोच्च सम्मान

पश्चिमी अफ्रीकी देश घाना में प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया गया। घाना के राष्ट्रपति महामा ने उन्हें सम्मानित किया। सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृतज्ञता प्रकट की। उन्हों कहा, वे 1.4 अरब भारतीयों की तरफ से इसे स्वीकार करते हैं।

पीएम मोदी ने कहा, घाना के लोगों के प्रति गहरी कृतज्ञता…
घाना में ‘द ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से सम्मानित होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘घाना के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होना मेरे लिए बहुत गर्व और सम्मान की बात है… मैं राष्ट्रपति महामा, घाना सरकार और घाना के लोगों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।’

घाना ने उत्कृष्ट राजनीतिज्ञता और प्रभावशाली वैश्विक नेतृत्व का सम्मान किया
बता दें कि बीते तीन दशकों में भारत के किसी प्रधानमंत्री ने पहली घाना यात्रा की है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री को यह पुरस्कार उनकी “उत्कृष्ट राजनीतिज्ञता और प्रभावशाली वैश्विक नेतृत्व” के लिए प्रदान किया गया। मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि घाना की उनकी “ऐतिहासिक” राजकीय यात्रा भारत-घाना संबंधों को नई गति प्रदान करेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, यह भारत-घाना के बीच गहरे और दीर्घकालिक संबंधों का प्रमाण है। 

सम्मान भारत और घाना के बीच ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित
पीएम मोदी ने कहा, ‘मैं 1.4 अरब भारतीयों की ओर से विनम्रतापूर्वक यह सम्मान स्वीकार करता हूं। मैं यह पुरस्कार हमारे युवाओं की आकांक्षाओं, उनके उज्ज्वल भविष्य, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं तथा भारत और घाना के बीच ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित करता हूं।’

भारत और घाना की द्विपक्षीय साझेदारी को व्यापक बनाने का फैसला
इससे पहले पीएम मोदी ने घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा के साथ बैठक की। वार्ता के बाद भारत और घाना के अधिकारियों ने दोनों देशों के बीच हुए चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति महामा और उन्होंने भारत और घाना की द्विपक्षीय साझेदारी को व्यापक बनाने का निर्णय लिया है।

भारत घाना के राष्ट्र निर्माण की यात्रा में सिर्फ साझेदार ही नहीं बल्कि सह-यात्री
घाना के राष्ट्रपति महामा के साथ वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत घाना के राष्ट्र निर्माण की यात्रा में सिर्फ साझेदार ही नहीं बल्कि सह-यात्री भी है। उन्होंने कहा, हमने अगले पांच वर्षों में भारत-घाना व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। हम इस बात पर एकमत हैं कि आतंकवाद मानवता का दुश्मन है। 

इन अफ्रीकी देशों का दौरा करेंगे प्रधानमंत्री मोदी
बता दें कि पीएम मोदी नौ जुलाई तक घाना, त्रिनिदाद-टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान छह और सात जुलाई को ब्राजील में 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इससे वैश्विक दक्षिण के देशों से भारत के संबंधों को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।

अफ्रीकी धरती से पीएम मोदी ने पूरी दुनिया को दिया संदेश
विदेश नीति को लेकर पीएम मोदी ने कहा, दोनों देश पश्चिम एशिया और यूरोप की स्थिति पर गंभीर रूप से चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि यह युद्ध का युग नहीं है, समस्याओं का समाधान बातचीत और कूटनीति से होना चाहिए।

US Defense Secretary Pete Hegseth and Indian Defense Minister Rajnath Singh

भारत-अमेरिका 10 साल की रूपपेखा पर डील करेंगे, रक्षा मंत्री राजनाथ-हेगसेथ के बीच हुई बात

भारत और अमेरिका आने वाले समय में दस साल के लिए एक नई रक्षा साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा, तकनीक और सैन्य सहयोग और मजबूत होगा। इसी सिलसिले में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए 10 साल के नए समझौते पर सहमति जताई है। यह समझौता दोनों नेताओं की फोन पर हुई बातचीत के बाद तय हुआ है और इसे इस साल होने वाली अगली मुलाकात में साइन किया जाएगा।

भारत और अमेरिका रक्षा सहयोग को नई दिशा देने जा रहे हैं। इसी क्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी समकक्ष पीट हेगसेथ के बीच फोन पर हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने दस साल के रक्षा समझौते पर सहमति जताई। साथ ही, तेजस विमान के लिए जीई इंजन की डिलीवरी तेज करने और संयुक्त उत्पादन को लेकर भी बातचीत हुई।  उधर,… वाशिंगटन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी हेगसेथ से मुलाकात की।

तेजस विमान के लिए इंजन की डिलीवरी तेज करने की मांग
साथ ही इस बातचीत के दौरान राजनाथ सिंह ने अमेरिका से तेजस लड़ाकू विमान में इस्तेमाल होने वाले जीई एफ 404 इंजन की डिलीवरी में तेजी लाने को कहा। इन इंजनों की देरी की वजह से हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) भारतीय वायुसेना को तेजस मार्क-1ए विमान तय समय पर नहीं दे पाया है। इसके अलावा सिंह ने अमेरिका की जीई कंपनी और भारत की एचएएल के बीच एफ414 इंजन के संयुक्त निर्माण को लेकर समझौते को भी जल्दी पूरा करने की बात कही।

भारत को अहम रक्षा साझेदार मानता है अमेरिका 
मामले में पेंटागन के बयान में कहा गया कि अमेरिका भारत को दक्षिण एशिया में अपना सबसे अहम रक्षा साझेदार मानता है। दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों की बिक्री, रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग, और लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण व संयुक्त सैन्य अभ्यास को बढ़ाने पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने फरवरी 2025 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तय किए गए रक्षा लक्ष्यों की प्रगति की भी समीक्षा की। साथ ही इस सहयोग को और मजबूत करने की योजना पर भी बात की।

India-US will deal on 10-year term, talks held between Defence Minister Rajnath and Hegseth News In Hindi

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर – फोटो : ANI

वाशिंगटन में जयशंकर ने पीट हेगसेथ से की मुलाकात
उधर, भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी को लेकर भी बड़ी बातचीत हुई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को वॉशिंगटन स्थित पेंटागन में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा चुनौतियों से मिलकर निपटने पर चर्चा की।

क्या बोले अमेरिकी रक्षा मंत्री
वहीं इस मामले में अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं से भली-भांति अवगत हैं और मिलकर इन खतरों से निपटने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका भारत को जरूरी तकनीक और रक्षा उपकरण उपलब्ध कराने को तैयार है ताकि वह क्षेत्रीय खतरों का सामना कर सके।

इसके साथ ही हेगसेथ ने ने उम्मीद जताई कि भारत को बड़े और लंबित रक्षा सौदे जल्द पूरे किए जाएंगे। साथ ही, दोनों देशों के बीच रक्षा उद्योगों में सहयोग और संयुक्त उत्पादन पर भी बातचीत हुई। हेगसेथ ने यह भी कहा कि अमेरिका भारत को अपने प्रमुख रक्षा साझेदारों में से एक मानता है।


10 साल का नया रक्षा समझौते पर सहमति
साथ ही जयशंकर और हेगसेथ ने मिलकर अगले 10 वर्षों के लिए एक नई रक्षा रूपरेखा पर हस्ताक्षर करने की योजना पर सहमति जताई है। यह समझौता इस साल होने वाली अगली उच्चस्तरीय मुलाकात में किया जाएगा। इसके साथ ही हेगसेथ और जयशंकर ने अगली INDUS-X रक्षा तकनीक सम्मेलन में भागीदारी की पुष्टि की। इसमें दोनों देश मिलकर नई तकनीक और रक्षा उपकरणों के निर्माण पर सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। इसी कार्यक्रम के तहत एएसआईए की भी शुरुआत होगी। 

सांकेतिक तस्वीर

फैक्ट्री पर हमला, तीन भारतीय अगवा; विदेश मंत्रालय ने सुरक्षित वापसी-रिहाई पर कही यह बात

माली में बढ़ते आतंकी हमलों पर हिंसा की खबरों के बीच बीते एक जुलाई को कुछ हमालवरों ने एक फैक्ट्री पर हमला कर तीन भारतीय नागरिकों का अपहरण कर लिया। इस बात पर भारत सरकार ने गहरी चिंता जताई है। ये तीनों भारतीय माली के काएस शहर में स्थित डायमंड सीमेंट फैक्ट्री में काम कर रहे थे। भारत ने माली सरकार से उनकी सुरक्षित और शीघ्र रिहाई की मांग की है।

माली में एक जुलाई को फैक्ट्री पर हमले में तीन भारतीयों का अपहरण कर लिया गया। भारत सरकार ने गहरी चिंता जताते हुए माली से उनकी सुरक्षित और शीघ्र रिहाई की मांग की है। दूतावास अपहृत भारतीयों के परिवारों के संपर्क में है। साथ ही विदेश मंत्रालय भी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।

हमलावरों ने फैक्ट्री पर हमला कर किया अपहरण
मामले में विदेश मंत्रालय (एमईए) बताया कि यह घटना एक जुलाई को हुई, जब कुछ सशस्त्र हमलावरों ने फैक्ट्री पर हमला किया और तीन भारतीयों को जबरन अपने साथ ले गए। अभी तक किसी संगठन ने इस अपहरण की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन माली में हाल ही में हुए कई आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी आल-कायदा से जुड़े संगठन जेएनआईएम ने ली है।

भारत सरकार ने हिंसक घटना की निंदा की
भारत सरकार ने इस हिंसक घटना की कड़ी निंदा करते हुए माली सरकार से अपील की है कि वह अपहृत भारतीयों की रिहाई के लिए जरूरी कदम उठाए। विदेश मंत्रालय ने कहा कि बमाको स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सीमेंट फैक्ट्री के प्रबंधन से लगातार संपर्क में है।

सरकार ने दिलाया भरोसा
दूतावास अपहृत भारतीयों के परिवारों के संपर्क में भी है। साथ ही मंत्रालय ने माली में रह रहे सभी भारतीयों से सावधानी बरतने, सतर्क रहने और दूतावास से नियमित संपर्क में रहने की अपील की है। वहीं विदेश मंत्रालय ने भरोसा दिलाया कि सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षित और जल्द रिहाई के लिए हर संभव प्रयास कर रही है और स्थिति पर वरिष्ठ अधिकारी लगातार नजर रखे हुए हैं।

अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था बालटाल के आधार शिविर पहुंचा।

‘बम बम भोले’ के जयघोषों से गूंजा बालटाल, आज से शुरू होगी आधिकारिक यात्रा

श्री अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था बालटाल बेस कैंप पहुंच चुका है। हर साल आयोजित होने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा का पहला चरण कल से औपचारिक रूप से शुरू होगा, लेकिन उससे पहले ही बालटाल में भक्तों का जमावड़ा देखने को मिला। दूर-दराज से आए श्रद्धालु भगवान शिव के पवित्र हिमलिंग के दर्शन की अभिलाषा लिए बेस कैंप में डेरा जमा चुके हैं।श्रद्धालुओं ने जैसे ही बालटाल बेस कैंप में कदम रखा, पूरे वातावरण में बम बम भोले और जय बाबा बर्फानी के जयघोष गूंज उठे। शिवभक्ति से सराबोर इन भक्तों की आंखों में तीर्थ के प्रति आस्था और चेहरे पर आत्मिक शांति की झलक साफ झलक रही थी।

A group of Amarnath pilgrims arrive at base camp of Baltal.The first phase of annual Amarnath Yatra will begin

अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था बालटाल के आधार शिविर पहुंचा। – फोटो : बसित जरगर

बाबा बर्फानी के भक्तों का यह जत्था अपने साथ एक अनोखी ऊर्जा और उत्साह लेकर चला है। ऐसा उत्साह जो उन्हें इस पवित्र यात्रा को हर बाधा और चुनौती का सामना करते हुए पूरी करने का हौसला देता है।

A group of Amarnath pilgrims arrive at base camp of Baltal.The first phase of annual Amarnath Yatra will begin

अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था बालटाल के आधार शिविर पहुंचा। – फोटो : बसित जरगर

वे अपने आराध्य की भक्ति में इतने डूबे हुए हैं कि उन्हें पर्वतमालाओं की ऊंचाई, ठंड और थकान का आभास तक नहीं है, न ही उसकी चिंता। 75 साल के फाल्गुनगी नेपाल के जगतपुर धाम से जम्मू पहुंच चुके हैं। राम मंदिर में ठहरे हैं, कहते हैं कि हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों और हरे-भरे घास के मैदानों के बीच स्थित इस गुफा के दर्शन की कल्पनामात्र से वे रोमांचित हैं। 

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अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था बालटाल के आधार शिविर पहुंचा। – फोटो : बसित जरगर

इस पवित्र यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कान दिखाई देती है, जो उनके मन की गहराई से निकलती है। वे इतने उत्साहित हैं कि उन्हें किसी भी चुनौती का सामना करने में कोई भय और संशय नहीं है। अमरनाथ यात्रा के प्रवेश द्वार से लेकर पवित्र गुफा तक, समूची कश्मीर घाटी बाबा अमरेश्वर की भक्ति के इंद्रधनुषी रंग में रंग गई है।

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अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था बालटाल के आधार शिविर पहुंचा। – फोटो : बसित जरगर

आस्था की डोर थामे, मन में उमंग लिए, ये भक्त अपने आराध्य की भक्ति में डूबे हुए हैं। इन्हें कोई बाधा अपने पथ से नहीं डिगा सकती। चट्टान सा हौसला है इनका और मन में श्रद्धा व अपने आराध्य पर अटूट विश्वास की गहराई।

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अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था बालटाल के आधार शिविर पहुंचा। – फोटो : बसित जरगर

कल से यात्रा की विधिवत शुरुआत होगी, जहां श्रद्धालु बालटाल मार्ग से चढ़ाई शुरू करेंगे और हिमलिंग के दर्शन के लिए अमरनाथ गुफा तक पहुंचेंगे।

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अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था बालटाल के आधार शिविर पहुंचा। – फोटो : बसित जरगर

इन शिव भक्तों के स्वागत के लिए हजारों की संख्या में लोग पलक पांवड़े बिछाए हुए हैं। कहीं लंगर तो कहीं रात्रि विश्राम की उचित व्यवस्था की गई है। 

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अमरनाथ यात्रियों का एक जत्था बालटाल के आधार शिविर पहुंचा। – फोटो : बसित जरगर

बाबा बर्फानी के भक्तों की यह टोली अपने साथ एक अनोखी आस्था और भक्ति लेकर चल रही है। वे अपने आराध्य की भक्ति में इतने लीन हैं कि उन्हें लगता है कि वे अपने जीवन के लक्ष्य के करीब पहुंच रहे हैं। ऐसे भक्तों के स्वागत में लगे लोग अपने को सौभाग्यशाली मान रहे हैं और उनके प्रति कृतज्ञता भी ज्ञापित कर रहे हैं।

पंडित नेहरू के साथ घाना के पूर्व राष्ट्रपति क्वामे नक्रूमा

66 साल पहले भारत आए थे घाना के राष्ट्रपति नक्रूमा, नेहरू के साथ मधुर संबंध

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घाना दौरे पर जाने के बीच कांग्रेस ने बुधवार को घाना के पूर्व राष्ट्रपति क्वामे नक्रूमा और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के बीच के घनिष्ठ संबंधों को याद किया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा, 60 के दशक के मध्य तक, घाना और अफ्रीकी राजनीति पर क्वामे नक्रूमा का दबदबा था। इस मौके पर कांग्रेस ने दोनों देशों के घनिष्ठ संबंधों को याद किया। घाना के राष्ट्रपति नक्रूमा 66 साल पहले वर्ष 1958-59 में भारत आए थे। कांग्रेस ने देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू और नक्रूमा के संबंधों को भी रेखांकित किया।

घाना और अफ्रीकी राजनीति पर क्वामे नक्रूमा का दबदबा
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, जवाहरलाल नेहरू के साथ उनके बहुत मधुर संबंध थे, जो मार्च, 1957 में घाना के स्वतंत्र होने से भी पहले बने थे। अकरा में एक प्रमुख सड़क जिस पर इंडिया हाउस स्थित है, उसका नाम नेहरू के नाम पर है, जबकि नई दिल्ली में राजनयिक एन्क्लेव का नाम क्वामे नक्रूमा मार्ग है।

66 साल पहले भारत आए थे नक्रूमा; बंगलुरू-मैसूर में पांच दिन रहे
नक्रूमा 22 दिसंबर, 1958 से 8 जनवरी, 1959 तक भारत दौरे पर थे। वह नई दिल्ली, मुंबई, नांगल, चंडीगढ़, झांसी, आगरा, बंगलुरू, मैसूर और पुणे में रहे थे। अकेले बंगलुरू और मैसूर में उन्होंने पांच दिन बिताए थे। रमेश ने बताया कि नक्रूमा ने ट्रॉम्बे परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठान, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, भाखड़ा नांगल बांध और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी का विशेष दौरा भी किया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

कैलिफोर्निया में ट्रंप प्रशासन की आव्रजन संबंधी कार्रवाई ‘नस्लीय’

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा ट्रंप पर इस आरोप के तहत लगाया गया है कि ट्रंप प्रशासन ने दक्षिणी कैलिफोर्निया में भूरे रंग की त्वचा वाले लोगों को निशाना बनाते हुए इमिग्रेशन (प्रवासन) छापेमारी की। बता दें कि यह मामला यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दायर किया गया है और इसमें कहा गया है कि सरकारी एजेंट बिना किसी ठोस कारण के लोगों को सड़कों, बस स्टॉप, पार्किंग, खेतों और दिहाड़ी मजदूरों के ठिकानों से जबरन और हिंसक तरीके से गिरफ्तार कर रहे हैं।

स कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग
ट्रंप प्रशासन के खिलाफ दायर इस मुकदमे में इस कार्रवाई को असंवैधानिक करार देते हुए इसपर रोक लगाने की मांग की गई है। अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) के वकील मोहम्मद तजसर ने कहा कि ये एजेंट शहर में हर जगह अचानक आकर लोगों को बिना वजह उठा रहे हैं, और हम चाहते हैं कि ये बंद हो। साथ ही शिकायत में यह भी कहा गया है कि पकड़े गए लोगों को खराब, अंधेरी और गंदी जेलों में रखा जा रहा है, जहां उन्हें वकील से मिलने की इजाजत भी नहीं दी जाती।

हालांकि दूसरी ओर इन आरोपों को होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की प्रवक्ता ट्रिशा मैकलॉघलिन ने घिनौना और पूरी तरह झूठा बताया। उन्होंने कहा कि हमारी टीमें केवल तय लक्ष्यों पर कार्रवाई करती हैं और सभी गिरफ्तारी कानूनी तरीके से होती हैं। सभी कैदियों को खाना, इलाज और वकील से बात करने की सुविधा दी जाती है। ध्यान रहे कि ट्रंप प्रशासन पर किए गए इस मुकदमे में तीन प्रवासियों, कुछ प्रवासी अधिकार संगठनों और दो अमेरिकी नागरिकों ने शिकायत की है। इनमें एक अमेरिकी नागरिक को उस समय हिरासत में ले लिया गया, जब उसने अपनी पहचान दिखाई थी।

लॉस एंजेलिस में विवाद के बाद मुकदमा
गौरतलब है कि ट्रंप प्रशासन के खिलाफ यह मुकदमा उस समय आया है, जब ट्रंप की प्रशासन ने लॉस एंजेलिस पर अवैध शरण शहर कानून को लेकर केस किया है। हाल ही में प्रवासन छापों और नेशनल गार्ड की तैनाती के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में हिंसा भी हुई है।

मामले में अब तक 40 से ज्यादा लोगों पर पुलिस पर हमला, घोड़ों पर हमला, और आगजनी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इतना ही नहीं एक 17 वर्षीय लड़के पर हत्या की कोशिश और पुलिस पर हमले का भी मामला दर्ज हुआ है। इसके अलावा 14 लोगों पर फेडरल केस भी चल रहे हैं, जिनमें सिंडर ब्लॉक और पेट्रोल बम से हमला करने के आरोप शामिल हैं।

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हाईकोर्ट की वकील को नौ दिनों तक बनाए रखा डिजिटल अरेस्ट, ठग लिए 3.29 करोड़

दिल्ली हाईकोर्ट की वकील सेक्टर-47 निवासी महिला (72) के लैंडलाइन की घंटी 10 जून को बजी। उन्होंने जैसे फोन उठाया,  आवाज आई कि आपका नाम अवैध हथियारों की तस्करी, ब्लैकमेलिंग और जुआ में आया है। इसमें आपका आधार नंबर और बैंक खाते इस्तेमाल हो रहे हैं। इससे वह डर गईं। कॉलर ने उन्हें नौ दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। जब तक उन्हें पता चला कि यह जालसाजों की चाल है, तब तक उनके हाथ से 3.29 करोड़ रुपये निकल चुके थे।

जालसाजों ने उन्हें व्हाट्सएप कॉल पर डिजिटल अरेस्ट रखा और इस दौरान पांच अलग-अलग खातों में रकम मंगवाई। उनकी शिकायत पर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। कॉल करने वाले ने पीड़िता से कहा कि वह भारत सरकार की एजेंसी से बात कर रहा है। मामले में जेल भी जाना पड़ सकता है। इस मामले में 25 अप्रैल को केस दर्ज हो चुका है। 

इसके बाद ठगों ने शख्स को लाइन पर लिया और कहा कि इस मामले में एनओसी वही देंगे। इसके बाद जालसाजों ने व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल कर बात की। इसमें बैकग्राउंड में कुछ लोग पुलिस वर्दी में थे और पीछे का हिस्सा थाने जैसा लग रहा था। पूछताछ के क्रम में महिला के बैंक खातों और उसमें जमा राशि के बारे में जानकारी ली। 

एफडी तोड़वाकर मंगाई रकम
ठगों ने महिला से कहा कि अपनी एफडी तुड़वा लें और सारी रकम बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दें। जालसाजों ने क्लीन चिट मिलने पर पूरी रकम वापस करने का वादा किया। इसके बाद महिला परेशान हो गईं।

इसके बाद नौ दिन तक जालसाजों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट रखा और किसी को जानकारी न देने की हिदायत दी। महिला ने जालसाजों के बताए गए खाते में 3.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने अपना नाम शिव प्रसाद, प्रदीप सावंत और प्रवीण सूद बताया था। 

जायसवाल-गिल

जायसवाल शतक से चूके, गिल ने लगातार दूसरे टेस्ट में जड़ा सैकड़ा

भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट के शुरुआती दिन पांच विकेट खोकर 310 रन बना लिए हैं। बुधवार का खेल समाप्त होने तक शुभमन गिल 114 और रवींद्र जडेजा 41 रन बनाकर क्रीज पर डटे हैं। दोनों के बीच 99 रनों की साझेदारी हो चुकी है। बता दें कि, भारत और इंग्लैंड के बीच जारी पांच मैचों की टेस्ट सीरीज का दूसरा मुकाबला एजबेस्टन पर खेला जा रहा है। इस मैच में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया है।

केएल दो रन बनाकर आउट
भारत की पहली पारी झटके के साथ शुरू हुई। सलामी बल्लेबाज केएल राहुल सिर्फ दो रन बनाकर आउट हो गए। उन्हें क्रिस वोक्स ने अपना शिकार बनाया। इसके बाद यशस्वी जायसवाल को करुण नायर का साथ मिला। दोनों के बीच दूसरे विकेट के लिए 80 रनों की साझेदारी हुई। ब्रायडन कार्स ने इस साझेदारी को तोड़ा। उन्होंने करुण नायर को अपना शिकार बनाया। वह 50 गेंदों में पांच चौके की मदद से 31 रन बनाकर आउट हुए। 

जायसवाल शतक से चूके
इसके बाद मोर्चा यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल ने संभाला। दोनों के बीच 66 रनों की साझेदारी हुई। सलामी बल्लेबाज जायसवाल 87 रन बनाकर आउट हो गए। वह अपना शतक पूरा नहीं कर पाए। उन्हें बेन स्टोक्स ने अपना शिकार बनाया। जायसवाल के बाद गिल को पंत का साथ मिला। दोनों ने चौथे विकेट के लिए कुछ अच्छे शॉट्स खेले और 47 रन जोड़े, लेकिन शोएब बशीर ने उपकप्तान को अपना शिकार बनाया। वह 42 गेंदों में 25 रन बनाकर आउट हुए। वहीं,  इंग्लैंड की धरती पर अपना पहला मैच खेल रहे नीतीश कुमार रेड्डी सिर्फ एक रन बना पाए। उन्हें क्रिस वोक्स ने बोल्ड किया। 

गिल ने जड़ा शतक
गिल ने लीड्स के बाद एजबेस्टन टेस्ट में भी शतक जड़ दिया है। वह इंग्लैंड के खिलाफ लगातार तीन टेस्ट मैचों में शतक लगाने वाले पांचवें भारतीय बन गए। इस मामले में उन्होंने मोहम्मद अजहरुद्दीन और राहुल द्रविड़ जैसे दिग्गजों की बराबरी कर ली। भारतीय कप्तान ने 199 गेंदों में अपने टेस्ट करियर का सातवां सैकड़ा पूरा किया। वह शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं। गिल ने इंग्लैंड के खिलाफ पिछले मैच में भी शतक लगाया था। उससे पहले 2024 में जब इंग्लैंड की टीम पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारत आई थी, तब गिल ने धर्मशाला में खेले गए मुकाबले में 110 रनों की पारी खेली थी। इस तरह गिल इंग्लैंड के खिलाफ लगातार तीन शतक जड़ने वाले पांचवें भारतीय बन गए। बतौर कप्तान भी गिल ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वह इंग्लैंड के खिलाफ लगातार दूसरा शतक लगाने वाले तीसरे भारतीय कप्तान बन गए। उनसे पहले यह कारनामा विजय हजारे और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने किया था। दोनों ने क्रमश: दिल्ली और ब्रेबोर्न (1951-52) व लॉर्ड्स और ओल्ड ट्रैफर्ड (1990) में यह कारनामा किया था।

Ramswaroop Mantri

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