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प्रसंगवश : अतीफेह रजबी सहलीह का अपराध और दंड

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~ज्योतिषाचार्य पवन कुमार (वाराणसी)

_सबसे क्रूर सजा दिए जाने का जो मामला दुनिया के सामने आया था, वो ईरान की 16 वर्षीय मासूम लड़की अतीफेह रजबी सहलीह (Atefeh Rajabi Sahaaleh) का मामला है._
     इस मासूम लड़की की गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने शरिया कानून वाले एक देश में कुछ हद से ज्यादा गिरे हुए घटिया लोगो के बीच में जन्म लिया था.

अपने इलाके की अधिकतर लड़कियों की तरह रजबी को भी बचपन से ही कई बंदिशों में रहने की आदत हो गई थी। लेकिन उसकी जिंदगी का असली बुरा दौर तो तब शुरू हुआ जब एक 51 वर्ष के रीटायर्ड गॉर्ड अली दराबी (Ali Darabi) की उस पर बुरी नजर पड़ी।

क़ानून के दायरे में किसी निर्दोष को मिली सबसे क्रूरतम सज़ा कौन सी है? उसे  यह सजा किस जुर्म के संदेह में मिली और उसके निर्दोष साबित होने के ...


गार्ड के पद से रिटायर होकर टैक्सी ड्राइवर बने 51 वर्ष के अली ने 15-16 साल की इस मासूम लड़की के साथ बलात्कार किया! एक या दो बार नहीं, बल्कि सैकड़ो बार!
दरअसल रजबी के परिवार को मजदूरी जैसे कामो की वजह से सारा दिन घर से बाहर रहना पड़ता था। उसी दौरान अली दराबी उसे अपनी हैवानियत का शिकार बनता था। उसने रजबी को बुरी तरह धमका दिया था कि अगर उसने किसी से कुछ भी कहा तो उसे और उसके परिवार को मार डालेगा।

डरी सहमी रजबी घुट-घुट कर जीती रही और ये दरिंदा उस मासूम बच्ची को अपनी हैवानियत का शिकार बनता रहा। यह सिलसिला पूरे तीन साल तक चलता रहा! कहा जाता है कि रजबी ने फिर भी अपने घर वालो को इस बारे में बताने की कोशिश की थी लेकिन उनने उसे ही फटकार के चुप करा दिया।
लेकिन जब धीरे-धीरे इस दरिंदे की हैवानियत हद से ज्यादा बढ़ने लगी तब रजबी के पिता ने परिवार के लाख आग्रह के बाद पुलिस को इस बात की सूचना दी।

अब एक पल के लिए थोड़ा रुक कर सोचिये कि ये मामला अगर भारत जैसे किसी देश में हुआ होता तो क्या होता?
लेकिन जरा देखिये कि हमारे कुछ बुद्धिजीवी जिस खाड़ी देश की सम्पनता का गुणगान करते नहीं थकते वहां का कानून कैसा है/था।
पुलिस ने इस बात की खबर लगते ही आरोपी के बजाये पीड़िता (रजबी) को ही थाने बुला कर उससे कड़ी पूछताछ की, और उसे वहीँ Crimes against chastity के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल इस्लामिक शरिया कानून के अनुसार, Crimes against chastity, सतित्वता (virginity) के उल्लंघन और यौन व्यवहार से संबंधित अपराध होता है, जिसमे गैर मर्द से किसी भी तरह के सम्बन्ध बनने पर महिला को ही सजा दी जाती है जब तक वो यह साबित न कर सके की उसने आरोपी को सम्बन्ध बनाने के लिए इनवाइट नहीं किया था!
इस वजह से रजबी को सलाखों के पीछे डाल दिया गया. यहाँ उसे अली से तो छुटकारा मिला, लेकिन दरिंदगी से नहीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रजबी को थाने में भी बेहद प्रताड़ित (टॉर्चर) किया जाता था और कई पुलिस वाले बारी-बारी से उसका दुष्कर्म भी करते थे।
काफी मशक्कत के बाद जब रजबी की दादी को उससे मिलने की इजाजत दी गई, वो भी कुछ महीनो बाद तो रिज्बी ने बताया कभी कभी तो उसके प्राइवेट पार्ट साथ इतनी दरिंदगी की जाती है कि वो अपने पैरो पर खड़ी भी नहीं हो पाती।
रिज्बी का यह दर्द-ऐ-हाल देख कर उसके परिवार ने काफी भागदौड़ कर जैसे-तैसे इस मामले को कोर्ट तक पहुंचाया, जिससे उन्हें और रिजबी को न्याय मिलने और इस दर्द से छुटकारा मिलने की थोड़ी उम्मीद जागी।
लेकिन कोर्ट में आरोपी और पुलिस ने मिलकर ऐसी-ऐसी दलीले दी की मामला रजबी के ही खिलाफ जाने लगा। फिर ऊपर से सरिया कानून!! जज हाजी रेजाई (Haji Rezai) उल्टा रजबी पर ही सजाये सुनाने लगा।

जब अतीफा रजबी को एहसास हुआ कि वह अपना केस हार रही है, तो उसने अपनी सफाई देने के लिए जल्दबाजी में अपने चेहरे से हिजाब (बुर्का) को उठा लिया और कहा कि अदालत को उसे नहीं बल्कि अली दरबी को दंडित करना चाहिए।
लेकिन उस अक्ल के अंधे जज ने हिजाब हटाने को अदालत का घोर अपमान बताते हुए रजबी को उम्र कैद की सजा सुना दी।
यह सुन रिजबी गुस्से में लाल हो गई, और होती भी क्यों न, इतना अन्याय झेलने के बाद भी उसे इन्साफ देने के बजाये वापस उस नर्क में जाने का जो कहा जा रहा था।
उसे सिर्फ वो दर्दनाक पल याद आ रहे होंगे इसलिए उसने विरोध में अपनी जूती निकाल कर जज की ओर फेक दी। इससे जज हाजी रेजाई इतना बौखला गया की उसने तुरंत रिज्बी को फांसी की सजा सुना दी।
15 अगस्त 2004 को ईरान के नेका में उसे एक क्रेन से लटका कर सरेआम फांसी दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ऑफ अपील में पेश किए गए दस्तावेजों में उनकी उम्र 22 साल बताई गई है, लेकिन उनके जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र में कहा गया है कि वह 16 साल की थीं।
ये कैसा न्याय है? ये कैसा कानून है? क्या यही है मुस्लिम बहुयाद वाले देशों में मुस्लिम महिलाओं की जिंदगी की असली तस्वीर?
और ये तो सिर्फ एक ऐसा मामला है जो ईरान से बाहर की दुनिया तक पहुंच पाया। ईरान, ईराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और न जाने ऐसे कितने ‘इस्तान’ है जहाँ ऐसे क्रूर कानून की वजह से कितनी निर्दोष बालिकाएं मौत के घाट उतार दी जाती होगी।


   _भारत में भी ऐसे किस्से/केसेज है, स्पेशली वो रेप केसेज जो pretext ऑफ मैरिज, underpriviledged कास्ट्स पर बेस्ड है। बस इनमे पीड़िता को सरे आम फांसी नही है पर जो रिजबी के साथ हुआ वही सब पीड़िता के साथ पुलिस, कोर्ट, प्रशासन, समाज सरे आम मौखिक बलात्कार करते है, बार बार करते है।_
   सुप्रीम कोर्ट के बाहर पीड़िता और गवाह द्वारा आत्मदाह किया गया क्योंकि कोर्ट ने पीड़िता को पीड़ित नही माना और चरित्रहीनता का आरोप और मढ़ दिया।
_ये तब है जब देश में कठोर कानून है। बिहार का पिछले साल का अररिया 'कोर्ट रूम लाइव ' केस और उन्नाव तो अभी हम लोग भूले भी नही।_

[चेतना विकास मिशन)

Ramswaroop Mantri

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