यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) और भारत के मध्य आज से प्रभावी होने जा रहा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) कई मायनों में ऐतिहासिक होने के साथ यह वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की सशक्त मौजूदगी को भी रेखांकित करता है। गौरतलब है कि ईएफटीए एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना चार यूरोपीय देशों-आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन-ने मुक्त व्यापार और आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने के लिए की थी। भारत और ईएफटीए के बीच बातचीत 2008 में शुरू हुई थी और 21 दौर की बातचीत के बाद दस मार्च, 2024 को यह समझौता संपन्न हुआ।अमेरिका की मनमानी टैरिफ नीति के बीच भारत और ईएफटीए के बीच आज से प्रभावी होने जा रहा टीईपीए इस मायने में ऐतिहासिक है कि यह किसी यूरोपीय समूह के साथ पहला व्यापक आर्थिक समझौता है। उम्मीद है कि इससे भारत की दूसरे देशों व समूहों के साथ चल रहीं व्यापार वार्ताओं को ऊर्जा मिलेगी।
समझौते के क्रियान्वयन के लिए चार यूरोपीय देशों से मंजूरी मिलनी जरूरी थी, इसी वजह से इसमें कुछ देरी हुई। यह ऐतिहासिक इसलिए भी है, क्योंकि टीईपीए भारत का किसी यूरोपीय समूह के साथ पहला व्यापक समझौता है और इसके साथ ही, यह पहली बार है जब भारत ने किसी आर्थिक समझौते में बाजार-पहुंच को निवेश की दृढ़ प्रतिबद्धताओं से जोड़ा है।

समझौते के तहत ईएफटीए की चार अर्थव्यवस्थाओं ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जिसमें पहले दशक में 50 और अगले पांच वर्षों में 50 अरब डॉलर का निवेश होगा। यही नहीं, इस समझौते से ईएफटीए ब्लॉक से आयातित करीब 80-85 फीसदी वस्तुओं पर शुल्क में कमी आएगी, जबकि लगभग 99 फीसदी भारतीय निर्यातकों को उनके बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी। हालांकि, सरकार ने डेयरी और कुछ कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए संरक्षणवादी रुख अपनाया है और घरेलू हितों की रक्षा के लिए उन्हें इससे बाहर रखा गया है।

इस समझौते से आगामी डेढ़ दशक में करोड़ों नए रोजगार पैदा होने की संभावना है। वैश्विक युद्धों और अमेरिकी टैरिफ के वर्तमान अनिश्चित दौर ने दुनिया को यह सिखाया है कि एक ही क्षेत्र या देश पर अत्यधिक निर्भरता खतरनाक हो सकती है। इस समझौते से भारत वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं का अधिक विश्वसनीय हिस्सा बन सकेगा।
दूसरी तरफ, अमेरिका, ओमान, पेरू, चिली और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ भारत की बातचीत चल रही है, तो कतर व बहरीन भी भारत के साथ ऐसे समझौतों की इच्छा जता चुके हैं। जाहिर है कि भारत अपने विशाल श्रमबल, बाजार और सुधारोन्मुख नीतियों के कारण देशों के लिए आकर्षक गंतव्य बन रहा है। ईएफटीए देश यूरोपीय संघ के सदस्य नहीं हैं, लेकिन इनके साथ हुआ समझौता यकीनन भारत-यूरोपीय संघ के बीच चल रही व्यापार वार्ता को गति देगा, जिसके इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड हैं। भारत ने इन देशों के साथ 10 मार्च, 2024 को व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता 1 अक्तूबर से लागू हो रहा है। इस समझौते के लागू होने के बाद घरेलू ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाले स्विस उत्पाद जैसे घड़ियां, चॉकलेट, बिस्कुट और घड़ियां कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) के सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड हैं। इस पर 10 मार्च, 2024 को हस्ताक्षर किए गए थे। घरेलू ग्राहकों को उच्च गुणवत्ता वाले स्विस उत्पाद जैसे घड़ियां, चॉकलेट, बिस्कुट और घड़ियां कम कीमत पर उपलब्ध होंगी। भारत व्यापार समझौते के तहत इन वस्तुओं पर सीमा शुल्क को 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर देगा।
समूह ने 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है- समझौते के कार्यान्वयन के बाद 10 वर्षों के भीतर 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर तथा अगले पांच वर्षों में 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर – जिससे भारत में दस लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। यह भारत की ओर से अब तक साइन किए गए किसी भी व्यापार समझौते में अपनी तरह की पहली प्रतिज्ञा है। इसे आधिकारिक तौर पर व्यापार व आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) के नाम से जाना जाता है। वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को दोहराया है कि टीईपीए 1 अक्टूबर से लागू होगा।
भारत अपनी टैरिफ लाइनों या उत्पाद श्रेणियों का 82.7 प्रतिशत प्रदान कर रहा है, जो ईएफटीए निर्यात का 95.3 प्रतिशत है, जिसमें से 80 प्रतिशत से अधिक आयात सोना है। डेयरी, सोया, कोयला और संवेदनशील कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों को बहिष्करण सूची में रखा गया है तथा इन वस्तुओं पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी जाएगी। सेवा क्षेत्र में भारत ने ईएफटीए को लेखांकन, व्यवसाय सेवाएं, कंप्यूटर सेवाएं, वितरण और स्वास्थ्य जैसे 105 उप-क्षेत्रों की पेशकश की है।
दूसरी ओर, देश ने स्विट्जरलैंड से 128 उप-क्षेत्रों में, नॉर्वे से 114, लिकटेंस्टीन से 107 और आइसलैंड से 110 उप-क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं हासिल की हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा उनमें कानूनी, दृश्य-श्रव्य, अनुसंधान व विकास, कंप्यूटर, लेखांकन और लेखा परीक्षा शामिल हैं।




