-निर्मल कुमार शर्मा
विश्व के लब्धप्रतिष्ठित स्वीडेन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय द्वारा जारी वी-डेम यानी वेरायटी आप डेमोक्रेसी संस्थान की अभी हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में यह बताया गया है कि वर्ष 2021में दुनियाभर के औसत नागरिक अपने वर्तमान समय के कथित लोकतांत्रिक समय में वर्ष 1989 के मानक स्तर के लोकतांत्रिक समाज के समय के जीवन स्तर से बहुत ही नीचे चले गए हैं ! इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘लोकतंत्र रिपोर्ट 2022: निरंकुशता की बदलती प्रकृति ‘ है।
उदार लोकतंत्र सूचकांक यानी लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में लोकतंत्र की स्थिति का आकलन निम्नलिखित 4 मापदंडों को आधार मानकर किया जाता है-
(1) उदार लोकतंत्र (2) चुनावी लोकतंत्र ,(3) चुनावी निरंकुशता और ,(4) बंद निरंकुशता
उदार लोकतंत्र सूचकांक यानी लिबरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में स्वीडेन अन्य स्कैंडिनेवियाई देशों तथा डेनमार्क,नार्वे के अलावा कोस्टारिका और न्यूज़ीलैंड के साथ शीर्ष स्थान पर विराजमान हैं ! लेकिन कई सदियों बाद भारत में बने हिंदू हृदय सम्राट कथित सबसे काबिल व्यक्तित्व के धनी श्रीयुत् श्रीमान नरेंद्र भाई दामोदर भाई मोदी जी के वर्ष 2014 में भारतीय गणराज्य के प्रधानमंत्री बनने के बाद वैश्विक रिपोर्ट में भारत की स्थिति बहुत ही शर्मनाक और निरंकुश शासन के मामले में अत्यंत निकृष्टतम् हुई है ! उक्त स्वीडेन के गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय द्वारा जारी वी-डेम यानी वेरायटी आफ डेमोक्रेसी संस्थान की अभी हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट में भारत जैसे देश का बिल्कुल सही मूल्यांकन किया गया है ! उदाहरणार्थ इस देश में दर्जनों कवियों,लेखकों, वकीलों,कलाकारों,प्रोफेसरों,दलितों, अल्पसंख्यकों और आदिवासी समुदायों के हक के लिए लड़नेवाले स्टेन स्वामी जैसे मानव समाज के देवदूतों को वर्तमान समय के सत्ता के कर्णधारों के गुप्त इशारों पर फर्जी मुकदमों में फंसाकर कई वर्षों से जेलों में सड़ा कर निर्दयतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया जाता है या सत्य बात कहने या लिखने पर प्रोफेसर कलबुर्गी,कामरेड पानसारे, डाक्टर नरेंद्र दाभोलकर और पत्रकार गौरी लंकेश जैसों के ऊपर पेट्रोल छिड़ककर जला दिया जाता है या उन्हें सीधे गोली मार दी जाती है ! इसके अतिरिक्त मोदीजी के दुर्नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करनेवाले पत्रकारों,लेखकों, समाजसेवियों व विरोधी सम्यक विचार धारा के लोगों को देशद्रोही,पाकिस्तान परस्त,अर्बन नक्सली आदि असंसदीय और अमर्यादित गाली देना आम बात हो गई है ! इसके अलावे अल्पसंख्यकों,ईमानदार पुलिस अफसरों और आदिवासियों को बिना वजह मिथ्या रोपड़ करके सरेआम सड़कों पर ट्रकों के पीछे घसीट-घसीटकर या उन्हीं की रिवाल्वर से या धारदार हथियारों से उनके सीने में घोंपकर मौत के मुंह में धकेल देना आज मोदीराज में एक सामान्य बात होकर गई है ! अब तो लोकतांत्रिक व्यवस्था के ताबूत के कील बने ईवीएम मशीनों की रात के अंधेरे में अपनी सत्ता के दलाल बने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत से चोरी करके लोकतांत्रिक पद्धति से भारतीय जनता के मत को हेर-फेर करके अपने हारे हुए प्रत्याशियों को भी जिताने के अत्यंत अलोकतांत्रिक वह शर्मनाक कोशिश करते हुए भी मोदी ऐंड कंपनी सरकार रंगे हाथों जनता द्वारा पकड़ी गई है !
उदार लोकतंत्र सूचकांक या LDI में भारत दक्षिण एशिया के अपने पड़ोसी छोटे-छोटे देशों यथा भूटान 65वें,नेपाल 71वें और श्रीलंका 88वें पायदान की तुलना में बहुत ही शर्मनाक 93वें पायदान पर और दुनिया के सबसे निचले निकृष्ट कोटि के प्रदर्शन करनेवाले 50 प्रतिशत देशों की कतार में बेशर्मी से खड़ा है ! इलेक्टोरल डेमोक्रेसी इंडेक्स में भारत की स्थिति तो और भी बदतर 100वें स्थान पर,तथा डेवेलपमेन्ट कम्पोनेन्ट इंडेक्स में सबसे बदतर 102वें स्थान पर पहुंच गया है !
कितने दु :ख और हतप्रभ करनेवाली बात है कि संपूर्ण दुनिया की स्थिति कितनी बदतर होती जा रही है कि जहां यह दुनिया वर्ष 2012में उदार लोकतंत्रों की संख्या 42थी,वह केवल अगले 10वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर 34 उदार लोकतांत्रिक देशों में सिमटकर रह गई है ! अब इस दुनिया के केवल 13प्रतिशत लोग ही उदार व लोककल्याणकारी वास्तविक लोकतंत्र की खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं ! भारत सहित शेष 87प्रतिशत लोग दुनिया के उन देशों में रहते हैं,जो तथाकथित लोकतंत्र हैं,लेकिन उनकी हालत जर्मनी के कुख्यात तानाशाह एडोल्फ हिटलर के शासन से भी बदतर तानाशाही,बर्बर व असहिष्णु शासन में रहने को अभिशापित हैं ! केवल एक साल वर्ष 2021से 2022के बीच तानाशाही देशों की संख्या 25 से बढ़कर 30 हो गई है ! अत्यंत खेदजनक स्थिति यह है कि आज आधी से ज्यादे दुनिया के लोग तानाशाहों और क्रूर तथा बर्बर शासकों के अधीन अपनी जिंदगी गुजर-बसर करने को बाध्य हैं यानी आज दुनिया के 89 देश ही वास्तविक तौर पर लोकतांत्रिक हैं,जबकि भारत जैसे 90 देशों में छद्म लोकतंत्र के भेष में मोदी जैसे अत्यंत क्रूर,असहिष्णु वह हिंसक तानाशाह के शासन तले लोग अपनी जिंदगी सिसक-सिसककर,घुट-घुटकर जीने को विवश हैं !
-निर्मल कुमार शर्मा, 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र- पत्रिकाओं में पाखंड,अंधविश्वास,राजनैतिक, सामाजिक,आर्थिक,वैज्ञानिक, पर्यावरण आदि सभी विषयों पर बेखौफ,निष्पृह और स्वतंत्र रूप से लेखन ', गाजियाबाद, उप्र,




