अब भारत का फोकस सुदर्शन चक्र मिशन (2035 तक) पर है. इसके जरिए सरकार देश को एक अभेद्य सुरक्षा कवच देना चाहती है. रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ तक पहुंचा. घरेलू उत्पादन तीन गुना बढ़ा, और निर्यात 10 साल में 34 गुना बढ़कर ₹23,622 करोड़ हुआ.

मोदी सरकार ने सुदर्शन चक्र मिशन का ऐलान किया है. इसका मकसद साफ है, आने वाले युद्धों की तस्वीर पहले ही भांपना और ऐसी टेक्नोलॉजी बनाना जो दुश्मन को सटीक निशाने पर ले सके.
तीन बड़े लक्ष्य रखे गए हैं:
रिसर्च से लेकर उत्पादन तक सबकुछ भारत में.
Predictive Technology के ज़रिये भविष्य के युद्ध का अनुमान.
दुश्मन को खत्म करने वाले प्रिसिजन हथियार और सिस्टम तैयार करना.
सरकार का कहना है कि 2035 तक भारत के पास ऐसा सुरक्षा कवच होगा जो रणनीतिक और नागरिक दोनों क्षेत्रों को दुश्मन के हर हमले से बचा सके.
अब भारत आयातक नहीं, रक्षा निर्यातक महाशक्ति
मोदी सरकार के 11 सालों में भारत की डिफेंस पॉलिसी में भूचाल आया है. 2013-14 में रक्षा बजट ₹2.53 लाख करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर ₹6.81 लाख करोड़ हो गया है. फर्क यह है कि अब यह पैसा सिर्फ हथियार खरीदने पर नहीं, बल्कि हथियार बनाने पर खर्च हो रहा है.
2024-25 में घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.50 लाख करोड़ तक पहुंचा, जो 2014-15 की तुलना में तीन गुना है. अब भारत खुद लड़ाकू विमान, मिसाइल सिस्टम, युद्धपोत, एयरक्राफ्टा कैरियर और तोप बना रहा है. यही नहीं, भारत ने अपने हथियार 100 से ज्यादा देशों को बेचे हैं, जिनमें अमेरिका और फ्रांस भी शामिल हैं. 2024-25 में डिफेंस एक्सपोर्ट ₹23,622 करोड़ तक पहुंच गया. यानी 10 साल में 34 गुना बढ़ोतरी.
SRIJAN और इंडिजिनाइजेशन: अब आयात पर लगाम
सरकार ने 2020 में SRIJAN Portal शुरू किया, जिसके तहत अब तक 46,798 आयातित सामान की लिस्टिंग की जा चुकी है, ताकि उन्हें भारत में बनाया जा सके. रक्षा क्षेत्र की कंपनियों ने 5,012 ऐसे आइटम चिन्हित किए हैं जिनके आयात पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगेगी.
सरकार ने साफ कर दिया है कि आत्मनिर्भरता सिर्फ नारा नहीं, बल्कि असली हथियार है.
पिछले एक दशक में भारत ने यह दिखा दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं होगा. पुलवामा और बालाकोट के बाद ऑपरेशन सिंदूर इस नीति की अगली कड़ी है. मोदी सरकार का फोकस अब सिर्फ तात्कालिक जवाब नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा पर है. यही वजह है कि चाहे सीमा पर गोलीबारी हो या आतंकी हमला, भारत अब ‘न्यू नॉर्मल’ के तहत सीधा वार करता है.
सरकार का दावा है कि सिर्फ रक्षा ही नहीं, आंतरिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा, वित्तीय समावेशन और तकनीकी नवाचार भी इस नई नीति की नींव हैं. लक्ष्य है 2047 तक विकसित भारत.





