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*आवारा कुत्तों पर ‘सुप्रीम’ फैसले से इंदौर, ग्वालियर ने तो बना लिया प्लान*

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मध्य प्रदेश के तमाम शहर आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान हैं. डॉग बाइट के केस की अस्पतालों में भरमार है. तमाम प्रयास के बावजूद लोगों को आवारा कुत्तों से राहत नहीं मिल रही. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने लोगों को बड़ी राहत दी है. सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. पहले चरण में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र पर फोकस किया जाएगा, जहां 5,000 से अधिक आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाएगा. यह फैसला देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मिसाल बनेगा.

इंदौर मेयर ने बता दिया अपना प्लान
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों के मामले में इंदौर जैसे बड़े शहरों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने चाहिए. महापौर ने बताया कि इंदौर नगर निगम आवारा कुत्तों को शिफ्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार है और सुप्रीम कोर्ट से मार्गदर्शन लेकर जल्द अभियान शुरू करेगा. इंदौर में कुत्तों की बढ़ती संख्या से लोग परेशान हैं और निगम अब सक्रिय भूमिका निभाएगा.ग्वालियर का और बुरा हाल
वहीं, ग्वालियर में स्थिति और भी भयावह है. शहर में 55,000 से अधिक आवारा कुत्ते मौजूद हैं, जो गलियों, सड़कों से लेकर कलेक्ट्रेट, यूनिवर्सिटी और स्कूलों तक आतंक मचा रहे हैं. 1 अगस्त 2024 से 31 जुलाई 2025 तक में 81,754 लोग कुत्तों के काटने का शिकार बने. जयारोग्य अस्पताल, मुरार जिला अस्पताल और हजीरा सिविल अस्पताल में इन पीड़ितों को रेबीज के इंजेक्शन लगवाने पहुंचना पड़ा.

अब यहां भी चलेगा विशेष अभियान
ग्वालियर नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी के नाम पर सालाना एक करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए, लेकिन नतीजा शून्य रहा. कुत्तों की संख्या 40,000 से बढ़कर 55,000 हो गई. डॉग लवर्स की बाधाओं के कारण अभियान रुक जाते हैं, जिससे निगम मूकदर्शक बना रहा. अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम के सभापति ने कमिश्नर को विशेष अभियान चलाने के आदेश दिए हैं. स्थानीय निवासी उम्मीद जता रहे हैं कि इससे राहत होगी.

बुरहानपुर में भी चरम पर आतंक
वहीं, बुरहानपुर जिले में भी आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है. हर महीने करीब 300 डॉग बाइट के मामले सामने आ रहे हैं. जनवरी से अब तक 2,000 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं. स्कूली बच्चे और राहगीर रोजाना इनके निशाने पर हैं. नगर निगम ने नसबंदी के लिए 44 लाख का प्रोजेक्ट तैयार किया था, लेकिन कागजों तक सीमित रहा. इस लापरवाही से लोगों की सुरक्षा खतरे में है. शहरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे. हालांकि, यहां भी अब प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत योजना बनाएगा.

Ramswaroop Mantri

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