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इंदौर मेट्रो:मंत्री बोले- इंदौर की जमीन कमजोर है; हकीकत- 8 मीटर पर ही बसाल्ट रॉक, जो नींव के लिए अच्छी

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इंदौर

इंदौर मेट्रो की डिजाइन सेसमिक जोन-4 (भूकंप) के हिसाब से बनाए जाने का मामला विधानसभा में उठा है। इसे लेकर विधायक हर्ष विजय गेहलोत ने सवाल किए। जवाब देते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इंदौर की जमीन को ही कमजोर बता दिया, जबकि विशेषज्ञों के मुताबिक यहां 8 मीटर पर बसाल्ट रॉक है, जो नींव के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

मंत्री के जवाब को शहर के इंजीनियर और एक्सपर्ट ने भी खारिज किया है। बता दें कि मप्र मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने हाल ही में मनमाने ढंग से इंदौर मेट्रो की डिजाइन में भूकंप जोन बढ़ाकर लागत में लगभग 2 हजार करोड़ का इजाफा कर दिया।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला
मेट्रो के लिए इंदौर को हिमालय की श्रेणियों वाले जाेन-4 में रखे जाने का खुलासा भास्कर ने किया था। इसके बाद हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी लगाई गई है। इसकी सुनवाई मार्च के पहले सप्ताह में ही होना है।

विधायक ने पूछा- केंद्रीय पर्यावरण विभाग से मंजूरी ली क्या, मंत्री ने कहा- अनुमति का सवाल ही नहीं
{इंदौर-भोपाल सेसमिक (भूकंप) जोन-2 में आते हैं, लेकिन मेट्रो प्रोजेक्ट में इंदौर के लिए 4 और भोपाल के लिए जोन-2 की प्लानिंग क्यों की गई है?
भूपेंद्र सिंह : निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, मप्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और पृथ्वी एवं विज्ञान मंत्रालय की नियमावली के अनुसार इंदौर जोन-3 और भोपाल जोन-2 में आते हैं। इंदौर की भूगर्भीय स्थिति चुनौतीपूर्ण है। इसके पास से दो भूगर्भीय फॉल्ट गुजरते हैं। मेट्रो के लोड को सपोर्ट करने लायक रॉक का स्तर काफी नीचे है। अत: रक्षा और स्थायित्व को देखते हुए जोन-4 की प्लानिंग की गई।

इंदौर को जोन-4 में रखने से लागत में 2 हजार करोड़ का इजाफा होगा? भूपेंद्र सिंह : भोपाल मेट्रो की लंबाई 27.87 किमी और लागत 6941.40 करोड़ है, जबकि इंदौर में 31.55 किमी की लागत 7500.80 करोड़ है। इंदौर मेट्रो का जोन बढ़ाने से लागत में इजाफा परीलक्षित नहीं होता।

इंदौर को जोन-4 में रखने को लेकर भूकंप वैज्ञानिकों से राय और केंद्रीय पर्यावरण विभाग से अनुमति ली थी? भूपेंद्र सिंह : पर्यावरण विभाग से अनुमति का सवाल नहीं उठता। अंतरराष्ट्रीय जनरल कंसल्टेंट (भूगर्भीय इंजीनियर सहित) के परामर्श और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही एक स्तर बढ़ाकर डिजाइन किया गया।

अतुल सेठ, सीनियर आर्किटेक्ट- जहां मेट्रो चलना है, वह पूरी तरह से सेसमिक जोन-2 में

इंदौर मेट्रो को लेकर मंत्री द्वारा सदन में दिए गए जवाब भ्रमित करने वाले हैं। सामान्य इंजीनियर भी जानता है कि इंदौर में बसाल्ट रॉक (काला पत्थर) 8 मीटर पर ही उपलब्ध है। यह नींव के लिए सबसे उपयुक्त है। जहां मेट्रो चलाई जानी है, वह पूरी तरह से सेसमिक जोन-2 में ही आता है। शहर से 40 किमी दूर मानपुर घाट के बाद नर्मदा घाटी के कारण सेसमिक जोन-3 लगना शुरू होता है। जोन-2 और 4 की डिजाइन में लागत नहीं बढ़ती तो भोपाल को जोन-4 के हिसाब से क्यों नहीं बनाया जा रहा।

निश्चित ही इंजीनियरिंग का हर छात्र जानता है कि स्ट्रक्चर मजबूत बनाने में सरिया बढ़ाना पड़ता है और इससे लागत 25 प्रतिशत तक आराम से बढ़ जाती है। जोन-4 तो हिमालय की श्रेणियों में आता है।

Ramswaroop Mantri

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