सिंहस्थ को देखते हुए इंदौर के चारों ओर सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है. इसी कड़ी में शहर को कुंभ से पहले ही पश्चिमी रिंग रोड मिल जाएगी, जो ट्रैफिक के दबाव को काफी हद तक कम कर देगी, जबकि पूर्वी रिंग रोड का काम भी जल्द शुरू हो जाएगा. यह ग्रेटर रिंग रोड प्रोजेक्ट के दो सबसे मजबूत स्तंभ हैं. इससे इंदौर के 50 साल की जरूरत को पूरा किया जा सकेगा.
पहले से मौजूद रिंग रोड पर ट्रैफिक का दबाव काफी ज्यादा है. इसको देखते हुए 2 साल पहले पूर्वी और पश्चिमी रिंग रोड की कल्पना की गई थी, लेकिन कई अड़चनों की वजह से पश्चिमी रिंग रोड का काम रुका हुआ था. अब यह तेजी से हो रहा है. पश्चिमी रिंग रोड पीथमपुर को सीधे उज्जैन से जोड़ेगी. 64 किमी के इस रिंग रोड का निर्माण NHAI कर रहा है.
100 km की स्पीड से दौड़ेंगे वाहन
पश्चिमी रिंग रोड पीथमपुर से शुरू होकर बेटमा, हातोद और सांवेर होते हुए शिप्रा पर जाकर मिलेगी. इसके लिए 31 गांव की 600 हेक्टेयर जमीन ली गई है. प्रोजेक्ट की लागत भी करीब 3000 करोड़ है, जिसमें 1900 करोड़ से रोड का निर्माण होना है. इसे 6-लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे की तरह बनाया जाएगा, जहां गाड़ियां 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी.
शहर में कम होगा दबाव
पश्चिमी रिंग रोड के बन जाने से शहर के ट्रैफिक पर दबाव काफी कम हो जाएगा. साथ ही मुंबई, अहमदाबाद और उज्जैन जाने वाली गाड़ियां शहर के अंदर आए बिना बाहर से निकल जाएंगी. इंदौर के एमआर-10 और लवकुश चौराहे पर जो भारी दबाव रहता है, वह इन बायपास के शुरू होने से 60-70% तक कम हो जाएगा.
यहां से गुजरेगी पूर्वी रिंग रोड
वहीं, पूर्वी रिंग रोड का निर्माण भी जल्दी शुरू हो जाएगा. इसे भी NHAI बनाने जा रहा है. यह 77 किमी लंबी होगी, जो शिप्रा के पास से शुरू होकर डबल चौकी की ओर सिमरौल होते हुए पीतमपुर तक जाएगी. इस तरह पश्चिमी और पूर्वी रिंग रोड को मिलाकर इंदौर के आसपास एक ग्रेटर रिंग बन जाएगी. इससे न केवल साइंस के ट्रैफिक को बल्कि इंडस्ट्रियल ट्रैफिक को भी बड़ा लाभ होगा.





