वैसे तो गणमान्य होना सबके बूते की बात नहीं है और इंदौर में तो गणमान्य होना किसी पदवी से कम भी नहीं.. गणमान्य नागरिकों की सूची में कुछ नाम तो वर्षों से यथावत है ही , वहीं कुछ नाम राजनीतिक व अन्य समीकरणों/ सिफारिशों के चलते घटते- बढ़ते रहते हैं , कुछ तो पद्मश्री भी हो गए तो कुछ वेटिंग लिस्ट में है .. अभी प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के मद्देनजर इन गणमान्यों की पूछ परख जोरदार तरीके से बढ़ गई है मगर साथ में एक परेशानी ये जरुर हो गई कि इन दोनों प्रमुख आयोजनों के लिए वे कितनी बार बैठकों में जाय… अभी एमपीआईडीसी की समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों , मीडिया कर्मियों के साथ इन गणमान्यों ने भी हिस्सा लिया ..उसके बाद कलेक्टर ने भी इन गणमान्यों के साथ बैठक कर ली , अब कल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ फिर गणमान्यों की चर्चा ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में होगी.. उसके पहले आज 11 बजे महापौर ने भी इन गणमान्यों को चर्चा के लिए बुलाया है .. नतीजतन इन गणमान्यों की मुसीबत ये है कि कितनी बार एक ही मुद्दे पर चर्चा करें और एक जैसे सुझाव दे और निर्देश माने.. अभी सांसद , विधायकों , मंत्रियों से लेकर पार्षदों की गणमान्यों के साथ बैठकें बची है.. यानी इंदौर के गणमान्य जनवरी के पहले हफ्ते तक बैठकों के लिए बुक रहेंगे .. आज सुबह एक कांग्रेसी मित्र का फोन आया .. भिया ये गणमान्यों की नई सूची कहा मिलेगी … राहुल जी की भारत जोड़ो यात्रा के लिए बुलाना है ..!
( एक भुक्तभोगी गणमान्य नागरिक तर्फे राजेश ज्वेल





