आरती शर्मा
_सेक्स-विकृति चरम पर है. नामर्दी इस सीमाहीनता तक बढ़ी है की महिला वर्ग पागलपन के स्तर पर है. संचार माध्यमों और सोशलमिडिया ने सेक्स के लिहाज़ा माहौल को पूरी तरह गरम कर रखा है. पोर्न तो हर किसी के पॉकेट में है. आजकल फीमेल्स किसी भी हद तक जाने को बेताब हैं. कुछ पत्नियां कहती हैं की पति की खुशी के लिए वे उसके सामने सफल सेक्स करवाना पशंद करती हैं. कुछ कहती हैं की वे ऐसे वास्तविक मर्द से सेक्स करवाना चाहती हैं जो उनकी माँ के सामने करे और माँ से भी करे. कुछ की मांग होती है की वे ऐसा मर्द चाहती हैं जो उनके साथ ही उनकी एकाधिक सहेलियों को भी सेक्सतुष्टि दे. इस तरह की डिमांड अक्सर की जाती है : चेतना मिशन के डायरेक्टर डॉ. विकास मानवश्री का सेक्स पाने के लिए._
चेतना मिशन महज सेक्सोलॉजी का रिसर्च पॉइंट नहीं है. यहाँ भावना, संवेदना, चेतना का विकास कर मनुष्य को पूर्णता का शिखर दिया जाता है. यह मानव निर्माण की पौधशाला है. हमारा ऐम बिना कोई भी क़ीमत लिए : इंसान की मानसिक- दैहिक बिमारियों का निवारण है. माध्यम मेडिसिन से अधिक मेडिटेशन है.
डॉ. मानवश्री से उनके शिविरों के जरिये देश-विदेश के करोड़ों लोग संबद्ध हैं. वे योगी-ध्यानी चिकित्सक हैं, लेकिन वे कृष्ण भगवान नहीं, आम इंसान हैं. कृष्ण ने 16 हज़ार नारियों को संतुष्टि की मंज़िल दी. उनको ये मंज़िल उन्होंने भी उनसे संभोग करके नहीं दी. संभोग उन्होंने केवल अपनी 8 पत्नियों से किया. संतान भी उन्हीं से पैदा हुई. मानवश्री से तो लाखों लड़कियां जुडी हैं. क्या कोई इंसान इतनों से सेक्स करता रह सकता है?
हमारा माध्यम प्राणिक हीलिंग, स्पर्शचिकित्सा, मेडिटेटिव मसाज थेरेपी और मेडिटेशन थेरेपी है. आपको आम खाने-चूसने से ही तो मतलब है? गुठली गिनने से नहीं ना? हमारे प्रयोग से आपको वो संतुष्टि मिल जाती है, जो किसी भी भौतिक सेक्स से नहीं मिल सकती– एक बात.
दूसरी बात यह की डॉ. मानवश्री आपके नामर्द को आपके योग्य मर्द बना देते हैं. उसके बाद आप उससे ही संतुष्ट होती रह सकती हैं. मेडिटेशन विद्या से स्पर्म डिस्चार्ज पर कंट्रोलिंग संभव है. जब तक वीर्य नहीं बहता, पेनिस काम करता है ना? सर्जरी से भी पेनिस की डेमेज नसों को ठीक करना और उसको बेहतर आकर देना आज संभव है.
सेक्स पूजा है, साधना है. संभोग एक योग है. इसे सड़क का सब्जेक्ट नहीं बनाएं. कचरा बनकर इसे कलंकित नहीं करें. इसका बेस विशुद्ध प्रेम है. समग्र प्रेम एक साथ कईयों से नहीं हो सकता.
जिन पतियों को अपने सामने किसी और से अपनी पत्नि का सेक्स करवाने में मज़ा मिलता है, उनको अपनी जिंदगी से निकाल कर बाहर फेक दें. ये साले टोटली नामर्द हैं और बहुत घटिया दर्जे के नीच भी हैं. इनकी संतुष्टि के लिए आप अपना नाश नहीं करें.
मां के सामने खुद किसी का सेक्स लेना और मां को भी दिलाना यह भी स्वस्थ मानसिकता नहीं है. सेक्स वैयक्तिक मामला है, सामूहिक नहीं.
जहाँ तक सहेलियों के साथ किसी इंसान से तुष्ट होने की बात है, आपकी पारस्परिक मैत्री भावना हमारी समझ में आती है. लेकिन कोई भी मर्द एक साथ एकाधिक स्त्री को संतुष्ट नहीं कर सकता. एक को संतुष्ट कर दे, बड़ी बात है. हमने स्पष्ट किया की सेक्स निहायत पर्सनल है. ग्रुप सेक्स आसुरी कल्चर है.
मर्द नामर्द क्यों बनता है? मूठ मारने से, कईयों को भोगने से नशा करने से और सेक्सपॉवर की दवा लेने से. इन सबसे पेनिस की नसें डेमेज हो जाती हैं. वे उसे टाइट रखने, वीर्य को संभालने में अक्षम हो जाती हैं. उन नामर्दो का इलाज़ कराएं. बच्चों को तो कारणों से अवश्य ही बचाएँ, वर्ना अगली पीढ़ियां और बदतर हो जाएंगी.





