अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*गांधीजी का अपमान और गरीबों की रोजी पर सवालिया निशान*

Share

संजय गोस्वामी

महात्मा गांधी नरेगा का विज़न देश भर के ग्रामीण परिवारों को कम से कम 100 दिन की गारंटी वाला रोज़गार देकर उनकी रोज़ी-रोटी की सुरक्षा को बढ़ाना था लेकिन जी राम जी के बाद उनका नाम हटा देना मुझे रूला दिया इसलिए मैं लिख पा रहा हूँ क्योंकि उनका आदर्श को भरी संसद जो देश का प्रतिनिधित्व करता है वहाँ फिर उनके विचारों को सूली पर लटका दि गई

क्या भगवान राम ने ऐ कभी कहा उनका नाम बदलकर मेरा नाम राम की जगह जी राम जी कह दो और फ़िल्म स्टार कँगना राणावत ने नया जमाना कह कर और भी अपमान किया पहले महात्मा गाँधी को समझते हैँ उन्होंने नील की खेती पर चम्पारण में गए और किसानों की गुलामी लो आंदोलन में नया मोड़ देकर उन्होंने एक क्रांति ला दि थी इसी टॉपिक2017 में पर मेरा शोधपत्र भोपाल के एमपीएसएसआर में वाचन के लिए बुलाया गया तब मुझे गाँधी जी के बारे में एक से एक विद्वान ने अपने विचार रख कर उनका सम्मान किया इसी पर गाँधी अध्ययन समिति और महात्मा गाँधी अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय द्वारा वर्धा में आयोजित एक राष्ट्रीय अधिवेशन पर गांधीजी के बारे में मौका मिला और वहाँ के प्रोफेसर ने गांधीजी पर कई शोध पत्र पर वाचन दिए

अतः गांधीजी का नाम बदलने से पहले बहुत ही शांत दिमाग़ से सोचा जाता है गांधीजी ने स्वदेशी चीजों का बढ़ाया था और अगर देश उसी रहा पर चलता तो शायद विदेश कर्ज नहीँ होता और देश के लोग खुश रहते, ऐ एक गंभीर मुद्दा इसलिए है कि एक भरी सदन में किसी योजना से नाम ही निकाल दिया गया और ऐ एक शर्मनाक घटना है क्योंकि गांधीजी क़ोई मुग़ल शासक या गलत विचारों से नहीँ थे तो सवाल ऐ उठता है फिर नाम ही मिटा दिया गया

वो भी इतनी बड़ी योजना से हटाना ही था तो गली चौराहा का नाम में परिवर्तन कर देते लेकिन एक भड़ी संसद में इस तरह की घटिया हरकत करने की आवश्यकता ही क्या थी और कैसे संसद से पास भी हो गया ऐ भी हैरान करने वाली है आज आप जो एपसटीन फ़ाइल अमेरिका का देख रहें हैं बिलकुल मत देखिए क्योंकि गाँधी ने सिखाया है बुरा मत देखो बुरा मत सोचो और बुरा मत करो ऐ उस समय का गाँधी था जो ब्रिटिश के बनाए हुए कपड़ो पर लात मार कर अपनी चरखी पर बनाई हुई धागो से बस्त्र बनाया भी और वही पहना भी इसलिए देश में उन्हें राष्ट्रपिता कहते हैँ पहले उनको समझो तब टिप्पणी करना और उसके लिए महात्मा गाँधी अंतराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के यहाँ जाकर देखिए या साबरमती आश्रम अहमदाबाद में देख लीजियेगा वहाँ जहाँ पानी पीते भी थे वहाँ वो कुवॉ आज भी मौजूद है

पहले उनके आश्रम में जाकर देखें और किसी भी राष्ट्रवादी पार्टी ने गांधीजी के नाम से खिलवाड़ नहीँ किया था और भड़ी संसद में ऐ हो गया मैं मानता हूँ कांग्रेस ने देश की आजादी के बाद गलती किए होंगे लेकिन ऐ कतई नहीँ मान सकता की यदि उनका नाम है तो किस उद्देश्य से हटाया गया ऐ संसद में हुआ इसलिए विदेशों में ऐ बात पहुंची होगी और देश शर्मसार हुआ है इसमें क़ोई दो राय नहीँ है हिदुस्तान का विभाजन के लिए गांधीजी जिम्मेदार नहीँ थे ऐ जिन्ना और अंग्रेजी हुकूमत की मिलीभगत चाल थी और जहाँ तक हिन्दू मुसलमान की बात है वो अगर टूटता तो देश के अंदर कितनी आग फैलती जरा इसका भी अंदाजा लगाइये देश जब बंटवारा में ही जल रहा था तो ऐ भारत में हिन्दू मुसलमान होता तो और भी धर्म के लोग थे सब बंट जाते और देश कमजोर होता और बाद में आपस में ही लड़ते रहते, इसलिए पहले उनके बारे में समझने की कोशिश करें और तब लगता है ऐ देश के लिए ठीक नहीँ है तो चुनाव में ऐ मुद्दा आना चाहिए की मनरेगा की जगह जी राम जी रखनेवाला हूँ

अगर जनता जीता देती तो एक लोकतान्त्रिक व्यवस्था को मैं सह्रदय स्वीकार करता मीडिया में गांधी जी पर खुब बोलो और हमें याद आती है की स्वच्छ भारत में गांधी जी की खुब प्रचार होती है क्योंकि वो स्वच्छता पर बहुत ध्यान देते थे लेकिन जब उनका नाम और चीज से हटता तो चुनाव में इसके परिणाम एक अलग ही होता गांधीजी से एक और सबक लेना चाहिए ऐ जो शांति बिल है क्या देश के भले के लिए है गांधी जी स्वदेशी की बात करते थे तो परमाणु सयन्त्र जैसे संवेदनशिल मुद्दे को विदेशों के लिए क्यों भारत में खोला गया और इससे अपने वैज्ञानिकों से भरोसा उठेगा और जिन्होंने 1998 में सीटीवीटी बैन के बाद भी परीक्षण कर लिए और चीन और पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश गया जो बार बार हमारे सैनिकों को मार डालता था वह पाकिस्तान ने हरबराहट में भारत की देखा देखी चीन से परमाणु सामग्री ली और बिस्फोट किया जो फुस जैसा था उसके बाद वहाँ उस समय रेडीएशन कितना फैला था उस पर भी नजर डाल ले और उसी के बाद चीन ने उसपर इसके लिए इतना कर्ज डाल दिया की वो अभी तक उबर ही नहीँ पाया

लेकिन भारत में जो परमाणु परीक्षण किये थे वो एटम बम से भी ज्यादा शक्तिशाली हाइड्रोजन बम था और जो सूर्य की क्रिया के अनुसार था इसलिए वहाँ रेडीएशन नहीँ फैला था और बाद में अटलजी ने 11 मई को हर साल नेशनल टेक्नोलॉजी डे मनाने का एलान किया और उन्होंने ही एक बार भड़ी सदन में कहा था पार्टी आएगी, जाएगी सत्ता आएगी सत्ता जाएगी लेकिन इस देश का संविधान रहना चाहिए इसलिए जब क़ोई संविधान बन जाते हैँ तो उसमें संसोधन करने की जरुरत नहीँ होनी चाहिए शांति बिल पास तो कर दिया लेकिन क्या इस क्षेत्र में जो लक्ष्य है वो हासिल होगी इसकी सम्भावना हमें दूर दूर तक नहीँ दिखाई देती क्योंकि ऐ क्षेत्र ऐसा है कि इसमें काफी सावधानी और सुरक्षा अहम होता है और अभी भी ऐ शोध का विषय है अगर नहीँ पता तो फ्रांस में इतर यानी फ्यूजन रियेक्टर के बारे में जाने और सभी तक सफलता हासिल नहीँ हुई है नाभिकीय क्षेत्र अन्य क्षेत्र से अलग है जैसे हम इसके खोज के बारे में चर्चा करें तो 1942 की दोपहर को, शिकागो यूनिवर्सिटी के स्टैग फील्ड के स्टैंड के नीचे एक स्क्वैश कोर्ट में बने एक बहुत बड़े टेंट के अंदर एटॉमिक युग की शुरुआत हुई। वहाँ, इटैलियन वैज्ञानिक एनरिको फर्मी की देखरेख में, पहली कंट्रोल्ड न्यूक्लियर फिशन चेन रिएक्शन को तैयार किया गया।

यानी 17 और 18वी शताब्दी की खोज नहीँ ऐ एक तरह से मात्र 19वी सदी का ही खोज है और भारत ने पहला परमाणु रिएक्टर अप्सरा भारत में वैज्ञानिक भाभा ने पहला परमाणु रिएक्टर का निर्माण वर्ष 1956 में हुआ था। यह एशिया का पहला परमाणु रिएक्टर भी था । जो मुंबई के ट्रॉम्बे में स्थित है यानि विश्व में जब 1942 में खोज हुई तो भाभा ने 12 से 14 साल में ही बना डाला जबकी अन्य क्षेत्र में भारत विश्व के खोज के मुकाबले उतना जल्दी कर ही नहीँ पाया आज भी भारत में थोरियम पर सफलतापूर्वक कार्य चल रहा है और जब ऐ सफल होगा तो भारत खुद ही आत्मनिर्भर हो जायेगा जो भाभा का 3 स्टेज परमाणु कार्यक्रम के अंतर्गत आता है अगर भारत टेक्नोलॉजी में अव्वल नहीँ होता तो दो बार परमाणु परीक्षण कैसे कर सकता था जहाँ तक रियक्टर बनाने की बात है तो कम से तीन साल तो बिल्डिंग बनाने में लग जाते हैँ जो अन्य उद्योग की बिल्डिंग से अलग होता इसमें भूकंप में भी कुछ ना हो इसका ख्याल रखा जाता और परमाणु ऊर्जा से सम्बंधित काम रेगुलेटरी बोर्ड करता जिसे आईएईए का गाइडलाइन फॉलो करना पड़ता है

उसके बाद मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल,इंस्ट्रूमेंटशन को इनस्टॉल करना इतना आसान नहीँ होता है उसके बाद पाईपिंग और वेल्डिंग और उसका टेस्ट करने में ही कम से कम 5 साल लग जाते हैँ क्योंकि इसमें जो टैंक बनते हैँ वो स्पेशल गुणवत्ता नियम का पालन कर ही बनाए जाते हैँ अतः निजी कंपनी के प्रवेश से कितना बनेगा ऐ भविष्य में मालूम हो जायेगा क्योंकि जो आप समझ रहें हैँ वो है नहीँ कमीशन होते होते कम से 10 से 15 साल लग जायेगा और जैसे जैसे डिले होगा जबरदस्ती तो कर नहीँ सकते है क्योंकि इसके कुछ पार्ट्स फ़ौरन से भी आते हैँ अतः वहाँ से यहाँ आने में समय लगेगा क्वेश्चन यहाँ ऐ है कि केवल कागजों पर कह कर नहीँ हकीकत में जाने की आवश्यकता है जल्दीबाजी की तो क्वालिटी टेस्ट नहीँ होगा और ऐसे उपकरण लगे तो रेडीएशन का लीकेज होगा जिसका खामियाजा निर्दोष लोंगो को ना जाने कितने सालों तक उठाना होगा विकिरण का रिसाव इसलिए हो सकता है की आप क्वालिटी टेस्ट कम समय में कर ही नहीँ पाएंगे क्योंकि एक दो उपकरण नहीँ लगाये जाते हैँ बल्कि कम से कम 100 उपकरण तो होते ही हैँ

अतः ऐ सब या तो प्राइवेट कम्पनी समझ नहीँ पा रही या क़ोई मिसअंदरस्टैंडिंग है जो उसे बाद में मालूम होगा और इसकी पढ़ाई भी कड़ी है जो देश में गिने चूने संस्थान में है पहले इसको पढ़ाई करवाये तब ही जब लोंगो को इसका फायदा या नुकसान के बारे में पता चलेगा।

(यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है)

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें