मध्यप्रदेश में जब से 1989 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग जैन मुख्य सचिव बनाए गए हैं तब से उनके और मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा के बीच में इस बात को लेकर संधि हो गई है कि, मप्र में किसी भी जिला कलेक्टर को जानबूझकर न तो अपमानित किया जाएगा और न ही उन्हें प्रताडि़त किया जाएगा, जैसा कि, पूर्व मुख्यसचिव इकबाल सिंह और पूर्व मुख्य सचिव वीरा राणा के जमाने में होता था।
ये दोनों पूर्व मुख्यसचिवों ने एक ही इलाके में अपना-अपना आशियाना बनाने के चक्कर में विवादों में रहे इकबाल सिंह बैंस ने तो बंगला नियमों को ताक में रखकर बनाने मेें कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन मप्र में कलेक्टरों को अपमानित करने का कोई मौका भी नहीं छोड़ा, जिसकी वजह से युवा आईएएस अधिकारियों में घनघोर निराशा भी फैली।
सूत्रों के अनुसार जबसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टर संस्थानों की इज्जत को लेकर संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सबसे पहले इकबाल सिंह के सताए युवा आईएएस अधिकारी आदित्यसिंह को हरदा का कलेक्टर बनाया और बाद में जितने भी कलेक्टर सताए गए उनके संरक्षण के लिए मुख्यसचिव अनुराग जैन को हिदायत देते हुए सुनिश्चित करने को कहा कि, कलेक्टर संस्थानों की प्रतिष्ठा बनाए रखना सरकारी की नैतिक जिम्मेदारी है, क्योंकि सरकार की सकारात्मक छवि को प्रस्तुत करने के लिए सबसे पहले कलेक्टर का चेहरा ही सामने आता है।
इसी के चलते मुख्यमंत्री के निर्देश पर जब कल भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा का 2047 का मास्टर प्लान अंतिम रूप नहीं ले लेता तब तक संभवत: इन जिलों में पदस्थ किसी भी कलेक्टर को नहीं बदला जाएगा, लेकिन निवाड़ी में कलेक्टर रहे वर्तमान इंदौर संभाग के अपर आयुक्त तरुण भटनागर जैसे युवा आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अनावश्यक विभागीय जांच करके इकबाल सिंह बैंस द्वारा ऐसे अधिकारियों को तनाव में रखा गया था अब ऐसे अधिकारियों की मुख्य सचिव अनुराग जैन फिर से फाइल बुलाकर उनके खिलाफ जबरदस्ती पूर्व मुख्य सचिव वीरा राणा द्वारा स्थापित की गई विभागीय जांच को समाप्त करते हुए उन्हें राहत मिल जाए तो चौंकिएगा मत…।





