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*क्या फ्लाईंग काफिन बनने की राह पर है जगुआर*

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पांच महीनों में तीन हुए दुर्घटनाग्रस्त

नई दिल्ली । भारतीय वायुसेना के जगुआर लड़ाकू विमान बीते पांच महीनों में तीन बार दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं, इससे इन विमानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ताजा दुर्घटना 9 जुलाई को राजस्थान के चूरू जिले के भानुदा गाँव के पास हुई, इसमें दो पायलटों की जान चली गई। इससे पहले, अप्रैल में गुजरात में एक और जगुआर क्रैश हुआ था जिसमें एक पायलट की मृत्यु हो गई थी, और मार्च में हरियाणा में भी एक जगुआर दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। लगातार हो रहे इन हादसों के बाद जगुआर की तुलना अक्सर मिग-21 से हो रही है, मिग-21 को अतीत में फ्लाइंग कॉफिन (उड़ता ताबूत) कहा जाता था, क्योंकि इससे जुड़े हादसों की संख्या बहुत अधिक थी। हालांकि, भारतीय वायुसेना के पूर्व फाइटर पायलट विंग कमांडर रोहित काद्यान (रिटायर्ड) इस तुलना से सहमत नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 20 साल तक जगुआर उड़ाया है और वायुसेना का रखरखाव बहुत अच्छा है। उनका मानना है कि मशीन में तकनीकी खराबी कब आ जाए, यह अनुमान लगाना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि जगुआर का कॉकपिट पायलट-फ्रेंडली है और इस कॉकपिट को कई बार अपग्रेड किया गया है, जिसमें नवीनतम नेविगेशन तकनीक भी शामिल है। यह कम ऊंचाई पर भी बहुत स्थिर रहता है। भारतीय वायुसेना के पास जगुआर फाइटर जेट की 6 स्क्वॉड्रन हैं। यह ब्रिटेन और फ्रांस की साझेदारी से बना ट्विन-इंजन विमान है, जो 1700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। यह 1970 के दशक से भारतीय वायुसेना का हिस्सा है। जगुआर के इन हादसों की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया गया है। जिसकी रिपोर्ट जल्द सामने आएगी। लेकिन जगुआर लड़ाकू विमान के बार-बार क्रैश होने से वायुसेना की चिंता बढ़ रही है। क्योंकि इन हादसों में सेना अपने युवा और होनहार पायलटों को गंवा चुकी है। जो कि सुरक्षा को लेकर जारी तनाव के बीच पायलट और विमान का नुकसान सेना और देश के लिए दोहरीमार है।

Ramswaroop Mantri

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