अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

क्या सचमुच क्रांति किसानों के खेतों की कोख में पल रही है ?

Share

*सुसंस्कृति परिहार

अभी पिछले शुक्रवार की ही तो बात है राहुल गांधी ने कहा कि  ‘कृषि विरोधी’ कानूनों को वापस लिया जाना चाहिए. उन्होंने ‘फार्मर्स प्रोटेस्ट’ हैशटैग से ट्वीट किया, ‘‘खेत को रेत नहीं होने देंगे, मित्रों को भेंट नहीं देने देंगे. कृषि विरोधी क़ानून वापस लो.”और कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘नौ माह से कृषि के क्रूर काले कानूनों के ख़िलाफ़ एक “क्रांति” खेतों की कोख में पल रही है, संघर्ष का जन्म होगा, अब रण “भीषण” होगा। कांग्रेस के इस हैशटेग से क्या मनोहर लाल खट्टर ने क्रांति कारी किसानों को भीषण रण की चुनौती दी है ?

 आज शनिवार को किसानों के लहू से धरती का टीका भी हो गया।करनाल में सीएम मनोहर लाल की  पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव की बैठक का विरोध कर रहे किसानों ने नेशनल हाईवे जाम कर दिया। हंगामे को रोकने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया। इस लाठीचार्ज में कई लोग घायल हो गए। लहू बहाते पुलिस का बर्बर अत्याचार सहते किसानों के जो फोटो आ रहे वे हृदय विधायक हैं।ज़रा सोचिए ये वही किसान जो ख़ून पसीना एक कर ठंड,ओला,आंधी तूफान,बाढ़,सूखा,भीषण ताप के बीच अन्य उत्पन्न कर हमारी क्षुधा शांत करते हैं। कारपोरेट से खेतों को बचाने , उनके भंडारण से  अन्न बचाने के लिए यही किसान पिछले नौ माह से शांति पूर्ण आंदोलन चला रहे हैं।वे तीन काले कृषि कानूनों हटाने की एक सूत्रीय मांग पर अडिग है।जिसका 10 दौर की बातचीत में कोई समाधान नहीं निकला है। किसान मोर्चे पर डटे हैं और महापंचायत करते हुए अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं।

हरियाणा में तो किसान पहले से भाजपा के लोगों को कोई आयोजन नहीं करने दे रहे हैं कई मंत्रियों को उल्टे पांव भागना पड़ा है।ऐसे हालात में मुख्यमंत्री खट्टर ने करनाल में जब बैठक में जाने की घोषणा की तो  किसानों का पारा चढ़ गया वे काले झंडों के साथ जिस तादाद में पहुंचे उससे ज्यादा वहां पुलिस का इंतजाम था।इसका फायदा उठाते हुए पुलिस ने किसानों पर पहले वाटर केनन का प्रयोग किया जब इसका  असर नहीं परिलक्षित हुआ तो अंधाधुंध लाठीचार्ज कर बड़ी संख्या में किसानों को घायल कर दिया तथा बहुत से किसानों को गिरफ्तार भी कर लिया गया ।यह ख़बर आग की तरह देश दुनिया में फैल  गई।

किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी बसताड़ा टोल ,प्लाजा करनाल पहुंच गए । उन्‍होंने कहा, गिरफ्तार किसानों को नहीं छोड़ा गया तो जाम नहीं खोला जाएगा। जाम सभी प्रमुख रास्तों पर लगाया गया  है । बड़ी तादाद में महिलाएं और किसान जगह जगह विरोध प्रर्दशन कर रहे हैं ।चढ़ूनी ने किसानों को कहा है कि हमारी सख्त हिदायत है कि न तो किलकी मारें, न ही बट्टा। जो ऐसा कर रहा है, उसे पकड़ लिया जाए। हमने कभी नहीं कहा कि किसी को बट्टे मारो, लाठी चलाओ। हमें शांतिपूर्वक संघर्ष करना है। हालांकि गांव जंवार के लोगों ने अपने लट्ठों में तेल पिलाना शुरू कर दिया है।

बेशक, किसानों की मंशा साफ है लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि आखिरकार किसान कितना सहेगा और कब तक ?25सितंबर को किसानों ने बंद की घोषणा की है।उधर 19 विपक्षी दल 20 से 30 सितम्बर तक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले हैं जिनमें किसान आंदोलन की मांगे भी शामिल हैं। शांति पूर्ण अहिंसक इस आंदोलन को लेकर दुनिया भर के सामाजिक कार्यकर्ता गंभीर और चिंतित हैं।यह आंदोलन किसी क्रांति का रुख करता है या समस्या का समाधान ले समाप्त होता है कुछ कहा नहीं जा सकता ।मगर यह तो तय है कि यह आंदोलन यदि नहीं थमता है तो यह उत्तर प्रदेश सहित कई प्रदेशों से भाजपा को उखाड़ फेंकने की क्षमता रखता है।देखना होगा बर्चुअल मीटिंग कैसे सरकार का बेड़ा पार करती हैं या लाठीचार्ज कितने रास्ते खोलते हैं ।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें