-सनत कुमार जैन
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में जो जानकारी दी है। उसके अनुसार केंद्रीय सुरक्षा बलों के एक लाख से ज्यादा पद खाली पड़े हुए हैं। सीआरपीएफ के 33730 पद खाली पड़े हुए हैं। सीआईएसएफ के 31782 पद खाली पड़े हुए हैं। बीएसएफ के 12808 पद खाली पड़े हुए हैं। आईटीबीपी के 9861 पद, एसएसबी के 8646 और एआर के 3377 पद पिछले कई वर्षों से खाली पड़े हुए हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों के सभी रिक्त पदों को जोड़ दिया जाए,तो यह संख्या एक लाख से ज्यादा होती है। पिछले 5 वर्षों में सरकार ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के केवल 72231 पदों को बढ़ाया है। केंद्रीय सुरक्षा बलों में जवानों की आत्महत्या की घटनाएं पिछले 5 वर्षों में बड़ी तेजी के साथ बढ़ रही हैं। केंद्रीय सुरक्षा बलों के 730 जवानों ने आत्महत्या की है।
47891 जवानों ने स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति ले ली है। वहीं 7664 जवानों ने इस्तीफा दे दिया है। केंद्रीय मंत्री ने संसद में यह आश्वासन दिया है। खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेजी के साथ शुरू की जा रही है।उन्होंने कहा जो पद खाली हुए हैं। वह सेवा निवृत्ति के बाद रिक्त पद और जवानों द्वारा इस्तीफा दिए जाने के कारण रिक्त हैं। पिछले 10 वर्षों में पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों में तनाव देखने को मिल रहा है। सीमावर्ती राज्यों में तनाव बना हुआ है। जम्मू कश्मीर और मणिपुर जैसे राज्यों में कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए लाखों की संख्या में अतिरिक्त सैन्य बल तैनात किए गये हैं।
उसके बाद भी कानून व्यवस्था की स्थिति को संभालने में केंद्र सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जम्मू कश्मीर मैं आतंकी हमले लगातार बढ़ रहे हैं। मणिपुर में दोनों समुदायों के बीच गृह युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। आंतरिक और बाहय सुरक्षा मे भारत सरकार को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।भारत में जिस तरह से धार्मिक उन्माद के कारण आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में जिस तरह का केंद्रीय सुरक्षा बलों का उपयोग हो रहा है। स्वतंत्रता के बाद से पिछले 70 वर्षों में सैन्य बल का इस तरह का उपयोग नहीं हुआ था। वर्तमान केंद्र सरकार,सेना में भरती जिस तरह से साल दर साल होती थी।
उस प्रक्रिया को बाधित कर दिया गया है। केंद्र सरकार इस बीच अग्निवीर योजना लाई। वह भी विवादों में फंस गई है। जिसके कारण सेना पूर्व की तुलना में सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। जिस तरह से दुनिया के देशों में संघर्ष बढ़ रहा है।ऐसी स्थिति में सेना और अर्धसैनिक बलों का कमजोर होना चिंता का विषय है। सरकार को जिस सजगता के साथ सेना और अर्धसैनिक बलों को मजबूत करने का काम करना चाहिए था। सरकार की प्राथमिकता सैन्य बलों को मजबूत बनाने की दिशा में काम करने की होनी चाहिए। वैसी स्थिति पिछले कई वर्षों से दिख नहीं रही है। जिसके कारण आंतरिक और बाहय सुरक्षा खतरे में है। चीन ने भारत के एक बहुत बड़े भूभाग पर पिछले कुछ वर्षों में कब्जा कर लिया है।विदेश मंत्री जयशंकर का यह कहना, चीन भारत से बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था है। चीन द्वारा लगातार भारत के हिस्से पर कब्जा किया गया है। भारत सरकार की चुप्पी बड़ी चिंताजनक है। सरकार को समय रहते सजग हो जाना चाहिए। अन्यथा इसके दुष्परिणाम देश को भुगतना पड़ेंगे।





