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जिला पंचायत की एक मात्र सामान्य सीट पर जयस का दबदबा, भाजपा-कांग्रेस के कई बड़े नेता हारे

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पेटलावद। 

लगभग 8 वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले दौर के प्रारंभिक परिणामो ने राजनीति समीकरण बिगाड़ कर रख दिए। सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे ये चुनाव, सत्ता में बैठी भाजपा के लिए जमीनी स्तर पर बड़ी चुनौती के रूप में सामने आये। जहा भाजपा के संगठन में बैठे कई नेताओ को करारी हार का सामना करना पड़ा है। वही मुख्य विपक्षी दल कॉंग्रेस के लिए चुनाव मिलाजुला रहा, जिला पंचायत में कांग्रेस का पिछले 20 साल का अभेद किया गया तो अब तक जमीन से गायब जय आदिवासी संगठन (जयस) की इस चुनाव में शानदार एंट्री हुई है और सरपंच, जनपद सहित जिला पंचायत की सीटों पर अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे हैं। भविष्य राजनीति को लेकर कॉंग्रेस की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं तो भाजपा के लिए जयस के रूप में नई चुनोती उभर कर सामने आ गई हैं।

जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 12, 13 और 14 में भाजपा-कांग्रेस ने आपसी तालमेल से लड़ा चुनाव

सरपंच, जनपद की सीटों पर इस बार दोनों मुख्य दलो द्वारा बहुत कम अधिकृत प्रत्याशियों को मैदान में उतारा और सभी मैदान में उतरने वाले कार्यकर्ताओ के लिए मैदान खुला छोड़ दिया गया। वही विकास खण्ड की जिला पंचायत की तीन सीटों क्षेत्र क्रमांक 12 ,13, और 14 पर दोनों मुख्य दल सहित पहली बार पूरी ताकत से मैदान में उतरे जयस संगठन ने अपने अधिकृत प्रत्याशी मैदान उतारे, पेटलावद विकास खण्ड का पूरा चुनाव तीनो मुख्य दावेदारो के आपसी तालमेल से लड़ा गया, तीनो सीटों में अलग-अलग भाजपा-कांग्रेस के नेताओं की साख दाव पर लगी हुई थी। बात करे पेटलावद विकास खण्ड की तो तीनों सीटों पर भाजपा-कांग्रेस और जयस के आपसी तालमेल लड़ा गया। कांग्रेस की और से कांग्रेस विधायक वालसिंह मैडा पूरे समय अपने पुत्र विक्रम मैडा के लिए लगे रहे, तो भाजपा ने इस सीट पर अपने प्रत्यासी नीलेश मीणा को अकेले दम पर चुनाव लड़ने के लिए छोड़ दिया। तो जयस संगठन का पूरा फोकस जिले की एक मात्र सामान्य सीट क्षेत्र क्रमांक 13 पर केंद्रित था।

क्षेत्र क्रमांक 12 

यहां विकास खण्ड के क्षेत्र क्रमांक के लिए भाजपा की और से नीलेश मीणा, कांग्रेस की और से विधायक पुत्र विक्रम मैडा तो कांग्रेस से एक बार फिर से बागी होकर लगातार दो बार की जिला पंचायत सदस्य कलावती गेहलोत और जयस प्रत्याशी के रूप में प्रेमसिंह भूरिया मैदान में थे। यहां भाजपा ने अपने प्रत्याशी नीलेश मीणा की बाग डोर पूर्व विधायक राज्यमंत्री निर्मला भूरिया को प्रभारी बनाया था जिन्होंने ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी के लिए एक भी जनसम्पर्क तक नही कर पाई। वही कांग्रेस विधायक वालसिंह मैडा ने अपने पुत्र विक्रम के लिए इस चुनाव को विधानसभा चुनाव की तर्ज पर लड़ा। बताया जा रहा है विधायक ने अपने पुत्र को जिताने के लिए एक विधानसभा चुनाव में खर्च होने वाली राशि खर्च कर दी, वही बिना किसी वरिष्ठ भाजपा नेता अकेले मैदान में उतरे नीलेश मीणा ने कड़ा मुकाबला किया हालांकि प्रारंभिक रुझान कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में जाता दिख रहा था, कांग्रेस की बागी उम्मीदवार कलावती गेहलोत भी इस परंपरागत सीट पर अपना दबदबा कायम नही रख सकी, जयस संगठन ने केवल उपस्थित के लिए यहां प्रत्याशि मैदान में उतरा जो केवल अपने क्षेत्र से वोट लेने सफल रहा। 

क्षेत्र क्रमांक 13 

       जिले की एक मात्र जिला पंचायत की सामान्य सीट जो कि महिला के लिए आरक्षित है , यह क्षेत्र सांसद गुमानसिंह डामर के प्रभाव वाला जहा से उनके खास भाजपा के जिला महामंत्री कृष्णपाल सिंह राठौर की पत्नी को भाजपा ने अधिकृत प्रत्यासी बना कर उतरा था , कांग्रेस की और से पिछले 20 से अधिक सालों अपना कब्जा जमाये बैठे जिला पंचायत उपाध्यक्ष चन्द्रवीर लाला की पत्नी  मैदान में थी ,यहां मुकाबला हमेशा की भाजपा कांग्रेस के बीच माना जा रहा था लेकिन इतिहास लिखने की तैयारी में जयस संगठन ने भी यहां से अपना प्रत्याशी कृष्णा ईश्वर गरवाल को उतारा जिसने चुनाव के सारे समीकरण बदल दिए और कांग्रेस प्रत्याशी को मैदान से बहार करते हुवे मुख्य मुकाबले में जयस को लाकर खड़ा कर दिया , क्षेत्र के कई बूथों पर कांग्रेस और भाजपा का सूपड़ा साफ कर दिया । सांसद के खास माने जाने वाले कृष्णपाल के लिए सांसद लगातार सक्रिय रहते हुवे प्रचार करते देखे गए लेकिन उम्मीद के मुताबिक न तो भीड़ जुटा सके न ही वोट जबकि बिना शोर शराबे के जयस संघ की तरह अंदर ही अंदर प्रचार कर जीत के करीब तक पहुँच गई। यहाँ भाजपा और जयस अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं , कुछ बूथों के आंकड़े प्रत्याशियों के पास नही होने से फिलहाल तय नही हुवा है लेकिन शोशल मीडिया पर दोनों और से अपनी अपनी जीत के दावे किए जा रहै है । कांग्रेस के लिए विधायक के साथ साथ झाबुआ विधायक कांतिलाल भूरिया , विक्रांत भूरिया सहित बड़े कांग्रेसी नेता प्रचार में कही नही दिखे।

वार्ड क्रमांक 14 

06 माह पूर्व आरक्षण के कारण रुकी चुनावी प्रक्रिया के बाद विकास खण्ड की तीन जिला पंचायत क्षेत्र के लिए केवल क्षेत्र क्रमांक 14 में भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदला यहां से पहले रायपुरिया मंडल के अध्यक्ष शांतिलाल मुनिया उतरे थे महिला सीट होने के कारण मण्डल अध्यक्ष ने हाथ खींच लिए तो बिना किसी तैयारी अजज़ा मोर्चे के जिलाध्यक्ष अजमेर भूरिया की पत्नी अनु अजमेर भूरिया को प्रत्याशी बनाया वही कांग्रेस की और से वर्तमान जिला पंचायत सदस्य शारदा डामोर मैदान में रही यहां पूर्व विधायक निर्मला भूरिया और सांसद गुमानसिंह डामर के भी वर्चस्व की लड़ाई थी , सांसद लगातार इस क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं तो क्षेत्र निर्मला भूरिया के प्रभाव का माना जाता है , अजमेर भूरिया इस क्षेत्र से एक बार जिला पंचायत सदस्य रह चुके है और एक बार हार भी चुके हैं जिसके चलते उनके लिए क्षेत्र नया नही था दूसरी और अजज़ा मोर्चा की नई टीम के साथ मैदान में उतरे और कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी सहित बाकी प्रत्याशीयो के लिए कोई जगह छोड़ी , विकास खण्ड की जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 14 ही एक मात्र सीट है जिस पर भाजपा जीत का दावा मजबूती से कर सकती है , प्राम्भिक आंकड़ों के मुताबिक यहाँ भाजपा को बड़ी जीत मिलती दिख रही हैं ।

जनपद अध्यक्ष और मण्डल अध्यक्ष सहित पहले चरण में हुवे मतदान में हारे भाजपा के कई बड़े नेता

त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव के पहले चरण में 08 साल से जमे हुवे ज्यादातर सरपंच ,जनपद सदस्यों को हार का सामना करना पड़ा पूरे विकास खण्ड की 77 पंचायतो में लगभग 10 पंचायतो में पुराने सरपंच को जीत मिली जिसमे बामनिया, सारंगी, पाचपीपला, कचराखदान , रामपुरिया , झकनावदा जैसी पंचायते शामिल हैं । जनपद पंचायत में भी जनता ने लगभग चेहरों को जनता ने नकार दिया है यहां 25 सदस्यों में से बमुश्किल तीन से चार लोगों की वापसी की सम्भवना है । इस चुनाव में भाजपा के बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है जिसमे भाजपा के ग्रामीण मंडल अध्यक्ष सुखराम मोरी , पूर्व जनपद अध्यक्ष के पति मूलचंद निनामा, युवा मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष नीलेश मीणा, सरपंच संघ के अध्यक्ष मुन्ना निनाना, पूर्व मंडल अध्यक्ष कालूसिंह निनामा , भाजपा के वरिष्ठ नेता और पेटलावद मण्डल महामंत्री के पिता देवीसिंह मैडा, पेटलावद मण्डल उपाध्यक्ष विनेश कटारा , अजज़ा मोर्चे के छगनलाल डामर , रायपुरिया मण्डल उपाध्यक्ष गलियां डोडियार, पूर्व जनपद सदस्य सुशीला खड़िया सरपंच पद के लिए तो उनके पति मोती खड़िया जनपद सदस्य का चुनाव हार गए, कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने वाले पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष सलूनिया दरबार, सहित कई मोर्चो के भाजपाई पदाधिकारीयो सहित वरिष्ठ नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है कांग्रेस के लिए चुनाव परिणाम भी अच्छा नही रहा जिला पंचायत उपाध्यक्ष चन्द्रवीर सिंह राठौर , पूर्व जनपद उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह राठौड़ , कांग्रेस नेता सुखराम मैडा, पेटलावद ब्लॉक मंत्री क्युम शेख तो पंच का चुनाव तक हार गये साथ ही ग्राम पंचायत बामनिया के अपनी जबाबदारी पर कांग्रेस के समर्थन से मैदान में उतरी जोशनी पंवार ,जनपद सदस्य खुशवंत डामर को भी इनके घटिया चुनाव मैनेजमेंट के कारण हार का सामना करना पड़ा , पूर्व मंडी अध्यक्ष घनश्याम सिंह सेमलिया सहित कई कांग्रेसियो की घर रवानगी हो गई। रायपुरिया मंडल अध्यक्ष शांतिलाल मुनिया, अजज़ा मोर्चे के जिलाध्यक्ष अजमेर भूरिया , मण्डल उपाध्यक्ष रमेश सोलंकी, महिला विंग की फुंदी बाई , अजज़ा मोर्चे के पेटलावद मण्डल अध्यक्ष सोहन डामर, जिला मंत्री रामकन्या मखोड सहित कुछ गिने चुने पदाधिकारीयो ने पार्टी की कुछ हद तक लांज बचाई है ।

आधिकारिक घोषणा 14 जुलाई को

पंच सरपंच का फैसला लगभग हो चुका है लेकिन जनपद , जिला पंचायत के परिणाम तीन चरणों के मतदान के बाद आधिकारिक रूप से 14 जुलाई को नतीजे घोषित होना है फिलहाल जनपद और जिला पंचायत चुनाव की बूथों पर हुई गिनती के आंकड़े से कई दावेदार जीत के दावे कर रहे हैं तो कई स्थानों पर देर रात तक हुई गणना के कारण प्रत्याशियों को सही आंकड़ों की जानकारी नही मिल रही जिससे ज्यादातर सीटो पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है । चुनाव के परिणाम जो कुछ भी हो भविष्य राजनीति में जयस संगठन की इंट्री हो गई हैं जिससे न केवल कांग्रेस बल्कि भाजपा की मुश्किलें भी बढ़ गई है, क्योकि इस चुनावी मैदान में दोनों मुख्य दलों ने जयस संगठन को कमजोर आंकते हुवे अपनी-अपनी चुनावी रणनीति तैयार की थी जिसके कारण कई जगह पर सत्ता पक्ष और विपक्ष को मात खानी पड़ी है।

Ramswaroop Mantri

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