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.कथा एक साज़ के दीवाने की…सेक्सोफोन फेस्ट पंद्रह मार्च को

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दस बारह साल पहले का किस्सा है । मैं उन दिनों प्रभात किरण के लिए शहर की महफिलों का हाल लिखता था । शुरुआती नवंबर की खुशनुमा शाम थी । मेरे दोस्त ने मुझसे पूछा तुम्हें पता है आज के दिन 6 नवंबर को दुनिया  सेक्सोफोन दिवस के रूप में मनाती है और  हमारे इंदौर में आज कोई कार्यक्रम नहीं । क्या इंदौर में कोई सेक्सोफोनिस्ट है ?मैंने उन्हें राजू कुलपारे के बारे में बताया । उन्होंने उस रात राजू कुलपारे से मिलने की जिद की । हम हार फूल लेकर राजू भाई के घर गए ।उन्हें इस दिन की बधाई दी । राजू भाई बहुत जज्बाती हो गए । गीली आंखों और भरे गले से उन्होंने हमसे पूछा आपने तो मेरे लिए बहुत कुछ किया , अब मुझे इस दिन के लिए क्या करना चाहिए ? 

 तब तक रात ढल चुकी थी , कोई कार्यक्रम नहीं हो सकता था । तो  राजू भाई ने कहा वे राजवाड़ा पर माता अहिल्या को अपना बाजा सुना कर यह दिन मनाएंगे । कुछ संगीत का प्रेम था और कुछ हम लोग भी तरंग में थे । राजू कुलपारे अपना साज़ लेकर  साथ हो लिये। राजवाड़ा पर आए। तब प्रशासन होस्टल के वार्डन की तरह शहर को घड़ी के साथ नहीं सुलाता था। आधी रात को राजू कुलपारे के और चाहने वाले भी अहिल्या प्रतिमा के नीचे जुटने लगे । उस रात राजू कुलपारे ने राजवाड़ा के बगीचे में खूब बजाया । संजय वर्मा की कार का बार उस रात राजवाड़ा की ही तरह सार्वजनिक हो गया था।अगले दिन एक सांध्य दैनिक ने इस मदमस्त सेक्सोफोन पार्टी की खबर भी छापी थी।
मेरे उस दोस्त का नाम था संजय वर्मा । इंजीनियर , उद्योगपति , लेखक , पत्रकार संजय वर्मा के कामों की फेहरिस्त में उस दिन एक काम और जुड़ गया – इस बेशकीमती खूबसूरत साज़ को दुनिया तक पहुंचाना । तब से एक सिलसिला चल रहा है , वह हर साल सेक्सोफोन दिवस पर एक शो करते हैं । सेक्सोफोन पर अधिकार से लिखते बोलते हैं ।पहले पहले लोग पूछते थे यह सैक्सोफोन क्या बला है ,

अब इंदौर के कई शादी पार्टियों में अकेले सेक्सोफोन के प्रोग्राम होने लगे हैं । इस बाजे से जितना सुख उन्हें मिला उसका हक उन्होंने अदा किया ।मज़े की बात यह है कि संजय वर्मा के परिवार में संगीत की कोई परंपरा नहीं है। साज़ तो छोड़िये शायद सीटी भी कोई नहीं बजाता। मगर उन्हें गाने की भी समझ है और सेक्सोफोन से तो इश्क ही है। उन्होंने कम से कम इस शहर में या कहना चाहिए मालवा में सेक्सोफोन को अलग पहचान दिलाई है, सम्मान दिलाया है ।
 राजू कुलपारे  की याद में वे इस साल पंद्रह मार्च को शाम सात बजे से  रवींद्र नाट्य गृह में सैक्सोफोन फेस्टिवल कर रहे हैं  ,जिसमें राजू भाई के दस शिष्य सैक्सोफोन बजाकर अपने गुरु को याद करेंगे। अगर लॉक डाउन या कर्फ्यू नहीं लगा तो कार्यक्रम तयशुदा तारीख और वक्त पर होगा। मनोज बेन, योगेश कुलपारे, लिलेश कुमार, रितेश लुंकड़ , असलम खान, पवन शाह, सदानंद इंगले, डॉ अक्षत पांडे जैसे जाने माने सेक्सोफोन वादक आ रहे हैं। जब ये सब एक साथ बजाएंगे तो क्या आलम होगा कहा नहीं जा सकता। एक बार दुआ सभागृह में इस तरह का कार्यक्रम हुआ था तो जगह कम पड़ गई थी और आवाज़ से दीवारें झन्नाने लगी थीं।

दीपक असीम

Ramswaroop Mantri

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