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गाँधी को जिंदा रखिए, देश जिंदाबाद रहेगा

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 पुष्पा गुप्ता

    _आप एक चश्मा, लाठी, पॉकेट-घड़ी या पतली गोल रेखा चाहें जो खीच दीजिये गाँधी उकेरा आएंगे. यही उनकी सहजता है | यही उनकी आम-जन के लिए उपलब्धता भी. आज से 107 साल पहले जब, गाँधी घर वापसी किये तो,  मुम्बई बंदरगाह पर रखा गया उनका पहला कदम, भारतीय इतिहास मे काल खंड की एक महान यात्रा की शुरुआत बन गयी।_

        आज जब हम भारतीय गाँधी की बात करते हैं तो उनको जनवरी 1915 से जनवरी 1948 तक मे ही देख पाते हैं | लेकिन जब शेष विश्व गाँधी को देखता है तो वो हमसे 21 साल पहले से गाँधी को देखना-समझना शुरू करता है.

       _वो 21 साल, दक्षिण अफ्रीका में, जहाँ एक साधारण सा आदमी, अपने देश से दूर एक अनजान संस्कृति के, ब्रिटिश सम्राज्य में, अपने हमवतनो की लड़ाई लड़ता है और जीतता है |_

         अपने ही देश मे एक विशेष विचारधारा द्वारा आज गाँधी के अस्त्र को भले ही मज़बूरी और कायरता का प्रतीक बताया जा रहा हो | लेकिन इतिहास जानता है कि गाँधी का वो अस्त्र भारत आने से पहले ही अपनी सफलता सिद्ध कर चुका था.

       गाँधी भारत मे आ कर कोई नया प्रयोग नही कर रहे थे, हाँ गाँधी के ये प्रयोग भारत के लिए जरूर नये थे.

          _गाँधी दक्षिण अफ्रीका मे सफल रहें, गाँधी भारत मे सफल रहें, गाँधी इंग्लैंड मे सफल रहें, गाँधी अपने सम्पूर्ण जीवन-काल मे सफल रहें. गाँधी आज अपने न रहने पर भी सफल हैं, गाँधी हजार साल बाद भी सफल रहेंगे |_

         लेकिन जिस भी दिन इस देश मे गाँधी असफल हो गए एक राष्ट्र के तौर पर ये देश भी असफल हो जायेगा.

    तो गाँधी को जिंदा रखिए देश जिंदाबाद रहेगा | गाँधी जहाँ कही भी हों भारत को आशीर्वादित करते रहेंगे|

      (चेतना विकास मिशन)

Ramswaroop Mantri

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