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केरला डायरी….केरल में 14 में से 10 जिलों में महिला कलेक्टर

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टीकेआर पिल्लई
केरल में 14 में से 10 जिलों में महिला कलेक्टर कार्यरत हैं। इसे केरल सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है। इसका एक और लक्ष्य है जो भ्रष्टाचार को खत्म करना है। केरल में न केवल कलेक्टरों के लिए बल्कि कई महत्वपूर्ण पदों पर विशेष रूप से राजस्व संबंधी पदों पर महिला अधिकारियों को नियुक्त करना एक आम बात हो गई है।इसके साथ जनता के सहयोग से समाज में अपराध को कम करने के लिए केरल में जनमैत्री सुरक्षा परियोजना बनाई गई है. इस व्यवस्था ने पुलिस और जनता के बीच की खाई को प्रभावी ढंग से पाट दिया है। जनमैत्री पुलिस में अच्छी तरह से प्रशिक्षित पुरुष और महिला पुलिस अधिकारियों को नामित करता है, जो प्रत्येक परिवार और नागरिक के साथ सीधे बातचीत करते हैं और क्षेत्र में होने वाली घटनाओं से परिचित होते हैं।इन सभी अधिकारी, चाहे वो कलेक्टर हो, पुलिस अफसर या कोई ओर, सब  जनता के मित्र के रूप व्यवहार करते है, जिससे जनता के हौसला बढ़ता है.  इसकेलिए हर प्लार्ट्फोर्म के उपयोग करते है. इस संबंधी कुछ  ताजा उदाहरण इस प्रकार है. महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी कला महोत्सव के दौरान पत्तनमतिट्टा जिला कलेक्टर दिव्या एस अय्यर ने छात्रों के साथ ग्रुप डांस में भाग लेकर सभी  को चौंका दिया था । डॉ अय्यर वहां महोत्सव की तैयारियों का जायजा लेने गए थे। दूसरे ओर वायनाड जिला कलेक्टर ए गीता ने प्रसिद्ध वल्लियुरकावु मंदिर में ‘नलचरितम’ कथकली में ‘दमयन्ती’ का किरदार निभाकर दर्शकों को चौंका दिया। कथकली केरल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नृत्य रूप है. इसके आलावा त्रिशूर जिला कलेक्टर हरिता वी कुमार ने जिला कला महोत्सव में “तिरुवतिराकली” प्रतियोगिता  में भाग लेकर केरल के लोगों की वाहवाही जीती। “तिरुवतिराकली” केरल में महिलाओं द्वारा भगवान शिव के जन्मदिन तिरुवतिरा के दिन किया जाने वाला एक अनूठा नृत्य है। इस नृत्य को स्कूलों, विश्वविद्यालयों में कला उत्सवों में प्रतियोगिता का विषय बनाया जाता है. यह कुछ उदाहरण मात्र है.
इन सभी के जरिये, प्रशासन और जनता के बीच की खाई को समाप्त  करने के वजह से केरल में भ्रष्टाचार में कमी आई है. इस के साथ, भ्रष्टाचार को पूर्ण रूप से समाप्त करने के लक्ष्य से केरल में “अक्षय केंद्र” स्थापित किया गया है, जो एक कंप्यूटर नेटवर्क है। वैसे तो ऐसे कंप्यूटर नेटवर्क कई राज्यों में मौजूद हैं, लेकिन केरल में लोगों को इससे जितना फायदा मिलता है, उतना दूसरे राज्य में नहीं है. अक्षय सेंटर द्वारा जमीन के नामांतरण सहित जनता और सरकार से जुड़ा हर मामला को निदान किया जाता है, जो हर 500 मीटर पर उपलब्ध होते हैं। हर सरकार में राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार के बड़े आधार होते हैं। केरल सरकार ने भूमि पंजीकरण सहित राजस्व संबंधी सभी कार्यों को ऑनलाइन कर दिया है। नॉन एन्कम्ब्रन्स सर्टिफिकेट सहित रजिस्ट्री केलिए अनिवार्य हर काम ऑन लाइन में किया जाता है.
केरल में  भ्रष्टाचार मुक्त शासन के बारे में बात करते वक्त मेरे अपने व्यक्तिगत अनुभव भी जोड़ा जाना उचित होगा. मैंने मध्य प्रदेश के मेरे निवास के पते के आधार नंबर के साथ केरल में मेरे नाम पर एक आवास भूखंड पंजीकृत किया गया था। जब मैं अपने नाम पर उस जमीन के नामांतरण  के लिए अक्षय केंद्र पहुंचा तो उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया क्योंकि रजिस्ट्री में दर्ज स्थायी पता दूसरे राज्य का है। मैं सीधे विलेज ऑफिस गया जहां हर खिड़कियों पर लिखा हुआ था  “यहां कोई आपसे रिश्वत मांगे तो इस नंबर पर कॉल करें”। अन्दर जाकर विलेज ऑफिसर से मिला, जो एक महिला थी। उसने रजिस्ट्री में मेरे नाम के बाद लिखा गया  मेरे पिता के घर के नाम के ध्यान में रख कर आवश्यक सुधार कर लिया और एक घंटे के भीतर मामले को क्लियर कर दिया  और मुझसे कहा, अब आप अक्षय केंद्र जाकर  प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार उसने 2 घंटे के भीतर एक जटिल नामांतरण के मामले को हल किया। मुझे मध्य प्रदेश में भी इस विषय सम्बंधित व्यक्तिगत अनुभव है जो यहां नहीं लिख रहा हूँ..

Ramswaroop Mantri

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