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खालिस्तान समर्थक अमृतपाल गिरफ्तार, 9 साथी भी पकड़े,तलवारें लेकर सड़क पर उतरे निहंग,

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खालिस्तान समर्थक अमृतपाल और उसके 9 साथियों को पंजाब पुलिस ने शनिवार को अलग-अलग जगह से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारियां अजनाला थाने पर हमले से जुड़े केस में की गईं।

अमृतपाल के 6 साथियों को शनिवार दोपहर जालंधर से मोगा की तरफ जाते समय पकड़ा गया। यहां पंजाब पुलिस के घेरा डालते ही अमृतपाल खुद गाड़ी में बैठकर भाग निकला। पुलिस की करीब 100 गाड़ियों ने लगभग डेढ़ घंटा पीछा करने के बाद उसे जालंधर के नकोदर एरिया से दबोच लिया। हालांकि उसकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। 2 लोगों को अमृतसर और एक को मोगा में उसके खेतों से गिरफ्तार किया गया।

इस बीच माहौल बिगड़ने की आशंका के चलते पंजाब में 24 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। राज्य में रविवार दोपहर 12 बजे तक मोबाइल इंटरनेट और बल्क SMS सेवाएं बंद रहेगी। राज्य के फाजिल्का और मुक्तसर जिले में धारा 144 लगा दी गई।

उधर अमृतपाल की गिरफ्तारी के विरोध में मोहाली में प्रदर्शन शुरू हो गया। यहां चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर लगे इंसाफ मोर्चा में मौजूद लगभग 150 निहंग नंगी तलवारें और डंडे लेकर सड़क पर उतर आए।

मोहाली में अमृतपाल को रिहा करने की मांग करते हुए सड़क पर उतरे निहंगों ने हाथों में तलवारें और डंडे ले रखे हैं। यह लोग मोहाली से चंडीगढ़ की तरफ मार्च कर रहे हैं।

मोहाली में अमृतपाल को रिहा करने की मांग करते हुए सड़क पर उतरे निहंगों ने हाथों में तलवारें और डंडे ले रखे हैं। यह लोग मोहाली से चंडीगढ़ की तरफ मार्च कर रहे हैं।

मोहाली में निहंगों ने एयरपोर्ट रोड जाम की

उधर अमृतपाल की गिरफ्तारी के विरोध में मोहाली में प्रदर्शन शुरू हो गया। यहां चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर लगे इंसाफ मोर्चा में मौजूद लगभग 150 निहंग हाथों में नंगी तलवारें और डंडे लेकर सड़क पर उतर आए। यह लोग अमृतपाल को रिहा करने के लिए नारेबाजी करते हुए चंडीगढ़ की तरफ बढ़ने लगे और रोके जाने पर एयरपोर्ट रोड जाम कर दी। पंजाब पुलिस के जवानों ने इनके चारों तरफ घेरा डाल लिया।

चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर इसी इंसाफ मोर्चे में शामिल निहंगों और पुलिस के बीच 8 फरवरी 2023 को हिंसक झड़प हो गई थी जिसमें कई पुलिसवाले घायल हो गए थे।

जालंधर-मोगा पुलिस का जॉइंट ऑपरेशन

खालिस्तान समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल के खिलाफ 3 केस दर्ज हैं जिनमें से दो मामले अमृतसर जिले के अजनाला थाने में हैं। अपने एक करीबी की गिरफ्तारी से नाराज होकर अमृतपाल ने 23 फरवरी को समर्थकों के साथ मिलकर अजनाला थाने पर हमला कर दिया था। इस केस में उस पर कार्रवाई नहीं होने के चलते पंजाब पुलिस की काफी आलोचना हो रही थी।

शनिवार को अमृतपाल ने जालंधर-मोगा नेशनल हाईवे पर शाहकोट-मलसियां इलाके और बठिंडा जिले के रामपुरा फूल में कार्यक्रम रखे थे। शाहकोट-मलसियां इलाके में उसके प्रोग्राम के लिए समर्थक सुबह से जुटने लगे थे।

पंजाब पुलिस के घेराबंदी करने के बाद गाड़ी में बैठकर भागते अमृतपाल सिंह का वीडियो सामने आया।

पंजाब पुलिस के घेराबंदी करने के बाद गाड़ी में बैठकर भागते अमृतपाल सिंह का वीडियो सामने आया।

इस प्रोग्राम से पहले ही जालंधर और मोगा पुलिस ने जॉइंट ऑपरेशन में गुपचुप तरीके से अमृतपाल को गिरफ्तार करने की रणनीति बना ली थी। इसके लिए आसपास के कई जिलों से रातोंरात पुलिस फोर्स बुला ली गई। जालंधर-मोगा नेशनल हाईवे पर भी सुबह से ही भारी नाकेबंदी कर दी गई।

शनिवार दोपहर लगभग 1 बजे जैसे ही अमृतपाल का काफिला जालंधर के मैहतपुर कस्बे के नजदीक पहुंचा, पुलिस ने घेरा डाल लिया। काफिले में सबसे आगे चल रही 2 गाड़ियों में सवार 6 लोगों को पकड़ लिया गया। अमृतपाल की मर्सिडीज कार काफिले में तीसरे नंबर पर थी। पुलिस को देखकर उसका ड्राइवर गाड़ी लिंक रोड की तरफ मोड़कर भगा ले गया। जालंधर और मोगा पुलिस उसके पीछे लग गई।

इस गाड़ी में सवार था अमृतपाल।

इस गाड़ी में सवार था अमृतपाल।

अमृतपाल ने की समर्थकों से इकट्‌ठा होने की अपील
पुलिस को गिरफ्तार किए गए अमृतपाल के 6 साथियों से कई हथियार मिले हैं। इन्हें जालंधर के मैहतपुर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया। अमृतपाल का कार में बैठकर भागते हुए का एक वीडियो भी सामने आया। इसमें अमृतपाल गाड़ी की अगली सीट पर बैठा नजर आ रहा है और अपने समर्थकों से इकट्‌ठा होने की अपील कर रहा है। गाड़ी में मौजूद अमृतपाल के समर्थक यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि पुलिस उनके पीछे लगी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, लगभग डेढ़ घंटा पीछा करने के बाद पुलिस ने अमृतपाल को नकोदर एरिया से गिरफ्तार कर लिया। हालांकि पुलिस का कोई अधिकारी इसकी पुष्टि नहीं कर रहा।

जालंधर के शाहकोट में तैनात भारी पुलिस बल। अमृतपाल का शनिवार को यहां कार्यक्रम होने वाला था।

जालंधर के शाहकोट में तैनात भारी पुलिस बल। अमृतपाल का शनिवार को यहां कार्यक्रम होने वाला था।

दो साथी अमृतसर से गिरफ्तार
अमृतपाल के 2 साथियों को अमृतसर में अलग-अलग जगह से गिरफ्तार किया गया। इनमें अमृतसर के बालसरां जोधा गांव का रहने वाला हरमेल सिंह जोध और शेरों गांव का हरचरण सिंह शामिल है।

पुलिस देख सोशल मीडिया पर लाइव हुआ बाजेके
अमृतपाल के करीबी भगवंत सिंह उर्फ बाजेके को पुलिस ने मोगा से पकड़ा। भगवंत को उस समय गिरफ्तार किया गया जब वह खेतों में पशुओं के लिए चारा काट रहा था। 5 गाड़ियों में पहुंचे पुलिसवालों के खेतों में घेरा डालते ही भगवंत सिंह सोशल मीडिया पर लाइव हो गया और अपनी तरफ बढ़ रहे पुलिसवालों को दिखाने लगा।

भगवंत सिंह के खिलाफ हथियारों के साथ सोशल मीडिया पर फोटो डालने को लेकर केस दर्ज हो चुका है। वह पंजाब सरकार के खिलाफ और अमृतपाल के हक में वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डालता रहा है।

अजनाला थाने पर किया था हमला
खालिस्तान समर्थक संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ के प्रमुख अमृतपाल की अगुवाई में उसके हजारों समर्थकों ने 23 फरवरी 2023 को अमृतसर के अजनाला थाने पर हमला कर दिया था। इनके हाथों में बंदूकें और तलवारें थीं। ये लोग अमृतपाल के करीबी लवप्रीत सिंह तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। हमले से दबाव में आई पंजाब पुलिस को लवप्रीत सिंह तूफान को रिहा करने का ऐलान करना पड़ा था।

अमृतपाल की गिरफ्तारी की खबर से पूरे पंजाब में हालात तनावपूर्ण हैं। ऐसे में पुलिस ने जगह-जगह नाकेबंदी की है।

अमृतपाल की गिरफ्तारी की खबर से पूरे पंजाब में हालात तनावपूर्ण हैं। ऐसे में पुलिस ने जगह-जगह नाकेबंदी की है।

पंजाब में इंटरनेट और ब्लक SMS सेवाएं बंद
अमृतपाल की गिरफ्तारी के साथ ही पंजाब में मोबाइल इंटरनेट और बल्क SMS सेवाएं बंद कर दी गईं। इससे जुड़ा आदेश पंजाब के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी की ओर से जारी किया गया। इस ऑर्डर में कहा गया कि पंजाब डीजीपी की तरफ से जानकारी दी गई है कि सोशल मीडिया और बल्क SMS के जरिए पंजाब में लोगों को भड़काने की कोशिश की जा सकती है। इसके बाद शनिवार दोपहर 12 बजे से रविवार दोपहर 12 बजे तक राज्य में मोबाइल इंटरनेट और बल्क SMS सेवाएं बंद करने के आदेश दिए गए हैं। बैंकिंग और मोबाइल रिचार्ज को छोड़कर अन्य सभी तरह की SMS सेवाएं बंद रहेंगी।

पंजाब सरकार द्वारा अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद इंटरनेट बंद करने को लेकर जारी किया गया ऑर्डर।

पंजाब सरकार द्वारा अमृतपाल की गिरफ्तारी के बाद इंटरनेट बंद करने को लेकर जारी किया गया ऑर्डर।

अमृतपाल का गांव घेरा, सेंट्रल फोर्स तैनात
अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस ने अमृतसर जिले में रईया के पास पड़ते उसके गांव जल्लूपुर खेड़ा को भी घेर लिया। गांव में आने-जाने वाले हर व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है और गाड़ियों की तलाशी ली जा रही है। पंजाब पुलिस के अलावा जल्लूपुर खेड़ा के चारों तरफ सेंट्रल फोर्सेस के जवान भी तैनात कर दिए गए हैं।

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में मोहाली में तलवारें और डंडे लेकर सड़क पर प्रदर्शन करते निहंग।

खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में मोहाली में तलवारें और डंडे लेकर सड़क पर प्रदर्शन करते निहंग।

अमृतपाल ने कहा था- कल को सेंट्रल एजेंसीज मुझे मरवा सकती हैं

‘वारिस पंजाब दे’ के चीफ अमृतपाल सिंह को पुलिस ने शनिवार को अरेस्ट कर लिया है। उनके 9 साथियों को भी पकड़ा गया है। मामला अजनाला थाने पर हमले का है। गिरफ्तारी के बाद माहौल न बिगड़े, इसके लिए पंजाब में इंटरनेट और मैसेज सर्विस बंद कर दी गई है। दो जिलों फाजिल्का और मुक्तसर जिले में धारा-144 लगाई गई है।

अमृतपाल खुद को गर्व से खालिस्तान का समर्थक बताते रहे हैं, खालिस्तान यानी खालसा या सिखों का अलग देश। वे कहते हैं कि सिखों की मांग दबाई नहीं जा सकती। सरकार हमें गलत साबित कर दे, तो हम मान जाएंगे। ये दावा भी करते हैं कि लोग खालिस्तान के समर्थन में हैं। साथ ही पूछते हैं कि अगर हिंदू राष्ट्र की मांग पर डिबेट नहीं होती, तो खालिस्तान पर क्यों की जाती है।

अमृतपाल सिंह के नेतृत्व में ही 23 फरवरी को हजारों लोगों की भीड़ अमृतसर के अजनाला थाने में घुस गई थी। उन्होंने बैरिकेडिंग तोड़ दी और पुलिस पर हमला भी किया।

अमृतपाल सिंह के साथ आई भीड़ ने पुलिस पर तलवार, फरसे और डंडों से हमला कर दिया था। ये लोग थाने से अमृतपाल के सहयोगी लवप्रीत तूफान को छुड़ाने आए थे।

अमृतपाल सिंह के साथ आई भीड़ ने पुलिस पर तलवार, फरसे और डंडों से हमला कर दिया था। ये लोग थाने से अमृतपाल के सहयोगी लवप्रीत तूफान को छुड़ाने आए थे।

इस घटना के बाद अमृतपाल सिंह का नाम चर्चा में आ गया। पर अमृतपाल हैं कौन, जिन्हें लोग अगला जरनैल सिंह भिंडरांवाले कह रहे हैं। यही जानने मैं जल्लूपुर खेड़ा गांव पहुंचा था। अमृतपाल का ये इंटरव्यू हमने 3 मार्च को पब्लिश किया था।

अमृतसर से करीब 40 किमी दूर जल्लूपुर खेड़ा गांव की संकरी गलियों से गुजरता हुआ, मैं एक किलेनुमा घर के सामने रुका। करीब 12 फीट ऊंची दीवारें, लोहे के मजबूत दरवाजे, घर के ऊपर सिख धर्म के लहराते झंडे, हाथ में कटार, तलवार और बंदूकें लिए कई सेवादार।

जल्लूपुर खेड़ा गांव में अमृतपाल सिंह के घर के बाहर हथियारबंद सेवादार घूमते रहते हैं। इसके अलावा हर आने-जाने वाले पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे भी लगे हैं।

जल्लूपुर खेड़ा गांव में अमृतपाल सिंह के घर के बाहर हथियारबंद सेवादार घूमते रहते हैं। इसके अलावा हर आने-जाने वाले पर नजर रखने के लिए CCTV कैमरे भी लगे हैं।

मैं घर में घुसा और कहा, ‘मुझे अमृतपाल सिंह जी से मिलना है।’ एक सेवादार ने मुझे दालान में बैठने के लिए कहा। फिर बताया कि अमृतपाल सिंह तैयार हो रहे हैं। करीब आधे घंटे बाद मुझे घर के अंदर से पीछे वाले हिस्से में ले गए।

घर से गुजरते हुए मेरी नजर दीवार पर लटकी सिख कट्टरपंथी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की बड़ी सी तस्वीर पर गई। मैंने मोबाइल से उसकी फोटो ले ली। इस पर एक सेवादार तुरंत पलटा और थोड़े गुस्से में बोला- ‘फोटो डिलीट कीजिए। बिना इजाजत फोटो नहीं ले सकते।’ फोटो डिलीट करवाने के बाद ही मुझे आगे बढ़ने दिया। मैं घर के पीछे वाले हिस्से में पहुंचा, वहां खाट और कुर्सियां पहले से लगी हुई थीं।

जिस जगह अमृतपाल सिंह से मुलाकात होनी थी, वह किसी खंडहर जैसी थी। वहां भी हाथ में राइफल लिए कई सेवादार मौजूद थे।

जिस जगह अमृतपाल सिंह से मुलाकात होनी थी, वह किसी खंडहर जैसी थी। वहां भी हाथ में राइफल लिए कई सेवादार मौजूद थे।

कुछ देर बाद एक दरवाजा खुला और राइफल लिए दो सेवादार तेजी से आए। उन्होंने जगह का मुआयना किया, इसके बाद अमृतपाल सिंह की एंट्री हुई। उम्र करीब 29 साल और शख्सियत बिल्कुल जरनैल सिंह भिंडरांवाले से मिलती-जुलती। शुरुआत में वे अपने फोन को देखते हुए कुछ सोचते रहे। इसके बाद शुरू हुआ बातचीत का सिलसिला…

सवाल: अजनाला में हिंसक भीड़ बैरिकेडिंग तोड़कर थाने में घुस गई, आप उसका नेतृत्व कर रहे थे। लोग आपके बारे में जानना चाहते हैं, बताइए आप कौन हैं?
जवाब: देखिए, पहली बात तो ये कि संगत को भीड़ कहना जायज बात नहीं है। दूसरा वहां इतनी ज्यादा हिंसा नहीं हुई है, ये सब सिर्फ 8 सेकेंड के लिए हुआ था, वो भी पुलिस के लाठीचार्ज के बाद। उसके बाद शांति रही।

मैं ड्रग्स और पंजाब के मुद्दा उठाता हूं, इसलिए यूथ मुझसे जुड़ रहे हैं। अमृतपाल सिंह कुछ हो या ना हो, ये मैटर नहीं करता। मैं सिर्फ एक विचार को रिप्रजेंट कर रहा हूं। ये विचार मुझसे पहले भी था और मेरे जाने के बाद भी होगा। कई बार लोगों को लगता है कि ये मेरा खुद का विचार है, ऐसा नहीं है।

सवाल- आपके सहयोगी पर केस हुआ, इसमें अगर कोई पुलिस पर चढ़ाई कर देगा, तो लॉ एंड ऑर्डर तो नहीं रह जाएगा। आप गुरु ग्रंथ साहिब भी साथ ले गए। क्या ये कानून व्यवस्था को चुनौती नहीं है?
जवाब:
 ये पर्सनल मसला नहीं है। हमने ड्रग्स सिंडिकेट के खिलाफ लड़ाई शुरू की है और सिंडिकेट चलाने वाले सरकार में बैठे हैं। उन्हें ये बात अच्छी नहीं लगती कि युवा सही रास्ते पर आएं और अपनी राजनीतिक समझ मजबूत करें। पुलिस ने एक झूठी FIR कराई और हमारे साथी को टॉर्चर किया। किसी बेकसूर का जेल में होना सबसे बड़ी हिंसा है।

ये तो कोर्ट तय करेगी न कि वो बेकसूर है या नहीं..
जवाब: कोर्ट ने ही उन्हें जेल से रिहाई दी है। हमने जबरदस्ती जेल से नहीं निकाला। ये पूरा केस हमें फंसाने के लिए किया गया था, लेकिन सरकार की नीति फेल हुई है। गुरु ग्रंथ साहिब की बात है तो हम जहां भी जाते हैं, गुरु ग्रंथ साहिब की ओट में जाते हैं। ये पहला वाकया नहीं है। इंदिरा गांधी ने जब इमरजेंसी लगाई थी, तो उसके विरोध के लिए संत करतार सिंह ने 37 नगर कीर्तन निकाले थे और गुरु ग्रंथ साहिब के साथ निकाले थे।

ये सरकार की नाकामी है कि बिना जांच किए झूठी FIR दर्ज की गई। उसकी जांच नहीं की। हमारा पुलिस सिस्टम अभी भी पुराने जमाने का ही है, उसमें बदलाव नहीं आ रहा है। जिसे कस्टडी में टॉर्चर किया गया, उसकी कौन भरपाई करेगा।

सवाल: अजनाला केस में जो हुआ, उसमें आप जीत गए और पुलिस-प्रशासन हार गया। इसे कैसे देखते हैं?
जवाब:
 मैं इसे उनकी हार नहीं कहूंगा, ये पॉलिटिकल सिस्टम की हार है। पुलिस को कभी पॉलिटिकल सिस्टम का टूल नहीं बनना चाहिए। पुलिस स्थायी है, सरकार 5 साल में बदलती रहती है।

सवाल: आपकी रोजमर्रा की जिंदगी कैसी है, क्या काम करते हैं, दिन कैसे बीतता है? जिस रास्ते पर आप चल रहे हैं, उससे क्या हासिल करना चाहते हैं?
जवाब: मैं दुबई से लौटा हूं, तब से संगत में ही मेरा दिन बीतता है। मैं नशे की वजह से बर्बाद हो चुके युवाओं के साथ काम करता हूं। यहां जो लोग आपको काम करते हुए दिख रहे हैं, जो हमारे गार्ड्स हैं, वो सभी नशा करते थे, इंजेक्शन में भरकर हेरोइन लेते थे। आज वो नशे के जाल से निकल आए हैं, खुशहाल जिंदगी बिताते हैं। रोज 20-25 पंजाबी नौजवान और उनके परिवार हमारे पास आते हैं, यहां रुकते हैं। हम उनका इलाज करते हैं।

हमारा मकसद है- पंजाब को ड्रग फ्री सोसाइटी बनाना, पानी का संकट, माइग्रेशन और भाषा का मुद्दा सुलझा रहे लोगों की मदद करना। संप्रभुता का मुद्दा पंजाब में हमेशा से ही रहा है, ये बात कब से बुरी होने लगी। हिंदू राष्ट्र की बात होती है, इस पर तो कोई डिबेट नहीं होती।

पर हम और आप तो हिंदुस्तानी हैं न..
जवाब: ये जो टैगलाइन है, उसे समझिए। अमेरिका एक देश है, लेकिन साउथ अमेरिका के लोग भी अमेरिकन हैं, कनाडा के लोग भी अमेरिकन हैं। उस हिसाब से हम कहें कि हिंदुस्तानी हैं, तो जरूरी नहीं है कि हम एक ही मुल्क में रहेंगे।

हिंद महासागर पर भारत, चीन समेत कई देशों का कंट्रोल हैं। डायवर्सिटी को स्वीकार नहीं किया जाता, वहीं से बात शुरू होती है। अगर ये ना कहा जाता कि सिख हिंदुओं का अंग है, तो बात यहां तक नहीं पहुंचती, न दरबार साहिब पर हमला होता, न आज संप्रभुता की बात आती।

सवाल: आपकी संप्रभुता की बात भारत से अलग मुल्क बनाने तक जाती है। देश में कई धड़े हैं, कोई हिंदू राष्ट्र की मांग करते हैं, कुछ कश्मीर को मुस्लिम राष्ट्र बनाना चाहते हैं।
जवाब:
 डेमोक्रेसी में डायलॉग को कभी नहीं दबाया जा सकता। अगर सिखों की खालिस्तान की मांग है, तो इसे दबाया नहीं जा सकता। अभी यहां कोई रेफरेंडम नहीं हुआ, इसलिए नहीं पता कि कितने सिख ये चाहते हैं। मैं रेफरेंडम की मांग नहीं करता। पहले हमें हमारा प्रचार करने दिया जाए।

लोकतंत्र में हमें इसका अधिकार है। इस पर बात होनी चाहिए, तब शायद कोई हल निकल जाए। हो सकता है सरकार साबित कर दे कि हम गलत बात कर रहे हैं, तो हम मान जाएंगे।

सवाल: आपका बचपन कहां बीता, पढ़ाई कहां की, क्या काम किया? ऐसा क्या हुआ कि आप मॉडर्न लाइफ से सिख बाने में आ गए, खालिस्तान का मुद्दा उठाने लगे?
जवाब:
 मेरा बचपन जल्लूपुर खेड़ा गांव में बीता। यहीं 10वीं तक पढ़ाई हुई। कपूरथला में मैंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन लिया था, लेकिन पढ़ाई पूरी नहीं की। इसके बाद मैं दुबई चला गया, वहां 10 साल फैमिली बिजनेस मैनेज किया। 2015 में बरगाड़ी में बेअदबी की घटना हुई, वो न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि कई सिखों के लिए ट्रिगर पॉइंट था।

अमृतपाल सिंह दुबई में रहकर ट्रांसपोर्ट का कारोबार कर रहे थे। पिछले साल सितंबर में वह दुबई में कामकाज समेटकर पंजाब आ गए।

अमृतपाल सिंह दुबई में रहकर ट्रांसपोर्ट का कारोबार कर रहे थे। पिछले साल सितंबर में वह दुबई में कामकाज समेटकर पंजाब आ गए।

सवाल: लोग कहते हैं कि आप जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तरह दिखते हैं। उनकी जवानी की फोटो और आपकी फोटो को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। क्या ये लुक आपने उन्हीं से लिया है?
जवाब: ये पहनावा जरनैल सिंह भिंडरांवाले का नहीं है, जो लोग कल्चर को नहीं जानते, वो ऐसी बात करते हैं। करतार सिंह भिंडरांवाले, संत गुरबचन सिंह भिंडरांवाले सभी ने यही बाना पहना है। सिख धर्म में उपदेश देने वाले का ये बाना होता है, निहंगों का बाना अलग होता है। जितनी भी टकसालें (सिख धार्मिक शिक्षा केंद्र) हैं, उनमें ये बाना आज भी पहना जाता है।

सवाल: आपने सिख धर्म की शिक्षा किस टकसाल में ली और कितने साल धर्म के बारे में पढ़ाई की?
जवाब:
 मेरी ट्रेनिंग किसी टकसाल में नहीं हुई, न ही मैंने धर्म की शिक्षा ली। मैंने घर से ही धर्म की शिक्षा ली है। उपदेश देने के लिए धर्म की शिक्षा की जरूरत नहीं होती। सिखी में ऐसा कोई कोर्स नहीं है, लेकिन टकसाल में रहने वालों को ज्ञान होता है, ये बात सही है।

सवाल: आप अलग देश की मांग कर रहे हैं। कोई और करता तो अब तक UAPA, NSA और राजद्रोह कानून लग जाता। पुलिस ही नहीं, CBI-NIA पीछे लग जातीं। आप पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, ऐसा क्यों?
जवाब:
 अगर जांच एजेंसियों ने छोड़ दिया होता, तो पुलिस मुझ पर फर्जी केस क्यों करती। राजद्रोह और UAPA जैसे कानून लोकतांत्रिक देश में क्यों हैं, ये सबसे बड़ा सवाल है। कल को सेंट्रल एजेंसी मुझे मरवा दें, ये भी हो सकता है। मैं जहां जाता हूं, मेरा प्रचार रोकने की कोशिश की जाती है।

जब तक सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है सरकार को एक्शन लेने का हक नहीं है। हमने हिंसक तरीके नहीं अपनाए हैं। अपनी पहचान, संप्रभुता, मुद्दों पर बात करना अपराध नहीं है। खालिस्तानी लोगों पर सख्त कानूनों में कार्रवाई हुई है, कई सारे खालिस्तानी सजा पूरी कर लेने के बावजूद जेल में है।

Ramswaroop Mantri

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