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खरगोन उपद्रव :लोग बोले- सैकड़ों दंगाइयों की भीड़ घर में घुसी, कहा- काटो, मारो, छोड़ो मत

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खरगोन

मध्यप्रदेश का खरगोन उपद्रव की आग में झुलस गया। रविवार शाम रामनवमी की शोभा यात्रा में हुआ दंगा रात में और भड़क गया। दंगे की आग में झुलसते खरगोन शहर के प्रभावित इलाकों मेंचश्मदीदोंने दंगे के दिल दहलाने वाले मंजर के बारे में बताया कि कैसे शहर दंगे की आग में फूंक दिया गया। पीड़ितों ने ये भी आरोप लगाए कि इतना सब होता रहा और पुलिस एक से डेढ़ घंटे बाद आई।

एक साथ घुस आए 500 से ज्यादा लोग, पढ़िए आपबीती..
मेरा नाम धन्नालाल पंवार है। शीतला माता मंदिर के पास ही रहता हूं। यहीं से दंगे की शुरुआत हुई। रविवार शाम घर में बेटी के साथ था। घर के पास दो बेकरी हैं। दंगाइयों में यहां काम करने वाले लोग शामिल थे। नमाज के बाद उनका यात्रा मार्ग से निकलना हुआ। यहां दूसरे वर्ग को देखकर घूरने के बाद आमना-सामना हो गया। इसके बाद तो पथराव शुरू हो गया। अचानक 300 से 400 लोगों की भीड़ आ गई। मस्जिद में नमाज पढ़ रहे लोग भी आ गए। किसी के हाथ में पत्थर, किसी के पास फरसे तो किसी के पास अन्य हथियार थे। भीड़ घर में घुस गई। मैं इतने लोगाें को देखकर घबरा गया। मेरे यहां खड़ी बाइक में आग लगा दी। दरवाजे तोड़ दिए। घर पर पथराव किया। लोगों ने बाहर भी पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। पेट्रोल बम भी फेंके गए। ये देख मेरी 10 साल की बेटी प्रियांशु घबराकर बेहोश हो गई। लोग बोल रहे थे- सब जला दो। काटो, मारो, छोड़ो मत। घर में से चने की बोरियां उठाकर ले गए। करीब डेढ़ घंटे बाद पुलिस पहुंची। मेरा काफी नुकसान हुआ है। मुझे नहीं पता कि लोगों ने क्यों मेरे घर पर हमला किया। पूरा घर दहशत में है। पुलिस की मदद से आज बाहर निकले हैं। मेरा सबकुछ उजड़ गया।

सड़क पर पड़े पत्थर दंगों के गवाह हैं।

सड़क पर पड़े पत्थर दंगों के गवाह हैं।

अचानक लोग आए और पेट्रोल बम फेंकने लगे
त्रिलोक जाधव भी मंदिर के पास ही रहता है। उसने बताया – शाम को अचानक लोगों की भीड़ आ गई। भीड़ में शामिल लोगों ने पेट्रोल बम फेंके। उनके हाथ में लाठी-डंडे और पत्थर थे। उन्होंने जमकर पथराव किया। वे आपस में कह रहे थे कि जो दिखे, उसे मारो। सड़क पर खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी। मंदिर में भी तोड़फोड़ कर दी। भगवान श्रीराम का पोस्टर भी फेंक दिया। दंगाइयों को जो दिखा, उस पर पत्थर मारा। किसी को नहीं बख्शा। इसमें बच्चे भी चपेट में आए। कई घर उजड़ गए। मैं भी बर्बाद हो गया। पुलिस का बल एक से डेढ़ घंटे छह बजे के बाद आया।

मंदिर के बाहर भी पत्थर बिखरे पड़े हैं।

मंदिर के बाहर भी पत्थर बिखरे पड़े हैं।

कर्फ्यू से हालात खराब
हालात को काबू में करने के लिए शहर में तीन दिन का कर्फ्यू लगा दिया गया है। इनमें संवेदनशील इलाकों में लोगों के आने-जाने पर भी पाबंदी है। यहां चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात है। सोमवार को कर्फ्यू के दौरान छात्र सागर निहाले को बस स्टैंड से बस नहीं मिली। उसे एग्जाम देने के लिए सनावद जाना था। दूसरी ओर इंदौर से खरगोन जाने वाली बस का ड्रायवर दिलीप खांडेकर ने बताया कि तीन दिन तक उनकी बस नहीं चलने से हर दिन करीब 15 हजार रुपए का नुकसान होगा।

कर्फ्यू के बाद शहर पूरी तरह बंद है।

कर्फ्यू के बाद शहर पूरी तरह बंद है।

Ramswaroop Mantri

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