_एमआर-10 से जूनी इंदौर तक फैला हैं ‘ साम्राज्य ‘ , नंदलालपुरा बना विवाद का सेंटर_
*_मतीन गुरु, लाड़ी बाई और अनिता गुरु के मरने के बाद आपस की लड़ाई सड़क पर आई_*
_सपना-पायल गुरु के गुट में बट गया किन्नर समाज, एक गुट हुआ सनातन रीति रिवाज के पक्ष में_
*_पुलिस प्रशासन हलके में न किन्नर समाज के विवाद को, दोनों गुटों ने बाहर से बुलवा लिए किन्नर_*
_बात बात पर सड़क पर उतर आने वालों के ख़िलाफ़ उत्तरप्रदेश की तरह सख्ती से पेश आये पुलिस प्रशासन_
*_शहर के विस्तार होने व ईनाम की राशि बढ़ने से बढ़ते जा रहें झगड़े, मूल झगड़ा गुरुओं की चल-अचल संपति से जुड़ा_*
*_…तमाम दुश्वारियों, दादागिरी व मनमानी के बाद भी ये शहर किन्नर समाज को आदर के भाव से देखता हैं। कारण हैं किन्नर बिरादरी का पौराणिक महत्व व जमात का गरिमामय अतीत। सनातन धर्म में किन्नर समाज का जुड़ाव द्वापरयुग से होने के कारण हिंदुस्तान में किन्नर बिरादरी को एक अघोषित ‘ प्रोटोकॉल मिला हुआ हैं। भारतीय समाज के डीएनए में किन्नरों का आदर, सम्मान व ईनाम-नेग रचा बसा हुआ हैं। ख़ुशी के अवसर पर किन्नर बिरादरी की सहभागिता को भारतीय संस्कृति, हिन्दू रीति रिवाजों में शुभ शगुन के रूप में माना जाता हैं। घर आंगन में किन्नरों का आगमन प्रसन्नता का विषय होता हैं। लेक़िन आजकल ये प्रसन्नता, दहशत में बदल गई हैं।_*
*_किन्नर बिरादरी का किसी के घर आना, किसी कालोनी, मोहल्ले, सोसायटी में पहुँचना अब सौभाग्य की जगज ‘ संताप ‘ का विषय होता जा रहा हैं। जो नेग व ईनाम और नज़राना स्वेच्छिक था, वह अब किन्नर समुदाय की स्वेच्छाचारीता से जुड़ गया हैं। दुआओं का असर, बददुआ में बदलता जा रहा हैं। किन्नर समाज की बढ़ती हिमाकत के ख़िलाफ़ उसी समाज में अभियान शुरू हो रहें हैं, जो समाज कभी इस बिरादरी को आदर के साथ अथिति बनाता था। आख़िर ऐसा क्यों हुआ या होने लगा? इस पर किन्नर या वृहन्नला समुदाय विचार करेगा? या यूं ही सड़क पर लड़ता-भिड़ता रहेगा और अपना समाज के बीच तेजी से गिरते सम्मान को और कम करेगा?_*
*_ये तमाम सवाल बुधवार को इंदौर की सड़कों पर हुए किन्नर समुदाय के हंगामे के बाद पूरे शहर से एक साथ उठ खड़ा हुआ है। हर तरफ बस एक ही प्रश्न है- क्या ऐसे होते हैं किन्नर? जो सनातन के सबसे बड़े दीपावली त्यौहार के एन मुहाने पर सड़क जाम कर दे। थाना घेर दे। पुलिस व प्रशासन के आला अफसरों को गिड़गिड़ाने, हाथ जोड़ने, पैर पड़ने व कसम खाने को मजबूर कर दे? जवाहरमार्ग जैसा शहर का सबसे व्यस्ततम मार्ग, ट्रैफिक के लिहाज से सबसे व्यस्ततम समय में जाम कर दे? अस्पताल में हंगामा कर दे? कमरा बंद कर समूहिक आत्महत्या पर आमादा हो जाये? फिनाइल गटक ले, वह भी उस समय, जब उस समाज मे दीप पर्व की त्यौहारी खुशियां चहक रही, जिससे नेग मांगने जाना हैं? क्या ऐसे होते हैं वृहनला? वे तो दूसरों की खुशियों में स्वयम की खुशी तलाशते है तो फ़िर इतना हंगामा क्यों?_*
*हलके में न ले पुलिस-प्रशासन गुटीय झगड़े को, बाहर से भी आए है किन्नर*
*_पुलिस प्रशासन किन्नरों के गुटीय झगड़े को हलके में न ले। सख्ती से काम ले। ये मसला करोड़ो की मिल्कियत व इलाक़े की ज़ागीर से जुड़ा हैं। एक गुट ने सनातन रीति रिवाजों का दामन थाम इस लड़ाई को अलग टर्न भी देने की कोशिशें शुरू की है। मतीन गुरु, लाड़ी बाई और अनिता गुरु की मृत्यु के बाद उनकी संपत्ति से भी जुड़ा हैं। एमआर 10, गायत्री नगर से लेकर जूनी इंदौर, बापू नगर तक पसरे इस झगड़े में नंदलालपुरा सेंटर बना हुआ है। नंदलालपुरा की इस चाल के भी 3 हिस्सेदार हो गए हैं। सपना व पायल गुरु के बीच चल रहा ये संघर्ष किसी भी दिन इंदौर की नाक कटवा देगा। जैसे कल एन त्योहार के मौके पर आम आदमी व बाजारों के बंदोबस्त छोड़ कई थानों का बल किन्नर विवाद निपटा रहा था और देशभर में ये खबर सुर्खियां बना रही थी कि इंदौर में किन्नरों ने सामुहिक आत्महत्या की। कल की घटना में भी बड़ी संख्या में किन्नर नज़र आये। इस बिरादरी के इतने सदस्य इंदौर में है क्या? बताते है दोनों गुटों ने बाहर से भी अपने अपने चेलों को बुला रखा है। इसमे निमाड़-मालवा अंचल के गांव कस्बों से लेकर महाराष्ट्र-राजस्थान तक का नाम सामने आ रहा हैं। इंदौर पुलिस को उत्तरप्रदेश पुलिस की तर्ज़ पर काम करना होगा, जहां इस तरह के झगड़े को बिरादरी से ऊपर उठकर सख्ती के साथ कानूनी रूप से निपटाया जाता हैं। आख़िर कब तक इंदौर की पुलिस हाथ जोड़ती रहेगी?_*
*शहर का विस्तार, नेग-नज़राने की बड़ी क़ीमत से बढ़ता झगड़ा*
*_इंदौर के विस्तार ने बृहन्नला समुदाय के बीच झगड़े बड़ा दिए है। इसके साथ ही अब नेग नजराना भी सो-दो सौ से बढ़कर एक दम 11-21-51 हज़ार तक पहुँच गया है। शहर में बढ़ती होटल्स, मॉल, मैरेज गार्डन, सोसायटी, टाउनशिप, पॉश कालोनियों व महंगी शादियों ने किन्नर बिरादरी के लालच को इतना बड़ा दिया है कि वे एक दुसरे को मरने मारने पर उतारू ह गए हैं। अब तो मामला स्वयम की जान लेने तक आ पहुंचा है। इस मामले में आला अफसरों को दो टूक रवैया अख्तियार अपनाना ही होगा। कल के झगड़े के बाद औसत इन्दौरी के मन मे ये सवाल है कि आख़िर कब तक ये शहर और यहां की कानून व्यवस्था किन्नरों की लड़ाई में ‘ किन्नर ‘ बनती देखती रहेगी?_*




