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आपकी सेहत के लिए खतरनाक है पेट्स को चूमना*

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       ~ रीता चौधरी 

    कुत्तापालन आधुनिकता की पहचान है. प्राचीन काल में गोपालन होता था. कुत्ते पर जितना खर्च किया जाता है, उतने मे एक गरीब परिवार की जीविका चल सकती है. कुत्तापालन महज़ दिखावे का शौक नहीं है, विशेष वर्गीय स्त्रियों की अघोषित जिस्मानी मज़बूरी भी है. बॉडी पार्टनर की नामर्दी का दंश वे झेल नहीं पाती और यह ऑप्शन होता उनका.

    ख़ैर, यह अलग टॉपिक है. यहां हमारा विषय कुत्ते को चूमने चाटने से होने वाला खतरा बताना है.

क्या आप अपने डॉगी को चूमती हैं? आपको उसे को किस करना पसंद है?  शोध बताते हैं कि यदि आप कुत्ते को चूमती हैं, तो आपको कई तरह की गंभीर बीमारियों का भी सामना करना पड़ सकता है। यह बात पहले ही साबित हो चुकी है कि कुत्ते अपने मालिकों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। 

*कमजोर इम्यून सिस्टम वाले हो सकते हैं प्रभावित :*

    कुत्ते को होठों पर किस करना अस्वच्छ और संभावित रूप से खतरनाक हो सकता है। यह उन विकारों को भी जन्म दे सकता है, जिसके कारण व्यक्ति को बेड रिडन होना पड़ता है।

     कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग या गर्भवती महिलाएं जानवरों से संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। कुत्तों के मुंह जर्म्स से भरे होते हैं। इससे इंसानों के लिए उन्हें साफ करना मुश्किल हो जाता है।

     संक्रमण अप्रत्यक्ष रूप से दूषित बिस्तर, गंदगी, भोजन या पानी के माध्यम से या सीधे कुत्तों से लार, शारीरिक तरल पदार्थ और मल के माध्यम से मनुष्यों में फैल सकता है।

      किसी पालतू जानवर को चूमना ओरल हेल्थ के लिए भी हानिकारक हो सकता है। बिल्लियों, कुत्तों और मनुष्यों में पेरियोडोंटल रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया भी पाए जाते हैं।

*बैक्टीरिया और रोग :*

    पालतू पशुओं की लार में हिस्टैटिन नामक केमिकल होते हैं, जो नई स्किन सेल्स के प्रसार को बढ़ावा देकर घाव भरने में सहायता करता है।

   लेकिन उनके मुंह में रोग को बढ़ाने वाले कई बैक्टीरिया भी हो सकते हैं।

    *1. पास्चुरेला :*

     बिल्लियों और कुत्तों के मुंह में पास्चुरेला बैक्टीरिया रहता है, जो स्किन, लिम्फ नोड और कभी-कभी अधिक गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है।

*2. बार्टोनेला हेन्सेले :*

    यह गंभीर स्किन और लिम्फ नोड संक्रमण का कारण बन सकता है, जिसे कैट-स्क्रैच-बुखार कहा जाता है।

*3. साल्मोनेला, ई. कोली, क्लॉस्ट्रिडिया और कैम्पिलोबैक्टर :*

   पालतू जानवरों की आंतों में ये पाए जाने वाले बैक्टीरिया मनुष्यों में गंभीर आंतों की बीमारी का कारण बन सकते हैं।

 *पशुओं का अपना एनस चाटना खतरनाक :*

     पालतू पशु खुद को साफ़ करने के लिए अपना एनस चाटते हैं। मल के अवशेषों में मौजूद बैक्टीरिया मुंह तक पहुंच जाते हैं। इंसानों के किस करने पर ये बैक्टीरिया हमारी आंतों तक पहुंच जाते हैं।

     चेहरे और होंठ चाटने से यह मल आसानी से मनुष्यों और पालतू जानवरों के बीच फैल सकता है।

*मस्तिष्क संबंधी विकार :*

      कुछ मामलों मे पालतू पशु पैथोजेन्स को अंजाने में इंसान तक पहुंचा देते हैं। इससे इंसानों को आंतों की बीमारी, त्वचा की समस्याएं, ब्लाइंडनेस और मस्तिष्क संबंधी विकार हो सकते हैं।

     जो पालतू जानवर अपनी गुदा को चाटते हैं, वे संभावित रूप से चेहरे को चाटने के दौरान पैथोजेन के अंडे मनुष्यों तक पहुंचा सकते हैं।

      छोटे बच्चों, बुजुर्गों, कीमोथेरेपी ले रहे व्यक्तियों, एड्स से पीड़ित व्यक्तियों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के पेट्स के साथ ओरल संपर्क से संक्रमित होने की सबसे अधिक संभावना होती है। स्वस्थ लोगों के संक्रमित होने की संभावना कम हो सकती है।

*सावधानी बरतने के उपाय :* 

     नियमित डीवोर्मिंग कार्यक्रम के साथ-साथ साल में एक बार पेट्स फीकल टेस्ट और एंटी पैरासाइट ट्रीटमेंट होना चाहिए। पेट्स के फीकल मैटेरियल का निपटान सही तरीके से होना चाहिए।

    पालतू पशुओं को पका हुआ, डिब्बाबंद या सूखा भोजन खिलाना चाहिए।

    बच्चों के इस्तेमाल की चीज़ें पेट्स से दूर रखनी चाहिए, ताकि वह मुंह में नहीं ले सके।

     पशुओं के एनस और उनके मल को साफ़ करने पर पर्याप्त रूप से हाथ धोना जरूरी है।

Ramswaroop Mantri

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