रिया यादव, भोपाल
स्त्री के लिए योग- ध्यान- तंत्र का पथ नहीं बना. यह रास्ता अख्तियार करने के लिए वह घर से निकले तो जंगली जानवर से पहले नर भेड़िये उसे खा जाएँ. हैंड-प्रैक्टिस करके और सेक्स पॉवर की मेडिसिन ठूस करके नामर्द बना बैठा है नर. यह नामर्द भी इतना गिर चुका है की हर गली में स्त्री ज़िस्म के लिए कीड़े- मकोड़ों की तरह बिलबिला रहा है. बस मौका मिलने भर की देर होती है. अब तो वह सगी बहन, बेटी ही नहीं माँ तक को भोगने लगा है.
स्त्री के लिए परम आनंद, पूर्णत्व, मोक्ष का मार्ग विशुद्ध प्रेम आधारित बेसुध कर देने वाला संभोग ही रहा है. मगर अफ़सोस! आज लाखों में से कोई एक नारी चरम सेक्ससुख पाती है. यह स्टेज ‘एक’ वास्तविक मर्द से ही संभव है. ऐसे मर्द से जो अद्वैत आधारित प्रेम करे और अपने ‘पेनिस’ से आपकी योनिमंदिर को तब तक पूजे, जब तक आप बस… बस.. प्लीज बोलती हुई बेसुध नहीं होने लगें. इसी को आर्गेज्म कहते हैं.
कई को यूज करने से शिखर नहीं मिलता. मिलता तो कॉल गर्ल, पैड वुमेन, वेश्याएँ सबसे सुखी रहती. लेकिन ऐसा नहीं होता. ये सड़ती हैं और एक दिन महा-सड़न में बेमौत मरती हैं. योनि में उंगली, खीरा, बैगन, लौकी, सेक्सटॉय या कुत्ते जैसे पशु का लिंग लेने वालियां भी योनि की सेंसटिविटी डेमेज कर उसे पत्थर बना लेती हैं.
ऐसा नहीं है की नामर्दी का इलाज़ नहीं है. पुख्ता इलाज़ है. पेनिस की सर्जरी भी होती है. आज तो लडके को लड़की, लड़की को लड़का तक बनाया जा रहा है. मतलब नया पेनिस लगवाना भी सम्भव है. लेकिन पुरुष का दम्भ उसे नामर्द स्वीकार नहीं करने देता. ऐसी सलाह देने वाली स्त्री पिट जाती है. बदचलन हवसी बता दी जाती है.
तृप्त नहीं होना, जीवन का अपमान है. जीवन का अपमान जीवनदाता भगवान का अपमान है. इससे बड़ा पाप कोई हो सकता है क्या? किसी योग्यतम इंसान से खुद को तृप्त करना आपका प्रथम धर्म है, सत्कर्म है. यह दुराचार नहीं है.
स्त्रीहित में हमारे पूज्यवर डॉ. मानवश्री उसके पालतू मर्द को निःशुल्क मर्द बनाते हैं. उनकी सेवा ली जा सकती है. पालतू नामर्द नहीं माने तो सीधा-सा अर्थ है : उसे सिर्फ़ अपनी हवस से मतलब है, आपकी खुशी तृप्ति से नहीं.
ऐसे में आप मानवश्री से खुद को धन्य कर सकती हैं. वे क्या है, कितनी साधनाएँ किए है, इस बात से संबंधित उनके लेख पढ़ लें. या फिर उनकी लाइफ हिस्ट्री ही पढ़ लें. या उनका कोई शिविर ही विथ फेमली ज्वाइन कर लें, अब क्लियर देख लेंगी. वे मेडिटेशन विद्या से अपने स्पर्म के डिस्चार्ज सिस्टम को मनचाहे समय तक कंट्रोल किए रखने में सक्षम हैं.
हलांकि उनको योनि-पेनिस वाला रिलेशन नहीं बनाना होता. उनका टचनेश ही काफ़ी है. आज़मा के देखें, जिन्दगी भर उनका स्वाद लेंगी. उनके पास आपको सुपर आर्गेज्म के सागर में डुबोकर अर्धनारीश्वर की अवस्था में लाने के लिए डिवाइन मसाज थेरेपी, मेडिटेशन थेरेपी, स्प्रिचुअल सेक्स थेरेपी और प्राणिक हीलिंग की टेकनिक है. वे कुछ लेते भी नहीं है.
मैं मूर्ख नहीं हूँ. साइवर सिक्योरिटी की इंजिनियर हूँ. डियूटी पूरी करके घर पर सहेली के यहाँ स्टे करने को बोल देती हूँ. फ्लाइट से दिल्ली पहुँचकर रातभर मानवश्री की सेवा लेती हूँ. सुबह इसी तरह भोपाल पहुंकर ऑफिस ज्वाइन कर लेती हूँ. जहाँ चाह, वहाँ राह. जहाँ राह वहां मंज़िल. खैर….
बात करते हैं आर्गेज्म के 6 प्रकारों पर. अपना आकलन आप कर सकती हैं. आज भी कई महिला ऐसी हैं, जो ऑर्गेज्म के बारे में खुलकर बात नहीं करती। समस्या ये है की वे अपने पार्टनर से भी इस विषय पर बात नहीं करती। लाखों लाख महिलाएं हैं, जिन्होंने कभी ऑर्गेज्म का अनुभव तो दूर अहसास तक नहीं किया।
महिलाओं को अपनी बॉडी से जुड़ी जानकारी होना भी महत्वपूर्ण होता है, तब वे अपने पार्टनर को अपनी बॉडी एक्सप्लोर करते वक्त अपना प्लेजर प्वाइंट बता सकती हैं। महिलाओं के काफी कोशिश के बाद भी उन्हें ऑर्गेज्म नहीं आता. उन्हे ऑर्गेज्म तक पहुंचने में काफी लंबा समय लगता है। पुरुष 15- 20 मिनट में ही निचुड कर खिसक लेता है. कई महिलाएं अपना प्लेजर प्वाइंट भी नहीं जानती।
क्या आपको मालूम है कि ऑर्गेज्म भी अलग- अलग प्रकार के होते हैं? जी हां, महिलाओं के ऑर्गेज्म तक पहुंचने का तरीका अलग- अलग होता है। इस बारे में ठीक से समझने के लिए मैंने चेतना मिशन की चिकित्सिका डॉ श्रेया पाण्डेय से बात की. तो चलिए जानते हैं, महिलाएं कितने प्रकार से ऑर्गेज्म प्राप्त कर सकती हैं।
*1. क्लिटोरल ऑर्गेज्म :*
क्लिटोरिस एक ऐसा यौन-अंग है, जो योनि के बाहरी भाग पर एक छोटे से उभरे हुए टिशु की तरह दिखता है. यह आपकी योनि में भी आंतरिक रूप से फैला हुआ होता है।
योनि की यह यूनिट लाखों नर्व एंडिंग से बनी होती है, जो इसे उत्तेजना के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाते हैं। क्लिटोरिस को सीधे उत्तेजित करने या क्लिटोरिस के आस-पास के लेबिया को छूने से उस क्षेत्र में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, जिससे क्लिटोरिस फूल जाता है और उसे ऑर्गेज्म की आवश्यकता होती है। इस प्रकार आप अपनी क्लिटोरी को सक्षम पेनिस से स्टिमुलेट कर आर्गेज्म प्राप्त कर सकती हैं।
*2. जी-स्पॉट ऑर्गेज्म :*
जी स्पॉट वेजिनल वॉल में अंदर की तरफ होता है। यह आपकी वेजाइनल ओपनिंग और सर्विक्स के बीच होता है।
यह एक ऐसा जादुई भग-अंग है, जो आपको भगवत्ता तक ले जा सकता है. यह क्लीटोरिस के नर्व एंडिंग के नेटवर्क का हिस्सा भी है।
जी-स्पॉट सेक्स अन्य प्रकार के सेक्स की तुलना में बहुत तीव्र महसूस होते हैं। नेचुरल पेनिस लें, आर्टिफिशियल नहीं.
*3. वेजाइनल ऑर्गेज्म :*
क्लिटोरिस के अलावा, योनि में अतिरिक्त उत्तेजक जोन होते हैं : ए-स्पॉट, या एंटीरियर फोर्निक्स. यह सर्विक्स के ठीक नीचे योनि की उच्च सामने दीवार पर स्थित होता है।
यहाँ पेनिस के सही तरीके से घर्षण करने पर एक डीप वेजाइनल सेक्स ट्रिगर होता है। ऐसे में आप सर्विक्स के स्टिम्युलेट होने से भी ऑर्गेज्म प्राप्त कर लेती हैं। इन क्षेत्रों में नर्वस के साथ लिगामेंट होते हैं, जो अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
*4. निप्पल ऑर्गेज्म :*
ब्रेस्ट और निप्पल ज्यादातर महिलाओं के एरोजेनस जोन होते हैं, इसलिए उन क्षेत्रों को उत्तेजित करके ऑर्गेज्म प्राप्त करना संभव है।
निप्पल को विशेष तरीके से छूने पर वह प्रतिक्रिया करती है, क्योंकि उनमें कई नर्व एंडिंग होती हैं। स्तनमर्दन और स्तनपान की एक खास टेक्निक होती है, जो 99% पुरुष नहीं जानते. वे पशुवत या यंत्रवत पेश आते हैं.
*5. ब्लेंडेड ऑर्गेज्म :*
ब्लेंडेड ऑर्गेज्म वे क्लाइमैक्स हैं, जो एक समय में एक से अधिक एरोजेनस जोन के उत्तेजित होने पर प्राप्त होते हैं। क्लिटोरिस, जी-स्पॉट, निप्पल जैसे कामुक क्षेत्रों का कोई भी संयोजन मिश्रित ऑर्गेज्म की ओर ले जा सकता है।
*6. मल्टीपल ऑर्गेज्म :*
महिलाएं मल्टीपल ऑर्गेज्म का अनुभव कर सकती हैं, लेकिन उन्हें ऑर्गेज्म और उत्तेजना के बीच बहुत अधिक समय की आवश्यकता होती है। वे पुरुष की अपेक्षा 08 गुना अधिक यौनऊर्जा वाली होती हैं. उनके गरम होने, पिघलने, निचुड़ने में समय लगना स्वाभाविक है.
बस एक योग्यतम पुरुष नशीब हो जाए, जिसका मक़सद स्त्री को पूजना हो, भोगना नहीं. मतलब उसका ऐम स्त्री को आनंद का उत्तुन्ग शिखर देना हो, खुद का सुख नहीं






