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जानें देश में कब-कब हुए हादसे

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महाकुंभ के संगम क्षेत्र में धार्मिक समागम बुधवार की सुबह कई लोगों के लिए दुःस्वप्न में बदल गया।हालांकि इस तरह की घटनाएं होना कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भारत में मंदिरों और अन्य धार्मिक आयोजनों में भगदड़ के कारण अनेक लोग हताहत हुए हैं।

  पिछले साल हाथरस में 121 लोगों की मौत

हाल के वर्षों में धार्मिक कार्यक्रमों में भगदड़ की वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। पिछले साल दो जुलाई को उत्तर प्रदेश के हाथरस में स्वयंभू भोले बाबा के सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत हुई थी जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं। इसी प्रकार, 2005 में महाराष्ट्र के मंधारदेवी मंदिर में 340 से अधिक श्रद्धालु मारे गए तथा 2008 में राजस्थान के चामुंडा देवी मंदिर में कम से कम 250 श्रद्धालु मारे गए। 2008 में हिमाचल प्रदेश के नैना देवी मंदिर में एक धार्मिक सभा में भगदड़ मचने से 162 लोगों की जान चली गई।

हाल के वर्षों में देश में हुईं ऐसी प्रमुख त्रासदियां

  • 2 जुलाई 2024: उत्तर प्रदेश के हाथरस में स्वयंभू भोले बाबा उर्फ नारायण साकार हरि द्वारा आयोजित ‘सत्संग’ में भगदड़ मचने से महिलाओं और बच्चों सहित 100 से अधिक लोग मारे गए।
  • 31 मार्च, 2023: इंदौर शहर के एक मंदिर में रामनवमी के अवसर पर आयोजित हवन कार्यक्रम के दौरान एक प्राचीन ‘बावड़ी’ या कुएं केऊपर बने स्लैब के ढह जाने से कम से कम 36 लोगों की मौत हो गई।
  • 1 जनवरी, 2022: जम्मू-कश्मीर में प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण मची भगदड़ में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और एक दर्जन से अधिक घायल हो गए।
  • 14 जुलाई, 2015: आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में ‘पुष्करम’ उत्सव के पहले दिन गोदावरी नदी के तट पर एक प्रमुख स्नान स्थल पर भगदड़ मचने से 27 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए।
  • 3 अक्टूबर, 2014: दशहरा समारोह समाप्त होने के तुरंत बाद पटना के गांधी मैदान में भगदड़ मचने से 32 लोग मारे गए और 26 अन्य जख्मी हो गए।
  • 13 अक्टूबर, 2013: मध्य प्रदेश के दतिया जिले में रतनगढ़ मंदिर के पास नवरात्रि उत्सव के दौरान मची भगदड़ में 115 लोग मारे गए और 100 से ज़्यादा घायल हो गए। भगदड़ की शुरुआत इस अफवाह के कारण हुई कि श्रद्धालु जिस नदी के पुल को पार कर रहे थे, वह टूटने वाला है।
  • 19 नवम्बर, 2012: पटना में गंगा नदी के तट पर अदालत घाट पर छठ पूजा के दौरान एक अस्थायी पुल के ढह जाने से मची भगदड़ में लगभग 20 लोग मारे गए और कई अन्य घायल हो गए।
  • 8 नवम्बर, 2011: हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर हर-की-पौड़ी घाट पर भगदड़ में कम से कम 20 लोग मारे गए।
  • 14 जनवरी 2011: केरल के इडुक्की जिले के पुलमेडु में एक जीप के तीर्थयात्रियों को टक्कर मार देने के कारण मची भगदड़ में सबरीमला के कम से कम 104 श्रद्धालु मारे गए और 40 से अधिक घायल हो गए।
  • 4 मार्च, 2010: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कृपालु महाराज के राम जानकी मंदिर में भगदड़ में लगभग 63 लोग मारे गए। लोग स्वयंभू बाबा से मुफ्त कपड़े और भोजन लेने के लिए एकत्र हुए थे।
  • 30 सितम्बर, 2008: राजस्थान के जोधपुर शहर में चामुंडा देवी मंदिर में बम विस्फोट की अफवाह के कारण मची भगदड़ में लगभग 250 श्रद्धालु मारे गए और 60 से अधिक घायल हो गए।
  • 3 अगस्त, 2008: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में नैना देवी मंदिर में चट्टान खिसकने की अफवाह के कारण मची भगदड़ में 162 लोग मारे गए, 47 घायल हुए।
  • 25 जनवरी, 2005: महाराष्ट्र के सतारा जिले में मंधारदेवी मंदिर में वार्षिक तीर्थयात्रा के दौरान 340 से अधिक श्रद्धालुओं की कुचल जाने की वजह से मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए। यह दुर्घटना उस समय घटित हुई जब कुछ श्रद्धालुओं द्वारा नारियल तोड़ने के कारण सीढ़ियों पर फिसलन हो गई और लोग गिर गए।
  • 27 अगस्त, 2003: महाराष्ट्र के नासिक जिले में कुंभ मेले में पवित्र स्नान के दौरान भगदड़ में 39 लोग मारे गए और लगभग 140 घायल हो गए।
  •  धार्मिक स्थलों में लोग अपने परिवार के साथ सलामती की दुआएं मांगने जाते हैं लेकिन जब धार्मिक स्थल ही मौत की रंग भूमि में तबदील हो जाते हैं उस वक्त श्रद्धालुओं के पास हाथ मलने के अलावा कुछ और बाकी नहीं रहता है।
  • जम्मू-कश्मीर स्थित माता वैष्णो देवी भवन में 31 दिसंबर यानी शुक्रवार रात 2:45 पर भगदड़ मच गई। इस दुखद हादसे में 12 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है। जबकि 20 लोग घायल हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जम्मू कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा ने पीड़ितों को 10-10 लाख रुपये का ऐलान कर दिया है।
  • कभी भगदड़ से तो कभी प्रशासन की बदइंतजामी की वजह से ही इस तरह के हादसे होते हैं। लेकिन अंत तक इन हादसों के लिए लोग एक दूसरे को ही जिम्मेदार ठहराते नजर आते हैं। प्रशासन व सरकार बस चंद रुपयों से उनकी मौत की कीमत चुकाने की कोशिश करते हैं। उनकी मौत पर मुआवजे का ऐलान करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
  • पर धार्मिक स्थलों पर कब-कब ऐसी घटनाएं हुईं? आइये जानते हैं।
  • भारत में धार्मिक स्थलों पर भगदड़ का इतिहास
  • 14 जुलाई 2015
  • दक्षिण भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश में एक पवित्र नदी के तट पर भगदड़ में कम से कम 27 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई है।
  • 25 अगस्त 2014
  • मध्य प्रदेश के सतना जिले में चित्रकूट के कामतनाथ मंदिर में भगदड़ मच गई। 10 लोगों की मौत और करीब 60 लोग घायल हुए थे।
  • 25 सितंबर 2012
  • झारखण्ड के देवघर में ठाकुर अनुकूल चंद की 125वीं जयंती पर एक आश्रम परिसर में हजारों की भीड़ एकत्र हो जाने और सभागार में भारी भीड़ के कारण दम घुटने से बारह लोगों की मौत हो गई, जबकि 120 अन्य बेहोश हो गए।
  • 08 नवम्बर, 2011
  • उत्तर प्रदेश के हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर हजारों श्रद्धालुओं के एकत्र हो जाने के दौरान मची भगदड़ में 16 लोगों की जान चली गई।
  • 14 जनवरी, 2011
  • केरल के इदुक्की में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल शबरीमाला के नजदीक पुलमेदु में मची भगदड़ में 102 श्रद्धालु मारे गए थे और 50 घायल हो गए थे।
  • 04 मार्च, 2010
  • उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में कृपालुजी महाराज आश्रम में प्रसाद वितरण के दौरान 63 लोग मारे गए थे।
  • 30 सितम्बर 2008
  • राजस्थान के जोधपुर में चामुंडा देवी मंदिर में बम विस्फोट की अफवाह से मची भगदड़ में 250 श्रद्धालुओं की मौत हो गई।
  • 03 अगस्त, 2008
  • हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण नैना देवी मंदिर की एक दीवार ढह गई। इसमें 160 लोगों की मौत हो गई।
  • 26 जून, 2005
  • महाराष्ट्र के मंधार देवी मंदिर में मची भगदड़ में 350 लोगों की मौत हो गई थी।
  • अगस्त 2003
  • महाराष्ट्र के नासिक में कुम्भ मेले में मची भगदड़ में 125 लोगों की जान चली गई थी।
  • 1986
  • हरिद्वार में एक धार्मिक आयोजन के दौरान भगदड़ में 50 लोगों की मौत हो गई।
  • 1954
  • इलाहाबाद में कुंभ मेले के दौरान भगदड़ से लगभग 800 लोगों की जानें गईं।

Ramswaroop Mantri

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