भारतीय संस्कृति में श्रृंगार का अपना एक अलग ही महत्व है, सौंदर्य और कला की दुनिया में लाख का नाम सबसे ऊपर आता है. लाख की चूड़ियां सिर्फ एक आभूषण नहीं, बल्कि हमारी परंपरा का एक अटूट भी हिस्सा हैं इसकी खनक में अलग ही रास होता है साथ ही इसका पूजा पाठ में भी इस्तेमाल होता है. हालांकि, लाख के बाजारीकरण और मिलावट ने इन कारीगरों की रोज़ी रोटी पर संकट खड़ा कर दिया है. इंदौर के जैविक बाजार में लाख के बैंगल्स बना रहे मोहम्मद हुसैन ने बातचीत में बताया कि लाख सदियों से भारतीय परम्परा और गहनों में अहमियत रखने वाला पदार्थ रहा है. इससे न केवल चूड़ियां, हार, फोटो फ्रेम वाले ब्रेसलेट, नाम वाली चैन, पेंडल्स तक लोग बनवाते हैं. बाजार में एक तरफ जहां प्लास्टिक और केमिकल वाले गहने मिलते हैं उनके बजाय लाख कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता और सुंदर भी दिखता है. साधारण लाख की चूड़ियों का सेट 100 रुपए से 300 रुपए के बीच मिल जाता है. भारतीय संस्कृति में लाख के गहनों का खास महत्व है. यह सिर्फ आभूषण नहीं बल्कि परंपरा और पूजा-पाठ का भी हिस्सा हैं. इंदौर के जैविक बाजार में मोहम्मद हुसैन जैसे कारीगर लाख की चूड़ियां, हार और ब्रेसलेट बनाते हैं. साधारण लाख की चूड़ियों के सेट की कीमत 100 से 300 रुपए तक होती है और यह प्लास्टिक या केमिकल वाले गहनों की तुलना में सुरक्षित और सुंदर होती हैं.
कैसे डिजाइन तैयार करते हैं
लाख केवल चूड़ियों तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल हस्तशिल्प की वस्तुएं, मूर्तियां, गहनों के बक्से और कलम बनाने और सोने के आभूषणों को मजबूती देने में भी खूब होता है. आयुर्वेद में भी लाख का उपयोग दवाओं के रूप में किया जाता है. इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और पॉलिश उद्योग में शैलैक के रूप में इसकी भारी मांग है. वैसे तो यह राजस्थान की कला है और जयपुर के आस-पास इसका खूब काम होती है लेकिन इंदौर के धार रोड़ पर मोहम्मद हुसैन और उनके जैसे कईं कारीगर मिल जाते हैं जो आपके मन पसंद अनुसार लाख की डिजाइन तैयार कर आपको दे देते हैं. इसकी व्यू सबसे पहले लाख ही मंगाते हैं इस पर अलग-अलग तरह के रंग पिघाल कर डालते हैं जब यह गर्म होता है तभी उसे अपने हाथों की जादूगरी से मनचाही आकृति में ढाल लेते हैं.
नकली के बाजार से परेशान असली कारीगर लाख की उपयोगिता और महत्व के चलते मिलावट वाला और नकली लाख भी बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा है जिसके चलते लाख का सामान बनाने वाले कारीगरों की रोजी रोटी पर संकट खड़ा हो गया है. वहीं, ग्राहकों को भी ठगा जा रहा है लेकिन इसकी पहचान आसानी से का जा सकती है. लाख गर्म होने पर मोम की तरह पिघलने लगता है अगर आसानी से यह नहीं पिघलता तो वह लाख नहीं है. असली लाख की चूड़ी प्लास्टिक के मुकाबले थोड़ी भारी होती है. इसे छूने पर यह हल्की सी खुरदरी और गर्म महसूस होती है, जबकि प्लास्टिक एकदम चिकना और ठंडा लगता है.






Add comment