चक्रवाती तूफान ‘मिचौंग’ के मंगलवार को आंध्र प्रदेश में तट को पार करने की संभावना है। इस दौरान 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका है। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी समेत कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। तमाम जिलों में स्कूल बंद हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों से बात कर मदद का भरोसा दिया है। मौसम विभाग ने सात दिसंबर तक इस तरह की स्थिति बरकरार रहने और उसके बाद ‘मिचौंग’ के गहन दबाव क्षेत्र में तब्दील होने की संभावना जताई है,संसद के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन, TMC सांसद महुआ मोइत्रा के निष्कासन पर सस्पेंस,विधानसभा चुनावों में हार की समीक्षा के लिए कांग्रेस में शुरू हुआ बैठकों का दौर,इजरायल पीएम के खिलाफ रिश्वतखोरी के मामले में आज से फिर शुरू होगी सुनवाई,मिजोरम: सरकार गठन का दावा पेश करने पर फैसले के लिए ZPM करेगी बैठक
स्पैनिश अखबार संगठन ने मेटा पर ठोका 4600 करोड़ का मुकदमा, पढ़ें पूरी खबर

सूचना मीडिया एसोसिएशन ने कहा कि वह मीडिया संगठन सोशल मीडिया दिग्गज मेटा से 4600 करोड़ रुपये की मांग की है। एसोसिएशन ने मेटा पर यूरोपीय संघ के डाटा संरक्षण नियमों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन करने का आरोप लगाया।80 से अधिक समाचार पत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले स्पेन के संगठन ने फेसबुक की मूल कंपनी मेटा के खिलाफ 55 करोड़ यूरो (60 करोड़ डॉलर – लगभग 4600 करोड़ रुपये) का मुकदमा दायर किया है। संगठन ने मेटा पर डाटा सुरक्षा को लेकर यूरोपीय संघ के नियमों की अनदेखी कर ऑनलाइन विज्ञापन में अनुचित प्रतिस्पर्धा का आरोप लगाया है। सगंठन में स्पेन के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र एल पेस, एल मुंडो, एबीसी और ला वैनगार्डिया सहित दर्जनों समाचार पत्र शामिल हैं।
सूचना मीडिया एसोसिएशन ने कहा कि वह मीडिया संगठन सोशल मीडिया दिग्गज मेटा से 4600 करोड़ रुपये की मांग की है। एसोसिएशन ने मेटा पर यूरोपीय संघ के डाटा संरक्षण नियमों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन करने का आरोप लगाया। ये निमय मई 2018 से जुलाई 2023 के बीच लागू किए गए थे। आरोप है कि मेटा ने विज्ञापन प्रोफाइलिंग के लिए डाटा के इस्तेमाल के लिए नागरिकों की सहमति की जरूरत को बार-बार नजरअंदाज किया है। कंपनी ने यह कहते हुए टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया कि उसने कानूनी कागजात नहीं देखे हैं। मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पैसे कमाने के लिए लंबे समय से व्यवहारिक विज्ञापन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
देश में हर घंटे 19 आत्महत्या, किसानों-श्रमिकों के जान देने की संख्या बढ़ी, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

देशभर में हुईं 18.4 फीसदी आत्महत्याओं की वजह गंभीर बीमारियां रहीं। 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। अंडमान एवं निकोबार द्वीप, पंजाब, तमिलनाडु, सिक्किम और गोवा में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर सबसे अधिक थी।
2021 में 1,64,033 आत्महत्याओं के मुकाबले 2022 में 1,70,924 आत्महत्याएं हुई हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 13.3 फीसदी, तमिलनाडु में 11.6 फीसदी, मप्र में नौ, कर्नाटक में आठ और पश्चिम बंगाल में 7.4 फीसदी मामले इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के सामने आए। आंकड़ों के लिहाज से इनकी गणना की जाए देश में 2022 में हर घंटे 19 लोगों ने आत्महत्या की। खेती-बाड़ी के क्षेत्र में हर घंटे एक से अधिक किसानों और कृषि श्रमिकों ने आत्महत्या की।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट एक्सीडेंटल डेथ्स एंड स्यूसाइड्स इन इंडिया 2022 के अनुसार, वर्ष 2021 में 10,881 किसानों और कृषि श्रमिकों के मुकाबले 2022 में 11,290 लोगों ने आत्महत्या की। कृषि क्षेत्र में महाराष्ट्र में 4,248, कर्नाटक में 2,392, आंध्र में 917 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। 2022 में आत्महत्या करने वाले 5,207 किसानों में 4,999 पुरुष, जबकि 208 महिलाएं थीं। वहीं, आत्महत्या करने वाले 6,083 कृषि श्रमिकों में 5,472 पुरुष और 611 महिलाएं शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, चंडीगढ़, लक्षद्वीप व पुदुचेरी में कृषि क्षेत्र से संबंधित कोई आत्महत्या दर्ज नहीं की गई।
गंभीर बीमारियां बड़ी वजह
देशभर में हुईं 18.4 फीसदी आत्महत्याओं की वजह गंभीर बीमारियां रहीं। 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही। अंडमान एवं निकोबार द्वीप, पंजाब, तमिलनाडु, सिक्किम और गोवा में बीमारियों की वजह से आत्महत्या की दर सबसे अधिक थी।
14.8% घरेलू महिलाओं ने उठाया घातक कदम
व्यावसायिक क्षेत्र में 2022 के दौरान आत्महत्या करने वालों में सबसे अधिक संख्या 26.4% दिहाड़ी मजदूरों की थी। इसी अवधि के दौरान 14.8% घरेलू महिलाओं ने भी आत्महत्या की, जबकि 2021 में इनकी संख्या क्रमश: 25.6 और 14.1 फीसदी थी।
उत्तर प्रदेश और बिहार बेहतर स्थिति में
2022 में अखिल भारतीय आत्महत्या दर (एक लाख की आबादी पर आत्महत्या) 12.4 फीसदी रही जो इससे पहले 12 फीसदी थी। देशभर के 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में आत्महत्या दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही, जबकि 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में यह दर राष्ट्रीय औसत से कम थी। इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति उत्तर प्रदेश, बिहार, मणिपुर, नगालैंड, जम्मू-कश्मीर और लक्षद्वीप की रही।
बच्चों के खिलाफ अपराध में 8.7 फीसदी की वृद्धि
2022 में बच्चों के खिलाफ अपराध के कुल 1,62,449 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 (1,49,404 मामले) की तुलना में 8.7 फीसदी अधिक हैं। इसमें 45.7 फीसदी मामले अपहरण और बंधक बनाए जाने और 39.7 फीसदी यौन उत्पीड़न से जुड़े थे।
साइबर अपराध बेतहाशा बढ़े
2022 में साइबर अपराधों के देशभर में 65,893 मामले दर्ज किए गए, जो 2021 में दर्ज 52,974 मामलों की तुलना में 24.4 फीसदी अधिक हैं। वहीं, 19 महानगरों में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में 42.7 फीसदी की वृद्धि हुई। साइबर अपराध के सबसे ज्यादा 64.8 फीसदी मामले (42,710) धोखाधड़ी के मकसद से जुड़े थे। 5.5 फीसदी (3,648 मामले) जबरन वसूली और 5.2 फीसदी (3,434 मामले) यौन शोषण के थे।
यूएपीए के 75 फीसदी से अधिक मामले 4 राज्यों में
2022 में देश में यूएपीए कुल मामलों में से 75 फीसदी से अधिक मामले जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, असम और उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए, जबकि अकेले प. बंगाल में राजद्रोह के एक-चौथाई मामले दर्ज किए गए। 2022 में देश में आईपीसी की धारा 124ए (राजद्रोह) के कुल 20 मामले दर्ज किए गए, जबकि गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत 1,005 मामले दर्ज किए गए। यूएपीए के सबसे अधिक 371 मामले जम्मू-कश्मीर में, उसके बाद मणिपुर में 167, असम में 133 और यूपी में 101 दर्ज हुए। राजद्रोह के सबसे अधिक 5 मामले बंगाल में दर्ज किए गए, उसके बाद जम्मू-कश्मीर, मणिपुर और यूपी में 3-3 मामले दर्ज किए गए।
राजद्रोह के मामलों में आई कमी
2020 के बाद से राजद्रोह के मामलों में कमी आई है, जबकि यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में पिछले तीन वर्षों में वृद्धि देखी गई है। 2021 में देश में राजद्रोह के 76 और यूएपीए के 814 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2020 में इसके आंकड़े क्रमश: 73 और 796 थे।
सरकार के खिलाफ अपराध की श्रेणी में मामले बढ़े
सरकार के खिलाफ अपराध की श्रेणी के तहत 2021 में 5,164 मामलों की तुलना में 2022 में 5,610 मामले दर्ज किए गए। 2022 में कुल मामलों में से 78.5 फीसदी सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम (4,403 मामले) के तहत दर्ज किए गए।
मुख्यमंत्री के लिए पुराने चेहरे की जगह नई पीढ़ी को मौका देने पर भाजपा कर रही मंथन; ये है रणनीति

तीनों राज्यों में मुख्यमंत्री के चयन को लेकर भाजपा जल्दबाजी में नहीं है। वहीं कहा जा रहा है कि भाजपा छत्तीसगढ़ में आदिवासी तो मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के नेता पर दांव लगा सकतीा है।
हिंदीपट्टी के तीन अहम राज्यों में जीत के बाद भाजपा मुख्यमंत्री का नाम तय करने में जल्दबाजी के मूड में नहीं है। पूर्ण बहुमत के बावजूद पार्टी ने अभी किसी का नाम तय नहीं किया है। पार्टी में इस पर करीब-करीब सहमति है कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पुराने चेहरे पर दांव लगाने के बदले नई पीढ़ी को मौका मिले।
संकेत है कि पार्टी मध्य प्रदेश में पिछड़ा और छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेता पर दांव लगाएगी। चुनाव नतीजे आने के बाद रविवार देर रात पीएम नरेंद्र मोदी ने पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महासचिव बीएल संतोष के साथ मैराथन बैठक की थी। इस बैठक में इन राज्यों में नया नेतृत्व उभारने पर सैद्धांतिक सहमति बनी है। सोमवार को एमपी के सीएम शिवराज सिंह चौहान दिल्ली पहुंचे। ऐसे में मंगलवार को संसदीय बोर्ड की बैठक होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार इसमें विधायक दल की बैठक की तारीख और पर्यवेक्षकों के नाम पर मुहर लगाई जाएगी।
वसुंधरा राजे के रुख के कारण राजस्थान में बढ़ सकता है इंतजार
चंद महीने बाद लोकसभा चुनाव हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री का नाम तय करते समय पार्टी नेतृत्व सामाजिक समीकरण के साथ राज्य के सियासी समीकरण का भी ध्यान रखेगा। जहां तक नई पीढ़ी को मौका देने की बात है तो इस मामले में पार्टी की असली चिंता राजस्थान है जहां इसके लिए वसुंधरा राजे को साधना होगा। वसुंधरा नतीजे आने के बाद से ही न सिर्फ समर्थक विधायकों के साथ बैठकें कर रही हैं, बल्कि दूसरे खेमे के विधायकों को भी पक्ष में लाने का प्रयास कर रही हैं। राजस्थान में बहुमत का आंकड़ा बहुत बड़ा नहीं है। ऐसे में भाजपा लोकसभा चुनाव से पूर्व कोई विवाद नहीं चाहेगी।
कयासों के दौर, मगर पार्टी में चुप्पी
तीन राज्यों में मुख्यमंत्री के चेहरे के सवाल पर सोमवार को दिन भर कयासों का दौर चलता रहा। हालांकि इस सवाल पर पार्टी ने चुप्पी साध रखी है।
- राजस्थान : पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुनराम मेघवाल, दीया कुमारी सहित कुछ नामों की चर्चा।
- छत्तीसगढ़ : केदार कश्यप, रमन सिंह, विष्णुदेव साय सहित कई नामों पर कयासबाजी हुई।
- मध्य प्रदेश : शिवराज सिंह चौहान के अलावा कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया व नरेंद्र सिंह तोमर के नाम चर्चा में।
जंगली सूअर के हमले से मजदूर गंभीर घायल

रंगस (हमीरपुर)। ग्राम पंचायत नेरी के गांव खगल में रविवार देर शाम को फोरलेन निर्माण कार्य में जुटे एक मजदूर पर जंगली सूअर ने हमला कर दिया। हमले में मजदूर बुरी तरह से घायल हो गया है। घायल मजदूर की पहचान झनियारा निवासी 52 वर्षीय सुरेश कुमार के रूप में हुई है। सूअर के हमले से सुरेश कुमार के एक बाजू की हड्डी टूट गई है।ग्राम पंचायत नेरी के गांव खगल में रविवार देर शाम को फोरलेन निर्माण कार्य में जुटे एक मजदूर पर जंगली सूअर ने हमला कर दिया। हमले में मजदूर बुरी तरह से घायल हो गया है।
देश के 15 राज्यों में मिलेगी कैंब्रिज और ऑक्सफोर्ड की शिक्षा, उत्तराखंड-उत्तर प्रदेश से होगी शुरुआत

कैंब्रिज एजुकेशन लैब के सीईओ सुयश भट्ट ने कहा कि हम कैंब्रिज और अ़ॉक्सफोर्ड जैसी प्रसिद्ध यूनिर्वसिटीज के उत्पाद और सेवाओं को लेकर भारत में आना चाहते हैं। हम इन विश्वविद्यालयों के साथ वर्षों से काम कर रहे हैं।
विदेश की प्रमुख यूनिर्वसिटीज ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज की शिक्षा अब भारत में भी मिलने वाली है। इसके लिए अब तक 15 राज्यों से बात हो रही है। शुरुआती चरण में उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के साथ बात जारी है।कैंब्रिज एजुकेशन लैब के सीईओ सुयश भट्ट ने कहा कि हम कैंब्रिज और अ़ॉक्सफोर्ड जैसी प्रसिद्ध यूनिर्वसिटीज के उत्पाद और सेवाओं को लेकर भारत में आना चाहते हैं। हम इन विश्वविद्यालयों के साथ वर्षों से काम कर रहे हैं। हमने इस साल भारत के 25-30 स्कूलों को इन विश्वविद्यालयों में आमंत्रित किया था। जबकि 30 स्कूल ऑनलाइन जुड़े थे। इनके मालिकों ने वहां की शिक्षा व्यवस्था देखी और वे इस व्यवस्था को यहां पर लेकर आने वाले हैं। कैंब्रिज एजुकेशन लैब की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में काफी सारे बदलावों की जरूरत है। इस संबंध में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी प्रस्ताव भेजे गए हैं। भट्ट ने कहा, हमने वहां के प्रोफेसरों व भारतीय टीचरों के साथ कई ट्रेनिंग प्रोग्राम किए हैं। हमारी 12वीं तक के छात्रों को शिक्षा देने की योजना है।
नई विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी एक-तिहाई से दूर, संख्या के हिसाब से मप्र में सबसे ज्यादा

हिंदी पट्टी के 230 विधानसभा वाले राज्य मध्य प्रदेश से इस बार 27 महिलाएं निर्वाचित होकर सदन पहुंची हैं। 2018 में यहां से केवल 21 ही सदन में जगह बना सकीं। 2013 में 30 महिलाएं चुनी गई थीं।संसद में भले ही महिला आरक्षण विधेयक को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मध्य प्रदेश विधानसभाओं में नवनिर्वाचित महिला विधायकों की संख्या एक-तिहाई के आंकड़े से काफी दूर रही है। थिंक टैंक पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मध्य प्रदेश में महिला विधायकों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है, जबकि राजस्थान में घट गई है। नवनिर्वाचित विधायकों में 21 प्रतिशत महिलाओं के साथ छत्तीसगढ़ सभी चार राज्यों में सबसे आगे रहा है।
मध्यप्रदेश में बढ़ी संख्या: हिंदी पट्टी के 230 विधानसभा वाले राज्य मध्य प्रदेश से इस बार 27 महिलाएं निर्वाचित होकर सदन पहुंची हैं। 2018 में यहां से केवल 21 ही सदन में जगह बना सकीं। 2013 में 30 महिलाएं चुनी गई थीं।
छत्तीसगढ़ में 19 महिलाएं: 90 सीटों वाले छत्तीसगढ़ में इस बार 19 महिलाएं जीतकर विधानसभा पहुंचीं। 2018 में छत्तीसगढ़ में 13 महिला विधायक (मात्र 14 फीसदी) थीं।
राजस्थान में कम हुई भागीदारी: 200 सीटों वाले राजस्थान में अबकी सिर्फ 20 महिलाएं ही विधानसभा में पहुंचीं। वर्ष 2018 में महिला विधायकों की संख्या 24 थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्थान विधानसभा में महिललों की संख्या कभी भी 15 प्रतिशत से अधिक नहीं रही।
तेलंगाना में आठ फीसदी महिलाएं: तेलंगाना में महिला विधायकों की संख्या 10 यानी कुल विधायकों का आठ फीसदी है। 2018 में राज्य ने छह महिलाओं को अपनी विधानसभा में भेजा था।
: हमीरपुर शहर की सड़कों पर शाम होते ही पसर रहा अंधेरा
शहर की सबसे अहम सड़कों पर स्ट्रीट लाइट न होने से लोगों को खासी दिक्कतें पेश आ रही हैं। होटल हमीर से वेटरनरी अस्पताल और उपायुक्त कार्यालय से अणु चौक तक कहीं भी स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। इससे शाम होते ही अंधेरा पसर जाता है।
अयोग्य घोषित सांसद ने पार्टी को तीन साल में शीर्ष पर पहुंचाया, अब संभालेंगे मिजोराम की सत्ता

लालदुहोमा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुरक्षा अधिकारी के तौर पर सेवा दे चुके हैं। उन्होंने पहली बार 1984 में कांग्रेस के टिकट पर मिजोरम विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए थे। उसी वर्ष बतौर कांग्रेस उम्मीदवार वह निर्विरोध सांसद चुने गए। जोरम पीपल्स मूवमेंट (जेडपीएम) को शानदार जीत दिलाने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी लालदुहोमा (73) का राजनीतिक सफर कई बाधाओं से जूझते हुए बीता है। दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने वाले पहले सांसद रहे लालदुहोमा अब मिजोरम की सत्ता संभालेंगे। उन्होंने 2020 में जोरम पीपल्स मूवमेंट (जेडपीएम) का गठन किया और तीन साल में ही सत्ता तक पहुंचा दिया।
लालदुहोमा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुरक्षा अधिकारी के तौर पर सेवा दे चुके हैं। उन्होंने पहली बार 1984 में कांग्रेस के टिकट पर मिजोरम विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए थे। उसी वर्ष बतौर कांग्रेस उम्मीदवार वह निर्विरोध सांसद चुने गए। तत्कालीन मुख्यमंत्री ललथनहवला और कुछ कैबिनेट मंत्रियों के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगने के बाद उन्होंने 1986 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और पार्टी से अपनी प्राथमिक सदस्यता वापस ले ली।
कांग्रेस छोड़ने के बाद लालदुहोमा दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित होने वाले पहले सांसद बने। 2020 में विधायक के तौर पर भी अयोग्य घोषित हो चुके हैं। उन पर आरोप लगा कि वे निर्दलीय जीते और फिर जेडपीएम में शामिल हुए।
केंद्र से बनाएंगे अच्छे संबंध
लालदुहोमा ने कहा, मिजोरम की अगली सरकार केंद्र से अच्छे संबंध बनाए रखेगी, पर उनकी पार्टी किसी राजनीतिक समूह में शामिल नहीं होगी। उन्होंने कहा, उनकी प्राथमिकताएं अधूरी परियोजनाओं को पूरा करना होगा।
सोने पर छाई महंगाई… उधर अवैध सोने की खरीद-बिक्री कर बढ़ाई कमाई
बुलियन कारोबारी और बिल्डर इन दिनों रोजाना 18 से20 करोड़ रुपये के अवैध सोने की कर रहे खरीद-बिक्री
सामान्य दिनों में 50 किलो अवैध सोने-चांदी की होती है खरीद-बिक्री, एक सप्ताह में 30 से 35 किलो तक डिमांड बढ़ी
गोरखपुर। दिवाली के बाद से सोने और चांदी का भाव तेजी से बढ़ा है। इस समय 10 ग्राम सोने का (बुलियन) भाव 65,051 हजार रुपये है। उधर, धंधेबाज जीएसटी की चोरी कर 1500 रुपये कम भाव में खरीद-बिक्री कर मोटी कमाई कर रहे हैं। सामान्य दिनों में रोजाना करीब 50 किलो अवैध सोने की खपत है, लेकिन इधर 35 किलो अवैध सोने की खपत और बढ़ गई है। धंधेबाज कच्चे बिल पर ही सोना बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे में सिर्फ पक्के पर्चे (जीएसटी बिल) पर ही आभूषणों की खरीदारी करें।
बाजार के सूत्रों के मुताबिक, धंधेबाज अवैध सोना खरीदने के बाद एक किलोग्राम में तीन लाख रुपये का अंतर रखकर उसे फुटकर दुकानदारों के पास खपा रहे हैं। फुटकर के व्यापारी कच्चे (अवैध) में खरीदे गए सोने के दाम को बढ़ा-घटा के ग्राहकों को बेच कर मुनाफा कमा रहे हैं।
दरअसल, सोने के दाम इसलिए भी बढ़े हैं, क्योंकि नए भंडार नहीं मिल रहे हैं। साथ ही पुराने भंडारों से उत्पादन गिर रहा है। ऐसे में सोने का उत्पादन रुक गया है। बाजार में रखे सोने खरीदे-बेचे जा रहे हैं।
एक कारण यह भी है कि लगातार इसके भाव चढ़ रहे हैं। अवैध बुलियन के कारोबार से जुड़े सूत्र ने बताया कि सोने का दाम बढ़ने पर इसका फायदा बड़े प्लेयरों को ही होता है। इसके लिए वे एक खास एप का सहारा लेते हैं। इसी एप पर प्रतिदिन प्रति मिनट की दर से भाव में बदलाव होते रहते हैं।
उदाहरण के तौर पर किसी ग्राहक ने एप पर शाम सात बजे सोने के 65,049 रुपये की दर से 1500 रुपये नीचे के भाव से एक किलो सोना खरीदा। अब 15 मिनट बाद इसी एप पर सोने का भाव 64,970 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। ऐसे में वह सोने के स्टाक को रोक लेगा, लेकिन जैसे ही एप पर इन दोनों से अधिक भाव आएगा तो अपने खरीदे सोने को बैंक के भाव से तीन लाख रुपये प्रति किलो की दर से कम कर फुटकर व्यापारियों को दे देगा।
अब फुटकर व्यापारी बैंक के भाव के हिसाब से आभूषण तैयार कर उसमें गलाई और डिजाइन का भाव जोड़कर कच्चे कागज पर ग्राहकों को दाम से महंगा-सस्ता कर बेच देते हैं। संवाद
बड़े व्यापारियों और बिल्डर की काली कमाई की होती है खपत
शहर में बड़े व्यापारियों और बिल्डरों की काली कमाई भी इसी बुलियन के खेल में खपाई जाती है। करोड़ों रुपये की खरीदारी एप के माध्यम से ही होती है। इसके लिए एप पर सोने की डिमांड बतानी होगी। एप पर ही व्हाट्सएप और फोन की सुविधा है। पंजीकरण फर्म से खरीदारी करेंगे तो बैंक के भाव से सोने की खरीद हो जाएगी। अवैध सोने की खरीदारी भी चाहेंगे तो सीधे कोलकाता से इसकी बुकिंग एप से ही हो जाएगी। ऐसे में लोग सीधे और बुलियन के द्वारा भी इसमें अपना धन खपाते हैं।
नेतन्याहू पर रिश्वतखोरी का केस फिर से शुरू
इस्राइल-हमास जंग के बीच एक जिला अदालत प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई मंगलवार से फिर शुरू करेगी। यह सुनवाई दो महीने बाद फिर से हो रही है। आरोप है कि नेतन्याहू ने ‘वल्ला’ वेबसाइट पर अपने पक्ष में मीडिया कवरेज के बदले से ऐसे रेगुलेटरी कदम उठाए जिससे बेज़ेक टेलिकम्युनिकेशंस को आर्थिक फायदा हुआ। जून में, मामले में तीन जजों ने सिफारिश की थी कि अभियोजन पक्ष रिश्वतखोरी का आरोप वापस ले ले। मगर आरोप वापस लेने से इनकार कर दिया गया था। इसके बाद अदालत ने मामले से जुड़े लोगों की गवाही सुनी।
50 से अधिक कंपनियों के सिरप टेस्ट में फेल
देश में कफ सिरप बनाने वाली 50 से अधिक कंपनियां क्वॉलिटी टेस्ट में फेल रही हैं। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। भारत में बने कफ सिरप से कथित तौर पर दुनियाभर में 141 बच्चों की मौत की खबरें सामने आई थीं। इसके बाद देश के विभिन्न राज्यों में लैब टेस्ट किया गया था।
सड़क हादसों में घायल लोगों को कैशलेस इलाज जल्द
केंद्र सरकार देश भर में सड़क हादसों में घायल लोगों को कैशलेस इलाज की सुविधा अगले तीन-चार महीनों में शुरू करने की तैयारी में है। सड़क परिवहन और राजमार्ग सचिव अनुराग जैन ने कहा कि भारत में सड़क हादसों में जान गंवाने वाले लोगों की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है। इसे कम करने के लिए सरकार पीड़ितों को फौरन मेडिकल सुविधा मुहैया कराने की योजना बना रही है।
चेन्नै में मिचौंग लाया बारिश का सैलाब, एयरपोर्ट बंद, बिजली गुल
चक्रवात मिचौंग ने तमिलनाडु में तबाही मचा दी है। सड़कों पर सैलाब आ गया है। रविवार रात से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। तेज हवाएं चल रही हैं। कई पेड़ गिर गए हैं। सारे शिक्षण संस्थान बंद हैं। शहर के कई इलाकों की बिजली गुल हो गई और इंटरनेट सेवा बाधित हुई। लोगों को भी वर्क फ्रॉम होम करने को कहा गया है। कई ट्रेनें कैंसल कर दी गई हैं, तो सोमवार रात तक के लिए चेन्नै एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया। राज्य के मंत्री के. एन. नेहरू ने कहा, चेन्नै में 70-80 वर्षों की सबसे बदतर बारिश झेल रहा है। मौसम का हाल देखते हुए यह भी आशंका का है कि चेन्नै का हाल 2015 जैसा हो सकता है। तब पूरे शहर ने ऐसी की आपदा झेली थी। मौसम विभाग के अपडेट के मुताबिक, चक्रवात मिचौंग 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। इसके आंध्र प्रदेश तट के करीब बढ़ने और 5 दिसंबर को नेल्लोर और मछलीपट्टनम के तट से टकराने की आशंका है।
मछली पकड़ने वाले विकसित देशों को हिंद महासागर के टूना को हुए नुकसान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए
भारत ने सोमवार को कहा कि मछली पकड़ने वाले विकसित देशों को हिंद महासागर के टूना को हुए नुकसान की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री परषोत्तम रूपाला ने भारतीय समुद्री टूना आयोग (आईओटीसी) के डेटा संग्रह और सांख्यिकी पर 19वें कार्यकारी पक्ष के समापन सत्र को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि कुछ देशों द्वारा औद्योगिक रूप से मछली पकड़ने में हाल की वृद्धि ने वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं। उन्होंने कहा, जहां कई देशों ने अपने विशाल औद्योगिक बेड़े को हिंद महासागर की टूना संपदा का दोहन करने और उसे खत्म करने की अनुमति दी, वहीं भारत ने समुद्री पारिस्थिति को बनाये रखते हुए काम किया।
राष्ट्रगान के अपमान को लेकर बीजेपी विधायकों को जारी नोटिस पर कलकत्ता हाई कोर्ट की रोक
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को कोलकाता पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा परिसर में राष्ट्रगान गाए जाने के दौरान उसका कथित अपमान करने को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आठ विधायकों को जारी नोटिस पर अंतरिम रोक लगा दी। भाजपा विधायक शंकर घोष और अन्य ने पार्टी के विधायकों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया है। न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने मदारीहाट के पार्टी विधायक एवं मुख्य सचेतक मनोज तिग्गा और सिलीगुड़ी निर्वाचन क्षेत्र के घोष सहित भाजपा विधायकों को सात दिसंबर को पुलिस के सामने पेश होने के नोटिस पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
महुआ के निष्कासन का विरोध करेगी कांग्रेस
महुआ मोइत्रा के मामले पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह एक ‘राजनीतिक साजिश’ है। ऐसे में मोइत्रा को निष्कासित करने के किसी भी प्रयास का कांग्रेस का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि हम आचार समिति की रिपोर्ट पर चर्चा चाहते हैं। रमेश के मुताबिक, मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपनी ‘चुप्पी’ तोड़नी चाहिए और दोनों सदनों में वहां की ‘गंभीर स्थिति’ पर चर्चा होनी चाहिए।
दिल्ली में प्रेम-प्रसंग के चलते हत्या के 16 मामले दर्ज किए गए: एनसीआरबी
दिल्ली में 2022 में प्रेम संबंधों के कारण हत्या के 16 मामले सामने आए। एनसीआरबी के आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। इनमें श्रद्धा वाल्कर की सनसनीखेज हत्या का मामला भी शामिल है। वाल्कर के लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला ने कथित तौर पर किसी अन्य व्यक्ति से संबंध होने के संदेह में गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी और शव के 35 टुकड़े कर दिए थे। वाल्कर के शव को दक्षिणी दिल्ली के महरौली के निकट जंगल में फेंक दिया गया था। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार दिल्ली में हत्या के कुल 501 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से कम से कम 13 मामले नाजायज संबंधों, 54 आपसी रंजिश, 197 पारिवारिक, संपत्ति और अन्य झगड़ों से संबंधित थे।
शाह ने चक्रवात को लेकर तमिलनाडु, आंध्र, पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों से बात की, मदद का आश्वासन दिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चक्रवात मिचौंग के कारण उत्पन्न स्थिति पर सोमवार को तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों से बात की और उन्हें सभी आवश्यक केंद्रीय मदद का आश्वासन दिया। शाह ने यह भी कहा कि एनडीआरएफ के कर्मियों की पर्याप्त तैनाती पहले ही की जा चुकी है और अतिरिक्त टीम आगे की सहायता के लिए तैयार है। शाह ने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी में उनके समकक्षों वाई एस जगन मोहन रेड्डी और एन रंगास्वामी से बात की।
ना हम हताश हैं ना निराश हैं, 3 राज्यों में नतीजों पर बोली कांग्रेस
मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान चुनावों में कांग्रेस की हार पर पार्टी महासचिव जयराम रमेश कि तीन राज्यों में नतीजे निराशाजनक हैं, लेकिन हम हताश या निराश नहीं हैं, हम इस फैसले को स्वीकार करते हैं। रमेश ने कहा कि यह हमारी उम्मीदों से काफी नीचे है। हम इन विवरणों का विश्लेषण कर रहे हैं… हमारा संकल्प कम नहीं हुआ है। हम और भी मजबूती से लड़ेंगे। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बुधवार को इंडिया गठबंधन की एक अनौपचारिक बैठक बुलाई है। इसके बाद मे, एक औपचारिक बैठक भी होगी।
व्हाइट हाउस ने यूक्रेन को वित्तीय मदद जारी रखने के लिए संसद में जल्द मंजूरी पर दिया जोर
बाइडन प्रशासन ने सोमवार को अमेरिकी संसद को यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक सहायता के रूप में अरबों डॉलर की मंजूरी देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा है कि मदद के बिना रूस के आक्रमण से खुद को बचाने में यूक्रेन सक्षम नहीं होगा। प्रतिनिधि सभा और सीनेट के नेताओं को लिखे और सार्वजनिक रूप से जारी किए गए एक पत्र में प्रबंधन कार्यालय और बजट निदेशक शलांडा यंग ने आगाह किया है कि साल के अंत तक अमेरिका के पास यूक्रेन को हथियार और सहायता भेजने के लिए धन की कमी हो जाएगी और इससे युद्ध के मैदान में यूक्रेन पर ‘‘दबाव’’ बढ़ेगा।




