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ताजा समाचार -करवा चौथ पर देशभर में होगा 15000 करोड़ रुपये का कारोबार,चार वर्ष में देश की 3.51 करोड़ हेक्टेयर खेती योग्य भूमि बर्बाद,फ्लोटिंग वोटरों के रुख पर दोनों दलों की नजर

सोने में दिखी तेज़ी : जाने आज का भाव
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दिल्ली शराब घोटाला मामले में सीएम केजरीवाल को ई़डी ने नोटिस भेज 2 नवंबर को पेश होने को कहा है। ईडी इस मामले के बाबत उनसे पूछताछ कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मामलों में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने छह से आठ महीने में जांच पूरी करने का निर्देश दिया।करवा चौथ पर देशभर में होगा 15000 करोड़ रुपये का कारोबार,चार वर्ष में देश की 3.51 करोड़ हेक्टेयर खेती योग्य भूमि बर्बाद,फ्लोटिंग वोटरों के रुख पर दोनों दलों की नजर महाराष्ट्र में विधायक अयोग्यता विवाद पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। SC ने स्पीकर से अजित पवार गुट के नेतृत्व वाले विधायकों के एक समूह के खिलाफ शरद पवार के नेतृत्व वाले NCP समूह की अयोग्यता याचिकाओं पर 31 जनवरी, 2024 तक फैसला करने को कहा है।

मध्य प्रदेश में कमल बनाम कमलनाथ, फ्लोटिंग वोटरों के रुख पर दोनों दलों की नजर, बागियों से भी खतरा

Kamal vs Kamal Nath in MP BJP started plan MP ke man mai modi MP Election news update

मैहर के रहने वाले नीरज यादव भोपाल में मास्टर ऑफ फार्मेसी की पढ़ाई के साथ फार्मा इंडस्ट्री में नौकरी भी कर रहे हैं। कहते हैं, सरकार ने शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अच्छा काम किया है, लेकिन मैहर, सीधी और रीवा में अच्छी सड़कों की कमी है। पानी की दिक्कत है। 

भोपाल रेलवे स्टेशन से ठिकाने तक पहुंचने के लिए पहली मुलाकात एक ऑटो चालक बाबू खां से हुई। कोई 35-40 वर्ष का नजर आ रहा बाबू खां शिवाजी नगर पहुंचाने के लिए बढ़ा ही था, कि एक वाहन कांग्रेस का बड़ा होर्डिंग ले जाते हुए नजर आ गया। इसी बहाने विधानसभा चुनाव पर चर्चा शुरू हो गई। बाबू खां से पूछा कि क्या कांग्रेस सरकार बना सकती है? जवाब देने से पहले खुद का सवाल दागा…कहां से आए हो? जवाब पुरसुकून महसूस होने पर बोला, लोग मामा (मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान) से ऊब गए हैं। पिछले चुनाव में हारने के बाद मामा ने कांग्रेस को जिस तरह तोड़कर सरकार बनाई, लोग बहुत गुस्सा थे। दो-तीन महीने पहले चुनाव हुआ होता, तो सूफड़ा साफ हो जाता। मगर भाजपा ने बड़े-बड़े लोगों को चुनाव में खड़ा कर दिया है…लोग अंदाजा ही नहीं लगा पा रहे कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा? लड़ाई अब कांटे की हो गई है। वह यह भी बताते हैं कि हारे-जीते कोई भी, वह वोट हमेशा कांग्रेस को ही देते हैं। आखिर में पूछने पर बताया कि नाम बाबू खां हैं और स्टेशन के पास ही रहते हैं।

मैहर के रहने वाले नीरज यादव भोपाल में मास्टर ऑफ फार्मेसी की पढ़ाई के साथ फार्मा इंडस्ट्री में नौकरी भी कर रहे हैं। कहते हैं, सरकार ने शहरी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अच्छा काम किया है, लेकिन मैहर, सीधी और रीवा में अच्छी सड़कों की कमी है। पानी की दिक्कत है। अस्पतालों में दवाओं की कमी है। सीएम के नाम पर किसी नए और युवा को जिम्मेदारी देने की बात कहते हैं। वे कहते हैं, पीएम नरेंद्र मोदी अच्छा काम कर रहे हैं। वे यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से प्रभावित हैं और कहते हैं कि अपराधियों के खिलाफ फॉर्मूला-न जेल न बेल, सीधा भगवान से मेल…अच्छा है।

सियासी भ्रमण के बीच सवाल चाहे आम लोगों से कीजिए या चुनावी रणनीति बनाने वाले नेताओं से, या फिर सियासी समीकरणों पर नजर रखने वाले विश्लेषकों से…ले-देकर सब ऑटो चालक बाबू खां वाली तस्वीर पर ही आकर टिक जाते हैं। सीएम चेहरे के बदलाव वाली नीरज की बात से इत्तेफाक करने वाले भी मिलते हैं। भोपाल में वरिष्ठ पत्रकार अश्विनी मिश्रा कहते हैं कि तीन महीने पहले तक कांग्रेस काफी आगे थी। मगर, जून-जुलाई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की चुनावों में एंट्री के बाद से भाजपा ने वापसी की है। 

‘एमपी के मन में मोदी’ कैंपेन
पार्टी ने ‘एमपी के मन में मोदी’ कैंपेन चलाकर सरकार को लेकर बनी नकारात्मकता कम की। फिर दिग्गज केंद्रीय मंत्रियों व सांसदों को प्रत्याशी बनाने का दांव चला। सीएम शिवराज ने कांग्रेस के कई वादों को चुनाव एलान से पहले ही पूरा कर दिया। इसमें सीएम लाडली बहना योजना के अंतर्गत महिलाओं को हर महीने 1250 रुपये और 450 रुपये में सिलिंडर की सुविधा देने की शुरुआत हो चुकी है। लाडली बहना की धनराशि चरणबद्ध तरीके से 3000 रुपये तक करने का वादा भी शामिल है। भाजपा इसे गेमचेंजर के रूप में देख रही है।

चुनाव विश्लेषक भावेश झा कहते हैं, कांग्रेस के पक्ष में दो बड़े फैक्टर हैं। पहला, तमाम लोग डेढ़ दशक से एक ही सरकार को देखते-देखते ऊब होने की बात कर रहे हैं। दूसरा, भाजपा के उलट मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर कांग्रेस में कोई द्वंद्व नहीं है। कांग्रेस पूर्व सीएम कमलनाथ के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है। कांग्रेस ने जिन मुद्दों पर 2018 के चुनाव में जनादेश प्राप्त किया था, उनमें से ज्यादातर को फिर दोहराया है। हालांकि वह यह भी याद दिलाते हैं कि कांग्रेस प्रत्याशी चयन में चूक गई है। भाजपा की अपेक्षा वहां ज्यादा विरोध है। कमलनाथ अपने कार्यकाल में ज्यादातर वादों पर अमल नहीं कर पाए। लोग वचनपत्र पर अमल के लिहाज से भाजपा पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। शायद इसी वजह से सत्ता जाने के तत्काल बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिल सका था।  28 सीटों में से भाजपा के 19 के मुकाबले उसे 9 सीटें ही मिली थीं।

50 सीटें तय करेंगी कौन बनाएगा सरकार
चुनावी सर्वे कर रहे एक विश्लेषक आंकड़े और समीकरण समझाते हुए दावा करते हैं कि शुरुआती बढ़त और घटत से हटकर बीते रविवार तक की स्थिति के अनुसार कांग्रेस और भाजपा लगभग 90-90 सीटों के साथ बराबर की लड़ाई लड़ती नजर आ रही हैं। बाकी 50 सीटें तय करेंगी कि कौन सरकार बनाएगा। एक अन्य विश्लेषक का दावा है कि लड़ाई कांटे की है, लेकिन भाजपा को 115 और कांग्रेस को 110 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, इनमें कई सीटों की तस्वीर आगे बदल भी सकती है, क्योंकि कई जगह कांग्रेस व भाजपा के बागी और छोटे-छोटे दलों के प्रत्याशी समीकरण बिगाड़ने की स्थिति में नजर आ रहे हैं। कांग्रेस को सात सीटों पर घोषित प्रत्याशी बदलने पड़े हैं। नतीजों पर फ्लोटिंग वोटर बड़ी भूमिका निभाते हैं। नामांकन के बाद वाले चुनावी कैंपेन में जो भारी पड़ेगा, वह दांव मार सकता है।

चुनौतियां…कार्यकर्ता निराश, तो कहीं बागियों से खतरा
भाजपा

  1. लंबे समय तक सत्ता में रहने की वजह से एक तबके में बदलाव की आवाज।
  2. इस चुनाव में मुख्यमंत्री का कोई चेहरा तय नहीं करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगना।
  3. 32 विधायकों का टिकट काटकर नए लोगों को मौका। इससे कई बागी हो गए या दूसरे दलों से मैदान में हैं।
  4. कांग्रेस का ओबीसी मुद्दा उठाते हुए जातिगत गणना कराने और कर्मचारियों से पुरानी पेंशन बहाल करने का वादा।
  5. केंद्रीय मंत्रियों व सांसदों को टिकट देने से वर्षों से विधानसभा चुनाव में अवसर का इंतजार कर रहे युवा कार्यकर्ताओं में निराशा।

कांग्रेस

  1. कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के बीच मनभिन्नता। भाजपा का इसे मुद्दा बनाना।
  2. लंबा समय लगाने के बाद टिकटों का एलान, फिर भी बड़ा असंतोष। सात टिकट भी बदले। तमाम बागी मैदान में।
  3. जातिगत गणना का वादा, लेकिन भाजपा की तरह सीएम पद पर ओबीसी चेहरों को अवसर देने का जवाब नहीं।
  4. कांग्रेस नेता राममंदिर से जुड़े मुद्दे उठाते हैं, तो भाजपा आक्रामक हो जाती है। पार्टी को बैकफुट पर आना पड़ रहा।
  5. इंडिया गठबंधन में शामिल सपा से गठबंधन न हो पाना और आपसी विरोध। सपा के कई प्रत्याशियों से नुकसान का खतरा।

किसका एजेंडा भाएगा मतदाताओं को

भाजपा
सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए शिवराज को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया है। पार्टी ने इस बार सामान्य वर्ग से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय, पिछड़े वर्ग से केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल, आदिवासी समाज से केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बना दिया है। सतना के सांसद गणेश सिंह, जबलपुर के सांसद राकेश सिंह, सीधी से सांसद रीति पाठक और होशंगाबाद से सांसद उदय प्रताप सिंह भी मैदान में हैं। ये सभी अपने-अपने क्षेत्र व समाज के दिग्गज चेहरे हैं और कुछ तो लंबे अरसे से सीएम बनने का सपना देखते आ रहे हैं। संदेश साफ है, जो जितनी ताकत से समर्थन और सीटें लेकर आएगा, उसका सियासी भविष्य आगे वैसे ही तय किया जाएगा। पार्टी को उम्मीद है कि ये अपनी सीट के साथ-साथ आसपास की सीटों पर भी जीत दिलाएंगे, हालांकि इनमें कई नेता अपनी सीटों में ही उलझे नजर आ रहे हैं।

भाजपा कभी नामांकन के दिनों तक प्रत्याशी का एलान करती रहती थी। इस बार चुनाव से काफी पहले अगस्त से ही प्रत्याशियों का एलान शुरू कर दिया। सबसे पहले हारी सीटों पर प्रत्याशी उतारे। उसके बाद केंद्रीय मंत्री व सांसदों के रूप में चर्चित चेहरों को उतारा गया। फिर मुख्यमंत्री शिवराज सहित पुराने चेहरों का एलान हुआ। अब पूरा फोकस असंतुष्टों को समझाने, जीत की रणनीति बनाने और उस पर अमल पर है। पूरी रणनीति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशन में अमल में लाई जा रही है।

शिवराज मध्य प्रदेश में भाजपा के पिछड़ा वर्ग के बड़े चेहरे हैं। तमाम किंतु-परंतु के बावजूद भाजपा उन्हें नजरंदाज करने की स्थिति में नजर नहीं आ रही। दिग्गजों को उतारने के बावजूद डेढ़ दशक में राज्य के हर क्षेत्र तक पहुंच बनाने वाले शिवराज के बड़े समर्थक वर्ग में गलत संदेश न जाए, इसका ख्याल रखा जा रहा है। पीएम मोदी ने राज्य के लोगों के नाम लिखी चिट्ठी में अपने नाम पर वोट जरूर मांगा, लेकिन न सिर्फ शिवराज की तारीफ की, बल्कि उनके विकास मॉडल को भी सराहा है।

लाडली बहना योजना व 450 रुपये में गैस सिलिंडर देने की योजना लाने के बाद शिवराज का तेवर और मिजाज भी बदल गया है। संकेत हैं कि बड़ा जनादेश आया तो लोकसभा चुनाव से पहले शिवराज के विकल्प पर शायद ही गौर हो। कमजोर बहुमत या नतीजे उम्मीद के हिसाब से न रहे तो बात और है।

कांग्रेस
भाजपा से उलट सारे द्वंद्व को खत्म करते हुए कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया है। प्रत्याशी से लेकर वचनपत्र तक पर कमलनाथ की पूरी छाप नजर आती है। कमलनाथ एक बार मोदी-शाह-शिवराज की टीम को भी हरा चुके हैं। कमलनाथ को दिल्ली से एमपी तक की सियासत की गहरी समझ है।

कमलनाथ भाजपा के हिंदुत्व व सनातनी एजेंडे का सामना करने का दम दिखाते रहे हैं। वह अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में 101 फुट ऊंची हनुमान जी की प्रतिमा लगवा चुके हैं। पार्टी ने रामनवमी व हनुमान जयंती पर अपने पदाधिकारियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं से रामलीला, सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ भी करवाया। राम मंदिर मुद्दे पर भी वह बोलते रहे हैं। हालांकि, भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है। सीएम शिवराज के सामने रामायण भाग-2 में हनुमान की भूमिका निभाने वाले विक्रम मस्ताल को टिकट दिया। यह सीट आकर्षण में है।

मुहूर्त देखकर टिकट देने की छवि भाजपा की रही है। लेकिन, इस बार कांग्रेस ने शुभ मुहूर्त का इंतजार कर नवरात्र के पहले दिन से टिकट का वितरण शुरू किया। इसे खूब प्रचारित भी किया गया।

कांग्रेस के स्थानीय नेता कमलनाथ व दिग्विजय को जय-वीरू की जोड़ी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। सांगठनिक ताकत कमलनाथ के पास मानी जाती है, तो जमीनी पकड़ दिग्विजय सिंह के पास। हालांकि दोनों के ही मनभेद सामने आ चुके हैं। भाजपा इसका लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। दिग्विजय को बमुश्किल हाथ में पंजे की तरह वचनपत्र के पेज दो पर छोटी सी जगह मिली है।

एमपी में कमलनाथ ही सबसे बड़े नेता
अन्य चुनावी राज्यों राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने पार्टी का वचन पत्र राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के हाथों जारी कराया। छत्तीसगढ़ में इसके लिए राहुल गांधी पहुंचे। लेकिन, मध्य प्रदेश में वचन पत्र जारी करने के लिए शीर्ष नेताओं में कोई भी नजर नहीं आया। एमपी में कमलनाथ ही सबसे बड़े नेता हैं। संकेत साफ है कि सत्ता आई तो कमलनाथ की, नहीं आई तो भी वे ही जिम्मेदार। एमपी में करीब 52 फीसदी ओबीसी आबादी मानी जाती है। कांग्रेस ने जातिगत गणना का वादा कर इस वर्ग को साधने का दांव चला है। पार्टी ने ओबीसी समाज से 62 लोगों को टिकट दिए हैं।

चिंताजनक : यूएनसीसीडी की रिपोर्ट में खुलासा, चार वर्ष में देश की 3.51 करोड़ हेक्टेयर खेती योग्य भूमि बर्बाद

Worrying UNCCD report reveals 3crore 51 lakh hectares cultivable land in country destroyed in four years

खनन भूमि निम्नीकरण का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। खनन के उपरांत खदानों वाले स्थानों को गहरी खाइयों और मलबे के साथ खुला छोड़ दिया जाता है। खनन के कारण झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में वनोन्मूलन भूमि निम्नीकरण का कारण बना है।वर्ष 2015 से 2019 के बीच भारत की 3.51 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि बर्बाद हुई है। यह देश की कुल भूमि का 9.45 फीसदी भाग है। 2015 में यह 4.42 फीसदी था। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी) की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

भूमि निम्नीकरण मानव प्रेरित या प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो किसी पारितंत्र में भूमि को प्रभावशाली ढंग से कार्य करने की क्षमता को घटा देती है। यानी भूमि की जैविक अथवा आर्थिक उत्पादकता में कमी आ जाती है। फसलों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन घट जाता है। यूएनसीसीडी के अनुसार, 251.71 मिलियन भारतीय भूमि क्षरण की इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए। यह भारत की कुल आबादी का 18.39 फीसदी है। इसे इस तरह भी समझा जा सकता है कि भारत की कुल बंजर भूमि 4 करोड़ 30 लाख फुटबॉल मैदानों के आकार के बराबर है।

तेजी से बढ़ता औद्योगीकरण और शहरीकरण
तेजी से हो रहे शहरीकरण के साथ-साथ देश के आर्थिक और उद्योगों के विकास के लिए खेती योग्य और हरे भरे मैदानों का उपयोग किया जा रहा है। इसके लिए वनों की अत्यधिक कटाई भी होती है और भूमि का उपयोग इस प्रकार होता है कि भूमि अपनी प्राकृतिक उन्नयन गुणवत्ता खो देती है।

खनन, अति पशुचारण सहित कई कारण
खनन भूमि निम्नीकरण का सबसे महत्वपूर्ण कारक है। खनन के उपरांत खदानों वाले स्थानों को गहरी खाइयों और मलबे के साथ खुला छोड़ दिया जाता है। खनन के कारण झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में वनोन्मूलन भूमि निम्नीकरण का कारण बना है। वहीं, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में अति पशुचारण भूमि निम्नीकरण का मुख्य कारण है।

मवेशियों के घास और अन्य हरे पौधों को अत्यधिक खाने से अवांछित पौधों की प्रजातियों की अत्यधिक वृद्धि हो जाती है, जिससे मिट्टी का कटाव होता है। इसके अलावा लकड़ी, ईंधन और वन उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण वनों की कटाई तेजी से हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप भूमि संसाधनों का क्षरण हो रहा है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अधिक सिंचाई भूमि निम्नीकरण के लिए उत्तरदायी है।

दुनिया ने 10 करोड़ हेक्टेयर स्वस्थ भूमि खोई
यूएनसीसीडी की रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2019 तक दुनिया ने हर साल कम से कम 10 करोड़ हेक्टेयर स्वस्थ और उत्पादक भूमि खो दी।

ठोस कार्रवाई आवश्यक
रिपोर्ट में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए ठोस कार्रवाई को आवश्यक बताया गया है। भूमि क्षरण न केवल हमारे पर्यावरण को प्रभावित करता है, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका और कल्याण को भी प्रभावित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी आज लॉन्च करेंगे मेरा युवा भारत, अमृत वाटिका का भी करेंगे उद्घाटन

Prime Minister Modi will launch Mera Yuva Bharat today Meri Maati Mera Desh

मेरा युवा भारत यानी माय भारत एक स्वायत्त निकाय है, जो युवाओं को अपनी प्रतिभा और अपने सपने पूरे करने के लिए एक उचित मंच देगा। ताकि वे विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा सकें।

: महिलाएं चलाएंगी रोडवेज की पिंक बसें, प्रशिक्षण के लिए दूसरे-तीसरे बैच की तैयारी शुरू

UP News: Women will drive pink buses of roadways, preparation for training of second and third batch begins

शारदीय नवरात्रि में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या (रामनगरी) में महिलाओं के हाथों में परिवहन निगम की कमान सौंपी थी। परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह ने बताया कि महिलाओं के प्रशिक्षण का पहला बैच 8 मार्च 2021 से शुरू किया था। 

केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया बोले, केंद्र सभी को सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं कर रहा प्रदान

Union Minister Mansukh Mandaviya says Center providing affordable health facilities to all

वीडियो कान्फ्रेंस के जरिये जुड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने कहा कि दक्षिण-पूर्व एशिया का क्षेत्र दुनिया की एक चौथाई से अधिक आबादी का घर है और इसे बीमारी के एक महत्वपूर्ण बोझ सेनिपटना भी होगा।

‘शराब कारोबारी समूह से 100 करोड़ मिलना बहस का मुद्दा’, सिसोदिया की जमानत याचिका पर अदालत की टिप्पणी

Supreme court comments on manish Sisodia bail plea

पीठ ने कहा, कानून के शासन का अर्थ है कि कानून सरकार समेत सभी नागरिकों और संस्थानों पर समान रूप से लागू होते हैं। कानून के शासन के लिए हाशिये पर पड़े लोगों के लिए न्याय तक पहुंच के समान अधिकार की आवश्यकता है। सिसोदिया की अर्जी खारिज करते हुए पीठ ने कई पहलुओं पर गौर किया। दिल्ली आबकारी नीति घोटाले में फंसे दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। मामले की सुनवाई कर रही शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा, सीबीआई और ईडी का आरोप है कि शराब समूह से 100 करोड़ रुपये प्राप्त हुए और इसका इस्तेमाल सिसोदिया के सहयोगियों और आप के अन्य नेताओं ने किया। यह कुछ हद तक बहस का विषय है।

साथ ही आरोप यह था कि 100 करोड़ रुपये की रिश्वत में से 45 करोड़ रुपये गोवा चुनाव के लिए हवाला के जरिये आम आदमी पार्टी को हस्तांतरित किए गए थे। हालंकि, सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि आप पर मुकदमा नहीं चलाया जा रहा है। लिहाजा कोर्ट ने कहा कि यह आरोप नहीं लगाया जा सकता है कि मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम 2002 की धारा 70 के तहत सिसोदिया परोक्ष रूप से उत्तरदायी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि गोवा चुनाव के लिए आप को 45 करोड़ रुपए के ट्रांसफर में सिसोदिया की संलिप्तता के संबंध में कोई विशेष आरोप नहीं है।

सब पर समान रूप से लागू होता है कानून
पीठ ने कहा, कानून के शासन का अर्थ है कि कानून सरकार समेत सभी नागरिकों और संस्थानों पर समान रूप से लागू होते हैं। कानून के शासन के लिए हाशिये पर पड़े लोगों के लिए न्याय तक पहुंच के समान अधिकार की आवश्यकता है। सिसोदिया की अर्जी खारिज करते हुए पीठ ने कई पहलुओं पर गौर किया। पीठ ने कहा, सीबीआई ने बताया है कि साजिश और उसमें सिसोदिया की संलिप्तता पूरी तरह स्थापित होती है। पीठ ने कहा, स्पष्टता के लिए, बिना कोई जोड़, घटाव या विस्तृत विश्लेषण किए, हम अपीलकर्ता के खिलाफ सीबीआई के आरोप पत्र में कही गई बातों को दोहराते हैं।

इन मामलों को मौत की सजा उम्रकैद जैसे अपराधों से जोड़ना उचित नहीं
पीठ ने फैसले में कहा, हालांकि अभियोजन एक आर्थिक अपराध से संबंधित हो सकता है, फिर भी इन मामलों को मौत की सजा, आजीवन कारावास, दस साल या उससे अधिक की सजा के अलावा एनडीपलीएस कानून के अपराधों के साथ जोड़ना उचित नहीं होगा। इसे हत्या, दुष्कर्म, फिरौती के लिए अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म जैसे मामलों की तरह भी नहीं देखा जा सकता।

कानूनी सवालों के जवाब नहीं मिले
पीठ ने कहा, दलीलों के दौरान कुछ कानूनी सवाल उठे, लेकिन जवाब नहीं मिला। जस्टिस खन्ना ने कहा, इन सवालों का अगर उत्तर आया भी तो वह बहुत ही सीमित था। पीठ ने सिसोदिया के इस तर्क पर भी गौर किया कि सीबीआई के 294 और डीओई के 162 गवाहों व दोनों की ओर से क्रमश: 31,000 और 25,000 पन्नों के दस्तावेजों के बाद भी आरोपों पर बहस शुरू नहीं हुई है।

सिसोदिया को 2.20 करोड़ रिश्वत देने का दावा आरोप नहीं है
पीठ ने बिचौलिये दिनेश अरोड़ा की ओर से सिसोदिया को 2.20 करोड़ रुपये की रिश्वत देने वाले दावे पर कहा कि यह कोई आरोप नहीं है। सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में भी इसका जिक्र नहीं किया है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस भुगतान को आपराधिक आय साबित करना मुश्किल हो सकता है।

अंतरिम जमानत अर्जियों पर भी मेरिट के आधार पर हो फैसला
पीठ ने कहा, मनीष सिसोदिया खराब सेहत और पत्नी की बीमारी से जुड़ी चिकित्सीय आपात स्थिति के आधार पर अंतरिम जमानत की अपील भी कर सकते हैं। उनकी इन अपीलों पर मेरिट के आधार पर ही फैसला होना चाहिए। पीठ ने कहा, अगर मुकदमा पूरा होने में देरी पर सिसोदिया जमानत अर्जी दाखिल करते हैं तो उस पर सुनवाई के दौरान निचली अदालतों को वर्तमान और पहले खारिज की जा चुकी अर्जियों पर गौर किए बगैर मेरिट के आधार पर फैसला करना होगा। तब त्वरित सुनवाई के अधिकार पर की गई टिप्पणियों पर विचार करना होगा। मुकदमा लंबित रहने से किसी को लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। पीठ ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम के मामले में 2020 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी जिक्र किया। पीठ ने कहा, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने तब 49 दिन जेल में काटे थे। हम सिसोदिया की ‘लंबी’ कैद को लेकर चिंतित हैं।

26 फरवरी से जेल में हैं सिसोदिया 
सिसोदिया को सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में 26 फरवरी को गिरफ्तार किया था। एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू की और 9 मार्च को पूछताछ के बाद सिसोदिया को गिरफ्तार किया था।

करवा चौथ पर देशभर में होगा 15000 करोड़ रुपये का कारोबार, खरीदारी के लिए सजे बाजार

more than Rs 15000 crore business expected during Karwa Chauth festival says CAIT

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया, करवा चौथ को लेकर पिछले कई दिनों से दिल्ली सहित देशभर के बाजारों में काफी गहमागहमी दिख रही है। इससे पता चलता है कि कोरोना जैसी चुनौतियों से उबरने के बाद लोगों की वित्तीय सेहत बेहतर हुई है।  

करवा चौथ का त्योहार एक नवंबर यानी बुधवार को मनाया जाएगा। इस पर्व पर खरीदारी के लिए बाजारों में काफी रौनक दिख रही है। अनुमान है कि करवा चौथ पर देशभर में 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होगा। अकेले दिल्ली में करीब 1,500 करोड़ रुपये की खरीद-बिक्री होने की उम्मीद है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने बताया, करवा चौथ को लेकर पिछले कई दिनों से दिल्ली सहित देशभर के बाजारों में काफी गहमागहमी दिख रही है। इससे पता चलता है कि कोरोना जैसी चुनौतियों से उबरने के बाद लोगों की वित्तीय सेहत बेहतर हुई है। इस पूरे त्योहारी सीजन में खर्च करने को लेकर लोगों की धारणा बेहतर दिख रही है। इसलिए, रक्षाबंधन और नवरात्र की तरह इस बार करवाचौथ पर भी पिछले साल की तुलना में अधिक कारोबार होने का अनुमान है। 

पिछले साल करवा चौथ पर पूरे देश में करीब 11,000 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ था। वहीं, दिल्ली के लोगों ने इस पर्व पर करीब 1,100 करोड़ खर्च किए थे। 

25% तक रहेगी सोने-चांदी की हिस्सेदारी कुल बिक्री में
कैट के मुताबिक, करवा चौथ पर देशभर में होने वाले कुल कारोबार में सोने-चांदी के आभूषणों की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी रहने की उम्मीद है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने बताया कि इस करवा चौथ पर परिधानों पर सबसे अधिक खर्च होने का अनुमान है। 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कुल कारोबार में वस्त्रों एवं साड़ियों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 35 फीसदी रह सकती है। पूजा सामग्री व्यापार की हिस्सेदारी 10 फीसदी, मेहंदी की 10 फीसदी, मिठाइयां व अन्य की 10 फीसदी, बर्तन की 5 फीसदी और फूल कारोबार की हिस्सेदारी 5 फीसदी रहने का अनुमान है।

चांदी के करवे की बाजार में अधिक मांग
छलनी, दीया व पूजा से जुड़ीं सामग्रियों के अलावा इस बार चांदी से बने करवे की भी बाजार में अधिक मांग है।

दिवाली पर 3.5 लाख करोड़ की बिक्री संभव
दिवाली पर इस बार देशभर में करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये के व्यापार की उम्मीद है। कैट के विभिन्न राज्यों के 30 शहरों में व्यापारी संगठनों के जरिये कराए गए हालिया सर्वे के मुताबिक, दिवाली पर करीब 65 करोड़ लोग खरीदारी करते हैं। प्रति व्यक्ति औसत खरीद 5,500 रुपये भी मान लिया जाए तो यह आंकड़ा 3.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा। 

वोकल फॉर लोकल का असर इस बार चीन से आयात नहीं
खंडेलवाल ने बताया, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुरू किए गए वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत अभियान की वजह से इस बार व्यापारियों ने त्योहारों पर बिकने वाला कोई भी सामान चीन से आयात नहीं किया है। ग्राहक भी चीनी सामान नहीं लेना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि सीमा पर तनाव के बाद चीन के उत्पादों की मांग में बड़ी गिरावट आई है। इस साल त्योहारी सीजन में चीन का कोई भी सामान बाजारों में नहीं बिकेगा। 

इस्राइल का गाजा पर दो तरफ से हमला, हमास के चार कमांडरों समेत कई आतंकी ढेर, सुरंगें भी ध्वस्त

Israel Hamas War updates IDF deepens military assault in Gaza Strip United Nations

इस्राइली सेना ने कहा, उसने गाजा के पूरब-पश्चिम से हमले किए हैं। लड़ाकू विमानों ने हमास के 600 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया है। इस्राइली सैन्य प्रवक्ता रियर एडमिरल डैनियल हगारी ने कहा, हम जमीन के रास्ते आगे बढ़ रहे हैं और सेना व आतंकियों में सीधी लड़ाई भी हो रही है। 

प्रियंका गांधी बोलीं, दादी-पिता छलनी हुए… फिर भी नहीं घटी हमारी देशभक्ति

chhattisgarh election 2023 Priyanka Gandhi addressed election meetings of Bilaspur and Khairagarh

कांग्रेस महासचिव प्रियंका ने बिलासपुर में दादी और पिता की हत्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, दादी को गोलियों से भून दिया गया, सात साल बाद पिता का छलनी शरीर घर आया, फिर भी हमारी देशभक्ति कम नहीं हुई। बिलासपुर और खैरागढ़ की चुनावी सभाओं में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने एलान किया कि एलपीजी सिलिंडर भराने पर महिला के बैंक खाते में 500 रुपये की सब्सिडी आएगी। साथ ही, प्रियंका ने सत्ता में कांग्रेस के लौटने पर हर माह 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली समेत सात अन्य घोषणाएं भी कीं।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका ने बिलासपुर में दादी और पिता की हत्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, दादी को गोलियों से भून दिया गया, सात साल बाद पिता का छलनी शरीर घर आया, फिर भी हमारी देशभक्ति कम नहीं हुई। जब हम अपनी बीती पीढ़ी की बात करते हैं, तो हमारे विरोधी परिवारवाद की बात उठाते हैं, पर ये परिवारवाद नहीं देशभक्ति है। रैली में उन्होंने प्रदेश कांग्रेस का थीम सॉन्ग लॉन्च किया।

जनसभा से प्रियंका गांधी ने की ये घोषणाएं

  • सिलेंडर रिफिल करने पर 500 रुपये की सब्सिडी घर की महिला के बैंक खाते में दिया जाएगा।
  • 200 यूनिट तक बिजली फ्री, अधिक खपत पर 200 यूनिट प्रति माह तक नि:शुल्क बिजली।
  • महिला स्व-सहायता समूहों तथा सक्षम योजनांतर्गत लिए गए ऋण माफ। 
  • आगामी वर्षों में 700 नवीन ग्रामीण औद्योगिक पार्कों की स्थापना। 
  • राज्य के सभी सरकारी स्कूल को स्वामी आत्मानंद इंग्लिश एवं हिन्दी मीडियम स्कूलों में अपग्रेड करेंगे। 
  • छत्तीसगढ़ के निवासियों के सड़क दुर्घटनाओं में तथा अन्य आकस्मिक दुर्घटनाओं में मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत नि:शुल्क इलाज। 
  • परिवहन व्यवसाय से जुड़े 6,600 से अधिक वाहन मालिकों के वर्ष 2018 तक के 726 करोड़ राशि के बकाया मोटरयान कर, शास्ति और ब्याज के कर्ज की माफ। 
  • राज्य के किसानों से तिवरा को भी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा। 

शिक्षकों का होगा सामूहिक बीमा, जल्द परस्पर तबादले की उम्मीद, छह नवंबर को फिर होगी वार्ता

Lucknow News: There will be collective insurance for teachers, mutual transfer is expected soon, talks will be

नौ अक्तूबर को शिक्षकों के महानिदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय पर धरना देने के बाद शासन के साथ वार्ता तय हुई थी। सोमवार को महासंघ के अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा एमकेएस सुंदरम व विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक हुई। 

यूपी कैबिनेट की बैठक आज : कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिलेगी मंजूरी, जौहर ट्रस्ट से वापस ली जाएगी जमीन

UP Cabinet meeting today: Many important proposals will get approval, land will be taken back from Johar Trust

बड़ी कंपनियों को उत्तर प्रदेश में आकर्षित करने के लिए फार्च्यून-500 कंपनियों को रियायती दरों पर जमीन देने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी मिल सकती है। इससे पहले इन कंपनियों को मिलने वाली सब्सिडी का प्रस्ताव खारिज हो चुका है। इसे पुन: संशोधन के बाद कैबिनेट में लाया जा रहा है।

: हार्दिक पांड्या की वापसी होते ही अय्यर होंगे से टीम से बाहर!

World Cup 2023: Shreyas Iyer will be out of Team India as soon as Hardik Pandya returns!

टीम इंडिया प्वाइंट्स टेबल में बिना एक भी मैच गंवाए 12 अंकों के साथ टॉप पर बनी हुई है। 

Ramswaroop Mantri

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