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ताजा समाचार -क्‍यों राहुल ब्र‍िगेड पर बीजेपी की नजर? बिना कीटनाशकों के बिना भी तैयार होंगी फल-सब्जियां,25% छात्र कक्षा दो की पुस्तक पढ़ने में असमर्थ,यूएन कार्यक्रम में रुचिरा कंबोज ने साझा की भारत की विकास यात्रा

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बंबई उच्च न्यायालय ने विधायकों को अयोग्य नहीं ठहराने के महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के आदेश को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की याचिकाओं पर बुधवार को नार्वेकर और उद्धव ठाकरे समूह के 14 विधायकों को नोटिस जारी किया। , पाकिस्तान ने बलूचिस्तान प्रांत में एक सुन्नी आतंकी संगठन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए जाने पर ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। ईरान के इन हमलों में दो बच्चों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। भारत में कोविड-19 के 269 नए मामले सामने आए हैं जबकि संक्रमण के उपचाराधीन मामलों की संख्या घटकर 2,556 रह गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को अयोध्या को कोलकाता से जोड़ने वाली ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’ की उड़ान सेवा को हरी झंडी दिखाई। पेरिस ओलंपिक में जगह बनाने से केवल एक जीत दूर खड़ी भारतीय महिला हॉकी टीम को एफआईएच ओलंपिक क्वालीफायर्स में अपने से अधिक रैंकिंग के जर्मनी के खिलाफ गुरुवार को यहां होने वाले सेमीफाइनल में सफलता हासिल करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना होगा।

माई बाड़ा…पुरुषों के मठ में हमें कौन महंत-महाराज बनाएगा, यहीं सुरक्षित हैं हम सब

My baada...who will make us a Mahant-Maharaj in the men's monastery, we all are safe here.

….भगवान राम का जिक्र आता है तो उनकी आंखें डबडबा जाती हैं। कहती हैं, सीता जी हमारी बहन हैं। बड़े दुख किए, अब घर मिला है। आंसू पोछती हैं, लेकिन गला रुंध जाता है। पिछले आषाढ़ की द्वादशी को 100 साल पूरे कर लिए हैं रामसनेही दासी ने। माई बाड़ा की वो सबसे उम्रदराज संत हैं।

जननी सम जानहिं पर नारी। तिन्ह के मन सुभ सदन तुम्हारे ।।
यानी, जो पुरुष अपनी पत्नी के अलावा किसी और स्त्री को मां के समान समझता है, उसी के हृदय में ईश्वर का वास होता है।

भगवान राम का जिक्र आता है तो उनकी आंखें डबडबा जाती हैं। कहती हैं, सीता जी हमारी बहन हैं। बड़े दुख किए, अब घर मिला है। आंसू पोछती हैं, लेकिन गला रुंध जाता है। पिछले आषाढ़ की द्वादशी को 100 साल पूरे कर लिए हैं रामसनेही दासी ने। माई बाड़ा की वो सबसे उम्रदराज संत हैं। जन्मभूमि आंदोलन में जब ढांचा गिरा, गोलियां चलीं तो वो सरयू किनारे रहती थीं। कहती हैं बसों में भरकर लाशें आतीं और उन्हें सरयू में बहा देते थे। आठ दिन तक लोग सरयू में इसलिए नहा नहीं पाए क्योंकि खून से पानी लाल हो गया था। 

उनके बाड़े में रामजानकी मंदिर की पहली महंत रेशमा दासी 70 साल की उम्र में भी मोपेड चलाती थीं। हृष्ट-पुष्ट ऐसी कि 50 किलो की बोरी अकेले उठा लेतीं। वह भी चुपके से कारसेवा में चली गई थीं। खूब पिटाई झेली, बंदूक के कुंदे से सिर में ऐसी चोट लगी कि छह महीने उठ नहीं पाई थीं।  

अयोध्या के 3 माई बाड़े में 40-45 महिलाएं रहती हैं। कोई बंगाल, मप्र तो कोई महाराष्ट्र, बिहार और यूपी के अलग-अलग जिलों से यहां आई हैं। कोई घर से परेशान है तो किसी को राघव श्री राम की भक्ति खींच लाई है। 

यहां की महिला संत कायदों की पक्की हैं। कभी मांगकर नहीं खातीं। आकाशवृत्ति परंपरा को मानती हैं, इसलिए जो यहां दे गया, उसी से काम चलता है। सुबह उठकर पूजन पाठ करती हैं। बिना भोग, खाना नहीं खातीं। और बाथरूम जाने के भी अलग कपड़े रखती हैं। बिल्कुल साधुओं वाले नियम। हां थोड़ा बहुत वक्त मिल गया, तो पंचायत जरूर कर लेती हैं। 16 साल की मांडवी इस माई बाड़ा की उत्तराधिकारी है। पांच दिन की थी जब रेशमा दासी उसे ले आई थीं। अब वह तो रहीं नहीं लेकिन बाकायदा वसीयत और ये बाड़ा उसके नाम कर गई हैं। दसवीं में पढ़ने वाली मांडवी अभी पूजा-पाठ-मठ उतना नहीं समझती। लेकिन मंदिर से मोह इतना कि किसी बूढ़ी संत को खरोंच तक आए तो दवा लेकर दौड़ पड़ती है। 

कुसुम दासी ग्रेजुएट हैं। माई बाड़े के दूसरे नंबर वाले मंदिर की वो महाराज हैं। कहती हैं यहां हम सुरक्षित हैं। पुरुषों के मठ में हमें कौन महंत बनाएगा? यहां हम सब एक दूसरी की मां-बहन-बेटी-शिष्या और चेली हैं। वो दस दिन पहले ही रामलला के दर्शन कर आई हैं।

कृष्णादासी ने तो 22 तारीख के लिए 2 किलो हवन सामग्री मंगवाई है। महीने का खर्च बमुश्किल चलता है फिर भी उनको भरोसा है, राम किसी को भूखा नहीं सोने देते। इनके पास पुरुषों के वर्चस्व वाले मंदिर-मठों की तरह सम्पन्नता और वैभव नहीं है। दरवाजे पुराने हो चुके हैं, चौखट लड़खड़ाती सी है। खिड़कियां टूट चुकी हैं और उसपर लटके फटे-पुराने कंबल अयोध्या की तेज सर्दी से बचाने के जरा भी लायक नहीं। खैर…

जानकी घाट पर एक दर्शन भवन है। इसका जिक्र अचानक इसलिए क्योंकि यहां कि महंत अयोध्या की पहली महिला पीठाधिपति हैं। महंत डॉ. ममता शास्त्री। यह स्थान सुल्तानपुर के सांसद रह चुके महंत विश्वनाथ दास शास्त्री ने बनवाया था। कहती हैं गुरुजी ने उन्हें धर्मपुत्री माना था। गुरुजी का शरीर पूरा हुआ तो उन्हें जो जलसमाधि दी, उसकी अंतिम क्रिया के सारे काम उत्तराधिकारी बतौर ममता ने ही पूरे किए।

ममता मनोविज्ञान में पीएचडी हैं। टॉपिक था, परीक्षा से पूर्व तनाव। सीबीएसई इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई की है और एलएलबी, बीएड की डिग्री भी है। उम्र बमुश्किल 40 साल है। 2015 में मठ की पीठाधिपति बनीं तो रामानंद संप्रदाय की पहली महिता महंत थीं। वह गृहस्थ हैं। पति वकील हैं। एक बेटी है, नाम है वैदेही। उनके मठ में स्वामी रामानंद आचार्य की 700 साल पुरानी मूर्ति है। सुबह साढ़े तीन घंटे पूजन-हवन के साथ उनका दिन शुरू होता है।

राममंदिर आंदोलन के वक्त वो स्कूल में थीं। कहती हैं, शिला पूजन के लिए स्कूल में राम लिखी ईंटें आई थीं। सब रोज उसकी पूजा करते थे। वो एक ईंट घर लाने की जिद कर बैठी थीं। जब वो ईंटें वापस चली गईं तो रोज वो उस जगह को प्रणाम करने जाती थीं जहां वो ईंटें रखी गई थीं। उनका मठ राममंदिर आंदोलन की राजनीति का अखाड़ा था। अशोक सिंघल और कल्याण सिंह यहां बैठकें लेते थे।  

वह कहती हैं ठाकुर जी महिला पुरुष में भेद नहीं करते। वरना जब उन्हें इस मंदिर की गद्दी मिली तो उससे पहले उन्होंने भी सिर्फ साधु पुरुष ही देखे थे। लोग सिर्फ इस उत्सुकता से उनके मठ में दीक्षा-कंठी लेने और शिष्य बनने के लिए आते थे क्योंकि वो ‘महिला महाराज’ थीं।

25% छात्र कक्षा दो की पुस्तक पढ़ने में असमर्थ, 14-18 आयु वर्ग के 34745 बच्चों पर किया गया सर्वेक्षण

25% students unable to read class two book survey conducted on 34745 childrens

देश के 25 फीसदी 14 से 18 आयु वर्ग के छात्र कक्षा दो की क्षेत्रीय भाषा की पुस्तक पढ़ने में असमर्थ हैं। आधे से अधिक युवा भाग के सामान्य सवाल हल करने में पीछे हैं। यह खुलासा वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर ) 2023 में हुआ है।  दिल्ली में बुधवार को भारत में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को दर्शाती असर रिपोर्ट 2023 जारी की गई है। असर रिपोर्ट के लिए 26 राज्यों के 28 जिलों में 14 से 18 आयु वर्ग के 34745 बच्चों पर सर्वेक्षण किया है।

असर रिपोर्ट 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के 86.8 फीसदी छात्र किसी न किसी शैक्षणिक संस्थान में नामांकित हैं। लेकिन आयु के अनुसार नामांकन में कुछ अंतर है। इसके मुताबिक, 14 वर्ष के 3.9 फीसदी और 18 वर्ष के 32.6 फीसदी युवा कहीं भी पढ़ाई नहीं कर रहे हैं।

देशभर के प्रत्येक राज्य के एक ग्रामीण जिले को चुना गया है, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के दो-दो ग्रामीण जिलों को सर्वेक्षण के लिए चुना गया था।

असर रिपोर्ट 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के 86.8 फीसदी छात्र किसी न किसी शैक्षणिक संस्थान में नामांकित हैं। लेकिन आयु के अनुसार नामांकन में कुछ अंतर है। इसके मुताबिक, 14 वर्ष के 3.9 फीसदी और 18 वर्ष के 32.6 फीसदी युवा कहीं भी पढ़ाई नहीं कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, 14 साल के 96.1 फीसदी छात्रों ने शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लिया था, लेकिन जब 18 साल के बच्चों की बात आती है तो यह प्रतिशत तेजी से गिरकर 67.4 फीसदी हो गया।

लड़कों की सबसे अधिक साइंस टेक्नोलॉजी, गणित में रुचि
अभी तक इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, साइंस, मैथ्स यानी स्टेम में लड़कियों का दबदबा होता था। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टेम एरिया यानी साइंस, इंजीनियरिंग, टेक्नोलाॅजी व मैथ्स में अब लड़कों का रुझान बढ़ रहा है। देश में 36.3 फीसदी लड़के इन विषयों में पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि लड़कियां का यहां आंकड़ा महज 28.1 फीसदी है। हालांकि, उच्च शिक्षा तक आते -आते बेटियां आगे निकल जाती हैं। वहीं, 14 ो 18 आयु वर्ग में सबसे अधिक छात्र कला या मानविकी स्ट्रीम में पढ़ाई करना पसंद करते हैं। कक्षा 11 व 12 के 54 फीसदी छात्र कला और मानविकी में, 9.3 फीसदी वाणिज्य और 33.7 फीसदी ने विज्ञान में अपना नामांकन कराया है। कक्षा 11 से ऊपर की कक्षाओं में 55.7 फीसदी छात्रों की पहली पसंद कला और मानविकी स्ट्रीम में हैं।

अंग्रेजी और गणित में लड़कियों से बेहतर लड़के
अंग्रेजी और गणित में लड़कियां से बेहतर लड़के होते हैं। यह खुलासा भी असर रिपोर्ट 2023 में हुआ है। इसमें लिखा है कि 70.9 फीसदी लड़के कक्षा दो की पढ़ाई क्षेत्रीय भाषा में कर पाते हैं तो लड़कियों का यह आंकड़ा 76 फीसदी है। हालांकि, लड़के अंग्रेजी और गणित में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इसके अलावा 57 .3 फीसदी युवा अंग्रेजी के वाक्य पढ़ सकते हैं। वहीं,लगभग तीन-चौथाई यानी 73.5 फीसदी युवा ही उनका अर्थ बता सकते हैं। वहीं, आधे से अधिक युवा भाग (3 अंक से एक अंक) का सवाल नहीं कर पाते हैं। सिर्फ 43.3 फीसदी युवा ही सवाल हल कर पाए। जबकि यह क्षमता कक्षा तीसरी और कक्षा चौथी में अपेक्षित की जाती है। इसका अर्थ है कि सर्वेक्षण में शामिल 51.6 फीसदी बच्चे बेसिक अंकगणितीय हल करने में असमर्थ थे। जबकि 56.7 फीसदी बेसिक भाग-जोड़ व लगभग 34.7 फीसदी बच्चे घटाना-जोड़ के बेसिक सवालों को भी हल नहीं कर सके।

छह महीने के स्किल कोर्स की अधिक मांग
स्कूलों में अभी भी व्यावसायिक कोर्स यानी कौशल विकास आधारित कोर्स बहुत पापुलर नहीं हैं। स्कूलों में सिर्फ 5.6 फीसदी युवा ही व्यावसायिक कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि कॉलेजों में यह आंकड़ा 16.2 फीसदी युवा पढ़ाई के साथ रोजगार या व्यवसाय में मदद करने वाले कोर्स की पढ़ाई भी साथ में करते हैं। इसमें भी सबसे अधिक पसंदीदा कोर्स छह महीने वाले स्किल कोर्स ही हैं।

65.1 फीसदी ही ओआरएस घोल के पैकेट के निर्देश पढ़ सके
सर्वेक्षण में शामिल लोगों में से 85 फीसदी किसी वस्तु की लंबाई की सही गणना कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि इसे रूलर पर ””0”” निशान पर रखा गया हो। लेकिन जब वस्तु को स्थानांतरित किया गया और रूलर पर कहीं और रखा गया, तो 40 फीसदी से कम लोग उसकी लंबाई की सही गणना कर सके। वहीं, दो-तिहाई युवा (65.1 फीसदी ) ओआरएस घोल के पैकेट पर लिखे निर्देशों को समझ सके।

92% स्मार्टफोन का प्रयोग कर रहे
सर्वेक्षण में शामिल 92 फीसदी से अधिक बच्चे स्मार्टफोन का उपयोग करते हैं। वहीं, 89 फीसदी ने बताया कि उनके पास घर पर स्मार्टफोन उपलब्ध है।लड़कियों की तुलना में लड़कों के पास अपना स्मार्टफोन है। वहीं, सर्वेक्षण में शामिल केवल 27.6 फीसदी बच्चे ही ऑनलाइन सेवाओं के लिए स्मार्टफोन का उपयोग करते थे और 37.1 फीसदी बच्चे अपने घरों की दूरी मापने के लिए गूगल मैप का उपयोग कर सकते थे। बेटियों को स्मार्टफोन की सुरक्षा का पता नहीं है।

मणिशंकर अय्यर की बेटी के एनजीओ के विदेशी चंदा लेने पर लगी रोक, गृह मंत्रालय ने दी जानकारी

Manishankar Aiyar daughter NGO banned from foreign donations

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर की बेटी यामिनी के एनजीओ सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) को विदेशी चंदा लेने पर रोक लगा दी है।

बुधवार को मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि विदेशी चंदा लेने व उसके उपयोग संबंधी नियमों में गड़बड़ी के चलते विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत सीपीआर का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है। 2023 में आयकर विभाग की जांच के बाद सीपीआर का एफसीआरए पंजीकरण 6 माह निलंबित किया गया था। बाद में इसे 6 माह बढ़ा दिया गया। अब इसे रद्द कर दिया है।

यूएन कार्यक्रम में रुचिरा कंबोज ने साझा की भारत की विकास यात्रा, कहा- मेरे लिए यह गर्व की बात

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के उच्च स्तरीय नीति संवाद में भारत की विकास यात्रा को साझा करना मेरे लिए गर्व की बात है। यह कहना है कि संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज का। उन्होंने कहा कि भारत सभी के सहयोग से सभी के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। कंबोज ने बताया कि भारत 2030 से पहले सतत विकास लक्ष्य 1.2 को पार करने की राह पर निरंतर बढ़ रहा है। भारत महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर गंभीर है। एक्स पर कंबोज ने बताया कि आज संवाद कार्यक्रम में भारत की विकास यात्रा को साझा कर मैं गर्व की अनुभूति कर रही हूं। संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने बताया कि भारत 2030 से पहले सतत विकास लक्ष्य 1.2 को पार करने की राह पर निरंतर बढ़ रहा है। भारत महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास पर गंभीर है।

दरअसल, 10 जनवरी को वाइब्रेट गुजरात ग्लोबल समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि आजादी के 100 साल पूरे होने तक भारत को विकसित देशों की सूची में शामिल कराने का लक्ष्य है। भारत अपने लक्ष्य पर काम कर रहा है। हाल ही में भारत ने आजादी के 75 साल पूरे किए। भारत अगले 25 साल के लक्ष्य पर काम कर रहा है। 

पहली मेक इन इंडिया चिप का उत्पादन इसी साल
कार्यक्रम में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि गुजरात में इस साल देश की पहली मेक इन इंडिया चिप का उत्पादन होगा। 104 विश्वविद्यालय और संस्थान सेमीकंडक्टर पर डॉक्टरेट अध्ययन सहित पाठ्यक्रम पेश कर रहे हैं। विश्वस्तर पर सेमीकंडक्टर में विशेषज्ञता वाले 10 लाख पेशेवरों की मांग है और भारत इसका लाभ उठाने के लिए उत्सुक है। 

इलेक्ट्रिक वाहनों का भारत से निर्यात करेगी मारुति सुजुकी
मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने बताया कि कंपनी अपने इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) का निर्माण भारत में करेगी और यहीं से वैश्विक निर्यात किया जाएगा। एमएसआई के कार्यकारी निदेशक राहुल भारती ने कहा कि इसी साल भारत में निर्मित ईवी का यूरोप और जापान जैसे देशों को निर्यात शुरू किया जाएगा। 

बेटियों के बजाय बेटे घर में कृषि काम में सहयोग दे रहे
अक्सर कहा जाता है कि बेटियां पढ़ाई के साथ घर का काम अधिक करती हैं। लेकिन इस रिपोर्ट के मुताबिक, 40.3 फीसदी लड़के घर या बाहर का काम पढ़ाई के साथ करते हैं। इसमें कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक काम करते हैं। जबकि 28 फीसदी लड़कियां पढ़ाई के साथ घर का काम करती हैं।

 बिना कीटनाशकों के बिना भी तैयार होंगी फल-सब्जियां,नौणी विश्वविद्यालय ने नैनो फंगीसाइड किया तैयार

Fruits and vegetables will be ready even without pesticides, Nauni University has prepared nano fungicide

फल और सब्जियां अब कीटनाशकों के छिड़काव के बिना भी तैयार हो जाएंगी। बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी की वैज्ञानिक डॉ. मोनिका समेत चार सदस्यीय वैज्ञानिकों की टीम ने इसका एक बेहतर विकल्प तैयार किया है। टीम ने नैनो यूरिया की तरह रसायनों का नैनो फंगीसाइड (सिंथेटिक फंगीसाइड) तैयार किया है। छह साल तक चले शोध में पाया गया कि यह जहरीले रसायनों के मुकाबले मात्र 15 से 20 फीसदी तक उपयोग होगा और फसलों व पौधों में लगने वाली बीमारियों पर अधिक असरदार होगा। नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ. संजीव चौहान ने बताया कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे किसानों और बागवानों की खेती में रसायनों के छिड़काव में आने वाली लागत भी 50 से 70 फीसदी तक घट जाएगी। साथ ही सब्जियों और फलों में पेस्टीसाइड भी न के बराबर होगा। भारत सरकार ने इसे पेटेंट कर दिया है। इसके शोध पत्र भी प्रकाशित हो चुके हैं।

शिमला मिर्च, आम पर सफल ट्रायल
औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय नेरी हमीरपुर में पादप रोग विज्ञान विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मोनिका ने बताया कि उनकी टीम ने अभी तक शिमला मिर्च और आम पर इसका सफल ट्रायल किया है। इन दोनों फसलों को जो भी बीमारियां लगीं, उसमें इस नैनो फंगीसाइड के छिड़काव का बेहतर असर हुआ।

अब फलों और कई फसलों पर ट्रायल शुरू
अब कई फलों और फसलों पर आगामी ट्रायल शुरू कर दिए हैं। इनमें संतरा, किनू, आम समेत लोअर हिमाचल प्रदेश में पाए जाने वाले सभी फलों और सब्जियों पर भी ट्रायल किए जाएंगे। दावा किया जा रहा है कि इससे तैयार सब्जियां शरीर के लिए हानिकारक नहीं होगी।

नैनो फंगीसाइड किसानों-बागवानों के लिए लाभदायक होगा। उनकी खेती की लागत भी घटेगी। इस पर टीम ने आगामी शोध शुरू कर दिए हैं। इसमें कई फसलों पर ट्रायल होंगे। ट्रायल सफल होते ही इसे बाजार में उतारा जाएगा। – प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल, कुलपति, नौणी विवि

बीजेपी राहुल ब्रिगेड पर क्यों डाल रही डोरे, समझिए इनसाइड स्टोरी

चुनाव से पहले नेताओं के पाला बदलने का ट्रेंड रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव भी इससे अछूता नहीं रहने वाला है। खासतौर से तब जब बीजेपी दूसरे दलों के नेताओं को शामिल करने के लिए बाहें फैलाए खड़ी है। यह उसकी स्‍ट्रैटेजी का हिस्‍सा भी है। उसकी नजर सबसे ज्‍यादा कांग्रेस पर टिकी है।

लोकसभा चुनाव सिर पर हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसके लिए अपनी तैयारी तेज कर दी है। तीसरी बार केंद्र की सत्‍ता में काबिज होने के लिए उसने कई प्‍लान बनाए हैं। इनमें से एक दूसरे दलों के नेताओं को तोड़कर अपने साथ मिलाना भी है। वैसे तो इसके लिए भगवा पार्टी की नजर सभी दलों पर है। लेकिन, उनमें भी सबसे ऊपर कांग्रेस है। इसके पीछे दो बड़ी मंशा हैं। पहली, इससे बीजेपी को मजबूती मिलेगी। दूसरी, प्रतिभावान नेताओं को चुन अपने साथ मिलाकर वह विपक्ष को कमजोर करने में कामयाब होगी। इसे राहुल ब्रिगेड पर बीजेपी के डोरे डालने की बड़ी वजह भी माना जाता है।

दरअसल, बीजेपी ने कमजोर सीटों के लिए स्ट्रैटेजी बनाई है। ये ऐसी सीटें हैं जहां वह चुनावी और वैचारिक तौर पर कमजोर है। पार्टी इन सीटों को मजबूत करने के लिए नए लोगों का स्‍वागत कर रही है। इससे चुनावी माहौल भी बनेगा। हालांकि, इस बार निशाने पर मुख्‍य रूप से कांग्रेस होगी। पार्टी के प्रभावशाली नेताओं के निकलने से यह उसे कमजोर करेगा। बीजेपी आलाकामान पहले ही इसके लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बना चुका है। इसका नाम ज्‍वाइनिंग कमिटी दिया गया है। इसमें केंद्रीय मंत्री भूपिंदर सिंह यादव, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, राष्ट्रीय पार्टी महासचिव विनोद तावड़े और महासचिव (संगठन) बीएल संतोष शामिल हैं। यह समिति संभावित उम्‍मीदवारों को पार्टी में शामिल करने से पहले उनकी स्‍क्रीनिंग करेगी। किसी उम्‍मीदवार को पार्टी के साथ जोड़ा जाए या नहीं, पहला निर्णय इसी का होगा।

क्‍यों राहुल ब्र‍िगेड पर बीजेपी की नजर?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों के सबसे बड़े आलोचकों के तौर पर पेश किया है। उन्‍हें पीएम मोदी के खिलाफ विपक्ष के प्रमुख चेहरे के तौर पर देखा जाता है। बीजेपी की कोशिश राहुल को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की है। वह कांग्रेस में राहुल के प्रभाव को कम करना चाहती है। यही वजह है कि हाल के सालों में बीजेपी ने राहुल की टीम से कई युवा नेताओं को शामिल किया है। उन्हें मुख्‍य पद देकर इनाम भी दिया है। इन नेताओं में ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद और आरपीएन सिंह शामिल हैं। सिंधिया केंद्रीय विमानन मंत्री हैं। प्रसाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री हैं। वहीं, आरपीएन सिंह को बीजेपी में बड़े पद का इंतजार है।

वैसे तो बीजेपी ने सचिन पायलट और मिलिंद देवड़ा को भी अपने साथ मिलाने की कोशिश की। लेकिन, बात नहीं बनी। देवड़ा आखिरकार पिछले रविवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। यह महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी है। अभी तक कांग्रेस आलाकमान पायलट को बनाए रखने में कामयाब रहा है। उन्हें एआईसीसी के महासचिव पद पर प्रमोट किया गया है।

और नेता टूटे तो राहुल के ल‍िए होगा खराब
अगर नेताओं को पाला बदलने के लिए लुभाकर बीजेपी कांग्रेस पर चोट करने में अब और कामयाब हुई तो इसका राहुल गांधी पर सीधा असर पड़ेगा। इसे राहुल की बड़ी नाकामी माना जाएगा। इसके उलट अपनी कोशिश में बीजेपी ने कांग्रेस के ही कई पुराने दिग्‍गजों को इस कवायद में लगा रखा है। इनमें हिमंत बिस्वा सरमा, एन बीरेन सिंह पेमा खांडू, नारायण राणे, कैप्टन अमरिंदर सिंह, विजय बहुगुणा, एसएम कृष्णा और दिगंबर कामत शामिल हैं।

इसके अलावा ऐसे समय में जब बीजेपी अपने आधार का विस्तार करने के लिए केरल में ईसाइयों को लुभाने की कोशिश कर रही है। तब पार्टी ने केजे अल्फोंस, टॉम वडक्कन और अनिल एंटनी सहित समुदाय के कुछ प्रमुख चेहरों को शामिल किया है। अनिल एंटनी कांग्रेस के दिग्गज नेता और रक्षा मंत्री रह चुके एके एंटनी के बेटे हैं। मीडिया में खबरें हैं कि बीजेपी कांग्रेस खेमे के ऐसे कई नेताओं के संपर्क में है जो उसके साथ जुड़ने की इच्‍छा रखते हैं। इनमें से कुछ हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब और राजस्थान में गांधी परिवार के करीबी माने जाते हैं। ये लोकसभा चुनाव से पहले पाला बदल सकते हैं।

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र हुड्डा से ईडी की पूछताछ

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन मामले में पूछताछ की। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत हुड्डा (76) का बयान दर्ज किया। वह छह घंटे से अधिक समय तक मध्य दिल्ली स्थित ईडी मुख्यालय में रहे। सूत्रों ने बताया कि यह पूछताछ गुरुग्राम में एक कथित भूमि घोटाले से जुड़ी धनशोधन जांच से संबंधित थी जिसमें हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) शामिल था। इससे पहले ईडी ने 2004-07 के दौरान गुरुग्राम के मानेसर में भूमि अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन के अन्य मामले में और फिर कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रवर्तित एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) के खिलाफ एक मामले में उनसे पूछताछ की थी।

भिड़ गए श‍श‍ि थरूर और ज्‍योत‍िरादित्‍य सिंधिया, किसने क्या कहा?

हाल में कोहरे के कारण बड़े पैमाने पर फ्लाइट लेट हुईं। इस चक्‍कर में इंडिगो की फ्लाइट में यात्री ने पायलट की पिटाई तक कर दी। अब उड़ानों में देरी का यह मसला राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुका है। इसे लेकर बुधवार को कांग्रेस नेता शशि‍ थरूर और एविएशन मिनिस्‍टर ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया की ट्विटर पर तीखी नोकझोंक हुई।

हमें न्योता ही नहीं मिला… सीएम केजरीवाल ने बताया रामलला के दर्शन करने कब जाएंगे

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ’22 जनवरी को होने वाले प्राणप्रतिष्ठा समारोह के बाद हम अयोध्या (दिल्ली से) के लिए और ज्यादा ट्रेन चलाने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा था कि उनकी टीम एक आखिरी न्योता देगी, लेकिन हमें नहीं मिला। मैं अपने परिवार के साथ अयोध्या जाना चाहता हूं, इसलिए हम 22 जनवरी के बाद कभी जाएंगे।’

Ramswaroop Mantri

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