महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला नारीशक्ति वंदन विधेयक लोकसभा में पास हो गया। विपक्ष के कई दलों ने मंगलवार को महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक को ‘चुनावी जुमला’ करार दिया। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) की महिलाओं को भी भागीदारी देकर सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जाना चाहिए। आंध्र उच्च न्यायालय ने प्राथमिकी रद्द करने संबंधी चंद्रबाबू नायडू की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। केरल के सीएम ने कहा कि राज्य में निपाह का प्रकोप नियंत्रण में है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। झारखंड में कुर्मी आंदोलन के कारण झारखंड, ओडिशा में 11 ट्रेन रद्द हो गईं। वहीं, आठ के मार्ग में परिवर्तन किया गया। एशियाई खेल फुटबॉल में चीन ने भारत को 5-1 से हराया।
आज के प्रमुख इवेंट्स
- संसद के विशेष सत्र का चौथा दिन है। राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पर चर्चा होगी। लोकसभा में चंद्रयान-3 मिशन की उपलब्धियों पर चर्चा होगी।
- जम्मू में पहली बार एयर शो का आयोजन होगा। दो दिन तक चलने वाले आयोजन में एयरफोर्स की आकाशगंगा डेयरडेविल स्काई डाइविंग टीम और सूर्य किरण एरोबेटिक टीम शामिल होंगी।
महिला आरक्षण बिल लोकसभा में पास हुआ, शाह बोले- चुनाव के बाद परिसीमन-जनगणना होगी

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर करीब 7 घंटे चर्चा हुई। जिसके बाद इसे पारित कर दिया गया।
संसद के विशेष सत्र के तीसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास हुआ। बिल के समर्थन में 454 और विरोध में 2 वोट पड़े। राहुल गांधी ने कहा कि OBC आरक्षण के बिना बिल अधूरा है। वहीं अमित शाह ने कहा कि आरक्षण जनरल, एससी और एसटी में समान रूप से लागू होगा। चुनाव के तुरंत बाद ही जनगणना और डिलिमिटेशन यानी परिसीमन कराया जाएगा।
भी लोकसभा में 82 महिला सांसद हैं, बिल के कानून बनने के बाद 181 महिला सांसद हो जाएंगी। यह आरक्षण सीधे चुने जाने वाले जन प्रतिनिधियों के लिए लागू होगा। यानी यह राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों पर लागू नहीं होगा। लोकसभा में 543 सीटों में से 131 SC-ST के लिए आरक्षित हैं। इनका एक तिहाई यानी 44 सीटें SC-ST महिलाओं के लिए रहेंगी। तब बाकी महिलाओं के लिए 137 सीटें बचेंगी।
बिल पर चर्चा में 60 सांसदों ने अपने विचार रखे। राहुल गांधी ने कहा- OBC आरक्षण के बिना यह बिल अधूरा है, जबकि अमित शाह ने कहा- यह आरक्षण सामान्य, एससी और एसटी में समान रूप से लागू होगा। चुनाव के बाद तुरंत ही जनगणना और डिलिमिटेशन होगा और महिलाएं की भागीदारी जल्द ही सदन में बढ़ेगी। विरोध करने से रिजर्वेशन जल्दी नहीं आएगा।
राहुल गांधी ने कहा- देश को चलाने वाले 90 में से सिर्फ 3 सेक्रेटरी ही OBC हैं, इसके जवाब में शाह ने राहुल नाम लिए बिना कहा कि देश को सरकार चलाती है, सचिव नहीं। कोई NGO चिट बनाकर दे देता है तो बोल देते हैं।
कुल भाजपा सांसदों में 85 OBC से हैं। कुल भाजपा विधायकों में 27% OBC से हैं। कुल भाजपा MLC में 40% OBC हैं। कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि मैं राजनीति में आने से पहले आईएएस था। 1992 बैच का अफसर सेक्रेटरी बनेगा। उस समय किसकी सरकार थी। ये (राहुल गांधी) अपनी ही सरकार को कोस रहे हैं।
शाह के बोलते ही हंगामा हुआ तो कहा- डरो मत
पर डिबेट का जवाब देने अमित शाह आए। उन्होंने कहा- संविधान के संशोधित करने वाले 128वें संशोधन पर बात करने के लिए मैं यहां खड़ा हूं। ये कहते ही विपक्ष का हंगामा शुरू कर दिया। इस पर शाह मुस्कुराते हुए राहुल गांधी की तरह बोले- डरो मत।
शाह ने कहा- महिला आरक्षण बिल युग बदलने वाला विधेयक है। कल का दिन भारतीय संसद के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा। कल नए सदन का पहली बार श्री गणेश हुआ, कल गणेश चतुर्थी थी और पहली बार कई सालों से लंबित पड़े बिल को पास किया गया। देश में एससी-एसटी के लिए जितनी सीटें आरक्षित हैं, उनमें से भी 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।
कुछ लोगों के लिए महिला सशक्तीकरण चुनाव जीतने का मुद्दा हो सकता है, लेकिन मेरी पार्टी और मेरे नेता मोदी के लिए यह मुद्दा राजनीति नहीं, बल्कि मान्यता का मुद्दा है। मोदी ने ही भाजपा में महिलाओं को पार्टी पदों पर 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाया।
PM मोदी को देश की जनता ने CM के बाद प्रधानमंत्री बनाया। 30 साल बाद उनके नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की भाजपा की सरकार बनाई। उस समय फिर जाहिर सी बात है कि PM मोदी ने CM के पद से इस्तीफा दिया। उस समय मोदी के एकाउंट में जितना भी पैसा था, उन्होंने वर्ग 3 के कर्मचारियों और बेटियों के खाते में अपना पैसा भेज दिया था।
आज दुनियाभर में विमान उड़ाने वाली महिलाओं की संख्या 5% है। भारत की इन महिलाओं की संख्या 15% है। यही महिला सशक्तीकरण है।
शाह बोले- पहली बार ये संविधान संशोधन नहीं आया। देवेगौड़ा जी से लेकर मनमोहन जी तक चार बार प्रयास हुए। क्या मंशा अधूरी थी? सबसे पहले इस पर प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के समय 12 सितंबर 1996 में संविधान संशोधन आया। कांग्रेस इस समय विपक्ष में थी। विधेयक को सदन में रखने के बाद गीता मुखर्जी की अध्यक्षता में समिति को दे दिया गया, लेकिन विधेयक सदन तक पहुंच ही नहीं पाया।
जब 11वी लोकसभा आई तो विधेयक लैप्स हो गया। इसके बाद 12वीं लोकसभा अटल बिहारी वाजपेयी के समय बिल आया, लेकिन ये विलोपित हो गया। 13वीं लोकसभा में अटल जी के समय फिर बिल आया, लेकिन अनुच्छेद 107 के तहत बिल विलोपित हो गया।
इसके बाद मनमोहन सिंह बिल लेकर आए, लेकिन बिल विलोपित हो गया। शाह ने कहा कि कोई पुराना बिल जीवित नहीं है। लोकसभा जब विघटित हो जाती है तो लंबित विधेयक विलोपित हो जाते हैं।
राहुल ने कहा- सरकार चलाने वाले 90 में से सिर्फ 3 सेक्रेटरी OBC, इसे बदलें

शाह से पहले राहुल गांधी ने कहा कि मैं महिला आरक्षण बिल के समर्थन में हूं, लेकिन ये अधूरा है। जब सांसदों को पुरानी संसद से नई संसद में ले जाया जा रहा था तो राष्ट्रपति को मौजूद होना चाहिए था।
हमारे इंस्टीट्यूशंस में OBC की भागीदारी कितनी है, मैंने इसकी रिसर्च की। सरकार चलाने वाले जो 90 सेक्रेटरी हैं, उनमें से तीन सिर्फ 3 ही OBC से हैं। इसे जल्दी से जल्दी बदलिए। ये OBC समाज का अपमान हैं।
राहुल के बोलने के दौरान सांसदों ने हंगामा किया तो वे बोले- डरो नहीं। देश की आजादी की लड़ाई महिलाओं ने भी लड़ी थी। महिला आरक्षण बिल पर बिल्कुल भी देरी नहीं करना चाहिए और इसे आज से ही लागू कर देना चाहिए।
ओम बिड़ला ने इस दौरान उन्हें टोकते हुए कहा- मैं राहुल गांधी से अपील करता हूं कि सदन में सभी सदस्य बराबर हैं। इसलिए उन्हें ‘डरो मत डरो मत नहीं कहें।
महुआ बोलीं- मुस्लिम महिलाओं को भी फायदा मिले; स्मृति ने कहा- धर्म के आधार पर रिजर्वेशन नहीं

सबसे पहले कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने सदन को बिल के बारे में बताया। उनके बाद कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी ने 10 मिनट तक अपनी बात कही। चर्चा के दौरान TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण देने की मांग की। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने महुआ मोइत्रा का नाम लिए बगैर कहा- मुस्लिम आरक्षण मांगने वालों को मैं बताना चाहती हूं कि संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण वर्जित है। जिस प्रकार से विपक्ष भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है, उसमें ना फंसें।
सोनिया बोलीं- तुरंत अमल में लाएं, सपा-एनसीपी की ओबीसी महिलाओं को भी आरक्षण की मांग सोनिया ने कहा, ‘कांग्रेस की मांग है कि बिल को फौरन अमल में लाया जाए। सरकार को इसे परिसीमन तक नहीं रोकना चाहिए। इससे पहले जातिगत जनगणना कराकर इस बिल में SC-ST और OBC महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था की जाए।’
NCP सांसद सुप्रिया सुले और SP सांसद डिंपल यादव ने भी बिल में OBC महिलाओं को आरक्षण देने की मांग की। सुप्रिया ने कहा कि सरकार बड़ा दिल करके बिल में SC, ST और OBC महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था करे। वहीं, SP सांसद डिंपल यादव ने कहा कि बिल में OBC और अल्पसंख्यक महिलाओं को भी आरक्षण दिया जाना चाहिए।

सोनिया गांधी ने जहां बिल से राजीव गांधी का सपना पूरा होने की बात कही। वहीं, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले और सपा की डिंपल यादव ने ओबीसी महिलाओं को भी फायदा देने की वकालत की।
सोनिया बोलीं- महिला आरक्षण का बिल सबसे पहले राजीव लाए
सोनिया ने कहा, ‘स्थानीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण देने वाला कानून सबसे पहले मेरे पति राजीव गांधी लाए थे, जो राज्यसभा में 7 वोटों से गिर गया था। बाद में पीवी नरसिम्हा राव की सरकार ने उसे पास करवाया। इसी का नतीजा है कि देशभर के स्थानीय निकायों में 15 लाख चुनी हुई महिला नेता हैं। राजीव का सपना अभी आधा ही पूरा हुआ है, यह बिल पास होने से सपना पूरा हो जाएगा।
इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि ये सिर्फ PM मोदी का बिल है, जिसने गोल किया, नाम उसी का होता है। हमारे प्रधानमंत्री और हमारी पार्टी ये बिल लेकर आई है तो इनके पेट में दर्द हो रहा है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि सोनिया गांधी इस बिल के लिए क्रेडिट लेना चाहती हैं।
सुप्रिया सुले बोलीं- देश में बाढ़ आ रही, स्पेशल सेशन क्यों बुलाया?
सुप्रिया सुले ने कहा कि महाराष्ट्र के पूर्व भाजपा प्रमुख ने मुझसे टीवी पर कहा था कि सुप्रिया सुले तुम घर जाओ, खाना बनाओ। देश कोई और चला लेगा। भाजपा इस पर जवाब दे।
उन्होंने कहा कि जनगणना और परिसीमन होने तक महिला आरक्षण को लागू नहीं किया जा सकता। फिर इसके लिए स्पेशल सेशन क्यों बुलाया गया। इसे विंटर सेशन में भी पास कर सकते थे। देश के कई हिस्सों में बाढ़ आ रही है, इस समय सेशन बुलाने की क्या जरूरत है।

DMK की एमके कनिमोझी बोलने खड़ी हुईं तो सत्ताधारी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। इस पर कनिमोझी और सुप्रिया सुले ने कहा कि बीजेपी के लोग महिलाओं की यही इज्जत करते हैं। फिर सदन में शांति छा गई।
TMC सांसद ने पूछा- बृजभूषण सिंह पर एक्शन क्यों नहीं
TMC सांसद काकोली घोष ने कहा, ‘देश में सिर्फ पश्चिम बंगाल में महिला CM है, भाजपा की 16 राज्यों में सरकार है, लेकिन एक भी राज्य में महिला CM नहीं है। देश के लिए मेडल जीतने वाली महिलाओं का सेक्सुअल हैरेसमेंट किया गया। आरोपी बृजभूषण सिंह आज संसद में बैठे हैं। भाजपा उनके खिलाफ कोई एक्शन क्यों नहीं लेती।’
उधर, JDU के सांसद ललन सिंह ने कहा कि ये 2024 का चुनावी जुमला है। I.N.D.I.A गठबंधन से सरकार घबरा गई और ये बिल लेकर आई। इनकी मंशा सही होती तो 2021 में जनगणना शुरू करवा दी होती। इससे अब तक जनगणना पूरी हो जाती और महिला आरक्षण 2024 से पहले लागू हो जाता।

YSR कांग्रेस की सांसद गीता विश्वनाथ ने बोलने से पहले ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाया और सभी को हाथ जोड़कर नमस्कार किया।
सांसदों को बांटी गई संविधान की कॉपी पर विवाद, कांग्रेस का आरोप- प्रस्तावना से समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष शब्द हटाए
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नई संसद के उद्घाटन के दौरान सांसदों को संविधान की जो कॉपी बांटी गई, उसमें छपी प्रस्तावना से ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द हटा दिए गए हैं। जवाब में सरकार ने कहा है कि संविधान की कॉपी में मूल संविधान की प्रस्तावना शामिल की गई है। जिसमें ‘सेक्युलर’ और ‘सोशलिस्ट’ शब्द नहीं थे। दरअसल, संविधान की प्रस्तावना में दोनों शब्द 1976 में 42वें संशोधन के जरिए शामिल किए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट अपने एक फैसले में संविधान की प्रस्तावना को संविधान का हिस्सा मान चुका है। ऐसे में अगर इसमें से कोई भी शब्द हटाना या शामिल करना है तो एक अन्य संविधान संशोधन की जरूरत पड़ेगी। भास्कर की छानबीन में सामने आया है कि जो कॉपी सांसदों को दी गई है उसमें ओरिजिनल प्रस्तावना और संशोधित प्रस्तावना दोनों शामिल हैं। हालांकि पुरानी प्रस्तावना क्यों रखी गई है ये भी स्पष्ट नहीं है।
संविधान की मूल प्रस्तावना और 42वें संशोधन से उसमें किए गए बदलाव को नीचे दिए ग्राफिक्स से समझ सकते हैं…


संविधान में बदलाव संशोधन के बिना मुमकिन नहीं
इस विवाद का कानूनी पहलू भी है। सुप्रीम कोर्ट अपने एक फैसले में संविधान की प्रस्तावना को संविधान का हिस्सा मान चुका है। ऐसे में अगर इसमें से कोई भी शब्द हटाना या शामिल करना है तो एक अन्य संविधान संशोधन की जरूरत पड़ेगी।
कांग्रेस ने कहा- BJP की मंशा पर संदेह
कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने आरोप लगाया है कि ‘हम जानते हैं ये शब्द 1976 में एक संशोधन के बाद जोड़े गए थे, लेकिन अगर आज कोई हमें संविधान देता है और उसमें ये शब्द नहीं हैं, तो यह चिंता की बात है।’
उन्होंने कहा कि BJP की मंशा संदिग्ध है। ये बड़ी चतुराई से किया गया है। यह मेरे लिए चिंता का विषय है। मैंने इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, लेकिन मुझे इस मुद्दे को उठाने का मौका नहीं मिला।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने 19 सितंबर को नए संसद भवन में जाने से पहले मीडिया को संविधान की कॉपी दिखाई थी।
कानून मंत्री बोले- ये शब्द मूल संविधान में नहीं थे
अधीर रंजन के आरोपों पर कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा, ‘जब संविधान अस्तित्व में आया, तब समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द नहीं थे। ये शब्द संविधान के 42वें संशोधन में जोड़े गए।’
क्या कांग्रेस ने आधा सच बताया
हालांकि भास्कर की छानबीन में सामने आया है कि जो कॉपी सांसदों को दी गई है उसमें ओरिजिनल प्रस्तावना और संशोधित प्रस्तावना दोनों शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक पहले पन्ने पर ओरिजिनल प्रस्तावना है जबकि दूसरे पन्ने पर संशोधित प्रस्तावना भी है। अधीर रंजन का दावा पुख्ता नहीं है क्योंकि उन्होंने पूरी बात नहीं बताई। हालांकि पुरानी प्रस्तावना क्यों रखी गई है ये भी स्पष्ट नहीं है।

सभी सांसदों को संविधान की जो कॉपी दी गईं, वे 18 सितंबर को ही संसद पहुंचा दी गई थीं। संसद का 5 दिन का विशेष सत्र 18 सितंबर से 22 सितंबर तक चलेगा।
नई संसद में जाते समय सांसदों को संविधान की कॉपी दी गई
18 सितंबर से शुरू हुए संसद के विशेष सत्र में कामकाज 19 सितंबर से शुरू हुआ। उसी दिन सभी सांसदों को पुरानी बिल्डिंग से नई बिल्डिंग ले जाया गया थी। तभी, सांसदों को संविधान की यह कॉपी दी गई थी।
नई संसद में पहले दिन पेश हुआ महिला आरक्षण बिल
नई संसद में कामकाज के पहले दिन यानी 19 सितंबर को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन विधेयक) पेश किया गया। इस बिल के मुताबिक, लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन लागू किया जाएगा।
लोकसभा की 543 सीटों में से 181 महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। ये रिजर्वेशन 15 साल तक रहेगा। इसके बाद संसद चाहे तो इसकी अवधि बढ़ा सकती है।
कनाडा में रहने वाले भारतीयों के लिए एडवाइजरी; अमेरिका समेत 3 देशों ने नहीं दिया कनाडा का साथ

तस्वीर 10 सितंबर की है। तब जस्टिन ट्रूडो G20 समिट में आए वर्ल्ड लीडर्स के साथ राजघाट गए थे।
भारत ने कनाडा में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि नागरिक उन इलाकों में जाने से बचें जहां भारत विरोधी गतिविधियां हुई हैं। वहीं वॉशिंगटन पोस्ट’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत में हुए G20 समिट में खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या के मुद्दे को उठाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के हेड ऑफ द गवर्नमेंट्स से बातचीत भी की थी, लेकिन किसी ने ट्रूडो का साथ नहीं दिया।
18 सितंबर को कनाडाई PM जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या का जिम्मेदार भारत को बताया था। ट्रूडो ने ये आरोप कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स में लगाए थे। पाकिस्तान के बाद कनाडा दूसरा देश है जिसने भारत पर अपने देश में ऑपरेशन का आरोप लगाया है। इसके बाद से ही दोनों देश एक-दूसरे के डिप्लौमैट्स को निकाल चुके हैं।
इस बीच, अमेरिकी अखबार ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की एक स्पेशल रिपोर्ट में अहम खुलासा किया गया है। इसके मुताबिक कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो नई दिल्ली में 9 और 10 सितंबर को हुई G20 समिट से पहले इस मुद्दे को उठाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के हेड ऑफ द गवर्नमेंट्स से बातचीत भी की थी, लेकिन कोई भी ट्रूडो का साथ देना तो दूर इस मुद्दे पर भारत की निंदा तक नहीं करना चाहता था। इस रिपोर्ट के अहम पॉइंट्स को आप नीचे पढ़ सकते हैं।

बाइडेन तमाम कोशिशों के बावजूद इजराइल और सऊदी अरब के रिलेशन नॉर्मल नहीं करा पाए हैं। अब वो भारत के साथ कोई नाराजगी मोल लेने का जोखिम नहीं लेना चाहते। (फाइल)
अमेरिका ने नहीं दी ट्रूडो को तवज्जो
- ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक 18 सितंबर को संसद में भारत पर निज्जर की हत्या में कथित तौर पर शामिल होने का आरोप लगाने से पहले जस्टिन ट्रूडो ने अपने खास सहयोगी अमेरिका से भी बातचीत की थी। ट्रूडो चाहते थे कि अमेरिका निज्जर के कत्ल को पब्लिकली गलत ठहराए।
- रिपोर्ट में एक अमेरिकी अफसर के हवाले से कहा गया- अमेरिका ने कैनेडियन प्राइम मिनिस्टर की इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया। हालांकि कनाडा की फॉरेन मिनिस्ट्री इस रिपोर्ट को गलत बता रही है। दरअसल, अमेरिका और उसके सहयोगी बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर चीन का कोई मुकाबला कर सकता है तो वो सिर्फ भारत है, और मोदी सरकार को नाराज करना वेस्टर्न वर्ल्ड के लिए बहुत भारी पड़ेगा।
- रिपोर्ट कहती है- ट्रूडो ने भारत पर गंभीर आरोप ऐसे वक्त लगाए हैं, जब प्रेसिडेंट जो बाइडेन की सरकार भारत को सबसे बड़ा जियोपॉलिटिकल और ट्रेड पार्टनर बना रही है। दोनों ही चीन को काबू करना चाहते हैं। ऐसे में बाइडेन कभी नहीं चाहेंगे कि प्रधानमंत्री मोदी को नाराज किया जाए।
- ट्रूडो ने ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर ऋषि सुनक और ऑस्ट्रेलियन प्राइम मिनिस्टर एंथनी अल्बनीज से भी बातचीत की। हालांकि दोनों ने ही भारत के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ इस मुद्दे पर चिंता जताई। ब्रिटेन के फॉरेन सेक्रेटरी जेम्स क्लेवरली तो चिंता भी नहीं जता सके।

बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से ट्रूडो को साफ समझाइश दी गई थी कि वो नई दिल्ली G20 समिट से पहले कोई विवाद पैदा न करें। (फाइल)
कनाडा की नई मुश्किल
- इस रिपोर्ट के मुताबिक ट्रूडो चाहते थे कि नई दिल्ली में हुई G20 समिट से पहले ही निज्जर की हत्या के मामले को उठाया जाए। हालांकि वो ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने उन्हें साफ बता दिया था कि इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
- इतना ही नहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय ने इन चारों देशों को काफी पहले बता दिया था कि भारत विरोधियों की हरकतों की वजह से इन देशों की इमेज खराब हो रही है। इसके बाद अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने भारत को भरोसा दिलाया कि उसके डिप्लोमैट्स और बाकी जगहों की सिक्योरिटी से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
- इस मामले एक चीज बहुत गौर करने लायक है। दरअसल, भारत के अलावा चीन और ईरान भी कैनेडियन गवर्नमेंट पर ये आरोप लगाते रहे हैं कि उनके नागरिकों और डिप्लोमैट्स को कनाडा में परेशान किया जाता है और वहां की सरकार आरोपियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेतीं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी ट्रूडो की बात पर कोई रिएक्शन नहीं दिया। ये तब है जबकि सुनक और ट्रूडो को करीबी दोस्त भी माना जाता है। सुनक मोदी के साथ दिखे।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
- मशहूर स्ट्रैटजिक एक्सपर्ट और कई किताबों के लेखक माइकल कुग्लमैन ने वॉशिंगटन पोस्ट से कहा- बाइडेन दोहरी मुश्किल में हैं। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वो कनाडा का साथ दें या भारत का। सच्चाई ये है कि अमेरिका के लिए ये वक्त ऊंचाई पर बंधी रस्सी पर चलने जैसा है। कनाडा उनके लिए पुराना साथी है, लेकिन अब कोई देश भारत से सीधा टकराव मोल नहीं लेना चाहता।
- माइकल आगे कहते हैं- पिछले साल तक कैनेडियन गवर्नमेंट भारत की मदद से चीन पर लगाम कसना चाहती थी। उसने एक स्ट्रैटजिक प्लान भी जारी किया था। ट्रूडो और शी जिनपिंग की पिछले साल बाली में डिनर के दौरान हुई बहस दुनिया ने देखी है। अब वो मोदी की नाराजगी भी मोल ले चुके हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस काम में कभी ट्रूडो का साथ नहीं देंगे।
- भारत-कनाडा के रिश्तों पर नजर रखने वाले सिंगापुर यूनिवर्सिटी के स्कॉलर कार्तिक नाचिप्पन ने कहा- काफी लंबे वक्त से दोनों देशों के बीच यह तनाव का मुद्दा है। इसे सुलझाया नहीं गया तो हालात बहुत ज्यादा खराब हो सकते हैं।
- कनाडा की पूर्व इंटेलिजेंस चीफ जेसिका डेविस ने कहा- कोई भी देश दूसरे देश में सीधे टारगेट किलिंग नहीं कर सकता। हमारी इन्वेस्टिगेशन और सिक्योरिटी एजेंसियां क्या कर रहीं थीं? सबसे पहला सवाल तो उनसे किया जाना चाहिए।
न्यूरालिंक को ब्रेन-चिप ट्रायल के लिए रिक्रूटमेंट की मंजूरी, इसके जरिए ब्लाइंड भी देख सकेंगे
एलन मस्क की ब्रेन-चिप कंपनी न्यूरालिंक को अपने पहले ह्यूमन ट्रायल के लिए रिक्रूटमेंट की मंजूरी मिल गई है। यानी अब न्यूरालिंक ह्यूमन ट्रायल के लिए लोगों की भर्ती कर सकेगी। ट्रायल कामयाब रहा तो चिप के जरिए ब्लाइंड भी देख सकेंगे। न्यूरालिंक ने कहा है कि 22 साल के ऊपर के पेशेंट ट्रायल के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
न्यूरालिंक ने सिक्के के आकार का एक डिवाइस बनाया है। इसे लिंक नाम दिया गया है। ये कंप्यूटर, मोबाइल फोन या किसी अन्य डिवाइस को ब्रेन एक्टिविटी (न्यूरल इम्पल्स) से सीधे कंट्रोल कर सकता है। उदाहरण के लिए पैरालिसिस से पीड़ित व्यक्ति के मस्तिष्क में चिप लगाने के बाद वह सिर्फ सोचकर माउस का कर्सर मूव कर सकेगा।
मोहम्मद सिराज वनडे के नंबर-1 गेंदबाज बने, बैटिंग में कोहली अब 9वें से 8वें नंबर पर
भारत के तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज 694 पॉइंट्स के साथ वनडे के नंबर-1 गेंदबाज बन गए हैं। ICC रैंकिंग में सिराज को आठ स्थान का फायदा मिला है। दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया के जोश हेजलवुड और तीसरे पर न्यूजीलैंड के ट्रेंट बोल्ट हैं। बैटिंग रैंकिंग में विराट कोहली को एक स्थान का फायदा मिला है। वे 9वें से 8वें नंबर पर आ गए हैं। कोहली के 708 पॉइंट हैं।
सिराज को एशिया कप के फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 6 विकेट लेने का फायदा रैंकिंग में मिला है। 17 सितंबर को हुए मुकाबले में सिराज ने महज 21 रन देकर 6 विकेट लिए थे। एशिया कप फाइनल में किसी भी प्लेयर का ये बेस्ट बॉलिंग फिगर भी है। सिराज ने एकओवर में 4 विकेट भी लिए। वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय भी बने।
हाई कोर्ट ने मुक्केबाजों की याचिका खारिज की, कहा-चयन ट्रायल्स कराने का समय नहीं
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बुधवार को तीन मुक्केबाजों द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए कहा कि एशियाई खेल इस हफ्ते शुरू हो रहे हैं इसलिए अब ट्रायल्स कराना संभव नहीं है। इन मुक्केबाजों में विश्व चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता अमित पंघाल भी शामिल हैं। एशियाई खेल 23 सितंबर से हांगझोउ में शुरू होंगे। पंघाल (51 किग्रा), राष्ट्रीय चैम्पियन रोहित मोर (57 किग्रा) और राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता सागर अहलावत (+92 किग्रा) ने जुलाई में एशियाई खेलों के लिए भारतीय टीम से बाहर किए जाने के बाद भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के खिलाफ उच्च न्यायालय का रुख किया था।
गणतंत्र दिवस समारोह के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन को दिया न्योता
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन को गणतंत्र दिवस समारोह के लिए भारत की ओर से न्योता दिया गया है। दिल्ली में G-20 सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी की ओर से यह न्योता दिया गया। भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने यह जानकारी दी। जी-20 के दौरान यह भी चर्चा थी कि सरकार अगले साल 26 जनवरी गणतंत्र दिवस समारोह के लिए QUAD समूह के नेताओं को आमंत्रित करने पर विचार कर रही है।
महिला आरक्षण बिल: सरकार पर खूब बरसीं TMC सांसद
लोकसभा पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, ‘मैं इस (महिला आरक्षण बिल) बिल के समर्थन में खड़ी हूं जो कि पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा पश्चिम बंगाल में लागू किया जा चुका है। पश्चिम बंगाल देश का एक मात्र ऐसा राज्य है जहां एक महिला मुख्यमंत्री हैं जबकि देश के 16 राज्यों में भाजपा की सरकार होने के बावजूद इनमें से किसी भी राज्य में महिला मुख्यमंत्री नहीं है। ममता बनर्जी ने महिलाओं के हित के लिए बुलंद तरीके से अपनी आवाज उठाई है। विशेष रूप से भारतीय विधानसभा में हमारे पास देश में किसी और विधानसभाओं की तुलना में सबसे अधिक महिलाएं हैं, हमारे यहां ममता बनर्जी के साथ-साथ कई महिला मंत्री हैं।’
खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत का हाथ होने के कनाडा PM जस्टिन ट्रूडो के दावे पर ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने कहा, ‘ये चिंताजनक रिपोर्ट हैं, जांच अभी भी चल रही है…हम अपने साझेदारों के साथ इन घटनाक्रमों की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं और हम इसे जारी रखेंगे।’
नई संसद में महिला आरक्षण बिल पेश होने के बाद जहां देश के लोग इस बिल से खुश हैं वहीं राजनीतिक पार्टियों के कुछ सदस्यों ने इस बिल पर आपत्ति जताई। एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस बिल पर असहमति जताते हुए अपना विरोध व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस बिल में सबसे बड़ी खामी यह है कि इसमें ओबीसी महिलाओं और मुस्लिम महिलाओं के लिए कोई कोटा नहीं रखा गया है। इसलिए हम इस बिल के खिलाफ हैं।





