भोपाल
मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पिछले महीने प्रस्तावित प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र को निरस्त करवाने के लिए तीन स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस पेश किया है। राज्य विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में शनिवार को दिए गए इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि इन तीन अधिकारियों ने सत्र को निरस्त करवाने में अहम भूमिका निभाई थी।
इसमें कहा गया है कि तीनों अधिकारियों ने विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों एवं विधायक विश्राम गृह में फर्जी कोरोना जांच की साजिश रची और सर्वदलीय बैठक में वहां कोरोना पीड़ितों के गलत आंकड़े प्रस्तुत किए, जिसके चलते कोविड-19 के खतरे को देखते हुए विधानसभा का 28 दिसंबर से शुरू होने वाला प्रस्तावित सत्र स्थगित कर दिया गया था।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पार्टी विधायकों -सज्जन सिंह वर्मा, डॉ गोविंद सिंह, एन पी प्रजापति और पीसी शर्मा – के हस्ताक्षर वाले इस नोटिस को राज्य विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय में शनिवार को दिया गया। विधानसभा के प्रमुख सचिव ए पी सिंह ने पिछले महीने कहा था, कोविड-19 के चलते 28 दिसंबर2020 से शुरू होने वाले विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र स्थगित कर दिया गया है।
अब बजट सत्र लंबा होगा और उसमें इन तीन दिनों (शीतकालीन सत्र के स्थगित तीन दिन) को जोड़ा जाएगा। विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने राज्य विधानसभा के 61 कर्मचारियों-अधिकारियों और पांच विधायकों के कोविड-19 से संक्रमित पाये जाने का खुलासा करने के कुछ ही घंटों बाद यह निर्णय किया था।
कांग्रेस नेताओं ने अपने नोटिस में आरोप लगाया कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र को स्थगित कराने में भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों समेत स्वास्थ्य विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध और साजिशपूर्ण है। इसमें कहा गया है कि इन तीनों अधिकारियों ने मिलकर स्वयं के स्तर पर या किसी से प्राप्त निर्देशों के तहत संवैधानिक रूप से 27 नवंबर 2020 को मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी सत्र की अधिसूचना को निरस्त कराने में भूमिका अदा की।




