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गद्दी छोड़ो बिल’ क्‍या सच में संसद से पास नहीं हो सकता? , लेकिन अंकगण‍ित क‍िस ओर

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कपिल सिब्बल ने गद्दी छोड़ो बिल पर दो तिहाई बहुमत की कमी बताई, एनडीए के पास 305 सांसद हैं जबकि 362 की जरूरत है, सरकार ने बिल सेलेक्ट कमेटी को भेजा है

कपिल सिब्बल ने गद्दी छोड़ो बिल पर दो तिहाई बहुमत की कमी बताई, एनडीए के पास 305 सांसद हैं जबकि 362 की जरूरत है, सरकार ने बिल सेलेक्ट कमेटी को भेजा है.

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फिलहाल संसद का गणित यही कहता है कि कपिल सिब्बल का दावा गलत नहीं है. सरकार के पास अपने दम पर दो-तिहाई बहुमत नहीं है और विपक्ष की एकजुटता के चलते इसे पास कराना आसान नहीं होगा. हालांकि मोदी सरकार के पिछले अनुभव बताते हैं कि वह मुश्किल हालात में भी गठबंधन प्रबंधन के जरिए कानून पास कराने में कामयाब रही

'गद्दी छोड़ो बिल' क्या सच में संसद से पास नहीं हो सकता अंकगणित किस ओर

गृहमंत्री अमित शाह ने एक बिल पेश क‍िया क‍ि अगर प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री और मंत्री करप्‍शन के आरोप में 30 द‍िन तक जेल में रहे तो उनकी कुर्सी खुद ब खुद चली जाएगी. उन्‍हें पद से हटना होगा वरना हटा द‍िए जाएंगे. विपक्ष इसे सरकार की चाल बता रहा है. कांग्रेस नेता और सीनियर वकील कप‍िल सिब्‍बल ने दावा कर द‍िया क‍ि यह संसद से पास ही नहीं हो सकता, क्‍योंक‍ि इसके ल‍िए दो त‍िहाई बहुमत की जरूरत होगी और बीजेपी के पास उतना बहुमत नहीं है. तो क्‍या सच में ‘गद्दी छोड़ो बिल’ संसद से पास नहीं हो सकता? अंकगण‍ित क‍िस ओर है?

पहले ये समझ‍िए क‍ि बिल पास करने की प्रक्रिया क्‍या है? सामान्य कानून (ordinary bill) को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों से पास कराना पड़ता है. इसके ल‍िए दोनों सदनों में साधारण बहुमत (present and voting का simple majority) ही काफी होता है. आमतौर पर सरकार के ल‍िए लोकसभा से इसे पास कराना आसान होता है, क्‍योंक‍ि बहुमत है तभी तो वह सरकार में है. लेकिन राज्‍यसभा में ऐसे बिल अटक सकते हैं क्‍योंक‍ि कई बार सरकारों के पास राज्‍यसभा में बहुमत नहीं होता. ऐसी स्थित‍ि में राष्‍ट्रपत‍ि दोनों सदनों का ज्‍वाइंट सेशन बुला सकते हैं और बिल पास करा सकते हैं.

लेकिन संव‍िधान संशोधन बिल में यह खेल नहीं चलता…

  • सरकार ने संव‍िधान संशोधन बिल पेश क‍िया है. इसे विशेष बहुमत से पास कराना होगा.
  • सामान्‍य बहुमत से संव‍िधान में संशोधन करने वाला बिल पास नहीं कराया जा सकता.
  • जहां तक इस बिल का सवाल है तो इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुत जरूरी होगा.
  • संव‍िधान संशोधन बिल को ज्‍वाइंट पार्लियामेंट सेशन बुलाकर पास नहीं कराया जा सकता.
  • इसके ल‍िए दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का 2/3 बहुमत होना चाह‍िए.
  • एक और बड़ी शर्त है, इस बिल के समर्थन में 50 फीसदी से ज्‍यादा सांसद होने चाह‍िए.
  • यानी अगर क‍िसी भी सदन में सरकार के पास इतनी ताकत नहीं तो बिल पास नहीं हो सकता

अब सरकार के पास ताकत क‍ितनी?

सिब्बल का बड़ा दावा यह है कि यह बिल किसी भी हाल में पास नहीं हो सकता क्योंकि इसके लिए दो-तिहाई बहुमत चाहिए और सरकार के पास इतनी ताकत नहीं है. सवाल यह उठता है कि क्या सच में एनडीए सरकार दो-तिहाई बहुमत से इतनी दूर है कि बिल पास कराना नामुमकिन हो?

लोकसभा की कुल संख्या 543 है, जिसमें 2/3 बहुमत के लिए लगभग 362 वोटों की जरूरत होगी.

एनडीए का आंकड़ा

बीजेपी – 240

जदयू – 12

तेलुगु देशम पार्टी – 16

शिवसेना (शिंदे गुट) – 7

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – 5

वाईएसआरसीपी – 4

जनसेना पार्टी – 2

जद(एस) – 2

राष्ट्रीय लोक दल – 2

विदुथलाई सिरुथिगल काची – 2

असम गण परिषद – 1

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) – 1

रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी – 1

Ramswaroop Mantri

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